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शादीशुदा दीदी के साथ बाथरूम में मजे : Antarvasana Sex Stories

ये कहानी उस गर्मी की छुट्टियों की है जब मैं अपनी बुआ के घर मुंबई गया हुआ था। मेरी ज़िंदगी का ये Antarvasana भरा किस्सा है, एक ऐसी Sex Stories जो मैं आज तक किसी को नहीं सुना पाया। ये मेरी अपनी सच्ची कहानी है, जिसे मैं हमेशा से अपने दिल में दबाए घूमता रहा। मेरा नाम अभय है और उस वक्त मैं 20 साल का था, कॉलेज की छुट्टियों में बेरोज़गार और आवारा सा। बुआ का घर अंधेरी के एक पुराने इलाके में था, एक बड़ी सी बिल्डिंग का चौथा फ्लोर। बुआ के घर का सबसे बड़ा आकर्षण था उनके घर का बाथरूम, जो बहुत बड़ा और आलीशान था, जिसमें एक बड़ा सा बाथटब भी लगा हुआ था।


मेरी बुआ के साथ उनकी बड़ी बेटी यानी मेरी चचेरी दीदी स्नेहा भी रहती थीं। स्नेहा दीदी की शादी को तीन साल हो गए थे, लेकिन जीजाजी आर्मी में थे और अक्सर पोस्टिंग पर बाहर रहते थे। इसलिए स्नेहा दीदी ज़्यादातर अपने मायके यानी बुआ के घर पर ही रहती थीं। स्नेहा दीदी की उम्र 28 साल थी और वो बेहद खूबसूरत थीं। उनकी त्वचा दूध जैसी गोरी थी, बाल घने और लंबे, और शरीर पर एक अद्भुत गठन। शादी के बाद उनका बदन और भी भर गया था, खासकर उनकी छाती और कूल्हे। मैं उन्हें देखकर हमेशा से एक अजीब सी खिंचाव महसूस करता था, लेकिन रिश्ते की मर्यादा ने मुझे हमेशा रोक रखा था। इंटरनेट पर मैं अक्सर Antarvasana और Sex Stories जैसी चीज़ें पढ़ता रहता, और सोचता कि काश मेरी ज़िंदगी में भी कुछ ऐसा रोमांच हो। शादीशुदा दीदी के साथ ये कहानी मेरी ज़िंदगी का सबसे बड़ा राज़ है।


बुआ का घर दिन में ज़्यादातर सूना रहता था। बुआ अपनी सोशल सर्विस की मीटिंग्स में व्यस्त रहती थीं और घर पर सिर्फ मैं, स्नेहा दीदी और एक नौकरानी होती थी। दोपहर के वक्त नौकरानी भी चली जाती थी। स्नेहा दीदी मुझसे बहुत प्यार से बात करती थीं, अक्सर मुझे अपने कमरे में बुलाकर कॉलेज के किस्से पूछती रहतीं। वो अक्सर घर में हल्के कपड़ों में ही रहती थीं, जैसे कि शॉर्ट नाइटी या पतली सी साड़ी। एक दिन दोपहर में मुंबई की उमस भरी गर्मी अपने चरम पर थी। बुआ बाहर गयी हुई थीं और नौकरानी भी काम खत्म करके जा चुकी थी। घर में सिर्फ हम दो लोग थे। स्नेहा दीदी ने कहा, |अभय, इतनी गर्मी हो रही है, मैं बाथरूम जा रही हूँ थोड़ी देर ठंडे पानी में आराम करने। बाहर का दरवाज़ा ध्यान से बंद कर देना।| मैंने सिर हिलाया और वो अपने कमरे के अंदर घुस गयीं। मैं हॉल में बैठा टीवी देख रहा था, लेकिन मेरा पूरा ध्यान बाथरूम की तरफ था। मैं सोच रहा था कि वो अंदर नहा रही होंगी, उनकी गीली देह कैसी लग रही होगी। मेरा लण्ड पैंट में ही तन गया था।


करीब पंद्रह मिनट बाद अचानक बाथरूम के अंदर से एक ज़ोर की आवाज़ आयी, जैसे कुछ गिरा हो, और फिर स्नेहा दीदी की हल्की सी चीख। मैं घबराकर उठा और उनके कमरे की तरफ भागा। बाथरूम का दरवाज़ा अंदर से बंद था। मैंने आवाज़ लगायी, |दीदी, क्या हुआ? सब ठीक है?| अंदर से स्नेहा दीदी की दबी-दबी सी आवाज़ आयी, |अभय, मेरा पैर फिसल गया… मुझे बहुत चोट लग गयी है, मैं उठ नहीं पा रही।| मेरी साँसें तेज़ हो गयीं। मैंने कहा, |दीदी, दरवाज़ा खोलो न।| वो बोलीं, |मैं खोल नहीं पा रही… तू ही अंदर आ, दरवाज़े की कुंडी बाहर से खुल जाएगी।| मैंने हिम्मत की और दरवाज़े की कुंडी खोल दी। दरवाज़ा खुला तो अंदर का नज़ारा देखकर मेरी साँसें रुक गयीं।


