सास को दिया सच्चे प्यार का सुख: Antarvasna
मेरा नाम आदित्य है और मैं गुजरात के सूरत शहर में रहता हूँ। मेरी उम्र 27 साल है और मैं एक टेक्सटाइल कंपनी में सुपरवाइजर हूँ। मेरी पत्नी का नाम नेहा है और उसकी उम्र 25 साल है। हमारी शादी को दो साल हो चुके हैं और हमारी शादीशुदा जिंदगी बहुत अच्छी चल रही थी। मेरे पिताजी का देहांत मेरे बचपन में ही हो गया था, इसलिए मेरी माँ ने मुझे अकेले ही पाला और पढ़ाया-लिखाया।
मेरी माँ का नाम कमला है और उनकी उम्र 48 साल है। वे एक हाउसवाइफ हैं और आज भी उनकी खूबसूरती किसी जवान लड़की को शर्मिंदा कर दे। भरे हुए स्तन, गोल कूल्हे, गोरा रंग और लंबे काले बाल — वे सच में किसी अप्सरा से कम नहीं लगतीं। पिताजी के जाने के बाद उन्होंने खुद को सिर्फ मेरी परवरिश में लगा दिया था और किसी दूसरी शादी के बारे में सोचा भी नहीं। लेकिन उनके शरीर की जो प्यास थी वह कहीं न कहीं दबी हुई थी और एक दिन वह फूट पड़ी। और मैंने उन्हें सच्चे प्यार का सुख दिया।
कामवासना एक ऐसी भावना है जो इंसान के अंदर कहीं न कहीं हमेशा मौजूद रहती है, चाहे वह किसी भी उम्र का हो या किसी भी रिश्ते में हो। माँ के अंदर भी यह कामवासना कई सालों से दबी हुई थी क्योंकि वे अपने पति के जाने के बाद अकेली रह रही थीं। मैंने कई बार देखा था कि वे मुझे और नेहा को देखकर अजीब तरह से मुस्कुराती हैं और हमारे शरीर पर नजरें गड़ाए रखती हैं। नेहा भी माँ को माँ कहकर बुलाती थी और उनका बहुत ख्याल रखती थी। माँ भी नेहा को बेटी की तरह मानती थीं और उसे बाजार से साड़ियां और चूड़ियां लाकर देती थीं। मुझे यह सब देखकर अच्छा लगता था लेकिन कभी-कभी मेरे मन में शक भी होता था कि माँ कहीं अकेलेपन में कुछ गलत तो नहीं कर रही हैं।
वह दिन मुझे आज भी याद है जब नेहा को अपनी मायके से किसी काम से जाना पड़ा और वह एक हफ्ते के लिए घर से बाहर थी। उस दिन मैं ऑफिस से थका हुआ लौटा तो देखा कि माँ रसोई में खाना बना रही थीं। उन्होंने एक पतली सी साड़ी पहनी हुई थी जिसमें उनका पूरा शरीर झलक रहा था। उनकी छातियाँ साड़ी के अंदर से साफ दिखाई दे रही थीं और उनकी कमर पतली लग रही थी। मैं उन्हें देखकर अपनी नजरें नहीं हटा पा रहा था। माँ ने मुझे देखा और मुस्कुराईं। उन्होंने कहा — |आदित्य, तुम थके हुए लग रहे हो। हाथ-मुंह धोकर आओ, मैं खाना लगाती हूँ।| मैं हाथ-मुंह धोकर आया और खाने की मेज पर बैठ गया। माँ ने मेरे सामने खाना रखा और मेरे पास ही बैठ गईं। हम दोनों खाना खाने लगे।
