मारिया - एक जवानी की तलाश: Antarvasana Sex Story
- Maria
- 6 days ago
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सुबह के पांच बजे का अलार्म बजा। मारिया की आंखें खुलीं। 37 साल की उम्र में उसका चेहरा अभी भी 30 की लगती थी - जिम की वजह से। पर आज उसके चेहरे पर वो चमक नहीं थी। वो बिस्तर पर लेटी रही, छत को देखती हुई। पति अजय पीठ फेरकर सो रहे थे। उनके बीच की दूरी सिर्फ शारीरिक नहीं थी, भावनात्मक भी थी।
"फिर वही दिन, वही रुटीन," मारिया ने सोचा।
उठी, बाथरूम गई। शीशे में खुद को देखा - 5'6" की हाइट, फिट बॉडी, 36-28-38 का फिगर। जिम में सब उसे देखते थे, पर कोई पास नहीं आता था। शादीशुदा होने का तमगा उसे हर जगह घेरे रहता था।
नहाते समय पानी उसके शरीर पर बह रहा था। उसने अपने हाथों से अपने बूब्स को छुआ - कितने टाइट थे अभी भी। पर किसके लिए? पति को तो शाम को आते ही नींद आ जाती थी। उनका 3 इंच का लंड तो बस झटपट काम निपटा देता था, उसकी जरूरतों का ख्याल कौन रखता?
"काश कोई होता जो मुझे पूरा महसूस करता..." उसने मन में सोचा।
नाश्ता बनाया, बेटे को स्कूल भेजा, और खुद निकल पड़ी ऑफिस के लिए।
मेट्रो में खड़ी थी। भीड़ थी, पर अकेलापन और भीड़ से ज्यादा था। उसने फोन निकाला। इंस्टाग्राम खोला। स्टोरीज देखीं - सब अपनी जिंदगी में व्यस्त थे। उसकी पिछली रात की जिम की स्टोरी पर 47 कमेंट्स थे।
"वाओ मैम, क्या फिगर है!"
"दिल्ली की सबसे हॉट मॉम!"
"काश मेरी वाइफ भी ऐसी होती!"
ये सब टाइपिंग उसके अंदर कुछ हिला रही थीं। वो चाहती थी कि कोई उसे देखे, सराहे, छुए। पर ये सब तो बस शब्द थे, हकीकत नहीं।
तभी एक रिक्वेस्ट आई - "नारायण_जयपुरा"। प्रोफाइल खोली - एक साधारण सा लड़का, गांव का, 26 साल का। लंबा-डुबला, मासूम चेहरा। बायो में लिखा था: "सिंपल लाइफ, बिग ड्रीम्स।"
"कौन होगा ये गांव का लड़का?" उसने सोचा, और अनजाने में ही एक्सेप्ट कर लिया।
पहला मैसेज आया: "हैलो मैम, आपकी जिम वीडियो देखी। बहुत इंस्पायरिंग है।"
मारिया ने मुस्कुराते हुए रिप्लाई किया: "थैंक्स। तुम भी जिम जाते हो?"
"नहीं मैम, हमारे यहां गांव में कोई जिम नहीं। खेत में काम करना ही जिम है।"
धीरे-धीरे बातचीत बढ़ी। नारायण बताता कि वो जयपुरा गांव में रहता है, पिता किसान हैं, वो खुद ग्रेजुएट है पर नौकरी नहीं मिली। मारिया उसे अपनी दिल्ली की जिंदगी बताती - ऑफिस, टेंशन, खालीपन।
एक हफ्ते बात नारायण ने पूछा: "मैम, आप खुश क्यों नहीं लगती? इतना सब होने के बाद भी?"
मारिया रुक गई। किसी ने पहली बार उससे ये सवाल पूछा था। उसने टाइप किया: "पता नहीं, कुछ तो कमी है जिंदगी में।"
"क्या कमी है?"
"प्यार, ध्यान, वो जोश जो पहले था..."
