दुखी बुआ को बच्चे का सुख दिया - Hindi Sex Stories
- Lucky Mehra
- 4 days ago
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कामिनी एक उदास औरत थी, जो 32 साल की हो चुकी थी।
वो एक गदराई माल थी, 5फीट 4 इंच लंबी, न मोटी थी न पतली, बस एकदम परफेक्ट फिगर वाली। उसके बड़े-बड़े बूब्स मिया खलीफा जैसे थे, गोल और भरे हुए, जो किसी को भी दीवाना बना दें। उसकी चूत गुलाबी रंग की थी, हमेशा शेव्ड रखती थी, और स्किन इतनी गोरी थी कि दूध जैसी लगती। उसके पति का नाम था राकेश, 34 साल का आदमी, जो एक प्राइवेट जॉब करता था।
राकेश हमेशा व्यस्त रहता, घर पर कम आता, और कामिनी के साथ ज्यादा समय नहीं बिताता। वो थोड़ा सख्त स्वभाव का था, लेकिन हाल के दिनों में कामिनी की उदासी को नजरअंदाज कर देता। घर में सास, ससुर और राकेश सब रहते थे। लेकिन हाल ही में एक बड़ा दुख आ गया था।
कामिनी प्रेग्नेंट थी, और उसका होने वाला बेबी एक एक्सीडेंट में पेट में ही मर गया। डॉक्टरों ने बताया कि बच्चा नहीं बचा, लेकिन प्रेग्नेंसी की वजह से उसके बूब्स में दूध भर गया था। अब वो दिन-रात उदास रहने लगी, आंसू बहाती, और दूध निकालने के लिए खुद को निचोड़ती, लेकिन कोई फायदा नहीं। राकेश ने तो बस एक-दो बार सांत्वना दी, फिर अपनी जॉब में व्यस्त हो गया। घर का माहौल भी उदास हो गया था।
कामिनी की मायके से उसका भतीजा आया, नाम था राहुल। वो 20 साल का जवान लड़का था, जिसका लंड 8 इंच लंबा और 3 इंच मोटा था – इतना मोटा कि किसी की भी बुर का भोसड़ा बना दे। राहुल अपनी उदास बुआ को देखकर दुखी हो गया।
वो सोचता, 'बुआ इतनी उदास क्यों है? मैं कुछ करूंगा।' लेकिन राहुल शरारती भी था। घर आने के बाद से वो कामिनी के आसपास घूमता रहता। एक दिन, कामिनी रसोई में खड़ी थी, सब्जी काट रही। राहुल पीछे से आया और 'अनजाने में' उसके कमर से टकरा गया। 'ओह सॉरी बुआ,' बोला, लेकिन उसकी नजर कामिनी के बड़े बूब्स पर टिक गई।
कामिनी ने महसूस किया, लेकिन कुछ कहा नहीं। दूसरे दिन, वो कामिनी के कपड़े धोते समय उसके अंडरवियर को छुआ, सूंघा भी। शाम को, जब कामिनी सो रही थी, राहुल चुपके से कमरे में घुसा, उसके ब्लाउज के बटन खोले, और बूब्स को हल्का सा दबाया। कामिनी जाग गई, डांटा, 'राहुल, क्या कर रहे हो? बाहर जाओ!' राहुल हंसता हुआ भाग गया, लेकिन मन ही मन सोचता, 'बुआ की बॉडी कितनी हॉट है। जल्दी ही मैं इसे चखूंगा।'
एक दिन, घर में सब काम में व्यस्त थे। कामिनी नहाने गई थी। राहुल ने चुपके से दरवाजे की झिरी से झांका। वो देखता है – बुआ नंगी होकर खड़ी है, उसके बड़े बूब्स से दूध टपक रहा है, गुलाबी चूत चमक रही है, गोरी बॉडी पर पानी की बूंदें लटक रही हैं। राहुल का लंड तुरंत खड़ा हो गया, पत्थर जैसा सख्त। वो सोचने लगा, 'बुआ अब बस चोदने वाली औरत लग रही है। उसके बच्चे का दुख मैं ही दूर करूंगा – उसे मां बनाकर। मैं अपना बीज उसके अंदर डालूंगा।'
