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सामने वाले लड़के को फंसाया पेलवाने के लिए - Desi Sex Kahani

मेरा नाम सुधा है। मैं दो सालों से कामवासना पर कहानियाँ पढ़ रही हूँ तो मैंने सोचा आज क्यों न अपनी बात भी आप सब से शेयर करूँ? ओके, मैं कानपुर में रहती हूँ। और मेरे परिवार में एक बहन, एक भाई और मम्मी-पापा रहते हैं। और मेरे घर के सामने एक परिवार रहता है, उसमें एक अंकल और उनका लड़का है।


जब मैं २२ साल की थी तो मेरी शादी हो गई पर भगवान की मर्जी नहीं थी और मेरी शादी एक महीने बाद ही टूट गई और मैं अपने मायके वापस आ गई। तो वो लड़का मुझे और मेरी बहन को रोज अपनी खिड़की से देखता था। हम दोनों बहनें काफी बिंदास स्वभाव की हैं भी।


तो कुछ दिन तो मैंने अवॉइड किया पर मैंने भी सोच लिया कि जब तक शादी नहीं हो रही क्यों न इसी से मजा ले लूँ। तो मैंने सोच लिया कि इसे फँसाना है और वो भी लाइन में तो था ही। अब मैं उसे देखती तो कुछ ज्यादा ही उसे दिखाती।


एक दिन जब वो बरजे पर खड़ा था तो मैं एकदम नीचे को झुक गई जिससे मेरी जींस पीछे से उठ गई और मेरी पैंटी उसे थोड़ी सी दिख गई पर वो कुछ कर तो सकता नहीं था, देख कर रह गया बेचारा। फिर मैंने कुछ नो टॉप खरीदे जिनका गला काफी बड़ा था और उसमें से मेरी चूची दिखती थी और वो रोज देखता था।


एक दिन मैं अपने कमरे में थी। मेरे कमरे की खिड़की और उसके कमरे की खिड़की आमने-सामने है। तो मैंने रात को करीब 10 बजे देखा वो खिड़की खोलके बैठा है। तो मैंने अनजान बनते हुए अपने कपड़े उतारना शुरू किया जैसे मैंने उसे नहीं देखा और मैं सोने के लिए कपड़े उतार रही हूँ।


थोड़ी देर वो नहीं देखा तो मुझे बहुत गुस्सा आया तो मैंने अपने कमरे में एक एडल्ट मूवी प्ले कर दी और उसका साउंड काफी तेज कर दिया। तब उसका ध्यान गया। तब तक मैंने केवल अपना टॉप उतारा था। वो देखता रह गया, मेरी व्हाइट ब्रा पर उसकी निगाह गड़ गई।


पर मैंने अनजान बनते हुए अपनी ब्रा उतार के फेंक दी। फिर जैसे ही मैंने अपनी जींस उतार के फेंकी और अपनी पैंटी में हाथ डाल के उसे उतारने लगी, वो बोल ही दिया, “सुधा अरे क्या कर रही हो? तुममें कोई शर्म है कि नहीं? खिड़की खोलके कपड़े क्यों उतार रही हो?”


पर उसने अपनी आँख नहीं हटाई मेरे ऊपर से।


और मैंने बोला, “तुम ही हट जाओ, क्यों देख रहे हो?”


तो वो बड़ी बेशर्मी से बोला, “मैं क्यों हटूँ? इतना बढ़िया ब्लू फिल्म वो भी फ्री में, क्यों न देखूँ?”


तो मैंने बोला, “मैंने मना किया है क्या? देखो ना।”


तो वो बोला कि दूर से नहीं, मेरे पास आओ, मैं ही उतार दूँ ना।


तो मैंने बोला, “पागल हो क्या? अभी कैसे आ सकती हूँ? तुम एक काम करो, कल दिन में मेरे घर में कोई नहीं रहेगा, तब तक आ जाना।”


उसने कहा ओके।


और तब मैं अपनी खिड़की बंद किये बिना ही ऐसे ही सो गई। फिर मैंने उसे दूसरे दिन बुलाया। उस दिन मैंने लॉन्ग स्कर्ट और लूज गले का टॉप पहना था जिसमें से मेरा बूब साफ दिख रहा था। तो वो बोला, “अरे इसे क्यों खोला है? इसे ढक के रखा करो।”


तो मैंने गुस्से से बोला कि इसे ढक दूँगी तो तुम यहाँ आके क्या करोगे?


