प्यासी बंगालन की सहेली की हवस: Sex Story
- Kamvasna
- Aug 10
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ये एक ऐसी Antarvasana है जिसे बयां करने से पहले मैं खुद सिहर उठता हूं। ये कोई बनावटी Sex Story नहीं, बल्कि मेरी अपनी आपबीती है, जिसे मैंने सालों तक अपने सीने में दफन कर रखा था। कोलकाता की भीगी शाम और दो बंगाली सुंदरियों के साथ बिताए वो पल मेरी रूह में बस गए हैं। आज मैं वो राज़ खोल रहा हूं, जिसे दुनिया को बताने की हिम्मत मुझमें कभी नहीं थी। ये सिर्फ देह की प्यास नहीं, एक अजीब सी हवस और भावनाओं का तूफान था, जिसने मुझे बहा दिया।
मेरा नाम अभय है और उम्र 27 साल। मैं पेशे से फोटोग्राफर हूं और अपने काम के सिलसिले में देश भर में घूमता रहता हूं। उन दिनों मैं कोलकाता में एक प्रोजेक्ट पर था और पार्क स्ट्रीट के पास एक छोटे से फ्लैट में किराए पर रहता था। मेरी फ्लैट की मालकिन थीं श्रीमती बनर्जी, लेकिन उनसे मेरी कभी ज़्यादा बातचीत नहीं हुई थी। वो खुद तो बूढ़ी थीं, लेकिन उनकी बेटी तनुश्री, जो उम्र में 22 साल की होगी, अक्सर मुझे बालकनी में गमलों को पानी डालते दिख जाती थी। तनुश्री देखने में जितनी साधारण थी, उसकी आंखों में उतनी ही शरारत भरी थी।
तनुश्री का रंग सांवला था, बाल घने और घुंघराले, और आंखें बड़ी-बड़ी जिनमें कोलकाता की उदासी और बंगाली मिठास दोनों बसती थी। वो अक्सर हल्के रंग की सूती साड़ी पहनती, माथे पर छोटी सी लाल बिंदी और हाथों में शंखे की चूड़ियां। जब वो हंसती तो ऐसा लगता जैसे बारिश में भी धूप निकल आई हो। मैं भी एक कलाकार होने के नाते खूबसूरती की कद्र करता था, और तनुश्री की सादगी में एक अलग ही कशिश थी। लेकिन उस दिन जब मैं उसके घर के अंदर गया, तो मालूम हुआ कि असली तूफान तो उसकी सहेली के रूप में मेरा इंतज़ार कर रहा था।
उस शाम तनुश्री ने मुझे अपने घर पर चाय पर बुलाया। बंगाल में चाय का मतलब सिर्फ चाय नहीं, बल्कि आडा-चा और घंटों की गपशप होता है। मैं शाम ढलते ही उनके घर पहुंचा। दरवाज़ा तनुश्री ने खोला, लेकिन इस बार उसके चेहरे पर एक अलग ही चमक थी। |आइए अभय दा, मेरी सहेली भी आई हुई है। आपको मिलवाती हूं।| मैंने अंदर कदम रखा तो ड्रॉइंग रूम में एक और लड़की बैठी थी। वो तनुश्री से बिल्कुल उलट थी। गोरा रंग, सीधे लंबे बाल, और आंखों में एक अजीब सी प्यास। उसका नाम रूपशा था और वो भी 23-24 साल की होगी। उसने गहरे हरे रंग की साड़ी पहनी हुई थी और ब्लाउज थोड़ा छोटा था, जिससे उसकी भरी हुई छाती का उभार साफ दिख रहा था।
रूपशा को देखते ही मेरे मन में एक अजीब सी हलचल मची। वो बहुत खूबसूरत थी, लेकिन उसकी खूबसूरती में एक जंगलीपन था, एक बेचैनी थी जो साफ झलक रही थी। तनुश्री ने बताया कि रूपशा उसकी बचपन की सहेली है और पति से लड़ाई के बाद कुछ दिनों के लिए यहां आई है। |पुरुषों की बात ही मत करो, सब एक जैसे होते हैं,| रूपशा ने तीखे स्वर में कहा और अपनी चाय की चुस्की ली। मैं मुस्कुराकर चुप रहा, क्योंकि मैं समझ गया था कि अभी इस आग में घी डालना ठीक नहीं।