कुछ दिनों बाद, घर में एक शादी का प्रोग्राम आया। सास-ससुर, राकेश और बाकी फैमिली वाले एक महीने के लिए बाहर चले गए। घर में सिर्फ कामिनी और राहुल रह गए। राहुल ने मौका देख लिया। शाम को वो घर का गेट बंद कर दिया, लाइटें बुझा दीं, और कमरे में छिप गया।
कामिनी थकी हुई लौटी, उदास मन से। वो कमरे में आई, और अचानक राहुल ने पीछे से उसे पकड़ लिया। 'राहुल! क्या कर रहे हो? छोड़ो मुझे!' कामिनी चिल्लाई, हाथ-पैर मारने लगी। राहुल ने उसके मुंह पर हाथ रख दिया, लेकिन कामिनी ने जोर से किक मारी, राहुल का पैर दर्द से झनझना गया। 'हरामी कुतिया! तू रु!' राहुल गुस्से से चिल्लाया, और कामिनी के बाल खींचे।
कामिनी ने नाखूनों से राहुल का हाथ खरोंचा, 'बेशर्म हरामी! तू मेरा भतीजा है, ये क्या पागलपन है? मैं तेरी बुआ हूं!' राहुल ने धक्का दिया, कामिनी दीवार से टकराई। 'चुप रंडी! तू उदास है, मैं तुझे खुश करूंगा। तेरी चूत में मेरा लंड डालकर!' कामिनी ने मुक्का मारा, राहुल के गाल पर लग गया। 'निकल जा यहाँ से, गंदा कुत्ता! तू जानवर है!' लेकिन राहुल ने जोर से कामिनी को जमीन पर पटक दिया, उसके ऊपर चढ़ गया।
राहुल ने जोर से कामिनी के कपड़े फाड़ दिए। साड़ी उड़ा दी, पेटीकोट खींचा, ब्लाउज फाड़ा, ब्रा-पैंटी सब चीर दिया। कामिनी पूरी नंगी हो गई – उसके बड़े बूब्स उछल रहे थे, दूध टपक रहा था, गुलाबी शेव्ड चूत खुली हुई। कामिनी पैर चलाने लगी, राहुल को लात मारने की कोशिश की, 'बचाओ! ये रेप कर रहा है!' राहुल ने उसके हाथ पकड़ लिए, 'चुप बुई रंडी! तेरी चूत तो गीली हो रही है!'
कामिनी ने थूक दिया उसके चेहरे पर, 'तेरी माँ की चूत! तू जेल जाएगा!' राहुल ने अपना 8 इंच लंबा, 3 इंच मोटा लंड निकाला, जो पत्थर जैसा सख्त था, नसें फूली हुईं। वो कामिनी को बेड पर पटक दिया, और मिशनरी स्टाइल में उसके ऊपर चढ़ गया। कामिनी ने घुटने से राहुल को धक्का दिया, लेकिन राहुल ने उसके पैर दबा दिए। 'बुआ, आज मैं तुझे मां बनाऊंगा। तेरा दुख दूर हो जाएगा,' वो गरम सांसों से बोला। कामिनी रोने लगी, 'नहीं राहुल, ये गलत है! छोड़ दो, हरामी!' लेकिन राहुल ने सुना नहीं।
उसने अपना मोटा लंड कामिनी की गुलाबी चूत पर रगड़ा, फिर जोर से धकेल दिया। 'आह्ह्ह!' कामिनी चीखी, दर्द से। लंड इतना मोटा था कि चूत फटने लगी, लेकिन राहुल ने पूरा अंदर घुसेड़ दिया। बच्चेदानी तक पहुंच गया। कामिनी ने राहुल के सीने पर नाखून चलाए, 'निकल बाहर, कुत्ते का बेटा! तेरी चूत फाड़ दूंगी!' राहुल दर्द से सिसकारा, लेकिन और जोर से चोदने लगा – ऊपर-नीचे, जोर-जोर से। फुच... फुच... तुप्प... तुप्प... कमरे में आवाजें गूंज रही थीं। 