खाने के दौरान माँ ने मुझसे पूछा — |आदित्य, नेहा के बिना तुम्हें अकेला लग रहा है?| मैंने कहा — |हाँ माँ, थोड़ा अकेला लग रहा है। लेकिन आप तो हैं ना मेरे साथ।| माँ मुस्कुराईं और उन्होंने मेरा हाथ पकड़ लिया। उन्होंने कहा — |आदित्य, तुम्हारे पिताजी के जाने के बाद मैंने तुम्हें ही अपनी दुनिया बना लिया था। मैंने कभी किसी और आदमी के बारे में नहीं सोचा। लेकिन अब जब तुम बड़े हो गए हो और शादीशुदा हो, तो मुझे अकेलापन महसूस होता है।| मैंने कहा — |माँ, आप मेरे साथ हैं ना। मैं हमेशा आपके साथ रहूंगा।| माँ ने मेरी आंखों में आंखें डालकर कहा — |आदित्य, मुझे सिर्फ तुम्हारा साथ नहीं चाहिए। मुझे एक आदमी का साथ चाहिए जो मुझे प्यार करे, मेरी इच्छाओं को पूरा करे। और मैं चाहती हूँ कि वह आदमी तुम हो।| मैं उनकी बात सुनकर स्तब्ध रह गया।
मैंने कहा — |माँ, आप क्या कह रही हैं? आप मेरी माँ हैं। यह ठीक नहीं है।| माँ ने कहा — |आदित्य, मैं जानती हूँ कि यह ठीक नहीं है। लेकिन मैं एक औरत हूँ और मेरी भी इच्छाएं हैं। मैंने तुम्हें पाला-पोसा है, तुम्हें पढ़ाया-लिखाया है। अब मैं चाहती हूँ कि तुम मुझे वह सुख दो जो मैंने कई सालों से नहीं पाया।| मैं कुछ देर तक सोचता रहा। मेरे अंदर गुस्सा और उत्तेजना दोनों थे। मैंने सोचा कि यह गलत है लेकिन माँ की बातों में भी सच्चाई थी। वे कई सालों से अकेली थीं और उन्हें भी एक आदमी का साथ चाहिए था। मैंने कहा — |माँ, मुझे कुछ समय दीजिए। मैं सोचता हूँ।| माँ ने कहा — |ठीक है आदित्य, मैं तुम्हें समय देती हूँ। लेकिन मैं चाहती हूँ कि तुम मेरी भावनाओं को समझो।|
उस रात मैं अपने कमरे में लेटा हुआ सोच रहा था। माँ की बातें मेरे दिमाग में घूम रही थीं। मैंने सोचा कि माँ ने मेरे लिए कितना कुछ किया है। उन्होंने अपनी पूरी जिंदगी मेरे लिए लगा दी। अब जब वे बूढ़ी हो रही हैं तो उन्हें भी थोड़ी खुशी का हक है। मैंने फैसला किया कि मैं माँ को वह सुख दूंगा जिसकी उन्हें तलाश है। अगली सुबह मैं माँ के पास गया और उन्हें गले लगा लिया। मैंने कहा — |माँ, मैं आपकी भावनाओं को समझता हूँ। मैं आपको वह सुख दूंगा जिसकी आपको तलाश है।| माँ की आंखों से आंसू निकल आए। उन्होंने मुझे कसकर गले लगा लिया और कहा — |आदित्य, तुमने मेरी जिंदगी में एक नई रोशनी भर दी है। मैं तुम्हें कभी नहीं खोना चाहती।|
उस दिन के बाद से माँ और मेरे बीच एक नया रिश्ता बन गया। मैंने उन्हें सच्चे प्यार का सुख देना शुरू किया। पहली बार जब मैंने उन्हें चूमा तो वे शरमा गईं। लेकिन फिर उन्होंने खुद को मेरे हवाले कर दिया। मैंने उनके होंठों को चूमा, उनकी गर्दन को चूमा, उनके कंधों को चूमा। माँ के मुंह से धीमी सी आह निकल गई — आह्ह्ह… आदित्य… माँ ने मुझे अपने से चिपका लिया और मेरे बालों में हाथ फिराने लगीं। मैंने उनकी साड़ी का पल्लू हटाया और उनकी छातियों पर हाथ रख दिया। वे बहुत भरी हुई और नरम थीं। मैंने उन्हें दबाया और माँ ने अपनी आंखें बंद कर लीं। उन्होंने कहा — |आदित्य, मेरी छातियाँ चूसो… मुझे बहुत दिनों से इसकी तलाश थी…
