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पति के सामने दो लंडों से बीवी की जंगली चुदाई - Hindi Sex Stories

मेरा नाम शोभा है। मैं अब 30 साल की हूं, लेकिन जब यह सब शुरू हुआ तो मैं 28 की थी। अप्रैल 2024 की बात है, जब मेरी जिंदगी में यह तूफान आया। मैं एक खूबसूरत महिला हूं, लंबी कद-काठी, गोरा रंग, भरी-भरी चूचियां और पतली कमर। लोग मुझे देखकर मुड़ जाते हैं, लेकिन मेरी किस्मत देखिए, मेरे पति को मेरी इस खूबसूरती से कोई मतलब ही नहीं। उनका नाम राजेश है, अपना बड़ा बिजनेस है, करोड़ों कमाते हैं। घर में सब कुछ है – लग्जरी कारें, बड़ा बंगला, नौकर-चाकर, ड्राइवर। नेपाली नौकर घर के काम संभालता है, छोटा कद लेकिन मजबूत बदन वाला, और रमेश ड्राइवर है, लंबा-चौड़ा, गांव का जवान लड़का। सब ठीक चल रहा था, लेकिन मेरे पति की एक आदत ने सब उलट-पुलट कर दिया। वे अपनी हर चीज शेयर करते हैं, दोस्तों को गाड़ियां देते हैं, शराब की पार्टियां करते हैं, और अब तो मुझे भी शेयर करने लगे।


शादी के बाद जब मैं ससुराल आई, तो लगा जैसे सपना सच हो गया। बड़ा घर, नौकरानी सुबह चाय लेकर आती, ड्राइवर कहीं भी ले जाने को तैयार। राजेश मुझे बाहर घुमाते, शॉपिंग कराते, लेकिन घर के अंदर कुछ नहीं। रात को बिस्तर पर आते, पीठ फेरकर सो जाते। मैं इंतजार करती रहती कि आज तो कुछ होगा, आज तो वे मुझे छुएंगे, लेकिन कुछ नहीं। न चुम्मा, न गले लगाना, न सेक्स। मैं सोचती, शायद थके हैं, बिजनेस का टेंशन है। लेकिन महीनों बीत गए, साल बीत गया, कुछ नहीं बदला। एक दिन मैंने पूछ ही लिया, “राजेश, क्या बात है? तुम मुझे छूते क्यों नहीं? मैं तुम्हारी बीवी हूं, मेरे हक हैं तुम पर।” उन्होंने बस मुस्कुराकर टाल दिया। लेकिन मैंने छानबीन की, देखा कि वे बाहर पुरुषों के साथ ज्यादा खुश रहते हैं। औरतों से दूरी, मर्दों को देखकर आंखों में चमक। तब समझ आया, वे गे हैं। औरतों में कोई इंटरेस्ट नहीं।


मैं टूट गई थी अंदर से। 28 साल की जवान औरत, जिस्म की आग लगी हुई, और पति को परवाह नहीं। मैं रातों को अकेले बिस्तर पर करवटें बदलती, अपनी चूत को सहलाती, लेकिन वो प्यास कहां बुझती। बच्चा भी नहीं हुआ, क्योंकि सेक्स ही कहां होता था। कभी-कभी वे कोशिश करते, लेकिन लंड खड़ा नहीं होता, या दो मिनट में खत्म। मैं रोती, सोचती कि क्या करूं। तलाक? लेकिन समाज क्या कहेगा, परिवार क्या सोचेगा। एक दिन झगड़ा हो गया, बड़ा वाला। मैं चिल्लाई, “तुम्हें औरतों से नफरत है न? तो क्यों शादी की? मुझे छोड़ दो, या मेरी भूख मिटाने के लिए किसी मर्द को लाओ। वरना मैं खुद ढूंढ लूंगी!” वे चुप रहे, लेकिन मेरी बात उनके दिमाग में बैठ गई। मैंने यह सिर्फ गुस्से में कहा था, डराने को, लेकिन शाम को मुझे पछतावा हुआ। मैं रोई, सोचा कि कितनी गलत बात बोल दी।


रात को उनका फोन आया। आवाज में प्यार था, “शोभा, घर आ रहा हूं, तुम्हारे लिए सरप्राइज है।” मैं हैरान, आज क्या हुआ? वे आए, हाथ में हीरे की अंगूठी। मैंने कहा, “यह किस लिए? न कोई त्योहार, न एनिवर्सरी।” वे बोले, “बस, तुम्हें खुश करने को। आज का झगड़ा भूल जाओ।” रात के दस बज रहे थे, हम बेडरूम में थे। वे बोले, “शोभा, आज तुमने जो कहा, वो सही था। मैं तुम्हें खुश नहीं कर पाता। मुझे औरतों में इंटरेस्ट नहीं, मर्दों में है। लेकिन मैं तुम्हें प्यार करता हूं, तुम्हारी खुशी चाहता हूं। इसलिए मैंने तुम्हारे लिए दो लोगों का इंतजाम किया है। वे तुम्हें मेरे सामने खुश करेंगे।” मैं स्तब्ध रह गई। “कौन?” “हमारा नेपाली नौकर और रमेश ड्राइवर।” उन्होंने फोन किया, “आ जाओ, तैयार होकर।” दस मिनट में दोनों आ गए। नेपाली ने सफेद शर्ट-पैंट पहनी, बाल संवारे, रमेश ने जींस-टीशर्ट, दोनों साफ-सुथरे, जैसे डेट पर आए हों। राजेश ने उन्हें पहले ही बता दिया था।