'हंस ले रंडी बुआ! तेरी चूत तो मेरा लंड चूस रही है!' राहुल हंसते हुए बोला। कामिनी की चूत से रस बहने लगा, लेकिन वो जोर-जोर से रो रही थी, 'बस करो! दर्द हो रहा है, गंदा हरामी!' राहुल ने उसके बूब्स पकड़े, निप्पल्स मुंह में लिए, जोर-जोर से चूसने लगा। दूध निकलने लगा, वो गटक-गटक कर पी गया। 'बुआ, तेरा दूध कितना स्वादिष्ट है! इससे मुझे और ताकत मिल रही है। चूसूंगा तेरी चूचियां रोज!' कामिनी ने सिर हिलाया, 'पीस ले तेरी बहन की! तू इंसान नहीं, जानवर है!' चूसते-चूसते वो और तेज चोदने लगा, लंड बच्चेदानी को टक्कर मार रहा था।
कामिनी के पैर फैलाए हुए थे, राहुल का मोटा लंड अंदर-बाहर हो रहा था, चूत लाल हो गई। कामिनी थक गई, दर्द से तड़प रही थी, लेकिन अब ताकत कम हो गई। आखिरकार, आधे घंटे तक वो बेरहमी से चोदा। कामिनी चीखी, 'मत छोड़ अंदर, कुत्ते!' लेकिन राहुल ने चीखा, 'लो बुआ, मेरा बीज! तू प्रेग्नेंट हो जाएगी!' और अपना गाढ़ा वीर्य – एक कप जितना – कामिनी की रसीली गुलाबी चूत में भर दिया। गर्म वीर्य अंदर फैल गया, बच्चेदानी भर दी। कामिनी दर्द से उठ नहीं पाई, वही बेहोश होकर सो गई। राहुल उसके बगल में लेटा, संतुष्ट।
सुबह कामिनी जागी, तो उसे उल्टियां होने लगीं। वो समझ गई – प्रेग्नेंट हो गई। डरकर उठी, गर्भनिरोधक गोलियां लेने गई। लेकिन राहुल ने रोक लिया। 'बुआ, तू घर से बाहर नहीं निकलेगी। ये हमारा बच्चा है। मैं इसे मारने नहीं दूंगा।' कामिनी रोई, 'राहुल, ये पागलपन है!' राहुल ने धमकाया, 'मामा को कह देना कि ये उनका ही बच्चा है। वरना बदनामी तेरी ही होगी। तू मुंह दिखाने लायक नहीं रहेगी। सबको पता चल जाएगा कि तूने भतीजे से चुदवाया।' कामिनी डर गई, चुप हो गई।
अब घर में अजीब सा माहौल था। राहुल रोज कामिनी को चोदता, उसके बूब्स चूसता, दूध पीता। कामिनी उदास थी, लेकिन पेट बढ़ने लगा। राहुल खुश था, सोचता – 'मैंने बुआ का दुख दूर कर दिया। अब वो मां बनेगी, मेरे बच्चे की।' एक दिन, कामिनी मायके गई – अपनी मासी के घर। वहां वो उदास बैठी थी, पेट छुपाए। मासी ने पूछा, 'क्या हुआ बेटी?' कामिनी ने झूठ बोला, 'मामा का बच्चा है।' लेकिन रात को राहुल भी चुपके से आ गया। मासी के घर के पीछे वाले कमरे में, उसने फिर कामिनी को पकड़ा। 'बुआ, यहां भी मैं तुझे चोदूंगा।' कामिनी विरोध करने लगी, लेकिन राहुल ने उसके कपड़े उतारे, नंगी कर दिया। मासी सो रही थी, बाहर शोर न हो इसलिए वो धीरे-धीरे चोदा। लंड चूत में डाला, धीमी स्ट्रोक्स से। कामिनी दांत किटकटाई, लेकिन चुप रही। राहुल ने बूब्स चूसे, थोड़ा दूध पिया, और फिर वीर्य अंदर डाला। 'ये बच्चा मजबूत बनेगा, बुआ।'
