हॉस्टल की वार्डन की ग्रुप में चुदाई - Antarvasna Sex Stories
- Kamvasna
- 3 days ago
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हेलो दोस्तों, मैं आपका दोस्त पीयूष हूँ। आज मैं आपको अपनी जिंदगी की सबसे गर्म और चुदासी रात के बारे में बताने जा रहा हूँ,
जब मैंने अपने तीन यारों – विजय, किशोर और गोविंद – के साथ मिलकर हॉस्टल की उस मोटी गांड वाली वॉर्डन मालती को चोदा था।
वो मालती, उफ्फ! क्या बला थी यार वो। वो 35 साल की विधवा गदराई औरत थी, लेकिन बदन ऐसा जैसे किसी पॉर्न स्टार का होता है।
ऊपर से उसके दो बड़े-बड़े चुचे, इतने मोटे ताज़े थे जैसे दो तरबूज लटक रहे हों, और नीचे वो गोल मटोल मोटी-मोटी गांड, जो चलते वक्त इतना हिलती कि किसी का भी लंड खड़ा हो जाए।
उसका रंग गोरा, चेहरा गोल-मटोल, होंठ मोटे और भरपूर रसीले थे, उसकी आँखें ऐसी लगती जैसे चुदाई की भूखी हों।
हमारे हॉस्टल में वो वार्डन थी, लेकिन लड़कों के बीच 'मालती रानी' कहलाती थी। हम चारों दोस्त इंजीनियरिंग के फाइनल ईयर के थे,
हम हमेशा हॉस्टल में ही रहते थे, और हर रात उसके बारे में सोचकर ख्यालों में मुठ मारते थे। लेकिन एक रात, हमने फैसला करा – आज अपने चुदाई भरे ख्यालों को हकीकत बनाएंगे।
हमारा हॉस्टल काफी पुराना था, वो शहर के बाहर था, जहाँ रातें सर्द और अकेली लगतीं है। मालती मैम रात 10 बजे के बाद सब कमरों की चेकिंग करतीं है और लड़के चुपके से उसके बारे में बातें करते थे।
विजय हमारा ग्रुप लीडर था, वो 5'10" का मस्तक लंड वाला लड़का था, वो मालती को चोदने का हमेशा प्लान बनाता रहता था। किशोर चुपचाप टाइप, लेकिन उसका लंड भी 7 इंच का काला नाग था।
गोविंद सब में से थोड़ा मोटा था, लेकिन वो चुदाई में स्टैमिना का बादशाह था, और मैं आपका प्यार पीयूष, 6 फुट का सांवला, 6.5 इंच का मोटा लंड वाला लड़का हूं।
हम चारों एक रूम में रहते थे, और हर शाम हम लोग बीयर पीते हुए मालती की गांड पर डिस्कस करते थे। "यार, उसकी गांड में मेरा लंड घुस जाए तो ज़िंदगी का मज़ा मिल जाए,"
विजय कहता"नहीं, पहले चूत चोदनी है, वो तो कटरीना कैफ जैसी टाइट लगती है," किशोर हँसता। गोविंद चुपके से बोलता,
"मैं तो उसके चुचों को दबाना चाहता हूँ।" और मैं? मैं तो कल्पना करता कि वो मेरी गोद में लंड मुंह में लेकर बैठी मुठ मार रही है।
एक शाम, हॉस्टल में पावर कट हो गया। पूरे में अंधेरा छा गया, और लड़के बाहर लॉन में इकट्ठे होने लग गए। मालती मैम भी वहां आईं टॉर्च के लिए।
वो लाल साड़ी में थी, उनका ब्लाउज टाइट था, चुचे निकलकर बाहर झाँक रहे थे। साड़ी की चूनर नीचे सरक गई थी, और उसकी मोटी कमर और गांड साफ दिख रही थी। हम चारों ने मौका देखा।
विजय ने कहा, "मैम, अंधेरे में डर लग रहा है ध्यान बांटने के लिए कोई गेम खेलें?" मालती हँसी, "कैसा गेम, लड़कों?" गोविंद ने कहा, "कार्ड्स खेलें, पॉकर वाला।
जो हारेगा, वो अगले हफ्ते सबके लिए ब्रेकफास्ट बनाएगा।" लेकिन विजय ने ट्विस्ट डाला, "मैम, आप भी खेलें प्लीज़। लेकिन हां हम अब बड़े हो गए है तो शर्त बड़ी लगेगी।"
मालती की आँखें चमकीं, शायद उसे भी बोरियत हो रही थी। "बताओ शर्त?" उसने पूछा, वासना से अपने रसीले होंठ चाटते हुए।विजय ने सीधा बोला,
"अगर हम जीतें, तो आप रात को हमारे रूम में आएँगी, और... एक घंटे की “स्पेशल सर्विस' देंगी।" मालती तुरंत चौंकी, लेकिन उसकी साँसें तेज हो गईं।" स्पेशल मतलब?"
