नौकरी के साथ माँ की चुत भी पाई - Antarvasna Sex Stories
- Riya
- 3 days ago
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हैलो दोस्तो आपकी रिया आप के सामने फिर एक नई कहानी लेकर हाजिर हूँ।
आज मैं आपको एक सच्ची कहानी बताने जा रही हूँ। यह सच्ची कहानी मुझे किसी ने अपनी आपबीती बताई है। यह सच्ची कहानी आज आपको उसीकी ही जुबानी सुनो।
नमस्कार दोस्तो, मेरा नाम अजीत है, उम्र 23 साल, हाइट 5 फीट 9 इंच। हमारा घर दिल्ली में है।
इस कहानी में मेरी मां सीमा बला की खूबसूरत, उनकी 36-30-40 की मादक फिगर सीधे आदमी को भी बेईमान बना दे। मेरी गंदी नजर उनके बदन पर थी।
आज मैं आपके सामने मेरे और मेरी सैक्सी मां के बीच हुई जबरदस्त चुदाई की सच्ची स्टोरी लेकर आया हूँ।
इसमें मैंने लिखा है कि कैसे सरकारी नौकरी के साथ-साथ मुझे मां की रसीली चूत चोदने का मौका भी मिल गया था। परिवार में मेरा बड़ा भाई सुजीत (मुझसे 3 साल बड़ा), उसकी दवाइयों-जनरल स्टोर की दुकान है और वह शादीशुदा है।
उनकी पत्नी यानि मेरी भाभी संगीता घर का काम निपटाकर भाई के साथ दुकान पर हाथ बंटाती हैं। एक बहन है, उसकी शादी हो चुकी।
पापा रमेश कुमार प्राइवेट कंपनी में जॉब करते हैं। सुबह अंधेरे में निकलते हैं, रात अंधेरे में लौटते हैं। उनका मानना है कि रात को घर आना ही भला होता है।
मेरी मां सीमा … उफ्फ्फ … बला की खूबसूरत गृहणी। उनकी 36-30-40 की मादक फिगर ऐसी … मां की सुडोल सुगठित चूचियों और डनलप से गद्दों जेसी बडे़े बड़े चूतड़ों की गांड़। गुलाबी भरें हुए गाल। रस भरे होंठ। जो अच्छे-खासे सीधे आदमी को भी बेईमान बना दे। मुरझाए हुए लन्ड में भी आग भड़का कर को खड़ा कर दें।
मैं बाथरूम से नहाकर अंडरवियर में बाहर निकलते हुए मां और भाभी ने बहुत बार मेरे ८ इंच लम्बा और ३ इंच मोटा मेरे लौड़े को उभार लिए हुए देखा है। जो अंडरवियर से भी बाहर निकल आया पड़ता था।
मां ज्यादातर सलवार-सूट और साड़ी ब्लाउज पेटीकोट ही पहनती हैं। मैं उस वक्त MA का स्टूडेंट था और CGL का एग्जाम पास कर चुका था, बस फाइनल मेरिट लिस्ट आना बाकी थी।

एक दिन सुबह ब्रेकफास्ट करके कॉलेज गया। वहां दोस्त ने बताया कि मेरिट लिस्ट आ गई है। फोन निकाला, वेबसाइट खोली, रोल नंबर डाला … और मेरा नाम था। खुशी के मारे मैं फूला नहीं समा रहा था। कॉलेज से भागा-भागा घर पहुंचा और मां को ज़ोर से गले लगा लिया- मां … मेरी सरकारी नौकरी लग गई!
