बहू ने प्यासी सास के लिए मूसल का इंतज़ाम कर दिया:१- Antarvasna Sex Stories
- Kamvasna
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काजल 22-23 साल की जवान और खूबसूरत बदन की मलिका है, कद पाँच फीट तीन इंच, बदन का एक-एक अंग साँचे में ढला हुआ। अभी 8 महीने पहले ही उसकी शादी विवेक खन्ना से हुई जो दिल्ली की एक कंपनी में काम करता है। विवेक भी 24 साल का हट्टा-कट्टा नौजवान है। दिखने में सुन्दर और लम्बे मोटे लंड का मालिक। काजल बहुत खुश थी विवेक से शादी करके। विवेक भी उसकी हर रात को रंगीन बनाने में कोई कसर नहीं छोड़ता था, खूब मस्त चुदाई करता था वो काजल की।
परिवार का एक और अहम सदस्य था विवेक की माँ सुनीता… उम्र 45 के आसपास पर बदन इतना मस्त कि अच्छी-अच्छी कुँवारी लड़कियाँ भी पानी भरती नजर आयें। कद पाँच फीट, चुचे ऐसे जैसे हिमाचल की पहाड़ियाँ। पतला सपाट पेट, मस्त उभरे हुए कूल्हे।
आप सोच रहे होंगे कि काजल की कहानी में मैं उसकी सास की तारीफ क्यों लिख रहा हूँ? तो बता दूँ कि इस कहानी की मुख्य पात्र विवेक की माँ और काजल की सास ही है।
कहानी की शुरुआत तब हुई जब एक दिन दोपहर में काजल ने अपनी सास के कमरे से सिसकारियों की आवाज सुनी। उसने दरवाजे में से झाँक कर देखा तो दंग रह गई। उसकी सास सुनीता सिर्फ पेटीकोट में पलंग पर लेटी थी और एक हाथ की दो उँगलियों से अपनी चूत को रगड़ रही थी वहीं दूसरे हाथ से अपनी कड़क चुचियों को मसल रही थी। शायद वो झड़ने वाली थी तभी उसके मुँह से सिसकारियाँ फूट रही थीं।
काजल का ध्यान सुनीता की चूत पर गया तो देखा कि सुनीता की चूत एकदम क्लीन शेव थी जैसे आज ही झांटें साफ़ की हों। पानी के कारण लाइट में चमक रही थी सुनीता की चूत। काजल को आशा नहीं थी कि उसकी सास इतनी कामुक होगी।
बहू काजल दरवाजे पर ही खड़ी रही और जब सास सुनीता झड़ कर शांत हो गई तो वो एकदम से दरवाजा खोल कर अंदर दाखिल हो गई। काजल को देख अस्तव्यस्त कपड़ों में पड़ी सुनीता एकदम से हड़बड़ा गई और उसने जल्दी से पास पड़ी साड़ी से अपने बदन को ढक लिया।
“अब क्या फायदा मम्मी जी… सब कुछ तो देख चुकी हूँ मैं!” काजल ने हँसते हुए माहौल को हल्का करने के मकसद से कहा।
सुनीता तो जैसे शर्म से मरी जा रही थी। काजल जाकर सुनीता के पास पलंग पर बैठ गई, “मम्मी जी, क्यों परेशान हो रहे हो… होता रहता है ये सब तो… ये सब तो प्राकृतिक है!”
सुनीता अभी भी चुपचाप बैठी थी जैसे चोरी करते पकड़ी गई हो। काजल ने सुनीता को सामान्य करने के इरादे से हाथ बढ़ा कर सुनीता की चूची को अपने हाथ में लेते हुए कहा, “क्या बात है मम्मी जी… आपकी चूची तो बहुत कड़क और मस्त हैं, देखो मेरी तो तुमसे छोटी भी है और इतनी मुलायम भी नहीं हैं।”
कहते हुए काजल ने सुनीता का हाथ पकड़ कर अपनी चूची पर रख दिया।
“क्यों शर्मिंदा कर रही हो बहू…” सुनीता के मुँह से पहली बार कोई शब्द निकले।
“अरे नहीं मम्मी जी… ये सब प्राकृतिक क्रिया है… होता है कभी-कभी ऐसा कि सेक्स हावी हो जाता है… जब विवेक कभी टूर पर जाते हैं तो मेरे साथ भी ऐसा होता है। तब मैं भी उंगली करके ही शान्त होती हूँ।”
जब बहुत कुछ कहने-करने पर भी सुनीता का मन नहीं बदला तो काजल ने ये कहते हुए बात खत्म की कि आज से हम दोनों सहेली हैं। जब भी आपको ऐसी कोई जरूरत महसूस हो तो मुझे बताना, मैं आपकी मदद कर दूँगी आपको शांत करने में और जब विवेक टूर पर होंगे तो आप मेरी सहायता कर देना।
कुछ दिन ऐसे ही बीते। काजल पूरी तरह से सास को खुश करने में लगी रहती पर सुनीता काजल के सामने शर्मा जाती और ज्यादातर चुप ही रहती।
फिर एक दिन विवेक को तीन दिन के लिए टूर पर जाना था, पीछे से सास-बहू घर पर अकेली थी। काजल ने सोच लिया था कि सुनीता को इन तीन दिनों में खोल देना है ताकि वो शर्मिंदा महसूस ना करें।