वो समझ गया कि मैं एकदम प्यासी हूँ।


तो वो बोला, “फिर जो कहो उसे करूँ, क्यों टाइम वेस्ट कर रही हो?”


मैंने कहा, “तो करो ना, मैं कब मना कर रही हूँ?”


वो बोला, “ओके डार्लिंग।”


मैं डार्लिंग सुनके एकदम मस्त हो गई। उसने मुझे गोद में उठा के बिस्तर पर बैठा दिया। क्योंकि घर में कोई नहीं था तो दरवाजा बंद करने की कोई जरूरत तो थी नहीं और मैं बिंदास उसके गोद में बैठी थी। मुझे बहुत अच्छा लग रहा था किसी मर्द की गोद में.


क्योंकि मेरी शादी जरूर एक महीने तक चली पर मेरा उनसे संबंध केवल एक दिन ही बना था वो भी सुहागरात को क्योंकि उनका साइज केवल 3 था और पतला सा तो वो मुझे उस दिन भी खुश नहीं कर पाए। यहाँ तक कि मेरी सील भी नहीं टूटी। तभी मैंने उन्हें तलाक भी दे दिया था।


हाँ तो आगे स्टोरी बढ़ाती हूँ। उसने मुझे गोद से उतार कर बगल में बिस्तर पर बैठा दिया। मैं बैठी देखती रही कि वो क्या करने वाला है। तब उसने अपने सारे कपड़े उतार दिए तो मैं उसका लंड देखकर दंग रह गई। करीब 7 इंच का था। वो मुझे वो देखकर अच्छा भी लगा और डर भी। मैंने सोचा कि कहीं आज मैं मर ही न जाऊँ।


तभी वो बोल पड़ा, “अरे डरो मत, मैं तुम्हें बड़े प्यार से खुश करूँगा, तुम डरो मत।”


और फिर बिस्तर पर आकर बैठ गया और मुझसे बोला कि अरे तुम भी तो कुछ हल्की हो जाओ। तो मैंने कुछ नहीं बोला तो उसने अपनी बात फिर से कही।


तो मैंने कहा, “अरे अब जो करना है तुम्हीं करो।”


उसने फिर कुछ नहीं कहा। और मुझे धीरे से गोद में बैठा के मेरे टॉप के बटन खोलने लगा। मुझे अच्छा लग रहा था। उसने मेरी टॉप उतार के फेंक दी। फिर वो मेरी ब्रा के हुक खोल दिया तो तुरंत ही मेरे दो 36 के कबूतर उड़ने को तैयार हो गए। उसने तुरंत ही उन्हें दोनों हाथों से पकड़ लिया और बड़ी बेदर्दी से मसलने लगा।


मैं दर्द से कराह उठी। मैंने कहा, “अरे कुत्ते छोड़ मुझे।” तो उसने अपनी पकड़ कुछ ढीली की तो मुझे कुछ आराम मिला। पर तुरंत ही उसने मेरी लेफ्ट चूची को अपने मुँह में डाल के चूसने लगा। मुझे ये करना अच्छा लगा और वो मेरी स्कर्ट के नाड़े को खोलने लगा पर वो उससे नहीं खुला बल्कि और फँस गया।


तब उसने मेरी चूची को मुँह से निकाला और अपना मुँह मेरी नाभि के पास लाके मेरे नाड़े को दाँत से काटने लगा और कभी-कभी अपनी जीभ मेरी नंगे पेट पर चला देता। मुझे बहुत अच्छा लगता उसका ऐसा करना। और थोड़ी देर में उसने नाड़े को अपने दाँत से काट दिया।


फिर उसने मुँह से ही स्कर्ट को पकड़ के नीचे सरकाना चाहा पर वो नहीं कर पाया तो उसने हाथ से मेरी स्कर्ट उतार दी। अब वो मुझे सिर्फ व्हाइट पैंटी में देखकर पागल हो गया। वो मेरी पैंटी पर टूट पड़ा पर उसने उसे उतारा नहीं, उसे अपने दाँत से काट डाला जैसे कोई चूहा करता है।