बातचीत आगे बढ़ी तो रूपशा थोड़ी सहज हुई। उसने बताया कि उसका पति उसे समय नहीं देता और हमेशा काम में लगा रहता है। उसकी बातों में एक शिकायत थी, लेकिन साथ ही एक गहरी शारीरिक प्यास भी छुपी थी। वो बार-बार अपने होंठों पर जीभ फेरती, अपने बालों को झटकती, और बैठे-बैठे अपनी साड़ी का पल्लू ठीक करती। ये सब छोटी-छोटी हरकतें मुझ पर अपना असर छोड़ रही थीं। मैं खुद पर काबू रखने की कोशिश कर रहा था, लेकिन उसकी मौजूदगी में मेरा शरीर बेकाबू हो रहा था।
तनुश्री अचानक उठी और बोली, |मैं थोड़ी देर में आती हूं, बाज़ार से कुछ सामान लाना है। तब तक आप दोनों बातें करो।| ये कहकर वो चली गई और हम दोनों कमरे में अकेले रह गए। माहौल में एक अजीब सी खामोशी छा गई। रूपशा ने अपनी आंखें उठाकर मुझे देखा और हल्का सा मुस्कुराई। |अभय, तुम फोटोग्राफर हो ना? तुम्हें औरतों की खूबसूरती अच्छे से समझ आती होगी।| उसकी आवाज़ में एक चुनौती थी।
|हां, मैं खूबसूरती को पकड़ना जानता हूं,| मैंने जवाब दिया और सीधे उसकी आंखों में देखा। रूपशा ने अपनी साड़ी का पल्लू थोड़ा और सरकाया और अपने पैरों को थोड़ा और फैलाकर बैठ गई। अब उसकी गोरी जांघें साड़ी के बाहर दिख रही थीं। मेरा ध्यान बार-बार उधर ही जा रहा था। रूपशा ने ये नोटिस कर लिया और एक शरारती मुस्कान उसके चेहरे पर आ गई। |देख क्या रहे हो? तुम फोटोग्राफर तो हो नहीं, बस एक आम मर्द हो जिसे औरत का जिस्म देखना है।| उसने ताना मारा।
|तुम्हें एतराज़ है?| मैंने पलटकर पूछा और अपनी सीट से उठकर उसके करीब आ गया। रूपशा ने अपनी सांस थोड़ी तेज़ की और अपनी छाती को ऊपर उठाया। |एतराज़ क्यों होगा, बल्कि मुझे तो अच्छा लग रहा है कि कोई मुझे इस नज़र से देख रहा है।| उसने धीमी आवाज़ में कहा। मैंने अपना हाथ बढ़ाकर उसके बालों को सहलाया और उसके कान के पीछे अपनी उंगली फेरी। रूपशा की आंखें बंद हो गईं और उसके मुंह से एक हल्की सी सिसकारी निकली।
|तुम बहुत प्यासी लग रही हो, रूपशा,| मैंने फुसफुसाकर कहा और उसके गाल पर अपना होंठ रख दिया। |हां… मैं बहुत प्यासी हूं… बहुत दिनों से…| उसने अपनी बाहें मेरी गर्दन के चारों ओर डाल दीं और मुझे अपनी तरफ खींच लिया। मैंने उसके होंठों को अपने होंठों में भर लिया। ये चुंबन कोमल नहीं, बल्कि जंगली और भूखी थी। रूपशा ने अपनी जीभ मेरे मुंह में डाल दी और पागलों की तरह मेरी जीभ से लड़ने लगी। उसके हाथ मेरी पीठ पर थे और वो मुझे ज़ोर से दबा रही थी।
मैंने उसे सोफे पर लिटा दिया और उसके ऊपर आ गया। मेरे हाथ उसकी साड़ी के पल्लू से खेल रहे थे और धीरे-धीरे उसके ब्लाउज के बटन खोल रहे थे। रूपशा ने मेरी मदद की और खुद ही अपना ब्लाउज उतारकर फेंक दिया। उसके स्तन बड़े और भारी थे, जो हल्के गुलाबी रंग की ब्रा में कैद थे। मैंने ब्रा के ऊपर से ही उसके निप्पल को मुंह में ले लिया और ज़ोर से चूसने लगा। |आआअह्ह्ह्हह…| रूपशा ज़ोर से कराह उठी और अपनी कमर ऊपर उठा दी।
मैंने उसकी ब्रा उतारी और अब उसके स्तन खुले आसमान के नीचे थे। मैं बारी-बारी से दोनों स्तनों को चूम, चाट और चूस रहा था। रूपशा के मुंह से लगातार कराहें और आहें निकल रही थीं। मेरा हाथ नीचे गया और मैंने उसकी साड़ी और पेटीकोट को ऊपर सरका दिया। उसकी पैंटी गीली थी और उसकी चुत की गर्मी मेरे हाथ को महसूस हो रही थी। मैंने उसकी पैंटी उतार दी और अपनी उंगलियां सीधे उसकी चुत पर रख दीं। वो बुरी तरह से गीली थी और उसकी चुत फूली हुई थी।