पहली ही रात को काजल ने सुनीता को अपने कमरे में सोने को कह दिया। सुनीता ने मना भी किया पर काजल नहीं मानी तो सुनीता को उसकी बात माननी ही पड़ी।
रात को काजल एक पतली सी नाईटि पहन कर सोने के लिए बेड पर आ गई पर सुनीता साड़ी पहने हुए थी तो काजल ने उसकी साड़ी को खींच कर अलग लिया और एकदम आराम से सोने को कहा।
कुछ देर इधर-उधर की बातें कीं और फिर काजल ने अचानक अपनी नाईटि उतार कर एक तरफ उछाल दी। काजल की इस हरकत से सुनीता स्तब्ध थी।
इससे पहले कि वो कुछ बोलती, काजल ने आगे बढ़ कर सुनीता के पेटीकोट का नाड़ा खींच दिया और फिर बिना देर किये सुनीता के ब्लाउज के हुक खोलने लगी। सुनीता ने रोकने की कोशिश की पर काजल उसको पूर्ण रूप से नंगी करने के बाद ही रुकी।
अब बेड पर दोनों सास-बहू जन्मजात नंगी बैठी थीं।
“अरे मम्मी जी… आप तो नई-नवेली दुल्हन की तरह शर्मा रही हैं… आगे बढ़ो और मजा करो।”
“काजल, तू बहुत बेशर्म है री… देख तो बेशर्म ने अपने साथ-साथ मुझे भी नंगी कर दिया!”
“मम्मी जी अभी तो सिर्फ नंगी किया है, आगे-आगे देखो क्या-क्या करती हूँ।”
“तू तो पूरी पागल है…” सुनीता शर्म से लाल हो गई थी। यह पहला मौका था जब वो अपने पति के अलावा किसी के सामने पूर्ण रूप से नग्न थी।
कपड़े उतारने के बाद काजल सुनीता से लिपट गई और सुनीता के खरबूजे के साइज़ के चुचों को मसलने लगी। सुनीता कसमसा रही थी पर सच यही था कि उसको भी इस सब से उत्तेजना होने लगी थी।
काजल ने किसी मर्द की तरह ही पहले तो उसके चुचों को कस-कस के मसला और फिर अपनी सासू माँ के तन चुके चूचुकों को मुँह में लेकर चूसना शुरू कर दिया।
जैसे ही काजल ने सुनीता के मम्मे चूसने शुरू किये, सुनीता तो जैसे जन्नत में पहुँच गई। सालों से सेक्स का मजा नहीं ले पाई थी सुनीता। जब भी ज्यादा बेचैन होती तो बस उंगली से चूत मसल कर पानी निकाल लेती। मूली, खीरा, बैंगन भी कभी प्रयोग नहीं किया था।
आज जब काजल ने ये सब किया तो सुनीता को बहुत मजा आने लगा था। काजल ऐसे ही सब कर रही थी जैसे विवेक उसके साथ करता था उसको गर्म करने के लिए।
चूची चूसते-चूसते काजल ने एक उंगली सुनीता की चूत में पेल दी। सुनीता की चूत पूरी गीली हो चुकी थी उत्तेजना के कारण। जब काजल की उंगली घुसी तो सुनीता मस्त हो उठी और उसके मुँह से आह्ह्ह… निकल गई।
सुनीता ने भी अब काजल के चुचों को अपनी हथेली में दबोच लिया और मसलने लगी थी।
काजल अब उसके चुचों को छोड़ नीचे की तरफ बढ़ने लगी थी। और फिर काजल ने सुनीता की चूत पर जब अपने होंठ रखे तो सुनीता का पूरा बदन गनगना उठा।
काजल ने जीभ निकाल कर अपनी सासू माँ को खुश करने के लिए पूरी लगन से सुनीता की चूत चाटना शुरू कर दिया। सुनीता के लिए ये सब एक नया अनुभव था।
काजल की थोड़ी सी मेहनत से ही सुनीता की चूत से पानी का दरिया बहने लगा। काजल के लिए भी ये अनुभव नया था क्योंकि आज तक उसने सिर्फ अपनी चूत चटवाई थी जबकि आज वो पहली बार किसी की चूत का मजा ले रही थी।
इसी सोच के कारण काजल भी उत्तेजित होने लगी थी। काजल अपनी सास की चूत चाटते हुए अपने चुचों को मसल रही थी। अब उसकी चूत में भी गुदगुदी होने लगी थी।
जब उससे बर्दाश्त नहीं हुआ तो उसने पलटी मारी और अपनी सासू माँ के ऊपर आकर 69 की पोजीशन बना अपनी चूत सुनीता के मुँह के ऊपर कर दी।
सुनीता भी समझ गई कि उसकी लाड़ली बहू क्या चाहती है और उसने भी काजल की चूत में अपनी जीभ घुसा दी।
करीब एक घंटा सास-बहू एक-दूसरे से लिपट कर मजा लेती रहीं और फिर दोनों पस्त होकर लेट गईं।
“काजल… आज सालों बाद मेरा इतना पानी निकला है… चार बार झड़ी आज मेरी चूत…” सुनीता ने लम्बी-लम्बी साँस लेते हुए काजल से कहा।
“माँ जी… सच बताना, आखिरी बार चूत में लंड कब लिया था आपने?”
