मौसी के चक्कर में चुदी माँ की गांड : Antarvasana Hindi Sex Stories
- Kamvasna
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ये एक हॉट देसी स्टोरी है, मेरी अपनी ज़िंदगी की सच्ची कहानी, जिसे मैं हमेशा छुपाना चाहता था, लेकिन अब लगता है इसे बयां करने का वक्त आ गया है। ये उस सर्दियों की बात है जब मैं, मेरी माँ रोहिणी और मेरी मौसी वर्षा मनाली घूमने गए थे। मैं तब 21 साल का था, जवानी का जोश सिर चढ़कर बोलता था। माँ की उम्र 42 थी, लेकिन लगती बिल्कुल 32 जैसी थीं। उनका फिगर ऐसा था कि हर कोई मुड़-मुड़कर देखता। गोरा रंग, चमकती त्वचा, भारी-भरकम गोल स्तन और पीछे का वो उभार जो साड़ी में और भी निखरकर सामने आता। मौसी वर्षा 38 की थीं, शादीशुदा थीं लेकिन मामा जी से उनकी नहीं बनती थी। वो अक्सर हमारे घर आकर अपना दुखड़ा रोती रहती थीं। वैसे भी हमारा परिवार थोड़ा खुले विचारों वाला था, जहाँ देह और उसकी भूख को लेकर ज्यादा परदे नहीं थे, कम से कम बातों में तो नहीं। माँ और मौसी आपस में हर बात शेयर करती थीं, यहाँ तक कि अपने सुहागरात के किस्से भी। मुझे अक्सर उनकी बातें सुनने को मिल जाती थीं, जिससे मेरे मन में एक अजीब सी हलचल मच जाती।
मनाली का वो ट्रिप हमारी ज़िंदगी का सबसे यादगार और चौंकाने वाला अनुभव बनने वाला था। बर्फ से ढकी पहाड़ियाँ, ठंडी हवाएँ और हम तीनों एक छोटे से होटल के कमरे में। होटल का कमरा बहुत खूबसूरत था, लकड़ी की बनी झोपड़ी जैसा, जिसमें एक बड़ा सा हीटर जल रहा था। बाहर बर्फ गिर रही थी और अंदर का माहौल गर्म और सुस्ताने वाला था। कमरे में एक बड़ा डबल बेड था और एक सोफा कम बेड। ये तय हुआ कि माँ और मौसी बिस्तर पर सोएंगी और मैं सोफे पर। लेकिन मनाली की उस जादुई रात में किस्मत को कुछ और ही मंजूर था। उस शाम हमने साथ बैठकर व्हिस्की पी, जो माँ ने अपने साथ पैक करवाई थी। माँ और मौसी दोनों ही ड्रिंक करना पसंद करती थीं और मैं भी नया-नया शौकीन बना था। शराब के घूंट के साथ-साथ बातें भी पुरानी यादों के दौर में पहुँच गईं।
मौसी वर्षा जोर-जोर से हँसते हुए माँ को चिढ़ा रही थीं, |रोहिणी, तू तो बता, तेरा पहला एक्सपीरियंस कैसा था? हमारे घरवालों ने तुझे तो बहुत छोटी उम्र में ब्याह दिया था। 19 साल की थी ना तू?| माँ ने लाज से लाल होकर कहा, |वर्षा, बच्चे के सामने ये सब बातें मत कर।| लेकिन मैंने झट से कहा, |नहीं मम्मी, मैं तो बड़ा हो गया हूँ। आप लोग बातें करो ना, मुझे बुरा नहीं लगता।| मौसी ने आँख मारकर कहा, |देख, तेरा बेटा भी तुझसे ज्यादा समझदार है। सुनाओ अब।| माँ ने एक बड़ा घूंट लिया और बोली, |छोड़ ना, उस ज़माने में कुछ खास मज़ा नहीं आया था। बस डर और दर्द ही याद है। उस जानवर ने तो जैसे मुझे फाड़ ही दिया था। बस जल्दी-जल्दी अपनी भूख मिटाई और सो गया। तेरा जीजा तो बाद में सुधर गया, लेकिन पहली रात तो नर्क जैसी थी।|