|उह्ह्ह्ह्ह… अभय… प्लीज़…| रूपशा ने मेरी कमर पर ज़ोर डाला और मुझे अपनी तरफ खींचा। मैंने अपनी पैंट खोली और अपना लंड बाहर निकाला। मेरा लंड पूरी तरह सख्त था और उसकी नसें उभरी हुई थीं। रूपशा ने मेरे लंड को देखा और अपने होंठ काट लिए। मैंने अपने लंड को उसकी चुत के मुहाने पर लगाया और धीरे-धीरे रगड़ने लगा। उसकी चुत का रस मेरे लंड पर लगकर उसे चमका रहा था।
|डालो… अंदर डालो…| रूपशा ने बेचैनी से कहा और अपनी टाँगें मेरी कमर पर लपेट दीं। मैंने एक ज़ोरदार धक्का दिया और अपना पूरा लंड उसकी चुत के अंदर डाल दिया। |आआअह्ह्ह्हह…| रूपशा ज़ोर से चीख उठी। उसकी चुत बहुत गर्म और टाइट थी, जिसने मेरे लंड को बुरी तरह जकड़ लिया। मैंने धीरे-धीरे अपने कूल्हों को हिलाना शुरू किया। पहले रफ्तार धीमी थी, फिर मैंने ज़ोर पकड़ लिया और उसे ज़ोर-ज़ोर से चोदने लगा।
रूपशा बंगाली में कुछ बड़बड़ा रही थी और मेरी पीठ पर नाखून गड़ा रही थी। उसकी आवाज़ें पूरे कमरे में गूंज रही थीं। |ओह… अभय… चोदो मुझे… ज़ोर से चोदो…| वो चिल्ला रही थी। मैंने उसकी एक टाँग ऊपर उठाई और अपने कंधे पर रख ली ताकि मेरा लंड और गहराई तक जा सके। इस पोज़ीशन में मेरा लंड उसकी चुत की गहराइयों में जा रहा था और हर बार रूपशा की सांसें तेज़ होती जा रही थीं। उसका पूरा शरीर पसीने से तर था और सोफे पर उसके बाल बिखरे हुए थे।
तभी दरवाज़े की घंटी बजी। हम दोनों चौंक गए। मैंने जल्दी से अपना लंड बाहर निकाला और हम दोनों ने जल्दी-जल्दी अपने कपड़े ठीक किए। रूपशा ने इशारे से मुझे चुप रहने को कहा और दरवाज़ा खोलने चली गई। दरवाज़े पर तनुश्री थी। वो हांफ रही थी और बोली, |बारिश शुरू हो गई, इसलिए भागकर आई।| उसकी नज़रें कमरे में घूमीं और वो समझ गई कि कुछ तो हुआ है। सोफे की तहरी हुई चादर, रूपशा का बिखरा हुआ बाल, और मेरा अस्त-व्यस्त कुर्ता… सब कुछ बयां कर रहा था।
|क्या हो रहा था यहां?| तनुश्री ने सीधे रूपशा से पूछा। रूपशा कुछ बोलती इससे पहले ही तनुश्री ने कहा, |तुम लोग शुरू हो गए और मुझे बताया तक नहीं?| ये सुनकर मेरे होश उड़ गए। तनुश्री के चेहरे पर अब गुस्सा नहीं, बल्कि एक शरारत भरी मुस्कान थी। वो आगे बढ़ी और उसने मेरे कुर्ते का बटन पकड़कर मुझे अपनी तरफ खींचा। |अभय दा, मुझे लगता था तुम बहुत सीधे हो, लेकिन तुम तो बड़े शैतान निकले।|
रूपशा ने तनुश्री का हाथ पकड़ा और उसे अपनी तरफ खींच लिया। |चुप कर, तू भी तो यही चाहती थी।| और फिर तनुश्री ने रूपशा को चूम लिया। ये सब देखकर मैं अवाक रह गया। तनुश्री और रूपशा एक-दूसरे को चूम रही थीं और एक-दूसरे के कपड़े उतारने लगीं। मैं वहीं खड़ा-खड़ा ये सब देख रहा था और मेरा लंड फिर से खड़ा हो रहा था। तनुश्री ने रूपशा की साड़ी उतारी और उसकी छाती पर अपना मुंह रख दिया। रूपशा कराह उठी और उसने तनुश्री के बालों को ज़ोर से पकड़ लिया।