“बहुत साल हो गये अब तो याद भी नहीं…”
“फिर भी बताओ ना?”
सुनीता ने अपनी कहानी काजल को सुनानी शुरू की। जब मैं कॉलेज में पढ़ती थी तब विवेक के पापा से मेरी शादी हुई, वो तब नए-नए फौज में भर्ती हुए थे, 19-20 के ही थे वो भी… दोनों ही नादान, सुहागरात को ना उन्हें कुछ पता था ना मुझे। पहली रात तो बस ऐसे ही बीत गई।
अगले दिन उनके दोस्तों ने उनको बताया कि क्या-कैसे करना है तब जाकर दूसरी रात को इन्होंने मेरी कमसिन सी चूत की शुरुआत की। मेरी चूत और उनका लंड सारी रात दोनों अन्दर डाल कर पड़े रहे। सुबह देखा तो पूरा बिस्तर खून से सना पड़ा था।
लगभग 20 दिन रहे हम साथ-साथ, रोज तीन-चार बार चुदाई करते। फिर उनकी छुट्टियाँ खत्म हो गईं और वो अपनी ड्यूटी पर चले गये। बहुत याद आती थी उनकी! मेरी ससुराल में भरा-पूरा परिवार था। मेरी सास इतनी कड़क कि उनकी नजर से ही डर लगता था मुझे। कभी इधर-उधर नजर उठाने की हिम्मत भी नहीं हुई।
दोनों तड़पते रहे। फिर धीरे-धीरे आदत सी हो गई। वो छुट्टियों में आते और हम दोनों पूरा समय बस एक-दूसरे में ही खोये रहते, पूरी-पूरी रात हम चुदाई का मजा लेते, एक-एक पल का आनन्द लेते।
फिर मैं पेट से हो गई, वो अपनी ड्यूटी पर थे जब मुझे अपनी कोख में पल रहे बच्चे का पता चला। जब विवेक पैदा हुआ तो वो आये। फिर उनकी ड्यूटी दूर बंगाल बॉर्डर पर हो गई और वो एक साल तक नहीं आये। मैं भी विवेक के साथ व्यस्त रहने लगी।
तीन साल तक वो जब भी आये तो हमारा मिलना सिर्फ रात को ही होता। दिन में तो बात भी नहीं होती। जब उनकी ड्यूटी पठानकोट हुई तब हम दो साल साथ में फैमिली क्वार्टर में रहे।
जिंदगी ऐसे ही चल रही थी, फिर तेरह साल पहले एक एक्सीडेंट में उनकी मौत हो गई, तब से अब तक अकेले ही जिंदगी काट रही हूँ।
“माँ जी… बुरा मत मानना… पर क्या इन तेरह साल में कभी आपका मन नहीं हुआ किसी से सेक्स करने का?”
“नहीं… विवेक की परवरिश ही मेरा मकसद बन गया था तो इधर-उधर कभी ध्यान ही नहीं गया।”
“मतलब आप इतने दिनों से उंगली से ही काम चला रही थीं?” काजल ने सवाल किया।
“बताया ना कि कभी मन नहीं हुआ…”
“फिर उस दिन इतनी गर्म कैसे हो गईं आप…”
“वो… वो… रहने दे ना बहू… तू भी क्या बात लेकर बैठ गई।”
“बताओ ना प्लीज…” काजल के बार-बार कहने पर सुनीता ने बताना शुरू किया: अब तू मेरी बहू के साथ-साथ मेरी सहेली भी बन गई है तो तुझसे कुछ नहीं छुपाऊँगी… असल में उससे एक रात पहले जब मैं पेशाब करने के लिए उठी तो तू और विवेक चुदाई का मजा ले रहे थे।
तुम्हारे कमरे से सिसकारियाँ, आहें… और तुम्हारी पायल की छम-छम की आवाज आ रही थी। मैं समझ गई थी कि मेरा बेटा विवेक मेरी बहू यानी तुम्हारी चुदाई कर रहा है।
तुम्हारे कमरे का दरवाजा भी थोड़ा सा खुला हुआ था। मैंने अपने आप को बहुत रोका पर फिर भी मैं अपने आप को रोक नहीं पाई तुम्हारे कमरे में झाँकने से।
अन्दर का नजारा देखा तो मेरा तो सारा बदन सिहर उठा। विवेक अपने मोटे से लंड से तुम्हारी चूत बजा रहा था। मैं देखते ही एकदम से अपने कमरे की तरफ चली गई पर मेरा दिल बेचैन हो गया था।
बहुत कोशिश की पर मन नहीं माना और मैं फिर से तुम्हारे कमरे के पास पहुँच गई और पूरे 20 मिनट तक मैंने अपने बेटा-बहू की चुदाई का कार्यक्रम देखा। चूत पानी-पानी हो गई थी मेरी।
सारा दिन मेरे दिमाग में तुम दोनों की चुदाई का सीन ही चलता रहा। जब कंट्रोल नहीं हुआ तो उंगली से अपने आप को शांत करने की कोशिश कर रही थी कि तभी तू आ गई और मेरी चोरी पकड़ी गई।
“ओह्ह तो ये बात है…”
“बहू, प्लीज किसी के सामने ये बात मत करना!”