नारायण ने लिखा: "मैम, आप बहुत खूबसूरत हैं। कोई भी आपको खुश रखने के लिए तरसेगा।"
ये पढ़कर मारिया के अंदर एक हलचल हुई। उसके गाल गर्म हो गए। 26 साल का ये लड़का उसे क्यों इतना अच्छा लग रहा था?
हफ्तों बीत गए। रोज बात होती। सुबह मेट्रो में, रात को बिस्तर पर। नारायण उसे अपनी दिनभर की कहानियां बताता - खेत, गांव के मेले, दोस्तों की शरारतें। मारिया उसे अपनी दुनिया दिखाती - शॉपिंग, मॉल्स, रेस्टोरेंट्स।
एक रात नारायण ने लिखा: "मैम, क्या मैं आपको मारिया कह सकता हूं? मैम बहुत फॉर्मल लगता है।"
"हां, क्यों नहीं," मारिया ने जवाब दिया, और मुस्कुराई।
अब बातें बदलने लगीं। नारायण उसे बताता कि वो कैसी लगती है - उसकी स्माइल, उसकी आंखें, उसका बदन। मारिया भी खुलने लगी। उसने एक दिन अपनी जिम वियर में एक फोटो भेजी - ब्रा टॉप और शॉर्ट्स में।
नारायण का दिल तेज़ी से धड़कने लगा। उसने रिप्लाई किया: "तुम तो देवी हो मारिया। मैं तो... मैं तो..."
"क्या?" मारिया ने पूछा।
"कुछ नहीं, बुरा मत मानना।"
"बोलो।"
"मैं सोच रहा था कि काश मेरी गर्लफ्रेंड तुम जैसी होती।"
मारिया ने पढ़ा और उसके अंदर एक अजीब सी खुशी हुई। वो 26 साल के इस लड़के से प्यार करने लगी थी? नहीं, शायद प्यार नहीं, पर कुछ तो था। वो फिर से जवान महसूस कर रही थी।
"मारिया, मेरा जन्मदिन आ रहा है। 15 अगस्त को। क्या तुम आ सकती हो?" नारायण ने पूछा।
मारिया सोच में पड़ गई। जयपुरा... वो कहां था? नक्शे पर देखा - दिल्ली से 8 घंटे की ट्रेन। एक छोटा सा गांव।
"मैं सोचकर बताती हूं," उसने कहा।
तीन दिन तक सोचती रही। घर पर क्या बोलेगी? पति को? पर फिर उसने फैसला कर लिया। जिंदगी में एक बार तो जीना चाहिए।
"आ रही हूं," उसने मैसेज किया।
नारायण खुशी से पागल हो गया। उसने तुरंत लॉज बुक करवाया - "कृष्णा लॉज"। गांव में कोई होटल नहीं था, ये एकमात्र ठिकाना था।
15 अगस्त की सुबह। मारिया ने घर पर झूठ बोला - ऑफिस का काम है, दो दिन लगेंगे। पति ने बिना कुछ पूछे हामी भर दी। उसे तो फर्क भी नहीं पड़ता था।
ट्रेन में बैठी तो दिल तेज़ी से धड़क रहा था। "क्या करने जा रही हूं मैं? एक अजनबी लड़के से मिलने जा रही हूं, छोटे से गांव में..."
पर excitement भी था। उसने एक टाइट टॉप और जींस पहनी थी। मेकअप हल्का किया था - लाल लिपस्टिक, काजल। वो खूबसूरत लग रही थी।
8 घंटे बाद जयपुरा स्टेशन। एक छोटा सा प्लेटफार्म, चारों तरफ हरियाली। मारिया उतरी और देखने लगी। कहां है वो?
तभी पीछे से आवाज आई: "मारिया!"