स्नेहा दीदी बाथटब से बाहर फर्श पर गिरी पड़ी थीं। उनके बदन पर सिर्फ एक पतला सा तौलिया था, जो अब आधा खुल चुका था। उनके गीले बाल फर्श पर बिखरे हुए थे और उनकी आँखों में दर्द और शर्मिंदगी का मेल था। तौलिया उनकी जाँघों तक ही था, और उनके भारी स्तन लगभग नंगे थे, बस एक सिरा उनपर पड़ा हुआ था। मैंने अपनी नज़रें उनके शरीर से हटाने की बहुत कोशिश की, लेकिन नहीं हटा पाया। मैंने झट से कहा, |दीदी, आप घबराओ मत, मैं हूँ।| मैं उनके पास गया और उनका हाथ पकड़ कर उन्हें सहारा देने की कोशिश की। उनकी त्वचा गीली और मुलायम थी, और उनके शरीर से शैंपू और साबुन की खुशबू आ रही थी। जैसे ही मैंने उन्हें उठाने की कोशिश की, मेरा हाथ उनकी पीठ पर फिसला और वो तौलिया पूरी तरह से खुल गया। अब स्नेहा दीदी पूरी तरह से नंगी मेरी बाहों में थीं।


उन्होंने तुरंत अपने हाथों से अपनी चुत और स्तनों को ढकने की कोशिश की, लेकिन एक पैर में मोच आने की वजह से वो गिर पड़ीं और मुझसे लिपट गयीं। मैंने उन्हें संभाला। हमारे चेहरे एक-दूसरे के बेहद करीब थे। उनकी साँसें तेज़ और गर्म थीं। मैंने हिम्मत करके कहा, |दीदी, पहले मैं आपको बाथटब तक ले चलता हूँ, वहाँ आप आराम से बैठ जाइए।| उसने धीरे से सिर हिला दिया। मैंने उनकी कमर में हाथ डाला और उन्हें सहारा देकर बाथटब तक ले गया। बाथटब में पानी भरा हुआ था और उसमें गुलाब की पंखुड़ियाँ तैर रही थीं। मैंने उन्हें धीरे से बाथटब में बिठा दिया। पानी में उनके शरीर का निचला हिस्सा छुप गया, लेकिन उनके स्तन अभी भी पानी के ऊपर तैर रहे थे। वो दर्द से कराह रही थीं और उनका पैर सूज गया था। ये मेरी ज़िंदगी का वो लम्हा था जिसे मैं कभी भुला नहीं सकता, एक ऐसा सच जिसे मैं हमेशा से छुपाना चाहता था।


मैंने कहा, |दीदी, आपका पैर तो बहुत सूज गया है। मुझे मालिश करनी आती है, क्या मैं करूँ?| उसने अपने होंठ दबाए और कहा, |ठीक है, लेकिन ज़्यादा ज़ोर से नहीं करना।| मैंने बाथटब के किनारे बैठकर उनके पैर को अपनी गोद में रख लिया। मेरा एक हाथ उनके पैर के तलवे पर था और दूसरा उनकी पिंडली पर। मैं धीरे-धीरे मालिश करने लगा। उसने अपनी आँखें बंद कर लीं और कराहने लगी, |हाँ… यहीं दर्द हो रहा है…| मेरी उँगलियाँ उनकी मुलायम त्वचा पर फिसल रही थीं। मेरा लण्ड अब मेरी शॉर्ट्स में पूरी तरह तन चुका था और वहाँ पर एक सख्त उभार बन गया था। स्नेहा दीदी ने अपनी आँखें खोलीं और उनकी नज़र सीधे मेरे उभार पर पड़ी। वो शरमा कर नज़रें फेरने लगीं, लेकिन मैंने देखा कि उनकी साँसें और तेज़ हो गयी थीं। उन्होंने कहा, |अभय, तू तो बहुत बड़ा हो गया है।| ये वाक्य सुनकर मेरे शरीर में बिजली सी दौड़ गयी।