मौसी हँसते-हँसते लोटपोट हो गई, |अरे पगली, तू तो ऐसे बोल रही है जैसे बलात्कार हो गया हो। मेरे साथ तो ठीक-ठाक रहा। तेरे जीजा तो बहुत कोमल थे। लेकिन सुन, मैंने सुना है आजकल तो लोग पीछे के रास्ते से भी बहुत मज़ा लेते हैं। तूने कभी ट्राई किया?| मेरी साँसें थम गईं। मुझे विश्वास नहीं हो रहा था कि मेरी मौसी मेरे सामने ही माँ से ऐसी बातें पूछ रही हैं। मेरे लंड में हरकत होने लगी और पाजामे में तंबू तन गया। मैंने चुपचाप कंबल ओढ़ लिया ताकि मेरी हालत पर पर्दा पड़ जाए। माँ ने मौसी को चुप कराने की कोशिश की, |पगला गई है क्या? ये कैसी बातें कर रही है? बच्चे के सामने कोई शर्म है कि नहीं?| लेकिन शराब का नशा हर शर्म और लिहाज को धो चुका था। मौसी ने फिर वही सवाल दोहराया। माँ ने अंततः हार मानकर इशारों में बताया कि हाँ, एक बार कोशिश की थी लेकिन दर्द से चीख पड़ी थीं, फिर कभी हिम्मत नहीं की।
मौसी वर्षा जोर से हँसते हुए बोलीं, |अरे, तू तो गुदा चुदाई के बारे में कुछ जानती ही नहीं। ये तो बहुत मज़ेदार चीज़ है बशर्ते ठीक से की जाए। इसमें तो वो आनंद है जो सामने से कभी नहीं।| मैं तो ये बातें सुनकर अंदर ही अंदर उत्तेजित हुआ जा रहा था। मेरा लंड अब पूरी तरह सख्त होकर कंबल से रगड़ खा रहा था। मैंने हिम्मत करके कहा, |मौसी, फिर तो आपको इस बारे में बहुत पता है?| मौसी ने मेरी तरफ देखा, उनकी आँखें शराब और कुछ और भाव से चमक रही थीं। वो बोलीं, |हाँ बेटा, बहुत पता है। तेरी माँ तो बहुत सीधी-सादी है, इसे तो मैं हमेशा से सिखाती आ रही हूँ। आज तुझे भी शायद कुछ नया देखने को मिल जाए।| ये सुनकर मेरे रोंगटे खड़े हो गए। माँ ने मौसी को डाँटते हुए कहा, |वर्षा, हद हो गई। अब चुप हो जा वरना मैं गुस्सा करूंगी।| लेकिन माँ की आवाज़ में वो सख्ती नहीं थी जो गुस्से में होती है। बल्कि एक अजीब सी काँप थी, जो मैंने पहले कभी महसूस नहीं की थी। रात बढ़ती गई और बोतल खत्म होती गई। हम तीनों ही अपने-अपने ख्यालों में खोए हुए थे। माहौल में एक अजीब सी बेचैनी और प्रत्याशा घुली हुई थी।
मैंने देखा माँ अपने आप को बार-बार सहला रही थीं, गर्दन पर हाथ फेर रही थीं, बालों को झटक रही थीं। उनका बदन गर्मी मांग रहा था, ये साफ नज़र आ रहा था। मौसी ने एक और पैग बनाया और माँ के हाथ में थमा दिया। उन्होंने कहा, |रोहिणी, ज़िंदगी में एक बार पूरी औरत बन कर देख। अपने आप को एक्सप्लोर कर। आज मौका है, मनाली की खूबसूरत रात है, तेरा बेटा है, मैं हूँ। कोई बाहरी दखल नहीं। बस अपनी मर्जी से जी ले।| माँ ने बिना कुछ बोले एक साथ पूरा पैग गटक लिया। उनकी हिम्मत बँधती दिख रही थी। उनकी आँखें मेरी तरफ उठीं और एक पल के लिए हमारी आँखें चार हुईं। मैंने उनकी आँखों में अपने लिए एक अलग ही भाव देखा, जो एक बेटे के लिए नहीं होना चाहिए था। वो भूख थी, वासना थी, एक ऐसी औरत की चाहत जो बरसों से अधूरी थी।