मुड़ी तो नारायण खड़ा था। लाइव में वो और भी मासूम लग रहा था। 6 फीट की हाइट, पतला बदन, काली आंखें। उसने साधारण शर्ट और जींस पहनी थी।
दोनों एक-दूसरे को देखते रहे। नारायण की आंखें चौड़ी थीं। उसने कभी सोचा नहीं था कि मारिया इतनी खूबसूरत होगी। उसका टाइट टॉप उसके बूब्स को शेप दे रहा था, जींस उसकी गांड को। नारायण का दिल धड़कने लगा, और नीचे उसके लंड में हलचल हुई।
"हैलो," मारिया ने कहा और आगे बढ़कर उसे गले लगा लिया।
नारायण कांप गया। मारिया की खुशबू उसके नाक में भर गई - परफ्यूम और पसीने की मिक्स खुशबू। उसका बदन उससे चिपक रहा था। नारायण का लंड तुरंत खड़ा हो गया। वो शर्मिंदा होने लगा, पर मारिया ने नोटिस नहीं किया... या शायद किया पर अनदेखा कर दिया।
"चलो, लॉज छोड़ता हूं," नारायण ने कहा, अपनी पैंट को ठीक करते हुए।
रास्ते में नारायण स्कूटी चला रहा था, मारिया पीछे बैठी थी। उसने हल्के से उसकी कमर पकड़ ली। नारायण के शरीर में करंट दौड़ गया। वो सोच रहा था: "ये क्या हो रहा है? ये तो मेरी मां की उम्र की है, पर क्यों मैं इतना उत्तेजित हो रहा हूं? उसकी गांड, उसके बूब्स... मुझे इसे चोदना है, बस यही सोच आ रही है।"
कृष्णा लॉज पहुंचे। एक पुरानी सी इमारत, कमरा छोटा सा पर साफ था। नारायण ने सामान रखा।
"शाम को मिलते हैं," उसने कहा, "मैं आऊंगा तुम्हें लेने। पर... पर एक बात है।"
"क्या?" मारिया ने पूछा।
"मैंने घर पर झूठ बोला है। मैंने कहा कि तुम मेरी दोस्त हो, दिल्ली से, जॉब के सिलसिले में आई हो। मैंने ये नहीं बताया कि हम ऑनलाइन मिले हैं।"
मारिया समझ गई। "ठीक है, कोई बात नहीं।"
शाम को मारिया ने साधारण काली साड़ी पहनी। गांव में ज्यादा मेकअप ठीक नहीं लगता। नारायण आया तो उसे देखकर फिर से हक्का-बक्का रह गया। साड़ी में मारिया और भी सुंदर लग रही थी। उसकी कमर, उसकी गांड, सब साफ दिख रहा था।
नारायण के घर पर उसके माता-पिता थे, कुछ रिश्तेदार, और उसके दोस्त। सब मारिया को देखकर हैरान थे - इतनी खूबसूरत औरत इस गांव में!
"बेटा, ये कौन है?" नारायण की मां ने पूछा।
"मेरी दोस्त है मां, दिल्ली से।"
मारिया ने सबको नमस्ते की। रात का खाना हुआ, केक काटा। फिर नारायण के दोस्तों ने शरारत शुरू की।
"भाई, ये तो बहुत हॉट है! कहां से लाया?" एक दोस्त ने फुसफुसाते हुए पूछा।
"चुप कर, दोस्त है बस," नारायण ने कहा, पर उसके मन में भी वही चल रहा था।
रात के 10 बजे, सब छत पर गए। नारायण ने चुपके से एक बोतल लाई - व्हिस्की। उसने कोल्डड्रिंक में मिलाई और सबको पिलाई। मारिया ने भी पी। अंधेरा था, सितारे चमक रहे थे।
नारायण मारिया के बगल में बैठा था। उसका दिल तेज़ी से धड़क रहा था। उसने अपना हाथ धीरे से मारिया की कमर पर रख दिया। मारिया ने हिला-डुला नहीं। उसके अंदर भी कुछ हो रहा था - नशा, या फिर कुछ और?