मैंने उसे मना किया क्योंकि कभी-कभी उसका दाँत मेरी गांड पर भी लगता था और मुझे एकदम दर्द होता पर उसने नहीं सुना और करीब 15 मिनट में मेरी पैंटी काट डाली और फेंक दी। उसके बाद तो वो मेरी चूत को देखता ही रह गया और पागल कुत्ते की तरह उसे चाटने लगा।


करीब आधे घंटे तक वो मेरी चूत को चाटता रहा और साथ में मेरे बूब को भी मसलता रहा। फिर मैंने कहा, “अरे मुझे भी चूसना है।” तो वो 69 में आ गया। फिर हमने करीब १ घंटे तक एक-दूसरे का जिभर से चाटा-चूसा। इस बीच मैं 3 बार झड़ गई और अंत में जब उसने मेरे मुँह में अपना कम छोड़ा तब हम अलग हुए।


फिर थोड़ी देर मैंने उसका चूस कर खड़ा किया और उससे कहा, “अब बस करो, अब मैं काम करो।”


उसने कहा क्या काम।


मैंने कहा, “अरे वही।”


वो बोला क्या।


वो मुझे परेशान कर रहा था।


मैंने कहा, “अरे मुझे शर्म आती है।”


उसने कहा, “जब तक तुम अपने मुँह से नहीं बोलोगी मैं नहीं करूँगा।”


तो मुझे बोलना पड़ा। मैंने कहा, “अरे बाबा चुदाई करो।” तब उसने मुझे सीधा लिटा दिया और मेरे पैरों को थोड़ा फैलाया और अपना सुपाड़ा मेरी चूत पर रख दिया और कोई रगड़े वगड़े बिना सीधा दबा दिया। अंदर की तरफ मैं चिल्ला उठी। तब वो गया और क्रीम ले आया और उसने ढेर सारी क्रीम मेरी बुर के अंदर डाल दी या ऐसे कहूँ मेरी बुर को क्रीम से भर दिया।


उसके बाद अपने लंड को क्रीम के डिब्बे में 5-6 बार अंदर-बाहर किया जैसे वो डिब्बे को चोद रहा हो। इस तरह उसके लंड पर भी क्रीम लग गई। तब उसने दुबारा धक्का लगाया और यकीन मानिए उसका 7 इंच का लंड बिना दर्द एक बार में ही पूरा अंदर चला गया। पर मुझे क्या पता।


मैंने बोला, “प्लीज धीरे डालो और थोड़ा रुक के बाकी डालना।”


तो वो बोला, “अरे जरा नीचे देखो, पूरा लंड अंदर है।”


फिर उसने अंदर-बाहर करना शुरू किया और करीब 30 मिनट तक करता रहा और उसकी स्पीड बहुत तेज थी। मुझे बहुत मजा आ रहा था। करीब 30 मिनट में मैं 5 बार झड़ी और बाद में वो झड़ गया। उसने अपना पूरा वीर्य मेरी चूत में ही छोड़ दिया और हम ऐसे लंड अंदर डाले ही लेटे थे। उसका सिर मेरे बूब पर था।


जब थोड़ी देर बाद हमारी थकान दूर हुई तो वो बोला, “अब पीछे से हो जाए।”


मैं कहा, “पागल हो क्या? मैं मर जाऊँगी।”


तब वो बोला, “अरे क्यों डरती हो?”


मन तो मेरा भी था। मैं कुछ बोल न सकी। उसने फिर से क्रीम का डिब्बा उठाया और इस बार क्रीम मेरी गांड में भरने लगा। उसने अपनी 2 उँगलियों पर ढेर सारा क्रीम रखा और अपनी दोनों उँगलियाँ मेरी गांड में डाल दी। मैं उछल पड़ी। ये कहानी आप हमारी वासना डॉट डॉट नेट पर पढ़ रहे है.