मां खुशी से मेरे गले लग गईं। उनके भरे-भरे मम्मे मेरे सीने से टकराए … और मेरा लंड झटके से खड़ा हो गया। मेरे शरीर में सनसनाहट ही गयी। उस दिमाग में एक गंदा सा ख्याल कौंधा … पर नौकरी की खुशी में मैंने अनदेखा कर दिया।
शाम को सब एक साथ खाना खा रहे थे। मां ने सबको मेरी नौकरी की खुशखबरी दी। सब बहुत खुश हुए, मुझे बधाइयां दीं। कुछ ही दिनों में मेरे MA के फाइनल पेपर भी खत्म हो गए। नौकरी के दस्तावेज़ वेरिफाई हुए और मुझे साउथ ज़ोन में हैदराबाद में जॉइनिंग लेटर मिल गया। आज मुझे हैदराबाद जॉइनिंग के लिए जाना था। बड़ा भाई भी मेरे साथ चल पड़ा। वह मेरे रहने-सहने की सैटिंग करवाने आया था। भाई के कई दोस्त वहां इंजीनियर थे।
इस सफर के बाद मेरी ज़िंदगी की सबसे हॉट और गंदी घटना होने वाली थी, यह मैंने सोचा ही न था। घर से निकलते वक्त मैंने भाभी को टाटा बोला, पापा के पैर छुए और आशीर्वाद लिया। मां ने मुझे फिर से गले से लगा लिया … और उसी पल मेरे दिमाग में मां के लिए नज़रिया हमेशा के लिए बदल गया। उनके भारी-भारी मम्मे मेरे सीने से टकराए … और मेरे फौलादी लंड ने तुरंत सलामी दे दी। क्योंकि मैंने मां-बेटे की चुदाई वाली ढेर सारी कहानियां पढ़ रखी थीं … वे सब एकदम से दिमाग में घूमने लगीं।
फिर हम दोनों भाई सामान लेकर हैदराबाद के लिए निकल पड़े। रास्ते भर मेरे दिमाग में बस मां के वह बड़े-बड़े मम्मे और उनकी चुदाई के सपने घूमते रहे। इन्हीं सपनों का रस लेते-लेते मैं हैदराबाद पहुंच गया।
भाई का दोस्त पहले से स्टेशन पर खड़ा था। उसने मेरे लिए पहले से ही एक अच्छा घर किराए पर ले रखा था। यह ऑफिस के बिल्कुल पास ही था। भाई ने मेरा रहना-खाना सब सैट करवाया और अगले दिन दिल्ली वापस चला गया। मैं अकेला रहने लगा और ऑफिस जाने लगा।
लगभग 3 महीने बाद एक हफ्ते की छुट्टी मिली तो मैं दिल्ली घर आ गया। शाम हो चुकी थी। सबको नमस्ते किया, मिला-जुला। खाने की टेबल पर सबने मेरी कमज़ोरी का कारण पूछा। मैंने बताया कि अच्छा खाना न मिलना और टाइम पर न मिलना।
बस वहीं पापा ने फैसला कर दिया- अब तेरी मां सीमा, तेरे साथ हैदराबाद जाएंगी … वे ही खाना बनाएंगी, घर संभालेंगी!
मैं मन ही मन बहुत खुश हो गया। रात को मां की चुदाई के ख्यालों में मुठ मारकर सो गया। अगले दिन दोस्तों से मिला तो पता चला – मैं MA में भी अच्छे नंबरों से पास हो गया हूँ।
शाम को मेरी फ्लाइट थी। भाई हमें एयरपोर्ट छोड़ गया। मैं और मां हैदराबाद पहुंच गए। कुछ दिन तो सब नॉर्मल ही चला। फिर एक दिन मैं खाना खाकर ऑफिस गया और थोड़ा जल्दी लौट आया।
घर आते ही मां ने मुझे ज़ोर से गले लगा लिया … उनकी सुडौल हिचकोले खाती हुई चूचियां मेरे सीने में गड़ती हुईं। , और मेरे अन्दर का शैतान तुरंत जाग गया।
मां बोलीं- अजीत … मैं तो आज घर पर अकेली बोर हो गई थी! मैंने झट से कहा- मां चलो न … आज मैं आपको एक अच्छी फिल्म दिखा लाता हूँ!
पहले तो मां ने आना-कानी की, फिर बोलीं- ठीक है चलो … चलते हैं! मेरे दिमाग में कुछ और ही चल रहा था। हम जल्दी से तैयार हुए और मॉल पहुंच गए। फिल्म शुरू हुई। बीच में एक जबरदस्त सेक्स सीन आया। मां ने शर्माते हुए गर्दन नीचे कर ली।
मैंने पूछा- क्या हुआ मां?
मां लजाती हुई बोलीं- तेरे साथ ऐसी फिल्म देखते मुझे अच्छा नहीं लग रहा … तू बस जल्दी से घर चल!
मैंने समझाया- मां … यहां मुझे अपना दोस्त समझो ना!