"सेल्फी लेते हैं," नारायण ने कहा।
फोन निकाला, और दोनों ने पोज़ दिए। नारायण ने अपना चेहरा मारिया के करीब लाया, उसकी गाल को छूते हुए। मारिया को एक करंट सा लगा। उसने नारायण की तरफ देखा - उसकी आंखों में वो लालसा थी जो वो पहचानती थी।
"मुझे जाना चाहिए," मारिया ने कहा, "सुबह जल्दी उठना है।"
नारायण ने हाथ हटाया, पर उसके मन में अब और भी ज्यादा गंदी सोचें आ रही थीं।
मारिया लॉज लौटी। कमरे में अकेली बैठी। दिल तेज़ी से धड़क रहा था। "क्या मैं सही कर रही हूं? वो मुझसे 11 साल छोटा है... पर क्यों मैं उसे देखकर घबरा जाती हूं? क्यों मेरा दिल तेज़ी से धड़कता है?"
उसने नाइट गाउन पहना - सफेद रंग का, सामने से बंधा हुआ, लेस वाला। अंदर काली ब्रा और पैंटी। वो बिस्तर पर लेटी, फोन देख रही थी।
रात के 2 बजे। अचानक दरवाजे पर खटखटाहट।
मारिया उठी, दरवाजा खोला। नारायण खड़ा था, थोड़ा नशे में, आंखों में वो चमक।
"सोई नहीं अभी तक?" उसने पूछा।
"तुम आओ," मारिया ने कहा, और मुस्कुराई।
नारायण अंदर आया। दरवाजा बंद हुआ। दोनों एक-दूसरे को देखने लगे। कमरे में धीमी रोशनी थी - बस एक बल्ब जल रहा था।
"केक काटें?" नारायण ने पूछा।
"हां," मारिया ने कहा।
नारायण ने केक निकाला। दोनों बैठे। मारिया ने मोमबत्ती जलाई, नारायण ने फूंकी। फिर मारिया ने केक का एक टुकड़ा उसके मुंह में डाला, अपने हाथों से।
नारायण ने उसके उंगलियां चाट लीं। मारिया के अंदर एक हलचल हुई।
"डांस करें?" नारायण ने पूछा।
"यहां? कैसे?" मारिया ने कहा।
"बस ऐसे ही।"
नारायण ने अपने फोन पर म्यूजिक लगाया। एक धीमा, सेक्सी गाना। वो खड़ा हुआ और मारिया का हाथ पकड़कर उसे भी खड़ा किया।
दोनों नाचने लगे। नारायण ने अपने हाथ उसकी कमर पर रख दिए। मारिया ने अपने हाथ उसके कंधों पर। वो एक-दूसरे के करीब आ रहे थे। नारायण की सांसें तेज़ हो रही थीं, मारिया की भी।
"तुम बहुत खूबसूरत हो," नारायण ने कहा, "मैंने कभी सोचा नहीं था कि तुम इतनी खूबसूरत होगी।"
"शुक्रिया," मारिया ने शर्माते हुए कहा।
"नहीं, सच में। तुम्हारा बदन, तुम्हारी स्माइल... मैं तो पागल हो रहा हूं तुम्हें देखकर।"
मारिया ने उसकी आंखों में देखा। वो सच बोल रहा था। उसके अंदर भी वही जोश भर रहा था जो सालों से गायब था।
"मैंने हॉलीवुड फिल्मों में देखा है," नारायण ने कहा, "बार में औरतें लैप डांस करती हैं। क्या तुम... क्या तुम मेरे लिए करोगी? बर्थडे गिफ्ट?"