मासी के घर में एक इवेंट हुआ – फैमिली गेट-टुगेदर। सब लोग आए, कामिनी को देखकर खुश हुए। लेकिन राहुल ने मौका लिया। रसोई में कामिनी अकेली थी, वो घुस गया। पीछे से पकड़ा, साड़ी ऊपर की, पैंटी नीचे खींची, और लंड चूत में घुसेड़ दिया। 'शशश... चुप बुआ,' बोला। तेजी से चोदा, फुच-फुच आवाज दबी हुई। कामिनी सहमी हुई, लेकिन चूत गीली हो गई। राहुल ने जल्दी वीर्य छोड़ा, और निकल गया। कामिनी कांपती हुई खड़ी रही।
फिर एक शाम, मासी के घर के बगीचे में। कामिनी फूल तोड़ रही थी। राहुल आया, उसे घास पर लिटा दिया। नंगी किया, पैर फैलाए, और मोटा लंड चूत में ठोक दिया। बाहर हवा चल रही थी, लेकिन वो जोर से चोदने लगा। बूब्स चूसे, दूध पिया। कामिनी रोई, 'किसी को पता चल जाएगा!' लेकिन राहुल नहीं रुका। आधा घंटा चोदा, वीर्य भरा। अब कामिनी का पेट दिखने लगा था। फैमिली लौट आई, लेकिन रहस्य छुपा रहा। राहुल मुस्कुराता, सोचता – 'बुआ अब खुश होगी, बच्चे के आने पर।' कामिनी उदास थी, लेकिन मजबूर।
कुछ महीनों बाद, कामिनी का बच्चा हो गया। एक स्वस्थ बेटा, जिसका नाम रखा गया आरव। फैमिली खुश थी, राकेश ने सोचा ये उसका बच्चा है, सबने जश्न मनाया। लेकिन कामिनी उदास ही रही – वो जानती थी सच्चाई। बच्चे के आने से उसका दुख थोड़ा कम हुआ, लेकिन राहुल का डर बरकरार था। डिलीवरी के बाद कामिनी की बॉडी और भी सॉफ्ट हो गई, बूब्स और बड़े हो गए, दूध से भरे हुए। चूत थोड़ी ढीली हो गई थी, लेकिन फिर भी गुलाबी और रसीली। राहुल को ये सब देखकर और लालच हो गया। वो सोचता, 'बुआ अब मां बन गई, लेकिन मैं इसे और बच्चे दूंगा। ये हमारा राज है।'
डिलीवरी के एक हफ्ते बाद, जब कामिनी बेड पर लेटी बच्चे को दूध पिला रही थी, राहुल कमरे में घुस आया। दरवाजा बंद किया, और चुपके से पास आया। 'बुआ, बच्चा कितना प्यारा है। लेकिन तुझे और चाहिए न?' कामिनी डर गई, 'राहुल, जा बाहर! मैं कमजोर हूं अभी।' लेकिन राहुल ने सुना नहीं। बच्चे को साइड में रख दिया, और कामिनी के ऊपर चढ़ गया। उसके नाइट गाउन ऊपर किया, पैंटी खींची। कामिनी विरोध करने लगी, हाथ-पैर मारने की कोशिश की, 'नहीं, दर्द होगा! बच्चा जाग जाएगा!' राहुल ने उसके मुंह पर हाथ रखा, 'चुप रंडी! तेरा दूध पीने आया हूं पहले।' वो उसके एक बूब को मुंह में लिया, जोर से चूसा। दूध की धार निकली, वो गटक-गटक पी गया। कामिनी सिसकी लेने लगी, दर्द से।
राहुल का लंड पहले से ही सख्त था, 8 इंच लंबा, 3इंच मोटा। उसने अपना पैंट उतारा, और कामिनी के पैर फैलाए। 'बुआ, तेरी चूत अब मां की चूत है, लेकिन मैं इसे फिर से भर दूंगा।' कामिनी रोई, 'बस करो, हरामी! बच्चा देख रहा है!' लेकिन राहुल ने अपना मोटा लंड चूत पर रगड़ा, फिर धीरे से अंदर धकेला। डिलीवरी के बाद चूत थोड़ी नरम थी, लेकिन फिर भी टाइट लगी। फुच... धीरे-धीरे वो अंदर-बाहर करने लगा। कामिनी दांत दबाए सह रही थी, आंसू बह रहे थे। राहुल ने दूसरे बूब को भी चूसा, दूध पिया, और स्ट्रोक्स तेज किए। तुप्प... तुप्प... बेड हिलने लगा। बच्चा सो रहा था, लेकिन कामिनी डर से कांप रही थी। 