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जेठ जी ने मुझे चोद प्रेगनेंट किया - Antarvasna Stories

हैलो दोस्तों आपकी रिया हाज़िर है नई सच्चाई से भरपूर कहानी लिए।


नमस्कार मेरा नाम आरती है.. मैं उतरप्रदेश की रहने वाली हूँ और मेरी शादी भी उतरप्रदेश में ही हुई है।। मेरे मायके और ससुराल में काफी खेतीबाड़ी जमीन जायदाद है।


मेरे पति खेतीबाड़ी का सारा काम ससुर के साथ सभांलते है। मैं सास के साथ घर का चुल्हा चोका पशुओं का सारे काम सभांलती हूँ।


पति के बड़े भाई यानि मेरे जेठ जी शहर में प्राईवेट कम्पनी में एकाउंट का काम करते है इसलिए जेठ जी जेठानी अलग रहते हैं।


मेरी उम्र 23 साल है.. और मेरी शादी हुए 10 महीने हुए हैं मायक़े ससुराल आते जाते हुए मुझे सब मुझे चोदने की फिराक में लगे रहते हैं मेरे सुडौल हिचकोले लेते हुए बूब्स 34D। है कमर 30। चूतड 36 इंच है मैं गज़ब की रसभरी सैक्सी हुं।



मैं अपने जीवन काल में अब इन दिनों रसभरी जवान तो थी ही और मेरी कामेक्षा भी अधिक हो गई थी।


मेरे पति मुझे चोदने का कोई भी मौका नहीं छोड़ते हैं, घर में, घेर में, खेत में।


क्योंकि मायके और ससुराल बस में आते जाते सब मेरी चूचियों पर और गान्ड पर हाथ फेर दिया करते थे ।


आज मैं अपने जीवन की सबसे सच्ची रोमान्चक घटना बताने जा रही हूँ.. जो आज भी मुझे उत्तेजित करती है।


क्योंकि किसी दुसरे ने अपने इतने भारी भरकम विकराल मोटे लम्बे लंड ने मेरी चुत का बुरी तरह से भौसड़ा बना दिया था।


बात 2 साल पहले की है। मेरे जेठ जी की बीवी यानि जेठानी जी की तबियत बहुत खराब थी और उनके घर कोई नहीं था।


तो मेरे सास ससुर ने मुझे उनके घर जाने को कहा। मैं वहाँ चली गई।


मैं जेठानी जी की देखभाल में लग गई।


एक दिन सुबह जेठानी जी की तबियत ज्यादा ही खराब हो गई और उन्हें अस्पताल में भर्ती करवाना पड़ा। उनकी बच्चेदानी में घाव हो जाने से इन्फेक्शन बढ़ गया था। दिन में तो मैं उनके साथ रहती.. पर शाम को वापस घर आ जाती।


जेठ जी के साथ ही शाम का खाना खाते और फ़िर बातें करते और फ़िर अपने-अपने कमरे में सोने चले जाते।


एक रात मैं जब पेशाब करने बाहर गई तो मैंने जेठ जी के कमरे के दरवाजा खुला देखा और उसमें से रोशनी आती देखी।


मैंने सोचा कि शायद जेठ जी को कोई परेशानी होगी.. इसलिए अन्दर उनसे पूछने चली गई।


जब मैंने अन्दर देखा.. तो मेरे होश ही उड़ गए।



मैंने देखा कि वे अपनी आँखें बन्द किए अपने काफी भारी भरकम लम्बे मोटे लन्ड को जोर-जोर से हिला रहे हैं।


यह नजारा देखते ही मैं वापस अपने कमरे की और दौड़ पड़ी। मैं सोने की कोशिश करने लगी.. पर मुझे नींद ही नहीं आ रही थी।


मेरे दिमाग में बस उनके विशाल लन्ड की ही छवि आ रही थी। मैंने आज तक इतना बड़ा लंबा मोटा लन्ड नहीं देखा था।


मुझे भी मेरी चुत की गर्मी खुजली महसूस होने लगी.. और मेरे हाथ खुद व खुद मेरी चुत पर चले गए। करीब 5 मिनट ही हुए होंगे कि मैंने किसी के अन्दर आने की आहट सुनी।