मैंने हिम्मत करके अपना हाथ उनकी पिंडली से ऊपर की तरफ बढ़ाया। मेरा हाथ उनके घुटने को पार कर गया और उनकी जाँघ पर पहुँच गया। उसने एक गहरी साँस ली और मेरा हाथ पकड़ लिया। उसने कहा, |अभय, ये गलत है…| मैंने उसकी आँखों में देखा और कहा, |दीदी, मैं आपको बहुत पसंद करता हूँ। बचपन से। प्लीज़, मुझे मना मत करिए।| मेरी बात सुनकर वो चुप हो गयीं। मैंने अपना हाथ आगे बढ़ाया और पानी के अंदर उनकी जाँघों के बीच अपनी उँगलियाँ फेरीं। उसने ज़ोर से मेरी कलाई पकड़ ली, लेकिन रोका नहीं। मेरी उँगलियाँ उसकी चुत पर पहुँच गयीं। वो पहले से ही पूरी तरह गीली थी, और वहाँ की गर्मी पानी से भी अलग थी। मैंने उसके चूत के होंठों को सहलाना शुरू कर दिया। वो ज़ोर से कराह उठी, |आआह्ह्ह्ह… अभय… क्या कर रहा है तू…| लेकिन उसने मेरा हाथ नहीं हटाया।


स्नेहा दीदी ने अपना शरीर बाथटब में पीछे की तरफ सरका लिया और अपनी टाँगें थोड़ी और खोल दीं। मैं समझ गया कि अब उसे कोई आपत्ति नहीं है। मैंने अपनी शॉर्ट्स और टी-शर्ट उतार फेंकी और बाथटब में उतर गया। गर्म पानी में हमारे नंगे शरीर एक-दूसरे से लिपट गए। मैंने उसे अपनी बाहों में भर लिया और उसके गीले होंठों को चूम लिया। उसने मेरे चुंबन का जवाब दिया, और हमारी ज़बानें पानी के अंदर भी आपस में लड़ रही थीं। मेरा हाथ उसके स्तनों पर गया। उसके स्तन बहुत बड़े और मुलायम थे, और उनका वज़न मेरे हाथों में आकर मुझे पागल कर रहा था। मैंने उसके निप्पल को पकड़कर हल्के से दबाया। वो मेरे होंठों पर ही कराह उठी।


उसने मेरा लण्ड पकड़ लिया। उसके हाथ का स्पर्श बहुत कोमल था। वो बोली, |इतना मोटा और सख्त है तेरा लण्ड, अभय।| मैंने कहा, |ये तो सिर्फ आपके लिए है, दीदी।| फिर मैंने उसे बाथटब के किनारे पर बिठा दिया, ताकि उसकी चुत पानी से बाहर आ जाए। मैंने उसके पैर फैलाए और अपना सिर उसकी जाँघों के बीच रख दिया। मैंने अपनी जीभ से उसकी चुत को चाटना शुरू कर दिया। स्नेहा दीदी ज़ोर से चिल्लाई, |आआअह्ह्ह्हह… हाँ अभय… ऐसे ही… मेरी चुत चाट…| मैं उसकी चुत को बड़े चाव से चाट रहा था, मानो कोई आइसक्रीम खा रहा हूँ। उसका स्वाद हल्का सा नमकीन और मीठा था। मेरी जीभ उसके क्लिट पर तेज़ी से घूम रही थी। उसने मेरे बाल पकड़ लिए और अपनी चुत को मेरे चेहरे पर ज़ोर से रगड़ने लगी। उसकी चूत का पानी मेरी ठुड्डी और गर्दन पर बह रहा था।


कुछ ही मिनटों में स्नेहा दीदी ज़ोर-ज़ोर से काँपने लगीं और उसकी चुत ने एक ज़ोरदार फुहार मेरे मुँह पर छोड़ दी। वो ज़ोर से चिल्लाकर झड़ गयीं। मैंने उसका सारा रस पी लिया। वो हाँफते हुए बोली, |अब मेरी बारी है।| उसने मुझे बाथटब के किनारे बिठा दिया और वो पानी में बैठे-बैठे मेरे सामने आ गयी। उसने मेरे लण्ड को अपने मुँह में ले लिया और ज़ोर-ज़ोर से चूसने लगी। उसका मुँह बहुत गर्म था। उसने मेरे पूरे लौड़े को अपने गले तक उतार लिया। मेरी आँखें बाहर की तरफ निकल गयीं। मैंने उसके बाल पकड़ लिए और ज़ोर से कराहा, |दीदी… आप तो बहुत अच्छा चूसती हैं…| वो मुस्कुरायी और और तेज़ी से मेरे लण्ड को चूसने लगी। उसके दाँत हल्के-हल्के मेरे लण्ड पर लग रहे थे, जो एक अद्भुत एहसास दे रहे थे।