पर मां ने साफ मना कर दिया और घर चलने को कहा। हम दोनों तुरंत मॉल से बाहर निकले, होटल में खाना भी कैंसिल कर दिया और सीधे घर आ गए। पर अब मेरे दिमाग में सिर्फ एक ही बात थी कि आज ही किसी भी तरह मां को चोदना है।
घर आते ही मां ने खाना बनाया। हम दोनों ने साथ खाया और सोने की तैयारी करने लगे।
तभी मैंने कहा- मां … तुम आज मेरे ही कमरे में सो जाओ।
मां ने मना किया- नहीं अजीत … मैं दूसरे कमरे में सो जाऊंगी।
‘मां … हम एक ही बेड पर सो जाएंगे ना!’
मां सख्ती से बोलीं- अजीत, तुम अब बड़े हो गए हो … मां-बेटे का एक बेड पर सोना ठीक नहीं।
मैंने हिम्मत जुटाई और सीधे कह दिया- मां … मुझे गलत-सही का नहीं पता, लेकिन मैं आपसे प्यार करने लगा हूँ … और आपके साथ सेक्स करना चाहता हूँ!
बस ये सुनते ही मां ने मुझे एक ज़ोरदार थप्पड़ जड़ दिया- ‘तू पागल हो गया है? मैं तेरी मां हूँ समाज क्या कहेगा?
फिर हम अलग-अलग कमरों में सोने चले गए। मैं पूरी रात सो नहीं पाया। मां की मोटी-मोटी चूचियां और चूत मेरे सामने घूमती रहीं। मैं सोचता रहा कि कैसे और कितने दिन में अपनी ही मां की चूत का मज़ा लूँगा … इसी उम्मीद में कब नींद आई, पता ही नहीं चला।
सुबह उठा तो रविवार था, छुट्टी थी। मां चाय लेकर मेरे कमरे में आईं। मैंने सोचा था कि मां बहुत गुस्सा होंगी … पर मुझे नहीं पता था कि आज मेरी किस्मत बदलने वाली है।
मां बेड पर बैठीं तो मैंने फट से माफी मांग ली- मां … रात वाली बात के लिए सॉरी!
मां मुस्कुराती हुई बोलीं- बेटा … मैं तेरी मां हूँ और तुझे बहुत प्यार करती हूँ। अगर मेरी कोई चीज़ तेरे काम आ सकती है तो मुझे कोई ऐतराज नहीं … बस डर इसी बात का है कि किसी को पता चल गया तो बहुत बदनामी हो जाएगी!
मैंने मौका देखते ही कहा- मां … तुम मुझे बहुत अच्छी लगती हो। जब तुम्हारे शरीर की खूबसूरती देखता हूँ तो पूरा दिन पागल रहता हूँ और यहां हमें कोई जानता भी नहीं … किसी को पता क्या चलेगा? वैसे भी मां तुम इतनी जवान और हॉट लगती हो कि मां तो बिल्कुल भी नहीं लगतीं!
मां ने आखिरी ऐतराज जताया- तेरे पापा और भाई का क्या? उन्हें पता लगा तो?
मैंने तुरंत जवाब दिया- मां … हमारे सेक्स के बारे में सिर्फ हम दोनों को ही पता रहेगा। उनके सामने तो हम मां-बेटे ही रहेंगे ना!
मैंने देखा कि मां लगभग मान ही गई थीं। इतने में मैंने मां को खींचकर अपने पास ले लिया और उनके रसीले होंठ चूसने लगा। मां भी मेरा पूरा साथ देने लगीं। पांच मिनट तक मैंने मां के रसभरे होंठ चूसे, साथ-साथ उनकी मोटी-मोटी चूचियां भी दबाने लगा।
मां हांफती हुई बोलीं- अजीत … तुम जो कहोगे मैं सब करूँगी … बस कभी ये बात किसी को पता नहीं चलनी चाहिए! मैंने भरोसा दिलाया और उनके कपड़े उतारने लगा।
मां ने फिर से रोका- पहले नहा लो, कुछ खा लो … मैं तो तेरे साथ ही हूँ, ये फिर कर लेना!
मैंने बेताबी से कहा- मां … तुम मेरे लिए स्पेशल हो। मैं तुम्हारी चुदाई के लिए पागल हूँ … प्लीज़ मुझे मत रोको!