“मैं समझ सकती हूँ माँ जी… ये भी तो शरीर की जरूरत है… जब मैं दो दिन भी विवेक से चुदे बिना नहीं रह सकती तो आपने तो फिर भी तेरह साल काटे हैं चुदाई के बिना… पर अब आप चिन्ता मत करो, आप के बदन की यह जरूरत मैं पूरी कर दिया करूँगी।”
कह कर काजल सुनीता से लिपट गई और कुछ देर के लिए फिर से दोनों बदन से बदन रगड़ कर चूत से पानी निकालने लगीं।
कहते हैं ना सेक्स की आग में जब मस्ती का तड़का लगता है तो ये बहुत ज्यादा भड़कने लगती है।
लगभग एक महीना हो गया था दोनों सास-बहू को… जब भी मन करता और समय मिलता दोनों कपड़े उतार कर बेड पर आ जातीं मस्ती करने।
फिर एक दिन… “काजल मेरी जान… तूने मेरी आदत बिगाड़ के रख दी है… सेक्स की जो आग पिछले तेरह सालों से दबी हुई थी तूने उसको सुलगा दिया है।”
“तो क्या हुआ माँ जी… जब तक जिंदगी है, मजे लो!”
“पर काजल अब दिक्कत कुछ बढ़ती जा रही है।”
“मतलब?”
“मतलब यह कि… कभी-कभी जब सेक्स हावी हो जाता है तो फिर कंट्रोल नहीं होता।”
“तो क्या हुआ माँ जी… आपकी बहू है ना आपको मजे देने के लिए!”
“बात वो नहीं है काजल…” सुनीता कुछ बेचैन सी होकर बोली।
“तो क्या बात है माँ जी… खुल कर बोलो… वैसे भी अब हम सास-बहू से ज्यादा सहेलियाँ हैं!”
“अब कैसे बताऊँ…”
“अरे बिंदास बोलो ना माँ जी…”
“काजल… जब से तूने मुझे ये लत लगाई है… मेरा दिल बेचैन रहने लगा है। अब रात को जब भी आँख खुलती है तो ध्यान तुम्हारे कमरे की तरफ ही जाता है। फिर ये सोच-सोच कर चूत सुलगने लगती है कि तू तो विवेक के मोटे लंड से मजे ले रही होगी और मैं अकेली पड़ी अपनी चूत को उंगली से मसल रही होती हूँ।”
“ओह्ह… तो ये बात है… मतलब आप का भी मन करने लगा है अब लंड से मजे लेने का?”
“हट पागल… अब इस उम्र में लंड लेकर मैं क्या करूँगी।”
“मन करता है तो बताओ ना?”
“कुछ नहीं… छोड़ इस बात को!” सुनीता ये बोल कर अपने कमरे में चली गई।
काजल को अपनी सास की बातों से यह तो महसूस हो गया था कि सुनीता के मन में लंड लेने की चाहत है। पर दिक्कत यह थी कि वो अपनी सास को खुश रखने के लिए किसका लंड दिलवाए अपनी प्यारी सासू माँ को।
दिन बीतते जा रहे थे और अब सुनीता कुछ ज्यादा बेचैन रहने लगी थी। यह बात काजल महसूस कर रही थी। काजल ने सुनीता से कई बार इस बारे में बात भी की पर सुनीता हर बार टाल जाती।
एक दिन सुनीता ने काजल से जो बोला वो सुन एक बार के लिए तो काजल अचम्भित हो गई।
“काजल वैसे तो मुझे ये बात नहीं कहनी चाहिए पर अगर तुम्हें बुरा ना लगे तो एक बात बोलूँ?”
“बोलो ना माँ जी… पूछना कैसा?”
“काजल मुझे कहते हुए शर्म महसूस हो रही है कैसे बोलूँ!”
“आप मेरी सहेली भी हो और सहेली से कोई बात कहने में कैसी शर्म?”
“काजल… वो…”
“अरे बोलो ना?”
“काजल… मैं चाहती हूँ कि तुम कोई ऐसा इंतजाम करो कि मैं तेरी और विवेक की चुदाई देख सकूँ!”
“माँ जी… आपने देखी तो है पहले भी?”