अचानक मौसी उठीं और लाइटें डिम कर दीं। उन्होंने कमरे में बस एक हल्की सी लैंप जलने दी। माहौल एकदम अंतरंग और रहस्यमयी हो गया। वो माँ के पास आईं और उनके कंधों पर हाथ रखकर धीरे-धीरे मसाज करने लगीं। माँ ने आँखें बंद कर लीं और एक लंबी साँस छोड़ी। मौसी ने धीरे से कहा, |देख, तुझे कितनी टेंशन है। बस मुझ पर छोड़ दे सब कुछ आज रात। मैं तुझे वो एहसास दिलाऊंगी जो तूने आज तक महसूस नहीं किया।| उन्होंने माँ के दुपट्टे को हल्के से खिसकाया और उनके कंधों पर जमी बर्फ की ठंडक को अपनी गर्म साँसों से पिघलाने लगीं। माँ का बदन काँप उठा। उनकी साँसें तेज़ हो गईं। मैं वहीं सोफे पर जड़वत बैठा ये नजारा देख रहा था। मेरा लंड तो अब दर्द की हद तक खड़ा हो चुका था। मैंने भी हिम्मत करके अपने ऊपर से कंबल हटा दिया और बैठ गया ताकि सब कुछ साफ देख सकूँ।
मौसी की उंगलियाँ अब माँ की पीठ पर नाच रही थीं। उन्होंने माँ का ब्लाउज का हुक खोलने की कोशिश की। माँ ने अचानक आँखें खोलीं और बोलीं, |नहीं वर्षा, अभी नहीं… अभी बहुत जल्दी है। अर्जुन यहीं है।| मौसी ने मेरी तरफ देखा और एक रहस्यमयी मुस्कान दी। वो बोलीं, |अर्जुन, तुझे क्या लगता है? क्या हमें रुक जाना चाहिए?| मेरे मुँह से सिर्फ इतना निकला, |मुझे… मुझे कोई दिक्कत नहीं है माँ। आप लोग जो चाहें करें।| मौसी जोर से हँस दीं, |देख रोहिणी, तेरा बेटा तुझसे ज्यादा खुले विचारों का है। आज तू इसी का सहारा लेकर अपनी सारी हिचक तोड़ दे।| माँ ने फिर मुझे देखा, उनकी आँखों में अब भी एक द्वंद्व चल रहा था लेकिन उनका बदन मौसी के स्पर्श के लिए बिल्कुल तैयार था।
मौसी ने अब पूरे आत्मविश्वास के साथ माँ का ब्लाउज उतार दिया। सामने माँ के भारी भरकम स्तन एक गहरे नीले रंग की ब्रा में कैद थे। उभार इतने ज्यादा थे कि ब्रा फटने को आतुर लग रही थी। मौसी ने पीछे से हाथ डालकर उस ब्रा के हुक खोल दिए। माँ के स्तन छूटते ही बाहर उछल पड़े। वो बिल्कुल गोल, सफेद और लटके हुए नहीं बल्कि उभरे हुए थे। निप्पल गहरे भूरे और सख्त थे। मौसी ने पीछे से दोनों हाथों से माँ के स्तनों को पकड़ लिया और उन्हें सहलाने और मसलने लगीं। माँ ने आह भरी, |आआह्ह्ह्ह… वर्षा… तू क्या कर रही है…| मौसी बोलीं, |चुप रह और बस महसूस कर।|
मौसी ने माँ के निप्पलों को अपनी उंगलियों के बीच दबाकर खींचना शुरू किया। माँ कराह उठीं, |उह्ह्ह्ह्ह… नहीं… बहुत टाइट है… दर्द हो रहा है…| लेकिन मौसी नहीं रुकीं। वो माँ के कान में फुसफुसातीं रहीं, |दर्द नहीं, ये खुशी की शुरुआत है। बता, तुझे अच्छा लग रहा है?| माँ ने सिर हिलाकर हाँ कहा और अपना सिर पीछे की तरफ मौसी के कंधे पर टिका दिया। मौसी की उंगलियाँ अब माँ के निप्पलों को मरोड़ रही थीं और माँ के मुँह से लगातार दबी हुई कराहें निकल रही थीं। मेरी हालत खराब थी। मेरा लौड़ा पैंट में तड़प रहा था। मैंने धीरे से अपनी पैंट की चैन खोली और अपने लण्ड को बाहर निकाल लिया। वो तनकर सामने खड़ा था, सिर से पानी जैसा तरल चमक रहा था। मैंने धीरे-धीरे मुठियाना शुरू कर दिया।