मां हंस पड़ीं और प्यार से बोलीं- ओके बाबा! अब मां मेरा पूरा साथ देने लगीं। मैंने मां का सूट-सलवार उतार दिया। अब मां सिर्फ ब्रा-पैंटी में थीं। उनके गोरे-गोरे बदन को देखकर मैं पागल हो गया।
मां शर्माती हुई बोलीं- क्या देख रहे हो बेटा?
मैंने बेताबी से कहा- मां … तुम सच में बहुत सुंदर और सेक्सी हो, मन कर रहा है कि तुम्हें अभी खा जाऊं! मां हंस पड़ीं और बोलीं- तुम्हारे बारे में मेरा भी कुछ ऐसा ही ख्याल है बेटा! जब तुम बाथरूम से नहाकर अंडरवियर में बाहर निकलते तब तेरे लम्बा मोटा लन्ड को देख कर मेरी चुत में आग भड़क कर गीली हो पानी निकल जाता था।
तेरी भाभी को भी मैंने तुम्हें ललचाई नज़रों से देखा है।
मैंने हैरत से पूछा- पापा तुम्हारी चुदाई नहीं करते क्या?
मां ने आह भरते हुए कहा- घर चलाने की चक्कर में तुम्हारे पापा मेरी चुदाई बहुत कम करते हैं।
मैंने तुरंत कहा- मां … अब तुम मेरे पास हो। मैं रोज़ तुम्हारी इतनी चुदाई करूँगा, इतना सुख दूँगा … जो तुमने कभी सोचा भी नहीं होगा।
वे मुस्कुरा दीं।
फिर मैंने ‘आई लव यू मां … ’ कहा।
अपने सारे कपड़े उतारे और मां को खींचकर फिर से उनके रसीले होंठ चूसने लगा। दोनों हाथों से उनकी मोटी-मोटी चूचियां दबाने लगा। मां भी अब पूरी तरह मादक भाव में आ गई थीं। मैंने उनकी ब्रा खींचकर फेंकी और चूचियां आज़ाद कर दीं, फिर से बुरी तरह चूसने-दबाने लगा। मां मेरे अंडरवियर के ऊपर से ही मेरा लंड सहला रही थीं। लगभग 10 मिनट तक मैंने मां की चूचियां चूसीं-दबाईं।
मां मादक सिसकारियां लेने लगीं- आआह्ह … अजीत … आआह्ह! आआआहहहहह ऊऊऊईईईईईईईई आआआहहहहह तब मैंने अपना अंडरवियर भी उतारा।

जैसे ही मां ने मेरा ८ इंच का लम्बा और ३ इंच मोटा लंड देखा, वे चौंक गईं- अरे … तुम्हारा तो बहुत बड़ा है … तुम्हारे पापा का इतना बड़ा नहीं … प्लीज़ आराम से करना बेटा!
मैंने मुस्कुराते हुए कहा- मां … मैं तुम्हें बिल्कुल आराम-आराम से चोदूँगा! वे चोदूंगा शब्द सुनकर शर्मा गईं।
मैंने उनसे कहा- मां … मेरा लौड़ा चूसोगी?
मां शर्माते हुए बोलीं- अजीत … मैंने आज तक तुम्हारे पापा का भी नहीं चूसा … मैं नहीं चूस पाऊंगी! बहुत ही लम्बा मोटा है। मैंने ज़िद की- मां … एक बार मेरे लंड को चूस कर तो देखो … अगर मज़ा न आए तो दोबारा मत चूसना! मां ने बेमन से मेरा लंड मुँह में लिया।
मां का मुंह पूरा खोलना पड़ा तब सुपाड़ा अन्दर गया। बस एक मिनट चूसा और बाहर निकाल दिया। मां की सांसें तेज़ हो रही थी और उनकी चूचियां छाती ऊपर नीचे हो रही थी। मैंने सोचा कि शायद उन्हें मज़ा नहीं आया।
पर मां ने मुझे चौंकाते हुए कहा- अजीत … तुम्हारा लंड चूसने में तो बहुत मज़ा आया! मैंने हंसकर कहा- तो मां … देर किस बात की है? मां फिर से मेरे लंड को मुँह में लेकर बहुत प्यार और आराम से चूसने लगीं। मुझे जन्नत की हूर का सा सुख मिल रहा था।

फिर मैंने कहा- मां … अब मैं तुम्हारी चूत चाटूँगा? मां हैरान हो गईं- अरे इसे भी चाटते हैं क्या? मुझे तो आज तक पता ही नहीं था! मां थोड़ा डर रही थीं पर मैंने ज़िद करके उन्हें 69 की पोज़िशन में ले लिया। अब हम दोनों एक-दूसरे का लंड और चूत चूसने में डूब गए।
मां को भी जबरदस्त मज़ा आ रहा था … और मैं तो जन्नत में पहुंच चुका था मैंने मां से कहा- मां … मेरा निकलने वाला है … क्या करूँ? मां हांफती हुई बोलीं- मेरा भी बेटा … मैंने कहा- मैं तो तुम्हारी चूत का सारा रस पी जाऊंगा!