फिर उसने मेरा लण्ड अपने मुँह से निकाला और बाथटब से बाहर निकल कर फर्श पर एक मैट पर हाथ टेक कर खड़ी हो गयी। उसने अपनी गीली गांड को मेरी तरफ कर दिया। पानी की बूँदें उसकी पीठ और कमर पर से बह रही थीं। ये नज़ारा बेहद कामुक था। उसने कहा, |अब मुझे यहाँ चोद, अभय। मुझे पूरी ताकत से चोद।| मैंने बाथटब से छलांग लगाई और उसके पीछे खड़ा हो गया। मैंने अपने लण्ड को उसकी चुत के मुहाने पर रखा और एक ही झटके में पूरा अंदर कर दिया। उसकी चुत अंदर से बहुत टाइट थी, और पानी की वजह से और भी फिसलन भरी हो गयी थी। वो ज़ोर से चिल्लाई, |आआअह्ह्ह्हह… मर गयी मैं…| मैंने उसकी कमर पकड़ ली और ज़ोर-ज़ोर से उसकी चुत में अपना लण्ड अंदर-बाहर करने लगा।


बाथरूम में हमारी चुदाई की आवाज़ें गूँज रही थीं। मेरे अंडे उसकी गांड पर तेज़ी से टकरा रहे थे, और उसके चूत से निकलने वाली चट-चट की आवाज़ें बाथरूम की दीवारों से टकराकर वापस आ रही थीं। मैं उसे ज़ोर-ज़ोर से चोद रहा था और वो लगातार चिल्ला रही थी, |हाँ… हाँ… मुझे चोद… मुझे चुदक्कड़ बना दे…| मेरा एक हाथ उसकी कमर पर था और दूसरा हाथ मैंने आगे ले जाकर उसके झूलते हुए स्तन को पकड़ लिया। मैंने उसके निप्पल को ज़ोर से मरोड़ा। वो दर्द और मज़े से कराह उठी। उसने मेरे लण्ड को अपनी चुत में कस कर पकड़ लिया, जिससे मेरी रफ़्तार और तेज़ हो गयी।


कुछ देर बाद, मैंने अपना लण्ड बाहर निकाला और स्नेहा दीदी को घुमाकर वॉशबेसिन के सामने खड़ा कर दिया। उसने शीशे में हमारा अक्स देखा। मैंने उसकी एक टाँग उठाई और उसे वॉशबेसिन पर टिका दिया। फिर मैंने खड़े-खड़े ही अपना लण्ड उसकी चुत में डाल दिया। ये पोज़िशन बहुत ही सेक्सी थी, क्योंकि हम दोनों शीशे में एक-दूसरे को देख पा रहे थे। उसके स्तन ज़ोर-ज़ोर से हिल रहे थे और उसकी आँखें मस्ती से भरी हुई थीं। मैंने उसके कान में फुसफुसाया, |दीदी, आप तो चुदक्कड़ निकलीं।| वो शरमा कर मुस्कुरायी और बोली, |तेरी वजह से, अभय। तू मुझे चोदता रह।| मैंने अपनी रफ़्तार बढ़ा दी और वॉशबेसिन हमारी चुदाई से हिलने लगा।


अचानक मुझे लगा कि मैं झड़ने वाला हूँ। मेरी साँसें बहुत तेज़ चल रही थीं और मेरे अंडे अकड़ गए थे। मैंने स्नेहा दीदी से कहा, |दीदी, मैं आपके मुँह में डालूँ?| वो तुरंत अपने घुटनों के बल बैठ गयी और मेरे लण्ड को अपने मुँह में भर लिया। उसने मेरे लौड़े को ज़ोर-ज़ोर से चूसना शुरू कर दिया। मैंने उसके बालों को कस कर पकड़ लिया और अपना सारा माल उसके गले के अंदर उड़ेल दिया। वो एक-एक बूंद पी गयी और फिर उसने अपनी जीभ से मेरे पूरे लण्ड को साफ कर दिया।


हम दोनों थके-हारे बाथरूम के फर्श पर लेट गए। कुछ देर बाद उठकर हमने एक-दूसरे को साबुन लगाकर नहलाया, और फिर से एक-दूसरे को चूमा और सहलाया। स्नेहा दीदी ने कहा, |अभय, आज का राज़ हमारे बीच ही रहेगा।| मैंने वादा किया। उस दिन के बाद, जब भी घर पर हम अकेले होते, वो बाथरूम हमारी पनाहगाह बन जाता। ये मेरी ज़िंदगी का वो अद्भुत Antarvasana है, एक ऐसी Stories जो मैं सिर्फ अपनी यादों में संजो कर रखता हूँ। शादीशुदा दीदी के साथ बाथरूम में वो मज़े, मेरी ज़िंदगी की सबसे बड़ी देन हैं।

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