“अरे तब तो डर के मारे अच्छे से देख ही नहीं पाई थी… बस अब कुछ ऐसा कर कि शुरू से आखिर तक देखने का मौका मिले।”
“कोई नहीं… मैं करती हूँ कुछ इंतजाम!”
“तू बहुत अच्छी है काजल… बहुत ख्याल रखती है मेरा!”
“एक बात तो बताओ सासू माँ… आपके मन में कैसे ख्याल आया हमारी चुदाई देखने का?” काजल ने पूछा।
“अब क्या बताऊँ… तू दिन में मेरे साथ मजा करने के बाद रात को विवेक के लंड का मजा लेती है तो कभी-कभी तुम्हारे कमरे से मस्ती भरी सिसकारियाँ सुन मेरी चूत में भी आग सी लग जाती है… बहुत कोशिश करती हूँ अपने आप को रोकने की पर कंट्रोल नहीं होता और सारी-सारी रात करवटें बदल-बदल कर कटती है। उंगली से भी शान्त करने की कोशिश करती हूँ पर आग नहीं बुझती। बस मन करता है तुम दोनों को चुदाई का मजा लेते हुए देखूँ और अपनी चूत में उंगली करूँ शायद कुछ शांति मिले!”
“ओह्ह्ह… ऐसी बात है… कोई ना मम्मी जी मैं कुछ इंतजाम करती हूँ… पर एक बात तो है…” काजल कुछ कहते-कहते रुक गई।
“अरे बोल ना क्या बात है?” सुनीता ने उत्सुकता से पूछा।
“मम्मी जी… एक बात बताओ कि अगर मेरी और विवेक की चुदाई देख कर आपका मन भी चुदने को करने लगा तो फिर क्या करोगी?”
यह सुन सुनीता चुप हो गई, इस बात का उसके पास कोई जवाब नहीं था।
चुप्पी काजल ने ही तोड़ी, “मम्मी जी… मुझे लगता है कि आपको भी अपनी चूत की आग को ठंडा करने के लिए लंड की जरूरत है।”
“हट पगली… तू फिर शुरू हो गई… अब मेरी उम्र थोड़े ही है लंड लेने की…” सुनीता ने शर्माते हुए कहा।
“माँ जी… लंड लेने के लिए उम्र कोई मायने नहीं रखती… मैंने तो 80-80 साल की बुढ़िया का भी सुना है कि वो लंड लेती हैं। अगर आपको झूठ लग रहा हो तो नेट पर देख लो… जब तक चूत में आग है तब तक लंड लेने की लालसा औरत में रहती ही है। और एक बात लंड लेने से बूढ़ी भी जवान हो जाती है… उम्र रुक सी जाती है।”
“बस कर बहू… अब क्या मुझे चुदवा कर ही मानोगी… पहले ही चूत चाट-चाट के मेरी दबी हुई आग को सुलगा चुकी हो तुम!”
“माँ जी आप इशारा तो करो… कोई ना कोई लंड भी खोज ही लेंगे आपके लिए!” काजल ने हँसते हुए कहा।
“बहू… जब भरी जवानी में विवेक के पापा अकेले छोड़ के ड्यूटी पर जाते थे तब कोई लंड नहीं खोजा तो अब बुढ़ापे में खोज के क्या नर्क में जाना है?”
“वो तो ठीक है माँ जी… पर अगर चूत में आग लगी है तो उसको तो ठंडा करना ही पड़ेगा ना… नहीं तो बहुत खराब करती है ये आग!”
“बस कर… जैसे पिछले कुछ दिनों से तुम मेरी आग ठंडी कर रही हो बस वैसे ही करती रह… अब लंड लेने की ना तो उम्र है और ना ही कोई चाहत!”