मौसी की नज़र मेरी तरफ गई और उन्होंने मेरी हरकत देख ली। वो मुस्कुराईं और बोलीं, |शाबाश, अपनी माँ की मदद करने के लिए तैयार हो जा। लेकिन अभी नहीं, पहले तेरी माँ को पूरा तैयार होने दे।| उन्होंने माँ को बिस्तर पर लेटा दिया और उनकी साड़ी का पल्लू पूरी तरह हटा दिया। अब माँ बस एक पेटीकोट और साड़ी के निचले हिस्से में बिस्तर पर पसरी हुई थीं। मौसी ने माँ के पेटीकोट को धीरे-धीरे खींचकर नीचे किया। माँ ने अपने हाथ से अपनी चुत को छुपाने की कोशिश की, लेकिन मौसी ने झट से उनके हाथ हटा दिए। |शर्म मत कर, ये सब अपने हैं।| माँ की पैंटी सफेद रंग की सूती थी, जो उनकी जाँघों पर कसी हुई थी। बीच में हल्की सी गीलापन की लकीर उभर आई थी। मौसी ने अपनी उंगली उस लकीर पर फेरते हुए कहा, |देख अर्जुन, तेरी माँ कितनी गर्म हो रही है। इसकी चुत से रस बह रहा है।| माँ ने शर्म से अपना चेहरा तकिये में छुपा लिया।
मौसी ने अब अपने कपड़े भी उतारने शुरू कर दिए। उनका फिगर भी कमाल का था। थोड़ा भरा हुआ, लेकिन बेहद कामुक। उनके स्तन माँ से थोड़े छोटे थे लेकिन उतने ही सुंदर। पेट थोड़ा निकला हुआ था जो उनकी उम्र का संकेत देता था, लेकिन कुल मिलाकर वो बेहद आकर्षक लग रही थीं। उन्होंने अपनी ब्रा और पैंटी उतार फेंकी। उनकी चुत पर बारीक से बाल थे, एक लाइन में आकर खत्म होते हुए। वो पूरी तरह नंगी माँ के पास लेट गईं और उन्हें चूमने लगीं। पहले होंठ, फिर गर्दन, फिर कॉलर बोन और फिर सीधे स्तन। उन्होंने माँ का एक निप्पल अपने मुँह में ले लिया और जोर-जोर से चूसने लगीं। माँ चीख पड़ीं, |आआअह्ह्ह्ह्हह… वर्षा… उह्ह्ह्ह्ह…|
मौसी बीच-बीच में दाँतों से निप्पल को हल्के-हल्के काटतीं, फिर जीभ से सहलातीं। उनका दूसरा हाथ माँ के दूसरे स्तन को बुरी तरह मसल रहा था। मैं अपने हाथ से अपने लंड को जोर-जोर से हिला रहा था। वो नज़ारा इतना उत्तेजक था कि मेरा रस टपक-टपक कर फर्श पर गिर रहा था। मौसी का हाथ धीरे-धीरे माँ के पेट को सहलाता हुआ नीचे पैंटी के अंदर चला गया। उन्होंने माँ की पैंटी को एक तरफ खिसका दिया और उनकी उंगलियाँ सीधे माँ की चुत के भीतर घुस गईं। एक गीली सी चपचप की आवाज़ आई। माँ ने अपनी कमर उठाकर मौसी की उंगलियों को और अंदर लेने की कोशिश की। मौसी ने दो उंगलियाँ अंदर डालकर जोर-जोर से चुदाई करने लगीं। माँ का पूरा बदन मरोड़ खा रहा था।
मौसी ने माँ की पैंटी पूरी तरह उतार फेंकी। अब माँ एकदम नंगी थीं, बस उनके पैरों में पायल बंधी थी जो हर हरकत पर छन-छन कर रही थी। मौसी उठकर माँ के पैरों के बीच बैठ गईं और उनके पैरों को घुटनों से मोड़कर पूरा फैला दिया। माँ की चुत अब पूरी तरह खुली हुई थी। वो गुलाबी और गीली थी, होंठ फूले हुए थे और भगशेफ उभरा हुआ था। मौसी ने अपना सिर झुकाया और सीधे माँ की चुत पर अपनी जीभ फेर दी। माँ जोर से चिल्लाईं, |आआअह्ह्ह्ह्हह… वर्षा… ये तू क्या कर रही है… बहुत शर्म आ रही है… अर्जुन देख रहा है…| लेकिन मौसी नहीं रुकीं। वो माँ की चुत को ऐसे चाट रही थीं जैसे कोई बर्फ का गोला हो। उनकी जीभ अंदर-बाहर जा रही थी, भगशेफ पर नाच रही थी, होठों को चूस रही थी। माँ की कमर हवा में उछल रही थी।