मां ने भी तुरंत जवाब दिया- हां मैं भी! बस हम दोनों चरम सीमा पर पहुंच गए। एक-दूसरे का गाढ़ा रस पीकर हम थोड़ी देर बाद सामान्य हुए। मैंने पूछा- मां … कैसा लगा? मां आंखें मटकाती हुई बोलीं- बेटा … मैंने आज तक ऐसा मज़ा कभी नहीं लिया था! मैंने मुस्कुराकर कहा- अब तो ऐसा मज़ा आपको रोज़ मिलेगा मां! बस मां ने नंगी ही मुझे अपनी मोटी-मोटी चूचियों से लिपटा लिया।
मैं फिर से उनकी चूचियां चूसने लगा, हाथ से चूत सहलाने लगा, मां को फिर से गर्म करने लगा। मां भी मेरा पूरा साथ देने लगीं और बोलीं- बेटा … मुझे तेरा लंड और चूसना है! आधा लन्ड ही मुंह में जाता है। मैंने अपना लंड मां के मुँह में दे दिया।
मां ज़ोर-ज़ोर से चूसने लगीं, आधा लन्ड ही मुंह में भरकर जा रहा था उसी से मां की सांसें तेज़ हो गई थी। मैं उनकी चूचियां मसलने लगा।
थोड़ी देर बाद मैंने कहा- मां … अब तुम मेरे ऊपर बैठकर चूत चुदवाओ! मां मेरे लंड पर अपनी चूत लेकर बैठने लगीं और बोलीं- अजीत … तेरे लंड के सामने मेरी चूत बहुत छोटी लग रही है … बिल्कुल आराम से करना … दर्द मत देना! मैंने धीरे-धीरे सुपारा उनकी चूत में डाला। ।
सुपाड़ा अन्दर जाते ही मां की दर्द भरी सिसकारियां निकल पड़ी। ईईईईईईई ऊऊऊईईईईईईईई। आआआहहहहह। ऊऊऊईईईईईईईई, मां को बहुत दर्द हो रहा था, पर मां ने मेरा लंड इतना चूसा था कि वह बिल्कुल नरम-चिकना हो चुका था इसलिए आसानी से उनकी चुत में धीरे धीरे फिसलता चला गया। मां दर्द से बुरी तरह से कराह रही थीं- आआह्ह …ऊऊऊईईईईईईईई ।
आआआहहहहह मममममम ईईईईईईई सससससस ऊऊऊईईईईईईईई। आआआहहहहह आह्ह …मैंने उनके होंठ अपने होंठों से बंद कर दिए और फिर से गर्म करने लगा। अब तक मेरा पूरा लंड मां की चूत में समा चुका था। मां की चुत में बच्चेदानी में अन्दर तक घुस गया।
मां दर्द से कराहते हुए बोली अजीत तेरा लन्ड बच्चेदानी में अन्दर तक घुसा हुआ है। मां दर्द भरी सिसकारियां भरती हुई बोली इतना दर्द और बच्चेदानी तक लन्ड पहले कभी नहीं घुसवाया। मां इतनी गर्म हो चुकी थीं कि खुद ही नीचे से अपने चूतड़ों को ऊपर उठा कर मेरे लंड पर उछल-उछलकर धक्के मारने लगीं। वे अपनी चूत खुद चोद रही थीं।
फिर मैंने रफ्तार तेज़ कर दी, अलग-अलग पोज़ में मां को चोदा। मां को इतना मज़ा आ रहा था कि बीच-बीच में चिल्लाने लगतीं- आह अजीत … मुझे फिर से तेरा लंड चूसना है! मैं जैसे ही अपना लंड उनके मुँह में देता, मां पागलों की तरह चूसने लगतीं … इससे सेक्स का मज़ा चौगुणा हो जाता।
लगभग 45 मिनट की लगातार चुदाई के बाद मां ने मुझे कसकर जकड़ लिया। मैं समझ गया कि मां फिर से तीसरी बार झड़ने वाली हैं। मैंने उनके बड़े-बड़े चूचे और ज़ोर से मसलने शुरू कर दिए, एक हाथ से चूत के दाने को सहलाने लगा। हम दोनों और उत्तेजित हो गए। अब मेरा भी चरम सुख शिखर पर था, मैंने कहा- मां … मेरा पानी निकलने वाला है … कहां निकालूँ?