मैंने माँ का ब्लाउज उतार दिया और उनकी छातियों को अपने मुंह में ले लिया। उनके निप्पल गहरे भूरे रंग के थे और उनमें से दूध जैसा रस निकल रहा था। मैंने उन्हें चूसना शुरू किया और माँ जोर से आहें भरने लगीं। उन्होंने मेरा सिर पकड़कर मुझे और करीब खींच लिया। मैंने उनकी दोनों छातियों को चूसा और उनके निप्पल को अपने दांतों से हल्के से काटा। माँ जोर से चीखीं — आआह्ह्ह… आदित्य… ऐसे ही… मेरी छातियाँ चूसो… मुझे बहुत मजा आ रहा है… मैंने उन्हें बिस्तर पर लिटा दिया और उनकी साड़ी पूरी तरह से उतार दी। अब वे सिर्फ अपनी पेटीकोट में थीं। उनका गोरा बदन कमरे की रोशनी में चमक रहा था।
मैंने उनकी पेटीकोट भी उतार दी और वे पूरी तरह से नंगी हो गईं। उनकी चुत पर घने बाल थे और उनकी जांघें मोटी थीं। मैंने उनकी चुत को अपनी उंगलियों से सहलाना शुरू किया। माँ की चुत पहले से ही गीली हो चुकी थी और उसमें से रस बह रहा था। उन्होंने अपनी आंखें बंद कर लीं और अपने होंठ काट लिए। मैंने अपनी उंगलियां उनकी चुत के अंदर डालीं और उन्हें अंदर-बाहर करने लगा। माँ जोर से चीखीं — आआह्ह्ह… आदित्य… उह्ह्ह्ह… और अंदर… मेरी चुत में और उंगलियां डालो… मैंने उनकी चुत को अपने मुंह से चूसना शुरू किया। मैंने अपनी जीभ से उनके भगशेफ को सहलाया और उनकी चुत के अंदर तक जीभ डाल दी। माँ की कमर ऊपर उठ गई और उन्होंने मेरे बाल पकड़ लिए। वे बार-बार कह रही थीं — |हाँ आदित्य… ऐसे ही… मेरी चुत चाटो… मुझे बहुत मजा आ रहा है…
मैंने माँ की चुत को चाटते हुए उनकी गांड में भी अपनी उंगली डाल दी। उनकी आंखें खुली की खुली रह गईं और उनके मुंह से एक तेज चीख निकली — आआअह्ह्ह्हह… आदित्य… वहां मत… मैंने वहां कभी नहीं… लेकिन मैंने उनकी बात नहीं मानी। मैंने अपनी उंगली को उनकी गांड में और अंदर कर दिया और उसे अंदर-बाहर करने लगा। माँ का शरीर कांपने लगा और उनकी चुत से रस की धारा बह निकली। मैंने अपनी उंगली निकाली और अपना लंड उनकी चुत के मुंह पर रख दिया। मैंने धीरे से उसे अंदर डालना शुरू किया। माँ ने अपनी आंखें बंद कर लीं और अपने होंठ काट लिए। मेरा मोटा लंड उनकी चुत में धीरे-धीरे अंदर जा रहा था और वे दर्द और मजे का अजीब सा मिश्रण महसूस कर रही थीं। जैसे ही पूरा लंड अंदर चला गया, मैंने धक्के मारने शुरू कर दिए। माँ की चुत मेरे लंड को कसकर पकड़ रही थी और हर धक्के के साथ वे जोर से चीख रही थीं — आआह्ह्ह… आदित्य… तुम्हारा लंड बहुत बड़ा है… मेरी चुत फट रही है…
मैंने माँ को करवट लेटा दिया और उनकी एक टांग उठाकर अपने कंधे पर रख ली। इस पोजीशन में मेरा लंड और गहराई तक उनकी चुत में जा रहा था। मैं जोर-जोर से धक्के मार रहा था और माँ की चुत से चट-चट की आवाजें आ रही थीं। माँ बार-बार कह रही थीं — |हाँ आदित्य… और तेज… मुझे और चोदो… मैं तुम्हारी हो गई हूँ…| मैंने उनके बाल पकड़कर उनका सिर पीछे की तरफ खींचा और उनकी गर्दन पर होंठ रख दिए। माँ की चुत अब पूरी तरह से खुल चुकी थी और मेरा लंड उसमें आराम से आ-जा रहा था।
