मेरे रंडीबाज बनने का सफर-१: Antarvasna
- Karan Singh
- 4 hours ago
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नमस्कार दोस्तों, मेरा नाम करण है। मैं 28 वर्ष का हूँ और इंदौर में रहता हूँ। यहाँ मेरा अपना कैफ़े है। परिवार भोपाल का है, लेकिन पिछले 10 साल से इंदौर ही मेरा घर बन गया है।
मेरी शक्ल-सूरत बिल्कुल मामूली और साधारण है, लेकिन मेरा शरीर गठीला और एथलेटिक है। 5 फीट 10 इंच लंबा, साँवला रंग होने के बावजूद मेरी बातचीत का अंदाज़ और आकर्षक व्यक्तित्व लड़कियों को भाता है।
कॉलेज के फर्स्ट ईयर से ही मैंने रंडीबाज़ी शुरू कर दी थी। तब से लेकर आज तक मेरी भूख कभी नहीं रुकी।
अभी भी हर हफ्ते कम से कम एक नई रंडी को निशाना बनाता हूँ। मुझे सबसे ज्यादा मज़ा आता है जब कोई नई लड़की या आंटी मेरे सामने कुतिया बन जाती है। सबसे ज्यादा मजा मुझे अधेड़ उम्र वाली मोटी आंटियों की गांड मारने में आता है। खासकर उनकी मोटी, नरम, भारी गांड को थपथपाते हुए एनल सेक्स करने में।मेरा मानना है कि उम्र ढलने के बाद औरतों की चूत ढीली पड़ जाती है, लंड डालने में मजा नहीं आता। लेकिन गांड तंग और गरम रहती है। उसमें लंड घुसाने का जो स्वाद है, वो बेजोड़ है। मैं गांड मारने का दीवाना हूँ।
ये कहानी मेरे पहले अनुभव की है। मेरा असली पहला सेक्स।
कॉलेज फर्स्ट ईयर की बात है। मैं इंदौर आकर रहने लगा था। स्कूल में मैं पतला-दुबला, चिकना और शर्मीला लड़का था। रनिंग करता था, मगर कॉलेज आते ही मुठ मारने की लत लग गई। दिन-रात पॉर्न देखता और हस्तमैथुन करता। कॉलेज की लड़कियाँ मुझे भाव नहीं देती थीं। मैं उनसे बात करने की हिम्मत भी नहीं जुटा पाता था।
अंदर से तो भूख बहुत थी। आखिरकार मैंने फैसला किया — अब रंडी चोदनी है। घर से पैसे मिलते थे, इसलिए बजट था। किसी दोस्त से नंबर मंगवाया एक घंटे की सस्ती रंडी फिक्स की।
वो लगभग 45 साल की मुस्लिम औरत थी। नाम था शबनम। फोटो नहीं देखा था, सिर्फ रेट देखकर हाँ कर दी। काली, मोटी, चेहरे पर झुर्रियाँ, भारी शरीर वाली औरत। मैंने उससे फोन पर बात की और शाम को उसके घर जाने को कहा।
शाम को मैं उसके इलाके पहुँचा। पुरानी सी कॉलोनी, तंग गलियाँ। उसके कमरे का दरवाजा खटखटाया। अंदर से वो खुद आई।
“आजा अंदर बेटा,” उसने मुस्कुराते हुए कहा।
कमरा छोटा था, एक बिस्तर, फैन और हल्की सी रोशनी। मैं घबरा गया। दिल जोरों से धड़क रहा था। उसने दरवाजा बंद किया और बिंदास अपने कपड़े उतारने लगी। कोई शर्म नहीं। साड़ी निकाली, ब्लाउज उतारा। उसकी भारी, झूलती हुई गांडे और बड़े-बड़े स्तन बाहर आ गए। काली, मोटी, थोड़ी लटकती चूचियाँ और मोटी कमर।
मेरा लंड बिल्कुल खड़ा नहीं हो रहा था। डर के मारे हाथ-पैर काँप रहे थे। मैं सोच रहा था — भगवान, ये बूढ़ी औरत है, मैं इसके साथ कैसे चोदूंगा?