बात करते-करते ही दोनों सास-बहू बेड पर जल्दी ही नंगी हो गईं और फिर शुरू हो गया एक-दूसरे की चूत से पानी निकालने का मुकाबला।
शांत होने के बाद काजल बोली, “आप चिन्ता ना करो, आजकल में ही मैं आपको मेरी और विवेक की चुदाई का लाइव टेलीकास्ट दिखाती हूँ और फिर जल्दी ही आपकी चूत के लिए भी एक मोटे लम्बे लंड का इंतजाम करती हूँ।”
“मुझे नहीं चाहिए किसी का लंड… इस उम्र में बदनाम करवाएगी क्या कमीनी…”
“चिन्ता ना करो माँ जी… बदनामी नहीं होने दूँगी आपकी… आपके लिए ऐसा लंड देखूँगी जिसमें बदनामी का कोई डर ना हो…” कह कर काजल उठ कर अपने कमरे में चली गई।
सुनीता अभी भी बेड पर नंगी पड़ी अपने चुचे मसलते हुए सोच रही थी कि क्या उसकी बहू सच में उसके लिए लंड का इंतजाम करेगी? और अगर करेगी तो किसका? ऐसा कौन है जिससे चुदवाने पर उसकी बदनामी का खतरा कम है? यही सोचते-सोचते उसकी आँख लग गई।
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शाम को सात बजे उसकी आँख खुली तो अपने आप को बेड पर नंगी पड़े देख वो शरमा गई और जल्दी से उठ कर उसने अपने कपड़े पहने और बाहर आई। विवेक ड्यूटी से आ चुका था।
सुनीता का दिमाग एक बार फिर ये सोच कर धक् रह गया कि अगर विवेक उसके कमरे में आ जाता और अपनी माँ ऐसे नंगी पड़े देख लेता तो वो उसके बारे में क्या सोचता! पर बाहर सब कुछ सामान्य था।
ऐसे ही दो-तीन दिन बीते। फिर एक सुबह काजल ने सुनीता को बताया कि आज रात को तैयार रहना मेरी और विवेक की चुदाई देखने के लिए।
सुनते ही सुनीता की दिल की धड़कनों ने शताब्दी एक्सप्रेस की स्पीड पकड़ ली। वो शरमा भी रही थी और मन भी कर रहा था वो चुदाई का नजारा देखने का।
सुनीता के लिए तो शाम तक का समय काटना पहाड़ जैसा हो गया था। शर्म के मारे कुछ कह नहीं रही थी पर नजर घड़ी पर ही थी कि कब रात होगी और कब वो लाइव चुदाई देखेगी। चुदाई भी किसकी… अपनी बहू और बेटे की।
शाम हुई, विवेक घर आ गया, सबने खाना पीना किया, सोने की तैयारी होने लगी। साथ ही-साथ सुनीता की बेचैनी और दिल की धड़कनें भी बढ़ने लगीं।
विवेक अपने कमरे में जाकर टीवी देखने लगा। तभी काजल सुनीता के कमरे में आई और उसको अपने साथ चलने को कहा। सुनीता बिना कुछ बोले उसके साथ चल दी।
काजल के कमरे के दरवाजे पर जाकर काजल ने सुनीता को रुकने को कहा और बोली कि जब मैं बोलूँ तब अन्दर आ जाना।
सुनीता दरवाजे पर खड़ी काजल के बुलावे का इंतजार करने लगी, एक-एक पल भारी हो रहा था, अजीब सा डर भी था कि कहीं विवेक को पता लग गया तो क्या होगा। चुदाई देखने की ललक उसकी चूत से पानी के रूप में टपक रही थी जो उसे वही खड़े रहने को मजबूर कर रही थी।
दस मिनट बाद काजल के कमरे की लाइट बंद हो गई। उसने सोचा कि अब तो लाइट भी बंद हो गई शायद काजल का प्लान फेल हो गया है, वो मुड़कर वापिस अपने कमरे की तरफ जाने लगी।
तभी काजल कमरे से बाहर आई और सुनीता का हाथ पकड़ कर कमरे में ले गई। कमरे में नाइट बल्ब जग रहा था, विवेक भी बेड पर नहीं था।
काजल ने दबी आवाज में बताया कि विवेक बाथरूम में है। उसने सुनीता को चुपके से एक परदे के पीछे छुपा दिया। काजल ने परदे के पीछे एक कुर्सी रख कर सुनीता के बैठने की व्यवस्था भी कर रखी थी।
सुनीता अपनी बहू के प्यार और समझदारी पर गदगद हो गई थी। सुनीता ने काजल को लाइट जला कर सब करने को कहा।
तभी बाथरूम के दरवाजे पर हलचल हुई तो काजल पर्दा ठीक करके वापिस बेड पर जाकर बैठ गई।
विवेक बाथरूम से सिर्फ अंडरवियर में बाहर आया, आते ही वो भी बेड पर काजल के पास बैठ गया।
काजल जो अपनी सासू माँ को गर्मागर्म लाइव चुदाई दिखाने को लालायित थी वो खुद ही विवेक से लिपट गई और अपने होंठ विवेक के होंठों से जोड़ दिए।
“क्या बात है मेरी जान… आज तो मेरे कुछ करने से पहले ही गर्म हो रही हो?”