कुछ देर बाद मैंने माँ को घोड़ी की तरह झुका दिया। उन्होंने अपने दोनों हाथ बिस्तर पर टिका दिए और अपनी गांड ऊपर उठा ली। मैं उनके पीछे खड़े हो गया और अपना लंड उनकी चुत में डाल दिया। इस पोजीशन में मैं और जोर से धक्के मार सकता था और माँ की गांड मेरे धक्कों से हिल रही थी। मैंने अपनी उंगलियां माँ की गांड में डाल दीं और उन्हें दोनों जगह से चोदने लगा। माँ की चीखें पूरे कमरे में गूंज रही थीं — आआअह्ह्ह्हह… आदित्य… मेरी गांड में भी… मुझे दोनों जगह से चोदो… मैं बर्दाश्त कर लूंगी…
मैंने माँ की गांड में अपना लंड डालने की कोशिश की। वे पहले तो चीखीं लेकिन फिर उन्होंने खुद को ढीला कर लिया और मेरा लंड उनकी गांड में धीरे-धीरे अंदर चला गया। उनका शरीर पसीने से भीग चुका था और उनके मुंह से लगातार आहें निकल रही थीं। मैंने उनकी गांड में जोर-जोर से धक्के मारने शुरू कर दिए। माँ का शरीर झूल रहा था और उनकी छातियाँ बिस्तर पर रगड़ खा रही थीं। मैंने उनकी चुत में भी अपनी उंगलियां डाल दीं और उन्हें दोनों जगह से चोदने लगा। माँ अब पूरी तरह से चुदक्कड़ हो चुकी थीं और वे बार-बार कह रही थीं — |मुझे और चोदो… मैं तुम्हारी रखैल हूँ… मेरी चुत और गांड दोनों तुम्हारी हैं…
मैंने माँ को बिस्तर पर लिटा दिया और उनकी दोनों टांगें अपने कंधों पर रख लीं। मैंने अपना लंड उनकी चुत में डाला और पूरी ताकत से चोदने लगा। माँ की चुत अब लाल हो चुकी थी और उसमें से झाग निकल रहा था। मैं बार-बार अपना लंड बाहर निकालता और फिर से अंदर डाल देता। माँ हर बार जोर से चीखतीं — आआह्ह्ह… आदित्य… मेरी चुत को मत छोड़ो… मुझे और चोदो…| मैंने उनकी छातियों को अपने मुंह में ले लिया और उन्हें चूसने लगा। माँ की छातियों से दूध जैसा रस निकल रहा था जो मैं पी रहा था।
मैंने माँ को अपनी गोद में उठा लिया और खड़े-खड़े उन्हें चोदने लगा। उनकी टांगें मेरी कमर के चारों तरफ लिपटी हुई थीं और उनके हाथ मेरे गले में थे। मैं उन्हें उछाल-उछाल कर चोद रहा था और माँ हर बार जोर से चीख रही थीं। उनकी चुत से रस टपक रहा था और मेरे लंड पर फैल रहा था। मैंने उन्हें दीवार के सहारे खड़ा कर दिया और उनकी टांगें अपनी कमर पर लपेटकर उन्हें और जोर से चोदने लगा। माँ की आवाज अब बैठ चुकी थी लेकिन वे फिर भी चिल्ला रही थीं — |हाँ… और… मुझे और चोदो… मैं तुम्हारी चुदवाती रहूंगी…