मौसी ने अचानक अपनी उंगली माँ की चुत से निकाली और पीछे की तरफ गुदा द्वार पर रख दी। माँ ने तुरंत आँखें खोल दीं और घबराकर बोलीं, |नहीं, वहाँ नहीं। वहाँ मत छूना। बहुत गंदा है और दर्द होगा।| मौसी ने अपना सिर उठाया, उनके होंठ और ठुड्डी माँ की चुत के रस से भीगे हुए थे। वो बोलीं, |यही तो आज का मेन कोर्स है। चुपचाप लेटी रह और दर्द को सुख में बदलना सीख। अर्जुन, जरा मेरा बैग इधर लाना। उसमें एक बोतल है मसाज ऑयल की।| मैंने झट से बैग खोला और खुशबूदार तेल की बोतल निकाल कर दे दी। मौसी ने तेल अपनी हथेली पर लिया और उसे माँ की पीठ, कमर और नितंबों पर फैलाने लगीं। उन्होंने खासकर माँ की गांड की दरार पर बहुत सारा तेल डाला।
मौसी ने माँ को चित्त कर दिया और उनके पैरों को पूरी तरह से मोड़कर घुटनों को उनकी छाती से लगा दिया। इस पोजीशन में माँ की गांड का छेद साफ दिखाई दे रहा था। वो एक सिकुड़ी हुई गहरी भूरी गाँठ की तरह था। मौसी ने तेल लगी अपनी उंगली बिल्कुल हल्के से उस छेद के चारों तरफ घुमाई। माँ सिहर उठीं। मौसी ने बहुत धीरे-धीरे, बस उंगली का पोरुआ अंदर डालने की कोशिश की। माँ ने कराहते हुए कहा, |उह्ह्ह्ह्ह… जल रहा है… नहीं वर्षा…| मौसी बोलीं, |श्श्श्श्… आराम से साँस लो। अंदर की तरफ ढीला करो, नहीं तो दर्द होगा। जब मैं अंदर जाऊं तो बाहर की तरफ धकेलना, समझी?| मैं उनकी इस तकनीकी बात को सुनकर दंग रह गया। साफ था कि मौसी इस कला में माहिर थीं।
मौसी की उंगली अब धीरे-धीरे अंदर खिसक रही थी। एक उंगली का पूरा पोर अंदर जा चुका था। माँ की गांड का छेद उस उंगली को कसकर पकड़े हुए था। माँ के चेहरे पर दर्द और अजीब सी संतुष्टि का मिलाजुला भाव था। मौसी ने अपनी उंगली को बहुत धीमे-धीमे घुमाना शुरू किया, गोल-गोल घुमाकर छेद को ढीला करने लगीं। उन्होंने माँ की तरफ देखा और पूछा, |अब कैसा लग रहा है?| माँ ने सिर हिलाकर कहा, |थोड़ा अजीब… लेकिन… अब दर्द कम हो रहा है।| मौसी ने उंगली को थोड़ा और अंदर धकेला। अब वो उंगली को अंदर-बाहर करने लगी थीं, बिल्कुल वैसे ही जैसे चुत में चुदाई के दौरान किया जाता है। माँ का मुँह खुल गया और उनकी आवाज़ निकली, |आआह्ह्ह्ह… हाँ… अब ठीक लग रहा है… थोड़ा और करो…|
मौसी ने अब अपनी बीच वाली उंगली डाल दी, यानी दो उंगलियाँ अब माँ की गांड में थीं। माँ की गांड ने उन उंगलियों को जकड़ लिया। माँ की चुत से रस बहकर गांड की तरफ आ रहा था और उंगलियों की चिकनाई बढ़ा रहा था। मौसी ने अपनी उंगलियों से एक तेज़ गति पकड़ ली। माँ की छूत से पानी की तरह पानी बहने लगा। माँ बुरी तरह चिल्ला रही थीं, |आआअह्ह्ह्ह्हह… हाँ वर्षा… चोद मेरी गांड… अब अच्छा लग रहा है… उह्ह्ह्ह्ह… तेरी उंगली मेरे पेट तक जा रही है…| मैं ये सुनकर हैरान था। मेरी सीधी-सादी माँ ऐसे शब्द बोल रही थीं। मौसी ने मेरी तरफ देखा और कहा, |अब तेरी बारी है, अर्जुन। आ, अपनी माँ को सच्ची गुदा चुदाई का मज़ा दिला। लेकिन ध्यान से, प्यार से और आराम से।|
मैं उठा। मेरे हाथ काँप रहे थे। मेरा लंड पूरी तरह तना हुआ था और उस पर नसें उभर आई थीं। मैंने माँ के पास आकर घुटने टेके। माँ ने अपना चेहरा घुमाकर मुझे देखा। उनकी आँखों में शर्म, डर, और एक बेतहाशा वासना सब कुछ मिला-जुला था। वो बोलीं, |अर्जुन, बेटा, बहुत आराम से करना। मुझे बहुत डर लग रहा है।| मैंने सिर हिलाकर हाँ कहा। मौसी ने मेरे लंड पर ढेर सारा तेल डाला और उसे अच्छी तरह से हथेली में लेकर मसल दिया ताकि वो पूरी तरह चिकना हो जाए। उन्होंने माँ की गांड के छेद पर भी फिर से तेल डाला।