मैंने बोला, “क्या कर रहे हो? दर्द हो रहा है।”


वो गुस्सा हो गया और बोल पड़ा, “चुपचाप पड़ी रह साली रंडी कहीं की।”


मैं चुप हो गई। थोड़ी देर में उसने ढेर सारी क्रीम मेरी गांड में भर दी। फिर अपना लौड़े पर क्रीम लगा के मुझे गधी बना दिया और मेरे बूब को पकड़ के मुझे पेलने लगा और 30 मिनट तक उसने मेरी गांड भी मारी। पर क्रीम लगे होने पर भी मुझे बहुत दर्द हुआ पर मजा भी बहुत आया। फिर जब उसका कम मेरी गांड में भर गया तो वो उठा और मेरी गांड को देखकर हँसने लगा।


बोला, “देखो कितनी सूज गई है और इसके छेद तो देखो” और हँसने लगा।


फिर मैंने कहा, “अब बस करो, मेरे पैरेंट्स के आने का टाइम हो रहा है।”


तो वो बोला, “ओके लाओ मैं तुम्हारी चूत और गांड साफ कर दूँ।”


मैंने कहा ओके।


तो उसने चादर को उंगली में लगा के मेरी चूत में डाला और कस के अपनी उंगली मेरी चूत के अंदर घुमा दी। मैं दर्द से चिल्ला उठी।


मैंने कहा, “क्या कर रहे हो?”


वो बोला, “बस हो गया, सारा कम बाहर निकल गया।”


फिर उसने यही मेरी गांड के साथ किया।


फिर बोला, “अब तुम मेरे लंड को साफ कर दो।”


मैंने भी उसे चाट कर साफ कर दिया। फिर वो अपने कपड़े पहन के चला गया और मैंने अपने कपड़े पहन लिए। किसी को कुछ पता नहीं चला। पर मुझसे एक भूल हो गई। मैंने ध्यान नहीं दिया कि उसने मेरी पैंटी काट कर रूम में ही फेंक दी थी और मैं अभी बिना पैंटी की हूँ। तो जब मैं रात को अपनी बहन के साथ सोने लगी तो जब मैंने कपड़ा उतारा क्योंकि हम बहनें रात को नंगी ही सोती हैं तो वो बोल पड़ी, “दीदी तुम्हारी पैंटी कहाँ है?”


मैंने झूठ बोलना चाहा, “आज मैंने नहीं पहनी थी।”


तो वो बोली, “तुम झूठ बोल रही हो, तुम्हारी पैंटी नीचे कटी हुई पड़ी है। सच बताओ नहीं तो मैं पापा को बोल दूँगी।”


मैं डर गई और मैंने उसे बता दिया कि मैं समर से चुदी थी आज। उसने मेरी पैंटी काटके फेंक दी।


तो गुस्से के बजाय बोली, “मुझे पता था। पर तुम मेरा एक काम करो, मुझे भी समर से चुदवाना है। तुम मेरी हेल्प करो नहीं तो मैं पापा को बोल दूँगी।”


मैंने कहा, “अरे कोई दिक्कत नहीं है। कल जब मम्मी-पापा चले जाएँगे तब तुम उनके साथ मत जाना, कोई बहाना करके घर पर रुक जाना बस।”


उसने कहा ओके।


मैंने हाँ कह दी, क्योंकि सच कहूँ तो मुझे भी मजा आ रहा था इस खेल में। शिल्पी मेरी छोटी बहन है, उम्र 20 साल, बहुत गोरी, पतली कमर, बड़े-बड़े बूब्स (34 साइज के आसपास), और गोल-गोल गांड। हम दोनों बहनें दिखने में काफी मिलती-जुलती हैं, बस वो मुझसे थोड़ी ज्यादा शरमाती है, लेकिन अंदर से उतनी ही प्यासी थी जितनी मैं। ये कहानी आप हमारी वासना डॉट डॉट नेट पर पढ़ रहे है.


अगले दिन मम्मी-पापा और भाई कहीं बाहर गए थे। मैंने शिल्पी को कहा कि तू घर पर रुक जा, बहाना बना ले। वो मुस्कुरा कर बोली, “दीदी, मैं तैयार हूँ।” मैंने समर को फोन किया और बोला, “आज आ जा, लेकिन सरप्राइज है।” वो उत्साहित होकर आ गया। जब वो घर में घुसा तो मैंने दरवाजा बंद कर दिया। वो मुझे देखकर लपका और मुझे किस करने लगा।


मैंने उसे रोका और बोला, “रुक, पहले मेरी बहन से मिल।”


शिल्पी दूसरे कमरे से शरमाते हुए आई। उसने पिंक कलर की टाइट टी-शर्ट और शॉर्ट स्कर्ट पहनी थी, जिसमें उसके गोरे पैर और बूब्स साफ दिख रहे थे। समर की आँखें फटी की फटी रह गईं।


वो बोला, “ये… ये तुम्हारी बहन?”