राजेश ने शराब की बोतल निकाली, बेड के पास सोफे पर बैठ गए। पेग बनाया, पीने लगे। बोले, “शुरू करो, मेमसाहब को खुश करो।” नेपाली और रमेश ने पहले अपनी शर्ट उतारी, फिर पैंट। दोनों के बदन मजबूत, रमेश का चौड़ा सीना, नेपाली का छोटा लेकिन टाइट बॉडी। फिर वे मेरे पास आए। मैं साड़ी में थी, लाल रंग की, ब्लाउज टाइट। रमेश ने मेरी साड़ी का पल्लू पकड़ा, धीरे से खींचा। नेपाली ने पीछे से ब्लाउज के हुक खोले। राजेश कमेंट कर रहे थे, “अच्छे से करो, मेमसाहब को आराम से नंगा करो।” साड़ी उतरी, पेटीकोट का नाड़ा नेपाली ने खोला, वो फर्श पर गिर गया। अब मैं सिर्फ ब्रा और पैंटी में। रमेश ने ब्रा का स्ट्रैप नीचे सरकाया, नेपाली ने पैंटी खींची। मैं पूरी नंगी, शर्म से आंखें बंद कर लीं। लेकिन अंदर आग लगी थी, सालों की प्यास।


दोनों ने जैस्मिन ऑयल की बोतल निकाली। रमेश ने मेरी पीठ पर तेल डाला, मालिश करने लगा। नेपाली ने आगे से, मेरी जांघों पर। उनकी उंगलियां फिसल रही थीं, मेरी चूत गीली हो चुकी थी। राजेश बोले, “अब सहलाओ अच्छे से।” रमेश मेरी चूचियों पर तेल मल रहा था, निप्पल को अंगूठे से दबा रहा, “मेमसाहब, कितनी मुलायम हैं आपकी चूचियां, जैसे मखमल।” नेपाली मेरी चूत पर उंगलियां फेर रहा, “बहुत गर्म हो गई है चूत, साहब, मेमसाहब की तो पानी बह रहा है।” मैं सिसकारियां ले रही थी, आह्ह… ओह्ह… इह्ह… राजेश पीते हुए बोले, “नेपाली, चूत चाटो। रमेश, लंड मुंह में दो।” रमेश ने अपना मोटा लंड निकाला, कम से कम 8 इंच, मेरे मुंह के पास लाया, “चूसो मेमसाहब, अच्छे से चूसो, जैसे लॉलीपॉप।” मैंने मुंह खोला, ग्ग्ग्ग… गी… गोग… गोग… चूसने लगी, वो जोर से अंदर धकेल रहा था। नेपाली नीचे जीभ से चूत चाट रहा, क्लिट को चूस रहा, “उम्म… कितनी स्वादिष्ट चूत है, साहब, मीठी जैसे शहद।” आह्ह… ह्ह्ह… ऊईई… मैं तड़प रही थी।


फिर वे बदले। नेपाली का लंड मुंह में, छोटा लेकिन मोटा, मैं चूस रही थी। रमेश मेरी चूचियों को मसल रहा, निप्पल काट रहा, “आह, मेमसाहब, तुम्हारी चूचियां लाल हो गईं, कितनी टाइट हैं।” नेपाली चूत में उंगली डाल रहा, दो उंगलियां, घुमा रहा। मैं चिल्लाई, “आह्ह… ह्ह्ह… और जोर से…” राजेश बोले, “अब चोदो इसे। नेपाली, पहले तुम।” नेपाली ने लंड चूत पर रगड़ा, फिर धक्का मारा। अंदर घुस गया, जोर-जोर से पेलने लगा, “ले मेमसाहब, मेरा लंड, कितनी टाइट चूत है तेरी।” आह्ह… ओह्ह… ऊउइ… मैं गांड उठा रही थी। रमेश मेरे होंठ चूस रहा, “चूस मेरी जीभ, मेमसाहब, कितने रसीले होंठ।” गर्दन पर किस, गाल पर दांत काटा, चूचियां मसलीं कि लाल हो गईं।


फिर पोजीशन चेंज। रमेश नीचे, अपना बड़ा लंड चूत में घुसाया, टांगें फैलाईं, जोर से धक्के। “ले साली, मेरा लौड़ा, फाड़ दूंगा तेरी चूत।” आह्ह… ह्ह्ह… ऊईईई… नेपाली ऊपर, लंड मुंह में, चूचियां मसल रहा। राजेश कमेंट कर रहे, “अच्छा कर रहे हो, और जोर से चोदो मेरी बीवी को।” फिर मुझे घोड़ी बनाया, रमेश पीछे से चूत में, नेपाली मुंह में। “चोदो मुझे, और जोर से…” मैं बोल रही थी। फिर कुत्तिया स्टाइल, उठाकर, बैठाकर। रमेश ने मुझे गोद में उठाया, लंड अंदर, उछाल रहा। नेपाली पीछे से गांड सहला रहा। दो घंटे चला यह सब। मेरी कमर टूट रही थी, जांघें दर्द कर रही थीं, लेकिन मजा इतना कि भूल गई। आखिर में दोनों ने पानी छोड़ा, मैं थककर लेट गई। राजेश बोले, “डार्लिंग, खुश हो? अब हर शनिवार ऐसा होगा।” अब मैं शराब पीती हूं, शनिवार को इंतजार करती हूं। जिंदगी बदल गई, लेकिन खुशी मिली।


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