मौसी ने माँ के घुटनों को और जोर से उनकी छाती पर दबा दिया और अपने दोनों हाथों से माँ की गांड के चूतड़ों को फैला दिया ताकि गुदा द्वार पूरी तरह से बाहर निकल आए। उन्होंने मुझसे कहा, |अब लगा अपना लौड़ा और बहुत आहिस्ता से दबाव दे। एक बार सिरा अंदर चला जाए तो रुक जाना, जब तक तेरी माँ कहे नहीं, आगे मत बढ़ना।| मैंने अपने लण्ड के सुपारे को माँ की गांड के छेद पर रखा और बहुत ही हल्का सा दबाव डाला। माँ का छेद उस दबाव से बिल्कुल सिकुड़ गया। माँ ने आँखें कसकर बंद कर लीं और अपना मुँह दबा लिया। मैंने धीरे-धीरे अपनी कमर आगे को धकेली। सुपारे का आधा हिस्सा अंदर चला गया। माँ तड़प उठीं, |आआअह्ह्ह्ह्हह… दर्द हो रहा है अर्जुन… रुक जा…|
मैं तुरंत रुक गया। मेरा लंड जोर से फड़फड़ाया। माँ के अंदर बहुत गर्मी और कसाव था। मौसी ने माँ के बालों पर हाथ फेरते हुए कहा, |शाबाश रोहिणी, तूने बहुत अच्छा किया। अब आराम से साँस ले और अपने आप को ढीला छोड़।| कुछ पलों के बाद माँ ने खुद कहा, |थोड़ा और अंदर करो… लेकिन धीरे…| मैंने फिर से दबाव दिया। इस बार माँ का छेद कम अकड़ा। मेरा आधा लौड़ा उनकी गांड के अंदर खिसक गया। वो एहसास अवर्णनीय था। इतनी टाइट, इतनी गर्म, इतनी गीली। माँ की चुत से बहता रस गांड तक आकर मेरे लंड को और भी चिकना कर रहा था। मैंने बहुत ही धीमी गति से अंदर-बाहर करना शुरू किया। हर बार जब मैं बाहर निकलता, उनकी गांड का छेद मेरे लंड को निगलने के बाद बाहर की तरफ निकल आता और फिर जब मैं अंदर जाता, पूरा समा जाता।
धीरे-धीरे माँ का दर्द कम होने लगा। उनका चेहरा ढीला पड़ गया और कराहों की जगह लंबी सिसकियों और आहों ने ले ली। वो बोलीं, |आआह्ह्ह्ह… अर्जुन… बेटा… ये तो… उह्ह्ह्ह्ह… बहुत अलग है… अब धीरे-धीरे करो… मज़ा आने लगा है…| मौसी माँ के ऊपर झुक गईं और उनके स्तनों को चूसने लगीं। एक तरफ बेटा माँ की गांड चोद रहा था, दूसरी तरफ बहन उनके स्तनों पर जीभ फेर रही थी। ये माहौल इतना कामुक था कि मेरा जी चाहता था अभी झड़ जाऊं। लेकिन मैंने खुद को काबू में रखा।
मैंने अपनी गति थोड़ी बढ़ाई। अब मेरा लगभग पूरा लंड माँ की गांड में था। उनके चूतड़ मेरी जाँघों से टकरा रहे थे और एक ताल बन गई थी। चपचप की आवाज़ के साथ-साथ माँ की पायल की छन-छन और हीटर की गरमाहट ने पूरे कमरे को कामदेव के मंदिर में बदल दिया था। मैंने माँ के कूल्हों को पकड़कर जोर से धक्का मारा। माँ चीख पड़ीं, |आआअह्ह्ह्ह्हह… बेटा… बहुत तेज़… उह्ह्ह्ह्ह… मेरी गांड फट रही है… लेकिन मत रुकना… चोदते रहो… मुझे चोदो मेरे बच्चे…|