शबनम ने मेरी हालत देखी तो हँस दी। “पहली बार है क्या रे?” उसने पूछा।
मैंने सिर हिलाया। वो मेरे पास आई, और बोली, “घबराना मत। मैं सब सिखा दूंगी।”
उसने मुझे बिस्तर पर बिठाया। मेरी शर्ट उतारी। फिर मेरी पैंट की चेन खोली। मेरे लंड को हाथ में लेकर धीरे-धीरे सहलाने लगी। उसकी गर्म उँगलियाँ मेरे लंड पर फिर रही थीं। धीरे-धीरे मेरा लंड खड़ा होने लगा।
फिर उसने झुककर मुंह में ले लिया। गर्म, गीला मुंह। वो जोर-जोर से चूसने लगी। गला तक ले जाती, फिर बाहर निकालकर चाटती। मैं आँखें बंद करके बैठा था। मजा आने लगा।शबनम मेरे लंड को मुंह में लेकर जोर-जोर से चूस रही थी। उसका गर्म, गीला मुंह मेरे लंड को पूरी तरह निगल रहा था। वो गला तक ले जाती, फिर बाहर निकालकर जीभ से चाटती। मैं आँखें बंद किए बैठा था। पहली बार किसी औरत का मुंह मेरे लंड पर था। महज दो-तीन मिनट में ही मेरी बॉडी काँपने लगी।
“उफ्फ… मैं… मैं झड़ने वाला हूँ…” मैं हाँफते हुए बोला।
शबनम को समझ आ गया। वो मुंह बाहर निकालकर हाथ से तेजी से हिलाने लगी। मेरा पूरा शरीर काँप रहा था। आँखें बंद हो चुकी थीं। एक झटके के साथ मेरा माल उसके हाथ पर और थोड़ा मुंह के आसपास निकल गया। मैं बुरी तरह काँप रहा था।
शबनम ने हँसते हुए कहा, “अरे बाबू, इतनी जल्दी? पहली बार लगता है।”
मैं शर्म से गर्म हो गया। लेकिन पैसे एक घंटे के दिए थे, वसूल तो करना ही था। मन बिल्कुल नहीं कर रहा था, फिर भी हिम्मत जुटाई। मैंने उसे बिस्तर पर लिटाया और उसकी टाँगें फैला दी। उसकी काली, झुर्रीदार चूत सामने थी। मैंने उँगली डालनी शुरू की। अंदर गर्म और थोड़ी नम थी, लेकिन बहुत ढीली।
फिर मैंने अपना मुंह उसकी चूत के पास ले जाकर चाटने की कोशिश की। एक झटका लगा। भयंकर बदबू आई। दिन भर में जाने कितने लोगों ने इस औरत को चोदा होगा। वो सड़ी-गंध वाली महक थी। मेरा मन बिल्कुल नहीं किया। मैं तुरंत पीछे हट गया।
शबनम ने देखा तो पूछा, “क्या हुआ?”
मैंने कुछ नहीं कहा। मेरी नजर उसकी मोटी, भारी गांड पर पड़ी। मैंने सोचा — शायद इसकी गांड किसी ने ज्यादा नहीं मारी होगी। मैंने उसे पेट के बल लिटाया और उसकी दोनों गांडों को हाथों से फैला दिया।
पहली बार था। मैंने झुककर उसकी गांड के छेद को देखा। थोड़ा सा गुलाबी-काला। मैंने हिचकिचाते हुए अपनी जीभ निकाली और हल्का-सा चाटा। अजीब सा स्वाद और हल्की बदबू आई। लेकिन मैं रुका नहीं।
“प्लीज़ शबनम, थोड़ा साफ कर लो,” मैंने कहा।
वो हँसी और बाथरूम जाकर दो मिनट में वापस आ गई। मैंने फिर शुरू किया। इस बार मैं पागल हो गया। अपनी पूरी जीभ उसके गांड के छेद पर फेरने लगा। थूक लगाया, चाटा, चूसने लगा। नाक को पूरी तरह उसके गांड में दबा दिया। जीभ अंदर डालने की कोशिश की।
शबनम पहले तो चौंक गई, फिर कराहने लगी — “आह्ह्ह… क्या कर रहे हो बाबू… आज तक किसी ने ये नहीं किया…”
मैं और दीवाना हो गया। आधे घंटे तक लगातार उसकी गांड चाटता रहा। दोनों हाथों से उसकी मोटी गांड फैलाए रखा, जीभ घुमाता, चूसता, थूक से गीला करता। उसकी गांड पूरी तरह चिकनी और गीली हो गई थी। वो बार-बार काँप रही थी और तकिए में मुँह दबाकर कराह रही थी।