मारिया ने सोचा। उसके अंदर की औरत जाग रही थी। "हां," उसने कहा।
नारायण सोफे पर बैठा। मारिया उसके सामने खड़ी हुई। उसने अपने गाउन के बटन खोले, एक-एक करके। अंदर से काली ब्रा दिखने लगी। नारायण का दिल तेज़ी से धड़कने लगा, उसका लंड पैंट में तनकर खड़ा हो गया।
मारिया धीरे-धीरे उसकी गोद में बैठी। उसकी गांड नारायण के लंड पर टिकी थी। वो धीरे-धीरे आगे-पीछे हिलने लगी, अपनी कमर घुमाने लगी।
नारायण ने अपने हाथ उठाए और उसकी कमर को पकड़ लिया। मारिया के शरीर में आग लग रही थी। वो नाच रही थी, अपनी गांड उसके लंड पर रगड़ रही थी।
"आह..." नारायण ने कराहा।
मारिया घूमी, अब उसका चेहरा नारायण की तरफ था। वो उसकी गोद में बैठी थी, उसके बूब्स उसके मुंह के सामने थे। वो आगे-पीछे हिल रही थी, उसका लंड उसकी चूत पर रगड़ रहा था - कपड़ों के ऊपर से।
"कैसा लग रहा है?" मारिया ने पूछा, आंखों में शरारत लिए।
"बहुत अच्छा... बहुत..." नारायण ने कहा।
अचानक उसने मारिया की गांड पर थप्पट मारा। "स्मैक!"
"उफ़... क्या कर रहे हो?" मारिया ने कहा, पर उसकी आवाज में वो गुस्सा नहीं था, मज़ा था।
"तुम्हें देखकर मैं पागल हो रहा हूं," नारायण ने कहा, "मुझे रोक नहीं पा रहा।"
मारिया ने उसकी आंखों में देखा। वो चाहती थी कि वो और करे, और छुए, और...
"आंखें बंद करो," नारायण ने कहा।
"क्यों?"
"बस करो ना।"
मारिया ने आंखें बंद कर लीं। नारायण उठा, अपने कपड़े उतारने लगा। शर्ट, जींस, फिर अंडरवियर। वो नंगा हो गया। उसका लंड 6 इंच का, कड़ा, तना हुआ। उसने सोचा: "अब क्या होगा? वो मुझे नंगा देखेगी तो क्या सोचेगी?"
पर वो रुका नहीं। उसने फ्रिज से वैनिला आइसक्रीम निकाली और अपने लंड पर लगा ली। ठंडक से उसका शरीर कांपा, पर वो सहन कर गया।
"खाओ," उसने कहा, "आइसक्रीम।"
मारिया ने आंखें बंद रखीं और अपना मुंह आगे किया। उसने कुछ ठंडा, कुछ गर्म महसूस किया। वो चाटने लगी। स्वाद अजीब था - मीठा और नमकीन मिक्स।
फिर उसे एहसास हुआ। ये तो... ये तो लंड है!
उसकी आंखें खुलीं, पर नारायण ने उसके सिर को पकड़ लिया।
"नहीं... रुको..." मारिया ने कहा।
"प्लीज... बस थोड़ी देर..." नारायण ने कहा।
और फिर उसने अपना लंड उसके मुंह में डाल दिया।
मारिया के मुंह में नारायण का लंड घुस गया। वो चौंकी, पर नारायण ने उसके बाल पकड़े और धक्का दिया। पूरा लंड अंदर चला गया - 6 इंच का कड़ा लंड उसके गले तक।
"उम्म्फ़... उम्म्फ़..." मारिया की आवाजें दबी हुई थीं।
"आह... क्या मुंह है तुम्हारा..." नारायण कराहने लगा, "बहुत टाइट है... बहुत गर्म..."
वो उसके सिर को आगे-पीछे करने लगा, अपना लंड उसके मुंह में अंदर-बाहर कर रहा था। मारिया पहले तो विरोध करती रही, पर फिर मज़ा आने लगा। उसने अपने हाथ उसकी जांघों पर रख दिए, उसे सहारा देने लगी।
नारायण तेज़ी से चलने लगा। उसका लंड मारिया के मुंह में पूरा अंदर-बाहर हो रहा था। उसके बूब्स हिल रहे थे, उसकी सांसें तेज़ हो रही थीं।
"आह... मैं आने वाला हूं..." नारायण ने कहा, "मुंह मत हटाना... पी लेना सब..."