मैंने हँसते हुए कहा, “हाँ, और आज तू हम दोनों को एक साथ चोदने वाला है।”


समर का लंड तो पहले से ही खड़ा था, अब तो और जोर से फड़फड़ाने लगा। शिल्पी शर्मा रही थी, लेकिन उसकी आँखों में भी वो ही प्यास थी जो मेरी में थी। मैंने समर का हाथ पकड़ा और उसे बेडरूम में ले गई। शिल्पी भी पीछे-पीछे आई। कमरे में बड़ा डबल बेड था।


मैंने समर को बिठाया और बोला, “आज हम दोनों तेरी रंडियाँ हैं। जो चाहे कर।”


समर खुशी से पागल हो गया। उसने पहले मुझे अपनी गोद में उठाया और जोर से किस किया। उसके होठ मेरे होठों पर थे, जीभ अंदर डालकर चूस रहा था। मैं भी उसका साथ दे रही थी। शिल्पी बगल में खड़ी देख रही थी, उसका चेहरा लाल हो गया था।


समर ने मुझे बेड पर लिटाया और मेरे कपड़े उतारने लगा। पहले टी-शर्ट ऊपर की, फिर ब्रा खोल दी। मेरे ३६ साइज के बूब्स बाहर आ गए। वो उन्हें देखकर बोला, “वाह सुधा, तेरे बूब्स तो और बड़े हो गए लगते हैं।” फिर उसने एक बूब को मुँह में लिया और चूसने लगा। दूसरा हाथ से मसल रहा था।


मुझे बहुत मजा आ रहा था। मैंने शिल्पी को इशारा किया कि आ जा। वो धीरे से बेड पर आई और मेरे बगल में लेट गई। समर ने शिल्पी को देखा और बोला, “तेरी बहन भी तो कम नहीं है।” फिर उसने शिल्पी की टी-शर्ट ऊपर की। शिल्पी ने ब्लैक ब्रा पहनी थी।


उसके बूब्स भी मेरे जैसे ही बड़े और गोल थे। समर ने उसकी ब्रा भी खोल दी। अब हम दोनों बहनें ऊपर से नंगी थीं। समर एक हाथ से मेरे बूब्स मसल रहा था और मुँह से शिल्पी के बूब्स चूस रहा था। शिल्पी की आँखें बंद थीं और वो “आह… आह…” कर रही थी। पहली बार किसी मर्द का मुँह उसके बूब्स पर था।


फिर समर ने हम दोनों की स्कर्ट और पैंटी उतार दी। हम दोनों पूरी नंगी हो गईं। समर ने भी अपने कपड़े उतार दिए। उसका 7 इंच का मोटा लंड देखकर शिल्पी डर गई। बोली, “दीदी, ये तो बहुत बड़ा है, मेरी तो फट जाएगी।” मैंने हँसकर कहा, “डर मत, मजा आएगा।”


समर ने पहले मेरी चूत पर उंगली फेरी। मैं तो पहले से ही गीली थी। फिर शिल्पी की चूत पर। शिल्पी की चूत पर हल्के बाल थे और वो भी गीली हो रही थी। समर ने हमें 69 पोजीशन में लिटाया। मैं ऊपर और शिल्पी नीचे। नहीं, पहले उसने मुझे और शिल्पी को बगल में लिटाया और खुद हमारे बीच में।


फिर उसने मेरी चूत चाटनी शुरू की और शिल्पी से कहा कि मेरा लंड चूस। शिल्पी शरमाते हुए उसका लंड मुँह में लेने लगी। मैं तो समर की जीभ से पागल हो रही थी। वो मेरी चूत में जीभ डालकर अंदर-बाहर कर रहा था। मैंने 2 बार झड़ गई। शिल्पी उसका लंड चूस रही थी, लेकिन पूरा मुँह में नहीं ले पा रही थी।


फिर समर ने शिल्पी को मेरे ऊपर लिटाया। हम दोनों बहनें एक-दूसरे के ऊपर। मेरे बूब्स शिल्पी के बूब्स से दब रहे थे। समर ने पीछे से शिल्पी की चूत में अपना लंड रगड़ना शुरू किया। शिल्पी डर रही थी। मैंने नीचे से शिल्पी के होठों को चूमा और बोला, “रिलैक्स कर।”