इससे पहले कि मैं कुछ समझ पाती.. किसी ने मेरे ऊपर आते हुए मुझे कस कर पकड़ लिया।


मैं चिल्लाना चाहती थी.. पर उन्होंने अपने हाथ से मेरी आवाज बन्द कर दी।


फिर एक आवाज आई- आरती तुम बहुत खूबसूरत सैक्सी हो.. और मैं भी प्यासा.. क्यों न एक-दूसरे की मदद करके इस आग को शान्त कर दें। फिर उन्होंने अपना हाथ मेरे मुँह से हटाया और मेरे ऊपर से उठ गए।। अब उन्होंने लाइट जला दी।


मेरे सामने जेठ जी खड़े थे। मैंने कहा- यह आप क्या कह रहे हैं। मैं आपकी बहू की तरह हूँ।


उन्होंने कहा- जरूरत इन्सान को बदल देती है।


मैंने उनको चिल्ला कर कमरे से बाहर निकल जाने को कहा.. पर वो बस मुझे मनाने में लगे रहे। और फिर मुझे दबोच कर अपने नीचे जकड़ लिया।। मेरी दोनों सुडौल चूचियों को दबा कर मसलने लगे।। अपने होंठ मेरे होंठों से लगा कर चूसने लगे।


मैंने उनकी गिरफ्त से बाहर निकल जाने की बहुत कोशिश की लेकिन जेठ जी ने मुझे ताक़त से दबोच रखा था।


उन्होंने मुझे दबोचे हुए मेरी ब्लाउज के हुक खींच फाड़ कर निकाल दी।ऊपर से मैं नंगी हो गई।


मेरी दोनों चूचियां उछल कर बाहर हिचकोलें खाने लगीं।


जेठ जी मेरी दोनों चूचियों को पकड़ कर एक अपने मुंह में लेकर चूसने लगे निप्पल को मुंह में लेकर काटने लगे। दुसरी को हाथ से मसलने लगे।


करीब आधे घन्टे के बाद मैंने अपनी हार मान ली।


आखिर मै भी औरत थी।। मै जेठ जी को समर्पित होती चलीं गई।


जेठ जी ने मेरी साड़ी पेटीकोट भी उतार कर उन्होंने मुझे पूरी तरह नंगी कर दिया और मेरे ऊपर आ गए।। फ़िर मुझे ऊपर से नीचे तक चूमना और चूसना शुरू कर दिया। मुझे जरा भी नहीं लगा कि वो कोई 45 साल के बुजुर्ग हैं।


मुझे ऐसा लग रहा था कि जैसे कोई 30 साल का जवान मर्द मेरे ऊपर चढ़ा है।


करीब 10 मिनट के बाद वो थोड़ा रुके और फ़िर मुझसे कहने लगे- आरती तुम बहुत खुबसूरत हो.. तुम्हारा जिस्म एकदम फूल की तरह कोमल है।।


तुम जबसे बहू बनकर हमारे घर में आई तब से मै तुझे चोदने के सपने देखने लगा। मैं बस शर्माती हुई उनकी बातें सुन रही थी।


वो बस मेरी तारीफ़ करते और चूमते रहे। चूस चूस कर मेरे शरीर पर चूचियों पर निप्पल पर निशान डाल दिए।। मेरी सिसकारियां निकलने लगीं थीं आआआआहहहहह ऊऊऊऊ।। शइइइइइइइ।। हहहहहहममममममम।। एएएएएएएए।। ऊऊऊऊऊऊछछ।


जेठ जी ने अपने कपड़े उतार दिए उनका फौलादी लन्ड उछाल ले रहा था।


मैं डर रही थी इतना बड़ा लंबा मोटा लन्ड मेरी गुलाबी चुत में कैसे जायेगा।


उनका लन्ड करीब करीब ८.५ इंच लम्बा और ३ इंच मोटा था। ओर वो चुदाई के पक्के खिलाड़ी भी थे।


जेठानी को चोद चोद कर उनकी ऐसी हालत कर दी है। मैं अभी नई नवेली बहू हुं।


तभी उन्होंने मेरी टाँगों को फ़ैला दिया। खुद अपने आपको वहाँ पोजीशन में कर लिया और अपने लम्बे मोटे लण्ड को मेरी चुत में रगड़ते हुए मुझे चूमने लगे।धीरे-धीरे उन्होंने मेरे मम्मों को चूसना शुरू किया। उनका एक हाथ मेरी एक चूची पर था जिसे वो जोर-जोर से मसल रहे थे और दूसरी चूची को अपने मुँह में ले कर चूस रहे थे। मुझे अजीब सा दर्द और मजा का अहसास हो रहा था।