|अभय दा, अकेले खड़े क्यों हो? आओ ना…| तनुश्री ने मुझे इशारे से बुलाया। मैंने अपने कपड़े पूरी तरह उतार दिए और दोनों की तरफ बढ़ा। तनुश्री ने मेरा लंड अपने हाथ में लिया और धीरे-धीरे हिलाने लगी। फिर उसने अपना मुंह खोला और मेरे लंड को अपने मुंह में ले लिया। उसकी जीभ मेरे लंड के सिरे पर घूम रही थी और वो ज़ोर-ज़ोर से चूस रही थी। |उह्ह्ह्ह्ह… तनुश्री…| मैं कराह उठा।
रूपशा पीछे से तनुश्री की चुत चाट रही थी। तनुश्री की साड़ी ऊपर तक उठी हुई थी और रूपशा की जीभ उसकी चुत के अंदर जा रही थी। तनुश्री मेरा लंड चूसते-चूसते कराह रही थी। फिर हम तीनों बिस्तर पर आ गए। तनुश्री ने मुझे धक्का देकर बिस्तर पर लिटा दिया और खुद मेरे ऊपर सवार हो गई। उसने मेरे लंड को अपनी चुत में डाला और ज़ोर-ज़ोर से ऊपर-नीचे होने लगी। उसके स्तन मेरी आंखों के सामने हिल रहे थे और मैं उन्हें ज़ोर से दबा रहा था।
रूपशा मेरे पास आई और उसने अपनी चुत मेरे मुंह पर रख दी। मैंने अपनी जीभ बाहर निकाली और उसकी चुत को चाटने लगा। रूपशा ज़ोर से चिल्ला रही थी और मेरे मुंह पर अपनी चुत रगड़ रही थी। उसकी चुत का रस मेरे मुंह में बह रहा था और मैं उसे पी रहा था। तनुश्री अब भी मेरे ऊपर थी और मुझे चोद रही थी। वो खुद एक चुदक्कड़ औरत की तरह मेरे लंड को अपनी चुत में लेकर उछल रही थी।
कुछ देर बाद हमने पोज़ीशन बदली। अब मैं तनुश्री के पीछे था और उसे डॉगी स्टाइल में चोद रहा था, जबकि वो रूपशा की चुत चाट रही थी। मेरा लंड तनुश्री की चुत में तेज़ी से अंदर-बाहर हो रहा था। तनुश्री की चीखें रूपशा की चुत में दबी हुई थीं। मैंने अपना हाथ आगे करके रूपशा के स्तनों को पकड़ा और ज़ोर से मसलने लगा। ये एक अद्भुत नज़ारा था, जहां तीनों के शरीर आपस में उलझे हुए थे और सिर्फ हवस और चुदाई की आवाज़ें गूंज रही थीं।
फिर रूपशा ने तनुश्री को हटाया और मुझे अपनी तरफ खींच लिया। |अब मेरी बारी… मुझे चोदो…| वो चीखी। मैंने तनुश्री को छोड़ा और रूपशा को बिस्तर पर लिटाकर उसकी टाँगें चौड़ी कीं और एक ही झटके में अपना लंड उसकी चुत में डाल दिया। रूपशा इतनी गीली थी कि मेरा लंड आसानी से अंदर-बाहर हो रहा था। मैं उसे ज़ोर-ज़ोर से चोद रहा था। तनुश्री हमारे बगल में लेटी हुई थी और अपनी चुत को उंगलियों से सहला रही थी।
|आआअह्ह्ह्हह… अभय… मैं… मैं आ रही हूं…| रूपशा चिल्लाई और उसका पूरा शरीर थरथराने लगा। मैंने अपने लंड को और तेज़ी से उसकी चुत में धकेला और एक आखिरी ज़ोरदार धक्के के साथ मैंने अपना सारा पानी उसकी चुत के अंदर गर्म-गर्म छोड़ दिया। |उह्ह्ह्ह्ह्ह…| रूपशा बेहोश सी हो गई।
मैंने अपना लंड बाहर निकाला तो तनुश्री ने तुरंत मेरे लंड को अपने मुंह में ले लिया और पूरा चूसने लगी। उसने मेरे लंड पर लगी रूपशा की चुत का रस और मेरा अपना वीर्य सब साफ कर दिया। उस रात हम तीनों ने एक-दूसरे की हवस की पूर्ति की। कई बार हमने पोज़ीशन बदली, कई बार एक-दूसरे को चूमा, चाटा और चोदा। सुबह होते-होते हम तीनों बिना कपड़ों के एक-दूसरे से लिपटे सो रहे थे। ये एक ऐसा अनुभव था जो मेरी ज़िंदगी का सबसे कामुक और अविस्मरणीय दिन बन गया। बंगाल की उस बारिश भरी रात ने मुझे हमेशा के लिए बदल दिया।
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