शबनम की मोटी गांड मेरे चेहरे पर दब रही थी। मेरा पूरा चेहरा अपने ही थूक से तरबतर हो चुका था। मैं उसकी काली, भारी चूतड़ को दोनों हाथों से फैलाए हुए था और अपना पूरा मुँह उसके गांड के छेद में दबाए हुए था। नाक पूरी तरह अंदर घुसाए मैं सूँघ रहा था। शुरू-शुरू में बदबू आई थी, लेकिन अब वो गंदी खुशबू मुझे पागल कर रही थी। मैं जीभ अंदर घुसा-घुसाकर चाट रहा था, चूस रहा था, थूक रहा था।
“हाँ रंडी… अपनी गांड चाटवा…” मैं गंदी आवाज़ में बुदबुदाया।
शबनम हँसते हुए बोली, “कुत्ता बन गया है बाबू… ले, और चाट।”
फिर मैंने कहा, “आ मेरे मुँह पर बैठ जा साली।”
मैं सीधा लेट गया। शबनम ने अपनी मोटी टाँगें फैलाकर मेरे चेहरे पर बैठ गई। उसकी भारी, गर्म गांड मेरे मुँह और नाक पर पूरी तरह दब गई। उसका सामने वाला हिस्सा मेरे होंठों पर था। मैंने दोनों हाथों से उसकी टाँगें पकड़ लीं। वो अपने बाएँ हाथ से मेरे लंड को पकड़कर हिलाने लगी। पहले अपने मुँह में थूक लगाया, फिर मेरे लंड पर चुपड़ दिया और जोर-जोर से मुठ मारने लगी।
धीरे-धीरे वो मेरे मुँह पर उठक-बैठक करने लगी। उसकी गीली गांड मेरे चेहरे पर रगड़ खा रही थी। मेरा मुँह लार और उसके गांड के रस से भर गया था। मैं जीभ बाहर निकालकर उसके गांड के छेद में बार-बार घुसा रहा था। जितना गहरा घुसा सकता था, उतना घुसा रहा था।
“चाट… और चाट मेरी गांड… आह्ह्ह…” शबनम कराह रही थी।
मैं कुत्ते की तरह उसकी गांड चाटने में इतना व्यस्त था कि कुछ नहीं बोला। बस चूसता रहा, चाटता रहा।
उसकी गांड अब पूरी तरह भीग चुकी थी मेरे थूक से। वो मेरे मुँह पर बैठकर अपनी गांड हिला रही थी। मैं साँस लेने के लिए भी मुश्किल से जगह पा रहा था। उसकी मोटी चूतड़ मेरे नाक-मुँह को दबाए हुए थी। फिर भी मैं जीभ हिलाता रहा, गांड का छेद चूसता रहा।
थोड़ी देर बाद मेरी बॉडी फिर से काँपने लगी। लंड फटने वाला था। शबनम को समझ आ गया। उसने अपने कठोर, मोटे हाथों से मेरे लंड को और तेज़ी से आगे-पीछे करने लगी। पूरा जोर लगाकर मुठ मार रही थी।
“झड़ने वाला है क्या बाबू? हाँ… झड़ जा…” वो हाँफते हुए बोली।
मैंने अपनी पूरी ताकत से जीभ उसके गांड के अंदर घुसाने की कोशिश की। जितना लंबा हो सकता था, उतना अंदर ठेल दिया। शबनम जोर से चीख पड़ी — “आआआह्ह्ह… मर गई रे… फट गई मेरी गांड…!”
तभी उसके गांड से एक जोरदार गर्म पाद निकला और सीधा मेरी जीभ पर लग गया। बहूत गंदा, सड़ा हुआ स्वाद था — जैसे सड़ी हुई हवा और मल का मिला-जुला स्वाद। मुझे उल्टी जैसा महसूस हुआ, आँखें पानी से भर गईं। लेकिन उसी पल मेरी बॉडी काँप उठी। मेरा लंड फूट पड़ा और गाढ़ा माल शबनम के हाथ पर छूट गया।
इतने में मेरा लंड फूट पड़ा। गाढ़ा-गाढ़ा माल उसके हाथ पर, पेट पर और मेरी छाती पर छूट गया। हम दोनों पसीने से भीगे हुए थे। थकान से हाँफ रहे थे। जैसे दो कुत्ते चुदाई के बाद अलग हुए हों।
हम दोनों पसीने से तरबतर होकर 10 मिनट तक बिस्तर पर लेटे रहे। मेरे मुँह में अभी भी उसकी मोटी गांड का गंदा स्वाद घुला हुआ था। शबनम हाँफ रही थी, उसकी गांड लाल होकर सूज गई थी। मैं उठा और बाथरूम गया। मुँह धोया, लेकिन जीभ पर अभी भी उसकी गांड का सड़ा-पड़ा स्वाद चिपका हुआ था। मन बिल्कुल नहीं भरा था। लंड फिर से आधा खड़ा हो रहा था।
मैं वापस आया और बोला, “शबनम, 69 करेंगी?”