मेरे मुँह से सिसकारियाँ निकलने लगीं। अब वो नीचे की तरफ़ आने लगे और अचानक उन्होंने अपना मुँह मेरी चुत से लगा दिया।

मेरी हिचकी निकल गई। ऊई,,,मां,मरररररर गई।


मैं उठ कर बैठने लगी.. पर उन्होंने मुझे दबोच कर लिटा दिया।


मैंने कहा- ये क्या कर रहे हैं ? उन्होंने कहा- तुम्हें मज़ा आएगा.. बस लेटी रहो।। उन्होंने मेरी चुत चाटना शुरू कर दिया मेरी चुत और गीली हो बहने लगी.. मुझे काफी मज़ा आने लगा।


मैंने उनका सिर अपनी चुत की ओर खींचना शुरू कर दिया।। मेरी गुलाबी चुत को भींच कर चूसने लगे। मैं अपनी गांड़ को उछालने लगी।

ईईईईईईईईई।। मममममममम।। एएएएएएएए।। ऊऊऊऊऊऊछछ।। ईईईईईईईईई।। खखखखगगगहहहहहहह। आआआआआइइ।। ऊईईईईईईघईई।। मम्मी।


कुछ देर में मेरी हालत खराब होने लगी। मैंने सिस्कारते हुए कहा- जेठ जी मैं झड़ने वाली हूँ। तो वो और जोर से चाटने लगे ।


फ़िर मैं भलभला कर झड़ गई। मेरी चुत से ढेर सारा लसलसा पानी निकल रहा था।। मेरी चुत का सारा पानी पी गये।


अब वो वहाँ से ऊपर आए और मुझसे बोले- तुम्हारी चुत कितना पानी निकालती है.. अब मेरे लण्ड को प्यार करो।


मैंने अपने हाथ से उनका लौड़ा हिलाने लगी।। उनका लिंग काफी मोटा था।


कुछ देर बाद उन्होंने मुझे लन्ड मुँह में लेने को कहा.. पर मैंने मना किया।


फ़िर उन्होंने जिद की.. तो मैंने मुँह में लेकर चूसना शुरू कर दिया।। कुछ देर बाद उन्होंने मुझसे कहा- अब बस करो.. चलो चुदाई करते हैं

उन्होंने मेरी कमर के नीचे एक तकिया रखा और मेरी जाँघों को खोल दिया।। मेरी चुत पर थूक लगा दिया और अपने लन्ड से चूत को रगड़ने लगे।


फ़िर वे झुके और मुझे कस कर पकड़ लिया। उन्होंने मुझसे कहा- मेरे लौड़े को चुत में लगा लो।


मैंने जेठ जी के लन्ड को पकड़ कर अपनी चुत के छेद पर रखा और तभी जेठ जी ने जोर से धक्का लगाया तो उनके फौलादी लन्ड का सुपारा मेरी चुत को चीरते हुए अन्दर घुस चुका था।


मेरी ज़ोर से चीख निकल गई।।ऊई। मां।। मरररररर।। गई।। ऊईईईईईईघईई।। मम्मी।


मुझे अपनी चुत में भयंकर खिंचाव सा महसूस होने लगा।


अचानक जेठ जी ने एक ओर जोर का धक्का मारा और उनका पूरा लन्ड मेरी चूत में मेरी चुत की दीवारों को चटकाते तोड़ते हुए अन्दर घुस गया।


मेरी चुत भरी भरी बुरी तरह से फैल गई। मैं चीख पड़ी- ऊई मा..ऊईई।। मां। मरररररर।। गई।।। मेरी आंखों में आसूं आ गये। मैं रोने लगी।।

वो जेठ जी बोले- बस.. हो गया.. थोड़ी देर रुको.. फ़िर चोदना चालू करूँगा।


वो मुझे होठों से गालों पे चूमने लगे.. मेरे होंठों को चूसने लगे। मेरी जुबान को चूसने लगे.. मेरे मुँह से निकलते रस को पीने लगे।