मारिया ने हामी में सिर हिलाया। और फिर नारायण ने अपना सारा वीर्य उसके मुंह में छोड़ दिया। गर्म, गाढ़ा, नमकीन। मारिया ने सब पी लिया, एक बूंद भी बर्बाद नहीं होने दी।
नारायण थककर सोफे पर गिर गया। मारिया उठी, उसके पास बैठी। दोनों एक-दूसरे को देखने लगे।
"मज़ा आया?" नारायण ने पूछा।
"हां," मारिया ने शर्माते हुए कहा।
नारायण ने उसे पकड़ा और किस करने लगा। गहरा, जोशीला किस। उसके हाथ मारिया के बूब्स पर थे, उन्हें दबा रहे थे, मसल रहे थे।
"मैंने हमेशा से एक बड़ी औरत को चोदने का सपना देखा है," नारायण ने कहा, "किसी और की बीवी, किसी की मम्मी..."
"मम्मी?" मारिया ने पूछा।
"हां... तुम मेरी मम्मी बनो... मैं तुम्हें चोदना चाहता हूं..."
ये सुनकर मारिया और भी गर्म हो गई। उसने अपनी ब्रा खोली। उसके बूब्स बाहर आ गए - 36 इंच के, टाइट, गुलाबी निप्पल।
नारायण झपट पड़ा। उसने एक बूब्स मुंह में लिया और चूसने लगा। दूसरे हाथ से दूसरा दबा रहा था। मारिया मोन करने लगी: "आह... हां... और चूसो..."
नारायण ने निप्पल काटा। "आई... दर्द हो रहा है..."
"मम्मी को दर्द भी मज़ा देता है," नारायण ने कहा, और फिर उसे उठाकर बिस्तर पर पटक दिया।
मारिया बिस्तर पर पड़ी थी, नारायण उसके ऊपर था। उसने उसकी पैंटी खींची, मुंह से। मारिया की चूत सामने थी - गीली, गुलाबी, तरस रही थी।
नारायण ने आइसक्रीम निकाली और उसकी चूत पर लगा दी। ठंडक से मारिया कांप उठी। फिर नारायण ने चाटना शुरू किया। ठंडी आइसक्रीम और उसकी गर्म जीभ का कॉम्बिनेशन - मारिया पागल हो रही थी।
"आह... हां... और चाटो... जीभ अंदर डालो..." वो चिल्ला रही थी।
नारायण ने अपनी जीभ उसकी चूत में घुसा दी। अंदर-बाहर करने लगा। मारिया की कमर उठ रही थी, वो झड़ने वाली थी।
"रुको... अब मैं चोदूंगा," नारायण ने कहा।
वो ऊपर आया, अपना लंड उसकी चूत पर रगड़ने लगा। मारिया पागल हो रही थी।
"डालो... जल्दी डालो..." वो कह रही थी।
"क्या डालूं मम्मी?" नारायण ने पूछा, "बोलो ना..."
"लंड... अपना लंड डालो... चोदो मुझे..."
नारायण ने एक जोरदार धक्का मारा। उसका 6 इंच का लंड पूरा अंदर घुस गया। मारिया चीख उठी: "आह... बहुत बड़ा है... धीरे..."
"साली रांड," नारायण ने गाली दी, "रोज़ छोटे लंड से चुदती हो, आज बड़ा मिला तो चिल्ला रही हो।"
ये गंदी बातें सुनकर मारिया और भी उत्तेजित हो गई। नारायण तेज़ी से धक्के मारने लगा। बिस्तर हिल रहा था, मारिया की चूत से पच-पच की आवाजें आ रही थीं।
"कैसा लग रहा है मेरी मम्मी?" नारायण ने पूछा।
"बहुत अच्छा... बहुत..." मारिया कराही।
"तुम्हारे पति का कितना है?"
"तीन... सिर्फ तीन इंच..."
"और मेरा?"
"छह... बहुत बड़ा है... बहुत मज़ा दे रहा है..."