समर ने क्रीम लगाई (जो पिछले दिन से रखी थी) और धीरे-धीरे शिल्पी की चूत में घुसाया। शिल्पी चिल्लाई, “आह… दीदी… दर्द हो रहा है…” लेकिन समर नहीं रुका। आधा लंड अंदर गया तो शिल्पी रोने लगी। मैंने उसके बूब्स चूसकर शांत किया।


धीरे-धीरे समर ने पूरा लंड शिल्पी की चूत में डाल दिया। शिल्पी की सील टूट गई। थोड़ा खून निकला। लेकिन अब मजा आने लगा। समर धीरे-धीरे धक्के मारने लगा। शिल्पी की आँखें बंद थीं और वो “उंह… उंह…” कर रही थी। मैं नीचे से उसके बूब्स मसल रही थी। फिर समर ने स्पीड बढ़ाई।


शिल्पी भी अब नीचे से गांड उठा-उठाकर साथ दे रही थी। करीब 20 मिनट बाद शिल्पी झड़ गई। उसकी चूत से पानी निकला। समर ने लंड निकाला और मेरी चूत में डाल दिया। अब मेरी बारी थी। समर मुझे जोर-जोर से चोदने लगा। शिल्पी मेरे ऊपर थी, उसके बूब्स मेरे मुँह में थे।


मैं उन्हें चूस रही थी। समर पीछे से मुझे पेल रहा था। कमरा हमारी आहों और चुदाई की आवाजों से भर गया। मैं भी 3 बार झड़ गई। फिर समर ने हम दोनों को डॉगी स्टाइल में कर दिया। हम दोनों बहनें घुटनों के बल, गांड ऊपर करके। समर पहले मेरी चूत में लंड डालता, 10-15 धक्के मारता, फिर निकालकर शिल्पी की चूत में। हम दोनों की चूतें उसके लंड से चुद रही थीं। शिल्पी अब पूरी तरह मजे में थी।


वो बोली, “समर भैया, और जोर से… फाड़ दो मेरी चूत…”


मैं भी बोली, “हाँ, हम दोनों तेरी रंडियाँ हैं आज।”


समर पागल हो गया। उसने हम दोनों को बारी-बारी से चोदा। फिर उसने हमें लिटाया और हम दोनों के मुँह में अपना लंड डाला। हम दोनों बहनें मिलकर उसका लंड चूस रही थीं। एक जीभ सुपाड़े पर, दूसरी लंड पर। समर की साँसें तेज हो गईं। वो झड़ने वाला था।


उसने बोला, “मुँह में लूँ या चूत में?”


हम दोनों बोलीं, “चूत में।”


फिर समर ने पहले मेरी चूत में लंड डाला और आधा कम छोड़ा, फिर शिल्पी की चूत में बाकी। हम दोनों की चूत उसके वीर्य से भर गईं। हम तीनों पसीने से तर, एक-दूसरे से लिपटकर लेट गए। समर बोला, “तुम दोनों बहनें कमाल हो। आज जीवन का सबसे अच्छा दिन था।” हम दोनों हँस पड़ीं। फिर हमने नहाया। समर ने बाथरूम में भी हमें चोदा। पहले मुझे दीवार से सटाकर, फिर शिल्पी को। हम दोनों की चूत और गांड दोनों मारी उस दिन। शाम तक हम तीनों नंगे ही रहे। समर ने हमसे कहा कि अब वो हर हफ्ते आएगा।


हमने हाँ कह दी। उस दिन के बाद हमारी जिंदगी बदल गई। समर हम दोनों को बारी-बारी और कभी-कभी एक साथ चोदता। कभी हम उसके घर जाते, कभी वो हमारे। शिल्पी अब पूरी रंडी बन गई थी। वो समर से कहती, “भैया, आज गांड मारो।” मैं भी मजा लेती। हम दोनों बहनें अब एक-दूसरे को भी चूसतीं। समर हमें देखकर और उत्तेजित हो जाता। एक बार तो समर ने अपने दोस्त को भी बुलाया, लेकिन वो अलग कहानी है। आज तक हम तीनों का ये सिलसिला चल रहा है। समर का 7 इंच का लंड हम दोनों की चूत और गांड का मालिक है। हम खुश हैं, प्यास बुझती है।

 
 
 

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