फ़िर मुझसे कहा- आरती जानू बस थोड़ा सा दर्द सहन कर लो। क्या तुम तैयार हो.. तो मैं धक्के मारना शुरू करूँ।


मैंने कहा- जेठ जी आपका बहुत मोटा लम्बा मेरी बच्चेदानी में घुस कर बहुत दर्द हो रहा है।। धीरे धीरे से करो।


जेठ जी थोड़ी देर रुक कर फिर से जोर जोर से धक्का लगा कर मुझे चोदने लगे। मेरी सिसकारियां निकलने लगी आआआआहहहहह ऊऊऊऊ।। शइइइइइइइ।। हहहहहहममममममम।। एएएएएएएए।


जेठ जी का लन्ड मेरी चुत में फंस कर तेजी से अन्दर बाहर होने लगा। इइइ।आआआआ।। ऊऊऊऊऊऊछछ।। ईईईईईईईईई।। मममममममम। एएएएएएएए। ऊऊऊऊऊऊछछ ईईईईईईईईई।


फिर जेठ जी ने मेरी दोनों टाँगें उठा कर अपने कन्धों पर ऊपर रख दीं।। और जोर जोर से धक्के लगाने शुरू कर दिए।


मेरे दोनों पैरों में पाजेब पायल के घुंघरू की आवाज कमरे में जोर से गूंज रहीं थी।। मेरी सिसकारियां निकलने लगी।


जेठ जी की मांसल जांघे मेरे चूतड़ौ से टकरा रही थी। आआआआहहहहह।। ऊऊऊऊ। शइइइइइइइ। हहहहहहममममममम।। एएएएएएएए।फट। फचफच पटपट। फचफच। पटपट फचफच। पटपट फचफच।


जेठ जी का मुसल जेसे लम्बा मोटा लन्ड हर घक्के पर मेरी बच्चेदानी में घुस रहा था।। ऊऊऊऊऊऊछछ।। ईईईईईईईईई। खखखखगगगहहहहहहह। आआआआआइइ।। ऊईईईईईईघईई।।


कुछ देर चुदाई बाद तभी मेरा शरीर अकड़ने लगा और मेरी चुत से ढेर सारा लसलसा पानी निकला मैं झडने लगी।


मैंने अपनी दोनों चूड़ियों से भरी बाहों को हार बनाकर जेठ जी के गले में डाल कर कर उनके होंठों पर अपने होंठ भिड़ा दिए।


मैं जेठ जी को पूरी तरह से समर्पित हो गई और उन्हें अपनी बाहों में भर कर जोर से भींच लिया।


अब उन्होंने और जोरदार तरीके से धक्के लगाना शुरू कर दिए। हम दोनों काफी गरम हो चुके थे और एक-दूसरे का भरपूर साथ दे रहे थे।

मैं उनके हर धक्के का जबाव अब अपनी कमर को ओर अपनी गांड़ को उचका कर दे रही थी।


कुछ देर बाद उन्होंने मुझसे कहा- क्या तुम मेरे ऊपर आना चाहोगी ? मैंने कहा- ठीक है.. शायद आप थक गए हैं।


उन्होंने मुझे उनको पकड़ने को कहा और एक हाथ मेरे चूतड़ों पर रख कर मुझे अपनी ओर खींचा और कहा- बस लन्ड को बाहर मत निकलने देना।


मैंने वैसा ही किया अपनी चूत से उनका लौड़ा निकाले बिना ही मैं उनके ऊपर आ गई।


उन्होंने मुझे चोदने को कहा और मैं जेठ जी के लंड पर उछलते हुए धक्के लगाने लगी।


थोड़ी देर बाद वो भी नीचे से धक्के लगाने लगे। मुझे लगा कि मैं फिर से झड़ने वाली हूँ और मैंने धक्के तेज़ कर दिए।। कुछ ही देर में मैं दोबारा झड़ गई और उनके ऊपर लेट गई।


पर वो नीचे से अब भी जोरदार मूसलाधार धक्के लगाते ही रहे।


जेठ जी वो समझ चुके थे कि मैं फिर से झड़ चुकी हूँ.. इसलिए उन्होंने मुझे कस कर पकड़ लिया था.. ताकि मैं अलग न हो सकूं।

तभी मैंने उनसे कहा- जेठजी मुझे पेशाब लगी है।


यह सुनते ही उन्होंने मुझे अपनी गोद में उठा लिया और बाथरूम की ओर चल दिए। मैंने कहा- ये क्या कर रहे है?