ये सुनते ही मेरे अंदर का जानवर जाग गया। मैंने माँ के पैरों को उनके कंधों पर डाल लिया और अपने दोनों हाथों से उनके स्तनों को बुरी तरह मसलने लगा। मैं पूरी ताकत से उनकी गांड चोद रहा था। मेरे अंडकोष उनके चूतड़ों पर जोर-जोर से टकरा रहे थे। माँ की चुत से रस की बौछार निकल रही थी जो मेरे पेट और उनके पेट पर फैल रही थी। माँ ने अपनी आँखें पूरी तरह से पलट लीं, उनका मुँह खुला रह गया और वो बस एकटक मुझे देखती रहीं जब तक मैं उनकी गांड चोदता रहा। उनकी नज़रों में अब कोई ममता नहीं थी, सिर्फ और सिर्फ हवस थी।
मौसी ने मेरी पीठ सहलाते हुए कहा, |शाबाश अर्जुन। पूरी जान लगा दे। तेरी माँ को आज अपनी औकात पता चलनी चाहिए। रोहिणी, बता अपने बेटे को, तू कितनी बड़ी चुदक्कड़ है?| माँ ने अपने होंठ काटते हुए, मेरे हर धक्के पर कराहते हुए कहा, |हाँ… हाँ… मैं चुदक्कड़ हूँ… मैं अपने बेटे की चुदक्कड़ माँ हूँ… मुझे चोद अर्जुन… मेरी गांड चोद…| मैंने ये सुना और मेरा वीर्य विस्फोट की तरफ बढ़ने लगा। मैंने अपनी पूरी ताकत से दस-बारह धक्के और मारे और फिर माँ की गांड की सबसे गहरी जड़ों में अपना माल छोड़ दिया। माँ ने मेरे लंड की फड़फड़ाहट को अपने अंदर महसूस किया और वो भी एक जबरदस्त चरमोत्कर्ष पर पहुँच गईं। उनकी चुत से पानी की तेज़ धार निकली और उन्होंने जोर से चीखकर मेरी बाँहों को पकड़ लिया।
मैं उनके ऊपर ही गिर गया। मेरा लंड अब भी उनकी गांड में हल्की-हल्की फड़फड़ा रहा था और वीर्य बाहर की तरफ रिस रहा था। माँ मेरे बालों पर हाथ फेर रही थीं और बार-बार कह रही थीं, |मेरा बच्चा… मेरा अच्छा बच्चा…| मौसी हमें देखकर मुस्कुरा रही थीं। उन्होंने माँ की चुत पर अपनी हथेली रखी और वहाँ से निकलते रस को माँ की गांड पर मले हुए मेरे वीर्य में मिलाकर एक लेप बना दिया। उन्होंने कहा, |देख रोहिणी, ये है असली टेस्ट ऑफ लाइफ। अब तुझे पता चल गया ना सच्ची चुदाई किसे कहते हैं?|
माँ ने थकी हुई आवाज़ में कहा, |अर्जुन… बेटा… मुझे माफ कर देना… मैं अपने आप को रोक नहीं पाई।| मैंने उनके गालों को चूम लिया और कहा, |माँ, ये सब आपके लिए ही तो किया। आपकी खुशी ही मेरी खुशी है। और वैसे भी, जो हुआ अच्छा हुआ।| मौसी ने फिर से दो पैग और बनाए। हम तीनों नंगे ही बैठे रहे। माँ मेरी बाँहों में सिमटी हुई थीं और मौसी हम दोनों को देखकर संतुष्ट मुस्कान बिखेर रही थीं।
करीब आधे घंटे बाद मौसी ने मेरे लंड को देखा जो फिर से अकड़ने लगा था। वो बोलीं, |लगता है अभी पार्टी खत्म नहीं हुई। अब मेरी बारी है, लेकिन इस बार मैं चुदवाने के मूड में हूँ। और हाँ, मुझे भी पीछे से चाहिए। अर्जुन, तू तो थक गया होगा, चल अब मैं ऊपर से करती हूँ।| मौसी ने माँ को जगाया और कहा, |रोहिणी, देखना और सीखना। अब तू देख कि तेरी बहन कैसे तेरे बेटे का लण्ड लेती है।| मौसी ने मुझे बिस्तर पर लिटा दिया। मेरा लंड खड़ा था, उस पर माँ की गांड का रस और मेरा वीर्य लगा हुआ था। मौसी ने बिना कोई हिचक के मेरा पूरा लण्ड अपने मुँह में ले लिया। वो उसे साफ करने लगीं। उनकी जीभ मेरे सुपारे पर नाच रही थी। माँ ने ये देखा और उनका मुँह खुला रह गया। मौसी ने मेरे अंडकोषों को भी चूसा और मेरे लंड को पूरी तरह गीला कर दिया।