मैंने माँ को वापस बिस्तर पर लिटाया और उनकी गांड में अपना लंड डाल दिया। इस बार मैं और जोर से धक्के मार रहा था और माँ की गांड से खून की हल्की धारा भी निकल आई। लेकिन उन्हें दर्द नहीं हो रहा था, उल्टा उन्हें और मजा आ रहा था। वे बार-बार कह रही थीं — |मेरी गांड चोदो… मेरी गांड में लंड डालो… मैं तुम्हारी चुदक्कड़ हूँ…| मैंने उनकी गांड में अपना पूरा लंड अंदर तक डाल दिया और उसे अंदर-बाहर करने लगा। माँ का शरीर अब पूरी तरह से टूट चुका था लेकिन वे रुकने का नाम नहीं ले रही थीं।
करीब एक घंटे तक मैं माँ को अलग-अलग तरीकों से चोदता रहा। मैंने उन्हें कई बार चरम सुख तक पहुंचाया और माँ भी हर बार मेरे साथ झड़ती रहीं। आखिरकार मैंने माँ की चुत में अपना वीर्य डाल दिया और उनके अंदर ही लेट गया। माँ ने अपनी टांगें मेरी कमर पर कसकर लपेट लीं ताकि एक भी बूंद बाहर न निकले। दोनों काफी देर तक एक दूसरे से चिपके रहे और एक दूसरे की सांसें महसूस करते रहे। माँ की आंखों से खुशी के आंसू निकल रहे थे। उन्होंने कहा — |आदित्य, तुमने मुझे वह सुख दिया जिसकी मुझे कई सालों से तलाश थी। अब मैं पूरी हो गई हूँ।|
उस दिन के बाद से माँ और मेरे बीच का रिश्ता और भी गहरा हो गया। जब भी नेहा बाहर जाती, मैं माँ के पास चला जाता और हम दोनों एक दूसरे के साथ समय बिताते। माँ ने मुझे अपने शरीर के हर हिस्से को छूना और चूमना सिखाया। उन्होंने मुझे बताया कि कैसे एक औरत को खुश किया जाता है और कैसे उसकी चुत को चोदा जाता है। मैंने भी उन्हें हर वह चीज दी जिसकी उन्हें तलाश थी। हमारे बीच अब कोई शर्म नहीं थी और हम दोनों अपनी कामवासना को पूरी तरह से जी रहे थे।
एक दिन नेहा ने मुझे और माँ को एक साथ देख लिया। मैं बहुत डर गया था कि कहीं वह नाराज न हो जाए। लेकिन उल्टा उसने मुझे गले लगा लिया और कहा — |आदित्य, मुझे खुशी है कि तुमने माँ को खुश किया। वे कई सालों से अकेली थीं और उन्हें भी खुशी का हक है।| मैं यह सुनकर हैरान रह गया। नेहा ने मुझे बताया कि उसे पता था कि मैं माँ के साथ सोता हूँ और वह इससे खुश है। उसने कहा कि अब हम सब एक परिवार हैं और हमें एक दूसरे के साथ खुश रहना चाहिए। उस दिन के बाद हमारे परिवार में एक नया रिश्ता बन गया। अब जब भी हम सब इकट्ठे होते हैं, तो सब एक दूसरे के साथ खुलकर मस्ती करते हैं। नेहा भी माँ के साथ और मैं भी माँ के साथ।
सास को दिया सच्चे प्यार का सुख — यह सिर्फ एक घटना नहीं थी बल्कि मेरी जिंदगी का सबसे बड़ा मोड़ बन गई। आज भी जब मैं माँ को देखता हूँ तो मेरा लंड खड़ा हो जाता है और मुझे वह रात याद आ जाती है जब मैंने उन्हें सच्चे प्यार का सुख दिया था। यही हमारी अन्तर्वासना है और हम इसे खुलकर जी रहे हैं। माँ अब पहले से भी ज्यादा खुश रहती हैं क्योंकि उन्हें मेरा प्यार भी मिल रहा है और नेहा का भी। हम तीनों एक साथ बहुत खुश हैं और हमारे बीच कोई बंदिश नहीं है।
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