“बात मत करो… बस शुरू हो जाओ… आग लगी पड़ी है नीचे चूत में…”
“ओके मेरी जान… तुम्हें तो पता ही है कि मैं तो खुद तेरी चूत का हरदम प्यासा रहता हूँ।”
फिर आगे काजल ने विवेक को कुछ बोलने नहीं दिया और एक बार फिर अपने होंठ विवेक के होंठों से मिला दिए।
उधर सुनीता की चूत भी कार्यक्रम के शुरू में ही गीली हो गई थी। मात्र चार फीट की दूरी से वो आज अपने बेटे-बहू की लाइव चुदाई देखने वाली थी।
उधर विवेक ने काजल के बदन से उसकी नाईटि उतार कर साइड में फेंक दी। काजल नाईटि के नीचे बिल्कुल नंगी थी। उत्तेजना उसे भी हो रही थी ये सोच कर कि आज उसकी चुदाई देखने वाला कमरे में मौजूद है।
काजल को नंगी करते ही विवेक उसकी चुची का मर्दन करने लगा और फिर एक चूची को मुँह में लेकर चूसने भी लगा। काजल के मुँह से सिसकारियाँ फूटने लगीं थीं, आह्ह… इह्ह… ओह्ह…।
सुनीता का हाथ भी अपनी साड़ी में घुस कर चूत को सहलाने लगा था।
काजल का हाथ अब विवेक के अंडरवियर में घुस कर उसके लंड से खेल रहा था। सुनीता बड़े ध्यान से विवेक के लंड के अंडरवियर से बाहर आने का इंतजार कर रही थी।
पहले जब उसने छुप कर काजल और विवेक की चुदाई देखी थी तब उसे सिर्फ विवेक के लंड की एक झलक मात्र देखने को मिली थी पर आज वो विवेक के लंड को मात्र चार फीट की दूरी से चमकती लाइट में देखने वाली थी।
ना जाने क्यों उसका मन कर रहा था कि काजल अब जल्दी से विवेक का लंड बाहर निकाले और आगे की कार्यवाही शुरू करे।
तभी जैसे काजल को सुनीता के मन की आवाज सुनाई दे गई और उसने एक झटके के साथ विवेक का आठ इंच लम्बा और लगभग तीन इंच मोटा लंड बाहर निकाल लिया।
विवेक का लंड काजल के हाथ के स्पर्श से लगभग तन चुका था। विवेक ने अपना अंडरवियर खुद उतार आकर अपनी टांगों से अलग किया और वो भी नंगा हो गया।
सुनीता की नजर जैसे ही विवेक के लंड पर पड़ी तो उसकी चूत में पानी उतर आया। बहुत सालों बाद इतनी नजदीक से किसी मर्द का लंड देखा था। क्या मस्त मोटा और कड़क लंड था विवेक का।
एक बारगी तो सुनीता का मन करने लगा कि वो अभी उठ कर जाए और काजल को साइड में कर विवेक के लंड का अहसास करे।
विवेक ने आगे बढ़ कर लंड का सुपारा काजल के होंठों से लगा दिया तो काजल ने भी झट से मुँह खोल कर लंड मुँह में भर लिया और मस्त होकर चूसने लगी, ग्ग्ग्ग… गी… गों… गोग…।
विवेक अपने लंड पर काजल के होंठ और जीभ के स्पर्श से आनन्दित हो उठा और उसके मुँह से मस्ती भरी आहें निकलने लगीं थीं।
विवेक का एक हाथ काजल की मस्त चूची का मर्दन कर रहा था तो दूसरा काजल की जाँघों के बीच चूत के दाने को सहलाने में व्यस्त था।
दूसरी तरफ सुनीता भी अपने पेटीकोट को पूरा ऊपर उठा कर अपनी चूत के दाने को अपने हाथों से सहला रही थी। चूत पानी-पानी हो रही थी सुनीता की… बिना कुछ करे ही वो मस्त हो गई थी।
चूत में कीड़े कुलबुला रहे थे और मस्ती की खुमारी चढ़ती जा रही थी। सच कहें तो सुनीता से अब कंट्रोल करना मुश्किल हो रहा था।
उधर बेड पर अब विवेक और काजल 69 की पोजीशन में आकर मजे कर रहे थे। विवेक की जीभ काजल की चूत की गहराई नाप रही थी तो काजल भी विवेक के लम्बे मोटे लंड को लॉलीपॉप बनाये हुए चाट और चूस रही थी।
दोनों मस्त मग्न थे, चपचप की आवाज के बीच कभी-कभी दोनों में से किसी की आह या सिसकारने की आवाज आती, आह… इह्ह… ओह्ह…।
दस मिनट की चूसा-चुसाई के बाद दोनों का पानी छूट गया। काजल ने विवेक का लंड मुँह से निकाल कर फेंटना शुरू कर दिया तो अगले कुछ मिनट में ही विवेक का लंड काजल की चूत की गहराई नापने को तैयार हो गया।
विवेक ने बेड से नीचे खड़े होकर काजल की दोनों टाँगें अपने कंधों पर रखीं और लंड को चूत पर सेट करके एक जोरदार धक्के के साथ लगभग पूरा लंड काजल की चूत में उतार दिया।
जोरदार प्रहार से काजल कराह उठी और उसके सिसकारने की आवाजें कमरे में गूँजने लगीं, आह्ह्ह… ह्ह्ह… इह्ह… ऊईईई…।
विवेक ने भी लंड अन्दर-बाहर करना शुरू कर दिया। हर धक्के के साथ काजल आह-आह, आईई ऊईईई कर रही थी।
तभी जैसे काजल को अपनी सासू माँ की याद आई और उसने सुनीता को और उत्तेजित करने के उद्देश्य से काजल ने अपनी सिसकारियों की आवाज बढ़ा दी, “आह… जोर-जोर से चोद मेरे राजा… फाड़ दाल मेरी चूत अपने मोटे लंड से… उम्म्ह… अहह… हाय… याह… क्या कड़क लंड है मेरे मर्द का… चूत की नस-नस में करंट भर देता है जालिम… चोद… चोद… जोर-जोर से चोद मेरी जान!”