फिर वो मेरे ऊपर बैठ गईं, लेकिन उल्टी दिशा में। उन्होंने मेरे लंड को पकड़कर अपनी गांड के छेद पर टिकाया और धीरे-धीरे बैठने लगीं। माँ हैरान थीं क्योंकि मौसी को कोई दर्द नहीं हो रहा था। मौसी की गांड ने मेरे लंड को ऐसे निगला जैसे कोई प्यासा पानी पीता है। वो पूरी तरह से मेरे ऊपर बैठ गईं और जोर-जोर से उछलने लगीं। उनके चूतड़ मेरे पेट पर पटक-पटक कर आवाज़ कर रहे थे। माँ ने आगे बढ़कर मौसी के स्तनों को पीछे से पकड़ लिया और उन्हें मसलने लगीं। मौसी ने माँ का सिर अपनी तरफ खींचा और वो दोनों एक-दूसरे को चूमने लगीं जबकि मौसी मेरे लंड पर उछल रही थीं।
मौसी ने मेरे लंड को अपनी गांड में लेकर गोल-गोल घूमना शुरू कर दिया। ये पोजीशन मैंने कभी सपने में भी नहीं सोची थी। मेरा लंड उनकी गांड में ऐसे बंद था जैसे स्क्रू में पेंच। उन्होंने अपनी चुत पर हाथ फेरना शुरू कर दिया और साथ-साथ मेरे लंड को भी चोद रही थीं। माँ ने मौसी की उँगलियों को हटाकर अपनी जीभ मौसी की चुत पर लगा दी। अब नज़ारा ऐसा था कि माँ मेरे लंड के ऊपर बैठी मौसी की चुत चाट रही थीं। ये एक अविश्वसनीय तिकड़ी थी। मौसी ने मेरी जाँघों पर अपने नाखून गड़ा दिए और जोर-जोर से चुदाई करने लगीं। उनके मुँह से सिर्फ अपशब्द निकल रहे थे, |चोद मुझे अर्जुन… अपनी मौसी की गांड को फाड़ दे… मैं तेरे लंड की पुजारन हूँ… उह्ह्ह्ह्ह… आआअह्ह्ह्ह्हह…|
उनका बदन पसीने से भीग गया और आखिरकार वो भी चीखकर मेरे ऊपर गिर पड़ीं। मैंने भी उनकी गांड के अंदर अपनी दूसरी बार की वीर्य की खुराक भर दी। माँ ने मौसी की चुत से अपना मुँह हटाया और उनके चेहरे को चूमने लगीं। वो बोलीं, |थैंक यू वर्षा। आज तूने मुझे ज़िंदगी का असली स्वाद चखाया है।|
वो पूरी रात हम तीनों ने एक-दूसरे की बाहों में गुज़ारी। न जाने कितनी बार हमने एक-दूसरे को चोदा, चाटा और चूसा। माँ ने वो रात अपनी सारी शर्म और झिझक उतार फेंकी। वो एक नई औरत बन गई थीं, एक ऐसी औरत जो अपनी देह की हर इच्छा को जानती थी और उसे पूरा करने का हक रखती थी। अगली सुबह जब हम बर्फ में खेलने निकले, तो माँ की आँखों में एक अलग ही चमक थी। वो बार-बार मेरी तरफ देखतीं और शरमाकर मुस्कुरा देतीं। मौसी ने मुझे एक तरफ ले जाकर कहा, |अब ये जिम्मेदारी तेरी है कि तू अपनी माँ की इस आग को जिंदा रखना। वरना मैं तुझे कभी माफ नहीं करूंगी।|
मनाली का वो ट्रिप खत्म हुआ, लेकिन हमारी ये दास्ताँ अभी बाकी थी। घर आकर भी माँ के कमरे का दरवाज़ा मेरे लिए हमेशा खुला रहता। हमने अपनी इस भूख को कभी छुपाया नहीं। बस एक बात का ध्यान रखा कि दुनिया को पता न चले। माँ ने अपनी जवानी फिर से जी ली और मैं उनका सबसे करीबी राजदार और प्रेमी बन गया। और हाँ, मौसी का आना-जाना भी बढ़ गया था। अक्सर रातों में हम तीनों साथ होते और वो मनाली की रात दोहराई जाती। यकीन मानिए, इस कहानी का हर शब्द सच है। ये मेरी ज़िंदगी का वो राज है जिसे मैं आज तक किसी को नहीं बता पाया था। अब आपके सामने बयां करके मन हल्का हो गया है।
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