मां ने तुरंत जवाब दिया- बेटा … मेरे अन्दर ही निकाल दे! मैंने अपना सारा गर्म गर्म गाढ़ा वीर्य मां की चूत के अन्दर ही बच्चेदानी में भर भर कर उड़ेल दिया। मैं बिल्कुल निढाल होकर मां के ऊपर गिर पड़ा और उनकी चूचियां चूसता रहा।
लगभग 15 मिनट बाद मां ने फिर से मेरा लंड मुँह में लिया, चूसा और साफ कर दिया। फिर वे प्यार से बोलीं- बेटा … मुझे बहुत मज़ा आया। अब मैं तेरे साथ तेरी पत्नी की तरह ही रहूँगी … बस ये राज हमेशा राज ही रहे! मैंने भी सहमति जताई।
फिर हम दोनों ने कपड़े पहने और रोज़ की तरह अपने-अपने काम पर लग गए। इसके बाद मैं दिन-रात मां को खूब चोदता … और मां भी मेरे साथ पूरी तरह खुलकर अपनी गन्दी चुदाई करवातीं।
फिर मां ने मुझे अपनी बांहों में भर कर प्यार करते हुए कहा कि मां मेरे बच्चे की मां बनने वाली हैं। मां प्रेग्नेंट हो गई। उस रात मैंने मां को पूरी रात जम कर चोदा। फिर मां और मैं दोनों नंगे एक दूसरे को बांहों में भर कर प्यार करने लगे और।
मां बोली अजीत मैं अब हर जन्म में तेरी पत्नी बन कर तेरे ढेर सारे बच्चों की मां बनना चाहती हूं। जो सुख तुमने मुझे दिया है वह मैं हमेशा से तरस रही थी। समय की विडंबना यह कि जिस चुत से मैं पैदा हुआ आज वो चुत ही मेरे लौड़े से चुद चुद कर प्रेग्नेंट हो कर मेरे बच्चे को अपने गर्भ में पनपने को आतुर हैं।
मां बोली - अजीत बेटा मेरा बहुत अरमान है कि मैं तेरे बच्चे की मां बनूं और इसको जन्म दूं। लेकिन रिश्तेदार, तेरे पापा को और घर वालों को हमारे इस राज़ का पता चल जाएगा। बहुत बदनामी हो जाएगी। मां कांपते हुए स्वर में बोली कि हमारा यह राज़ बना रहे ताकि मैं हमेशा तेरी पत्नी बन कर चुदाई करवाती रहूं।
मैंने कहा - मां मैं हमेशा तुम्हें अपनी बीवी मानते हुए ही रात दिन तुम को चोद चोद कर इतना प्यार सुख दूंगा। फिर मां ने और मैंने दोनों ने समझदारी दिखाते हुए इस बच्चे को गर्भपात करवा कर मां की सफाई करवा दी।
हम काफी सावधानी से चुदाई करने लगे लेकिन फिर भी मां मेरे फौलादी लन्ड से कई बार प्रेग्नेंट होती रही, जो उसके पीरियड मिस होने के बाद ही हमे पता चलता था। और हमेशा टेबलेट से या गर्भपात से सफाई करवा दिया करते है।
दोस्तो, मेरी ये सच्ची Antarvasna Sex Stories यहीं समाप्त नहीं होती है। मैं अगली बार में बताऊंगा कि कैसे मैं और मां बर्फीले पहाड़ों पर अपना हनीमून मनाने गए। आपकी रिया। rs9533749@gmail.com

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