उन्होंने कहा- इतने साल के बाद आरती तेरी चुत में लन्ड गया है.. निकालने का मन नहीं हो रहा। उन्होंने मुझे बाथरूम में उतारा और कहा- जल्दी पेशाब कर लो।


मैं उनके सामने ही बैठ गई और पेशाब करने लगी।। मेरे पेशाब की धार की आवाज गूंज रहीं थी।


वे मेरे सामने ही खड़े होकर अपने लन्ड को हाथ से हिलाते हुए मुझे देखते रहे।। मैं जैसे ही उठी.. वे मेरे सामने आए और मुझे दीवार से लगा दिया।।


फ़िर मेरी एक पैर को उठा कर लन्ड को मेरी चूत में अन्दर पेल दिया और मुझे चोदने लगे। कुछ देर बाद उन्होंने मेरा दूसरा पैर भी उठा लिया.. अब मैं हवा में झूल रही थी।


वो जोर-जोर से धक्के मार रहे थे। उनके जिस्म से पसीना टपक रहा था.. उनकी साँसें तेज़ होती जा रही थीं।


मेरी चूड़ियों ओर पाजेब पायल की आवाज गूंज रहीं थी।


इधर मेरी भी सिसकारियाँ तेज़ होने लगीं। ऊऊऊऊऊऊछछ।। ईईईईईईईईई। मममममममम। एएएएएएएए ऊऊऊऊऊऊछछ ईईईईईईईईई।। मममममममम।


मेरे मुँह से निकलने लगा- जेठ जी ओर अन्दर और अन्दर.. वो और तेज़ गति से चोद रहे थे।। उन्होंने मुझसे कहा- मेरा निकलने वाला है..

मैंने कहा- जेठ जी अदंर ही निकाल दो।


फ़िर जोरदार धक्कों के साथ उन्होंने अपना ढेर सारा गाढ़ा गाढ़ा वीर्य मेरी चुत के अन्दर मेरी बच्चेदानी में निकाल दिया और मैं भी तीसरी बार झड़ गई। करीब 5 मिनट तक हम उसी अवस्था में पड़े रहे। फ़िर हम अलग हुए।।


जैसे ही मैं शीट पर बैठी मेरी चुत से गाढ़ा वीर्य तकरीबन 8-9 चम्मच निकल कर शीट से चिपक गया।


मैने कई डब्बे पानी के डाल के हाथ से साफ किया।


मैंने अपनी चुत को साफ़ किया और जेठ जी के लन्ड को पकड़ कर साफ़ किया।। और हम दोनों अन्दर चले गए।


कुछ देर आराम के बाद जेठ जी फ़िर शुरू हो गए। फिर मुझे बेड पर लिटा कर मेरी ताबड़तोड़ चुदाई करने लगे।


मैं भी भरपूर सहयोग कर रही थी।। जेठजी ने हर बार मेरी चुत में अपना गाढ़ा गाढ़ा वीर्य बच्चेदानी तक भर दिया था।


उस रात जेठ जी ने मेरी 3 बार जमकर चुदाई की। मेरी चुत बुरी तरह से सूज कर मोटी भरी भरी हो गई थी।


सुबह हम दोनों की हालत खराब हो चुकी थी.. पूरे जिस्म में दर्द था।


सुबह तो मैं ठीक से चल भी नहीं पा रही थी। मेरी जाँघों में चुत में दर्द और अकड़न सी हो गई थी।


मेरी दोनों चूचियों में दर्द से ओर उठ कर तन गई थी।


मैं उनके यहाँ करीब 32-35 दिन रुकी थी और जेठ जी ने दिन रात मुझे अपनी बीवी की तरह मुझे खुब मसल मसल रगड़ के चोदता रहा।


हर दिन हम दोनों ने जी भर कर चुदाई की। यहाँ तक कि जब दिन में मौका मिलता तब भी लण्ड चूत का खेल शुरू हो जाता था।