नारायण ने उसके पैर उठाए और कंधों पर रख दिए। अब और गहरा घुस रहा था। मारिया की आंखों में आंसू आ रहे थे - दर्द से, और मज़े से।
"घोड़ी बनो," नारायण ने कहा।
मारिया घुटनों के बल आई। नारायण पीछे से आया और उसकी गांड देखने लगा। "क्या गांड है साली... इतनी बड़ी..."
उसने थप्पट मारा। "स्मैक!"
"आह..."
फिर दूसरा थप्पट। "स्मैक!"
"उफ़... और मारो..."
नारायण ने अपना लंड उसकी चूत में डाला और पीछे से चोदने लगा। मारिया की गांड की दरार में उसका पेट हिट हो रहा था। वो उसके बूब्स पकड़कर खींच रहा था।
"आह... जोर से... और जोर से..." मारिया चिल्ला रही थी।
बिस्तर की स्प्रिंगें चर-चर की आवाजें कर रही थीं। अचानक एक तेज़ आवाज़ के साथ बिस्तर टूट गया। दोनों फर्श पर गिरे, पर रुके नहीं। नारायण ने मारिया को घुमाया, उसके पैर फैलाए, और फिर से चोदने लगा।
"अब गांड मारूं?" नारायण ने पूछा।
"नहीं... पहली बार है... दर्द होगा..."
"मज़ा भी आएगा..."
नारायण ने थूक लिया और अपने लंड पर लगाया। फिर मारिया की गांड के छेद पर रखा और धीरे से धक्का दिया।
"आह... बहुत दर्द हो रहा है..." मारिया चीखी।
"सहन करो थोड़ी देर... फिर मज़ा आएगा..."
नारायण का लंड धीरे-धीरे अंदर घुसा। मारिया की सांसें रुक सी गईं। पर फिर, जैसे-जैसे वो अंदर-बाहर होने लगा, दर्द कम होने लगा और मज़ा बढ़ने लगा।
"आह... हां... अब अच्छा लग रहा है..." मारिया ने कहा।
"कहती थी नहीं करूंगी... अब देखो कैसे मज़े ले रही हो," नारायण ने कहा, और जोर-जोर से गांड मारने लगा।
मारिया अपने हाथों से अपनी चूत सहला रही थी। दोनों छेदों में मज़ा simultaneously आ रहा था।
"मैं झड़ने वाला हूं..." नारायण ने कहा।
"अंदर ही छोड़ दो... गांड में ही..."
नारायण ने जोर से धक्के मारे और फिर अपना सारा वीर्य मारिया की गांड में भर दिया। गर्म वीर्य उसके अंदर बह रहा था, और मारिया भी झड़ गई।
दोनों एक-दूसरे से लिपटकर फर्श पर पड़े रहे। सांसें तेज़ चल रही थीं, शरीर पसीने से लथपथ थे।
सुबह के पांच बजे। नारायण उठा, अपने कपड़े पहने।
"मुझे जाना चाहिए, मम्मी-पापा उठ जाएंगे," उसने कहा।
मारिया ने उसे देखा। उसके शरीर पर लव बाइट्स थे, गांड और चूत में दर्द था, पर वो खुश थी।
"फिर मिलेंगे?" नारायण ने पूछा।
"हां," मारिया ने मुस्कुराते हुए कहा।
नारायण ने उसे किस किया और चला गया।
मारिया अकेली बिस्तर पर लेटी रही। उसने सोचा: "ये क्या था? मैंने क्या किया? पर... पर मुझे जिंदगी में पहली बार इतना मज़ा आया। मैं फिर से जवान महसूस कर रही हूं।"
उसने अपने फोन पर एक मैसेज टाइप किया: "थैंक्स... बेस्ट बर्थडे गिफ्ट एवर।"
नारायण ने रिप्लाई किया: "नेक्स्ट टाइम और भी मज़ा दूंगा।"
मारिया मुस्कुराई। उसे पता था कि ये सिर्फ शुरुआत थी।
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