वो हँसी,
मैंने कहा, “पहले अपनी ढीली चूत धोकर आ।”
उसने बाथरूम जाकर चूत धो ली और नंगी बिस्तर पर लेट गई। मैं उसके ऊपर 69 पोजीशन में लेट गया। मेरी नाक उसकी काली, झुर्रीदार चूत पर और मेरा लंड उसके मुँह के पास।
मैंने उसकी मोटी टाँगें फैलाकर उसकी चूत चाटनी शुरू कर दी। ढीली, गीली, बदबूदार चूत। जीभ अंदर डालकर चूसने लगा। शबनम ने मेरा लंड मुंह में भरा और जोर-जोर से चूसने लगी। कभी-कभी वो मेरी गांड तक जीभ फेर देती। उसकी गर्म जीभ मेरे गांड के छेद पर पड़ते ही मेरी आत्मा निकल गई।
“आह्ह्ह… साली रंडी… मेरी गांड चाट… हाँ… गहरी चाट…” मैं कराह रहा था।
10 मिनट तक हम दोनों एक-दूसरे की चूत-लंड चूसते रहे। मैं उसकी चूत को चाट-चाटकर निगल रहा था, वो मेरे लंड को गले तक उतार रही थी। मजा इतना आ रहा था कि लग रहा था स्वर्ग मिल गया।
अचानक मुझे लगा मैं झड़ने वाला हूँ। मैंने झटके से अपना मोटा लंड उसके मुंह में ठेल दिया। शबनम ने बाहर निकालने की कोशिश की, लेकिन मैंने उसका सिर दोनों हाथों से पकड़ लिया और पूरी ताकत से गले तक लंड घुसा दिया।
“ले साली… पूरा लंड चूस…”
उसका गला फूल गया। आँखों से आँसू बहने लगे, नाक से पानी निकलने लगा। वो चटपटा रही थी, हाथ-पैर मार रही थी, लेकिन मैंने अपना पूरा वजन डालकर लंड गले के अंदर तक ठूंस रखा। उसका दम घुट रहा था। मैंने और जोर लगाया।
“हाँ रंडी… गला चोद रहा हूँ तेरी… ले मेरा माल…”
इतने में मेरा लंड फूट पड़ा। गाढ़ा-गाढ़ा गरम माल सीधा उसके गले में उछाल दिया। मैंने झड़ते तक लंड गले में ही दबाए रखा। शबनम की आँखें बाहर निकल रही थीं।
जैसे ही मैंने लंड बाहर निकाला, वो जानवर की तरह हाँफने लगी। “खां-खां…” और अचानक उसने बिस्तर पर ही उल्टी कर दी। सारा मेरा माल और थूक उसके मुँह से निकलकर बिस्तर पर फैल गया।
“हरामी कुत्ते… मादरचोद… गला फाड़ दिया… निकल जा यहाँ से… भोसड़ीके…” वो गुस्से से चीखते हुए गालियाँ बकने लगी।
मैंने कपड़े पहने। वो अभी भी नंगी चीख रही थी, “
, “हरामी… निकल जा यहाँ से!”
लेकिन थोड़ी देर बाद वो शांत हुई। साँस संभालकर बोली, “पहली बार किसी ने मेरी गांड इतनी जोर से चाटी और चोदी है। आज तक किसी ने मेरी गांड पर मुँह नहीं लगाया था…
उसने मुस्कुराते हुए कहा, “अब बार-बार आना। मेरी गांड तेरे लिए खुली रहेगी।”
मैंने हँसकर सिर हिलाया, “हाँ शबनम, जरूर आऊंगा।”
पैसे देकर मैंने उससे विदा ली।
उसी दिन से मेरी गांड चोदने की भूख शुरू हुई जो आज तक नहीं रुकी।
दोस्तों, ये थी मेरी पहली रंडीबाज़ी की सच्ची कहानी। शबनम जैसी अधेड़, मोटी, काली रंडी की गांड चाटने, और गला चोदने का वो पहला अनुभव आज भी मेरे लंड को खड़ा कर देता है। उसके बाद तो मैं पक्का गांड-प्रेमी बन गया। अब हर हफ्ते नई-नई आंटियों और रंडियों की चूत-गांड फाड़ता हूँ।
अगर आपको मेरी ये गंदी, Antarvasna Sex Stories पसंद आई हो तो कमेंट में जरूर बताना। अगली कहानी में मैं आपको अपनी रेस्टोरेंट वाली यामिनी आंटी को कैसे बाथरूम में कुतिया बनाकर चोदा, वो सुनाऊंगा।
आप मुजे ईमेल करके जरूर फीडबैक दे।

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