पूरे घर में में ऐसी कोई जगह नहीं थी जहां जेठजी ने मुझे ना चोदा हो।


जेठ जी ने मुझे चोद चोद कर नई नवेली बहू से भरपूर औरत बना दिया।


कई बार तो जेठ जी ने मुझे जेठानी जी की शादी की साड़ी में मुझे अपनी दुल्हन बनाकर मेरी मांग में सिंदूर भरकर सुहागरात भी मनाई।


मैं जब तक जेठजी के पास रहीं ।। मैं भी उनकी बीवी की तरह चुदतीं थी।


मैं अब जेठ जी को जेठानी जी की कमी महसूस नहीं होने देती थी।


मेरी महीने में माहवारी नहीं हुई तो मैंने जेठ जी को बताया तो उन्होंने परेग्नैंसी किट लाकर दी।। मैंने चैक किया तो रिपोर्ट पोजिटिव निकलीं।।

नतीजा यह हुआ कि मैं जेठजी से गर्भवती प्रेगनेंट हो गई।


यह बात मैंने जेठजी को बताईं कि मैं तुम्हारे बच्चे की मां बनने वाली हुं।


फिर जेठ जी के सामने ही मुझे उबकाई उल्टी हो गई। उस रात जेठजी ने मुझे खुशी से खुब जमकर चोदा।


और बच्चे का सुनकर उस रात मेरी चुत की तरह ही मेरी गान्ड का भी उद्घाटन करते हुए मेरी गान्ड की सील भी तोड़ डाली।


उस रात जेठजी ने मेरी 3 बार चुत मारी और 2 बार मेरी गान्ड मारी।


मैंने जैसा सोचा था.. इसका उल्टा हुआ था.. वे 45 साल के होने के बाद भी उनमें एक 30 साल के जवान मर्द की तरह ताकत थी।


जिसको मैं अच्छी तरह से भुगत रही थी। जेठ जी भी चाहते थे कि मैं उनके बच्चे की माँ बनकर बच्चे को जन्म दू।


वैसे मैंने अपने पति से कहा था कि मैं 3 साल माँ नहीं बनना चाहती अच्छे से एंजाय करना चाहती हूँ।


इसलिए पति मुझे चोदते हुए सावधानी बरती और कड़ोम लगा कर करते थे कभी मेरी चूचियां पर निकालते। कभी मेरे मुंह में।


मुझे मालूम था कि 4-5 दिन बाद जेठानीजी ठीक होकर घर आ जायेगी। तो मैंने मन मन ही जाकर पति से लगातार चुदाई करवा कर इस बच्चे को अपने पति को पापा बनाकर जन्म दूंगी।


कयोकि जेठ जी ने मुझे पति से भी ज्यादा अपने भारी भरकम विकराल मोटे लम्बे लंड से चोदते हुए मुझे अपनी दीवानी बना दिया है।


फिर जेठ जी 5 दिन बाद ही जेठानीजी को अस्पताल से छुट्टी मिल गई।। उनकी बच्चेदानी काफी हद तक ठीक हो गई थी।

उससे अगले दिन ही मैं वापस ससुराल आ गई।


पति भी मेरे इंतजार में भूखे शेर की तरह से।। मेरे जाते ही मेरी बिना कंडोम के 4 बार जमकर चुदाई कर दी ।


और उन्होंने खुद ही अपना आपा खोकर बिना कंडोम के ही मुझे चोद डाला।


शायद ऊपर वाले को ये ही मंजूर था मैं खुश थी कि मुझे कुछ करना नहीं पड़ा।


कुछ दिनों बाद मैंने पति को खुशखबरी दी कि मेरी माहवारी नहीं आई।। आप पापा बनने वाले है ।। सास के सामने भी मुझे उबकाई उल्टी हो रही थी।


घर में खुशी का माहौल बन गया।


नौवें महीने में मैने जेठ जी के लड़के को जन्म देकर माँ बन गई।। यह राज मुझे ओर जेठ जी को ही मालुम था।

उसके बाद पति मुझे पहले ही चोदने का कोई भी मौका नहीं छोड़ते थे । ओर अब तो रात दिन मेरी चुदाई करने में लगे रहते हैं।


जेठ जी अब जब भी हमें मौका मिलता है और जब मैं जेठ जी के यहां जाना होता है मौका मिलते ही जेठजी मेरी जमकर चुदाई करते।


आपकी रिया ।

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