विवेक एक बारगी तो काजल के इस रूप को देख कर दंग रह गया क्योंकि आज से पहले कभी काजल ने ऐसा नहीं किया था उल्टे वो तो विवेक को कम आवाजें करने को बोलती थी कि ‘धीरे बोलो या धीरे करो… साथ वाले कमरे में मम्मी जी सो रही हैं…’ पर आज वो खुद ऐसे आवाजें निकाल रही थीं कि साथ वाले कमरे में मम्मी जी तो क्या पड़ोसी भी सुन लें, समझ लें कि काजल चुद रही है।
जो भी था काजल की इस हरकत ने विवेक को और ज्यादा उत्तेजित कर दिया था और वो अब पहले से भी ज्यादा जोश के साथ काजल की चूत में लंड पेल रहा था, “ले मेरी रानी… ले पूरा का पूरा लंड ले… आज तो तेरी चूत में अलग ही बात है… आग बरसा रही है साली… ले चुद मेरे मोटे लंड से…”
विवेक भी अब काजल के रंग में रंगने लगा था। काजल भी तो ये ही चाहती थी।
दूसरी तरफ सुनीता का हाल बेहाल हो पड़ा था। तीन-तीन उंगलियाँ चूत में पेल रही थी, चूत पानी-पानी हो रही थी पर चूत में जो आग लगी थी वो जैसे कह रही थी कि ‘अब उंगली से काम नहीं बनेगा, मेरी जान अब तो मेरे लिए लंड का इंतजाम कर ही दे तो शांति मिले।’
अब सुनीता का ध्यान काजल-विवेक की चुदाई से ज्यादा अपनी चूत को ठंडी करने पर था।
उधर विवेक ने काजल को अब घोड़ी बना लिया था और लंड पीछे से काजल की चूत में उतार दिया था और सुपरफास्ट गति से लंड को अंदर-बाहर करते हुए काजल की चूत बजा रहा था।
विवेक के टट्टे काजल की गांड पर थप-थप की मधुर आवाज कर रहे थे। हर धक्के के साथ विवेक की मस्ती भरी आहें और काजल की दर्द और मस्ती से भरी सिसकारियाँ कमरे के मौसम को और ज्यादा रंगीन बना रही थीं, आह्ह… ह्हीईई… आअह्ह्ह्ह…।
करीब बीस मिनट की मस्त चुदाई के बाद विवेक ने अपने लंड का लावा काजल की चूत में उगल दिया। वो और काजल दोनों हैरान थे क्योंकि आज चुदाई और दिनों के मुकाबले थोड़ा ज्यादा लम्बी चली थी।
आमतौर पर विवेक काजल को दस-बारह मिनट तक ही चोदता था पर आज तो लगभग बीस मिनट तक उसने काजल की चुदाई की थी। काजल भी पहले दो या तीन बार ही झड़ती थी पर आज तो जैसे उसकी चूत से दरिया बह निकला था। आज वो पाँच बार झड़ी थी और अब निढाल सी बेड पर पड़ी अपनी साँसों को नियंत्रित कर रही थी।
विवेक भी उसके साइड में लेटा हुआ लम्बी-लम्बी साँसें ले रहा था।
सुनीता भी अब झड़-झड़ के थक सी गई थी। बहुत पानी निकला था आज उसकी चूत से!
तभी जैसे काजल को सुनीता का ख्याल आया। सुनीता को कमरे से निकाल कर दूसरे कमरे में भेजने के लिए विवेक को साइड करना जरूरी था।
“विवेक आज तो तुमने कमाल ही कर दिया… मेरा तो मन है कि आज एक बार और ऐसी ही मस्त वाली पारी खेली जाए…”
“आज क्या खा के आई है मेरी जान… जो चूत में इतनी गर्मी हो रही है कि बीस मिनट की चुदाई के बाद भी मैडम को दुबारा चुदाई करवानी है?”
“पता नहीं पर आज तो मन कर रहा है कि जैसे सारी रात चुदवाती रहूँ… तुम बाथरूम से फ्रेश होकर आओ जल्दी से… फिर सोचते हैं दूसरी पारी के बारे में…”
विवेक उठ कर बाथरूम में चला गया। विवेक के जाते ही काजल सुनीता के पास गई और उसको बाहर जाने का इशारा किया।
सुनीता की हालत खराब थी, काजल ने उसको उठाया और उसको दरवाजे तक छोड़ कर वापिस अपने बेड पर आकर लेट गई।
सुनीता लगभग लड़खड़ाते हुए कदमों से अपने कमरे में पहुँची और धम से बेड पर लेट गई। लेटते ही सुनीता जैसे नींद के आगोश में समा गई। उसमें अब हिलने की भी ताकत नहीं बची थी। उंगली कर-कर के चूत का सारा रस तो निचोड़ चुकी थी वो।
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