'तेज मत, आवाज हो जाएगी!' वो फुसफुसाई। राहुल हंसा, 'तेरी चूत तो फिर से गीली हो गई, बुआ। मां बनने के बाद भी तू रंडी है।' वो १० मिनट तक धीरे-धीरे चोदा, फिर जोर से धक्का मारा और गाढ़ा वीर्य चूत में छोड़ दिया। गर्म स्पर्म अंदर फैल गया। कामिनी थककर लेट गई, राहुल संतुष्ट होकर चला गया।
इसके बाद, राहुल की आदत बन गई। रोज रात को, जब राकेश सो जाता, वो कामिनी के कमरे में आता। कभी बच्चे को दूध पिलाते समय चोदता, कभी नहाने के बाद। एक दिन, कामिनी बच्चे को गोद में लेकर लिविंग रूम में बैठी थी। राहुल आया, उसे सोफे पर लिटा दिया।
साड़ी ऊपर की, पैंटी साइड में की, और लंड सीधा चूत में ठोंक दिया। 'आह्ह!' कामिनी चीखी, लेकिन राहुल ने मुंह दबा दिया। बच्चा गोद में था, वो धीरे-धीरे चोदने लगा। बूब्स से दूध टपक रहा था, राहुल ने चाटा। 'बुआ, तेरा दूध और मीठा हो गया है। बच्चे के साथ शेयर करूंगा।' कामिनी की आंखों से आंसू बह रहे थे, लेकिन चूत में रस बहने लगा। राहुल ने १५ मिनट तक पेला, वीर्य भरा, और बच्चे को वापस गोद में रख दिया।
कभी-कभी वो और साहसी हो जाता। एक शाम, राकेश घर पर था, लेकिन किचन में व्यस्त। राहुल ने कामिनी को वॉशरूम में घसीटा। दरवाजा बंद किया, उसके कपड़े उतारे। कामिनी विरोध की, 'पागल हो गए हो? बाहर सब हैं!' राहुल ने उसे दीवार से सटा दिया, पैर ऊपर उठाए, और लंड गांड में घुसेड़ने की कोशिश की। 'नहीं, गांड मत!' कामिनी चिल्लाई, लेकिन राहुल ने थूक लगाया और जोर से अंदर डाला। गांड फटने लगी, दर्द से कामिनी की चीख निकल गई। राहुल ने मुंह दबाया, 'चुप कुत्तिया! तेरी गांड भी चोदूंगा अब।' वो जोर-जोर से पीछे से ठोकने लगा, लंड पूरा अंदर-बाहर। कामिनी की गांड लाल हो गई, खून निकलने लगा। राहुल ने बूब्स पकड़े, निप्पल्स मरोड़े, दूध निचोड़ा। ५ मिनट में ही वो झड़ गया, वीर्य गांड में भर दिया। कामिनी गिर पड़ी, रोती हुई। राहुल ने साफ किया और बाहर चला गया।
बच्चा बड़े होने लगा, लेकिन राहुल रुका नहीं। वो कामिनी को ब्लैकमेल करता, 'अगर कुछ कहा तो बच्चे का बाप कौन है, सबको बता दूंगा। तू जेल जाएगी, रंडी।' कामिनी चुप रहती, मजबूर। राहुल अब और क्रूर हो गया – कभी मुंह में लंड ठोंसता, जबरदस्ती ब्लोजॉब करवाता। 'चूस बुआ, अपना दूध पीने के बदले।' कामिनी रोते हुए चूसती, गले तक लंड जाता। स्पर्म मुंह में उंडेलता। कभी डॉगी स्टाइल में चोदता, बाल खींचकर। कामिनी का शरीर अब राहुल का था – वो सोचता, 'ये मां बनी, लेकिन मेरी रखैल भी। और बच्चे पैदा करेगी मेरे।' कामिनी उदास जीवन जी रही थी, लेकिन राहुल की भूख कभी न मिटती।
कैसी लगी मेरी Hindi Sex Stories?

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