किशोर ने हँसते हुए कहा, "मैम, आप समझदार हो। हम चारों को खुश करेंगी आप, जैसा हम कहें वैसे।" मालती का चेहरा लाल हो गया, लेकिन वो बोली, "और अगर मैं जीतूँ, तो?"
मैंने कहा, "तो हम चारों एक महीने तक हॉस्टल की सफाई करेंगे, और आपकी हर बात मानेंगे।" वो सोची, फिर हँसी, "चलो, खेलते हैं फिर। लेकिन याद रखना, मैं हार नहीं मानती।"
हमने कार्ड्स निकाले, बाहर चंद की रोशनी थी तो हम लॉन में ही बैठे। सभी का दिल धड़क रहा था। मालती का साड़ी का पल्लू सरक रहा था, चुचे हिल रहे थे हर बार कार्ड देखते वक्त मैं उसकी गांड पर नजर डालता, जो कुर्सी पर फैली हुई थी।
हमारा गेम चला। पहला राउंड विजय हारा, लेकिन हम सब खूब हँसे। दूसरा किशोर, तीसरा गोविंद। मेरा दिल तो अफसोस से बैठा जा रहा था, लेकिन आखिरी राउंड में, मालती के पास फुल हाउस था, मगर विजय के पास रॉयल फ्लश! तो बस "हम जीत गए!" विजय चिल्लाया।
मालती तो सन्न रह गई, लेकिन फिर भी वो मुस्कुराई। "ठीक है, लड़कों। रात 12 बजे, आपका रूम तैयार रखना । लेकिन शोर मत करना।"
वो उठी, हाथ पीछे सहलाते हुए गांड हिलाती हुई चली गई। हम चारों ने एक-दूसरे को हग किया। "यार, आज रात जिंदगी के मज़े ही मज़े है!" गोविंद बोला। हम सब रूम में लौटे, बीयर पी, अपने लंड सहलाए।
हमने घड़ी देखी – 11:50 बज रहे थे। फिर किसी ने दरवाजा खटखटाया। हमने देखा तो हमारी रानी मालती आई, वो ब्लैक नाइटी में थी, ऊपर से ट्रांसपेरेंट ब्रा जिसमें, चुचे साफ दिख रहे थे, उसके नीचे मोटी जांघें नंगी टांगे उफ्फ। "आ गई रानी?" विजय ने कहा।
वो अंदर आई, हमने दरवाजा बंद किया। मालती बोली "शुरू करो, लेकिन धीरे करना बहुत दिनों से मैने कुछ नहीं करा है।"
हमने लाइट्स डिम कीं। रूम में सिर्फ बेड था उसपर मालती अपनी जवानी लुटाने बैठी थी और चारों तरफ हम चार लंड वाले।खड़े थे। मालती बीच में खड़ी हुई उसने अपनी नाइटी और ब्रा उतार दी।
उफ्फ! नंगी मालती के– दो बड़े चुचे, भूरे निप्पल जो सख्त हुए जा रहे थे, उसका पेट थोड़ा मोटा लेकिन सेक्सी था, उसकी चूत पर काले बाल थे, और वो मोटी गांड, जैसे दो बास्केटबॉल चिपके हों।
"मैम, पहले डांस करो," मैंने कहा। हमने संगीत लगाया, वो बसंती हम कुत्तों के सामने नंगी नाचने लगी। वो गांड हिलाती, उसके चुचे उछलते।
हमारा लंड पैंट फाड़ रहा था। विजय ने पहला मूव मारा – उसने आगे बढ़कर उसे किस किया, उसके मुंह में जीभ डाली। मालती सिसकारी लेने लगी,
"आह...उम्ममम हम्मम लड़के, तुम्हें तो ट्रेनिंग मिली हुई है चूत बजाने की।" किशोर ने उसके चुचों को पकड़ा, और दांतों में दबाकर चूसा। " ओंह्ह्ह मम्मी... कितने बड़े हैं ये," वो बोला।
गोविंद ने पीछे से आकर उसकी गांड सहलाई, "ये तो मेरा इलाका है आज।" मैंने भी अपनी जगह पकड़ते हुए चूत पर हाथ फेरा –वो गीली थी पहले से ही।
अब असली खेल शुरू हुआ। हमने उसे बेड पर लिटाया। "शर्त याद है, मैम? एक साथ सबको खुश करो आज," विजय बोला। मालती आंखों में वासना लेकर हँसी, "हाँ, लेकिन तुम्हें भी स्टैमिना दिखाना पड़ेगा।"
वो घुटनों पर बैठी। उसने पहले मेरी पैंट उतारी। मेरा 6.5 इंच का मोटा लंड बाहर आया, वो उसकी चूत देखकर पहले ही सख्त था।
"वाह, पीयूष... ये तो तोप है," वो बोली। उसने दोनों हाथों से मेरा लन्ड पकड़ा और प्यार से मुठ मारने लगी। बाईं हाथ से धीरे-धीरे ऊपर-नीचे करती, दाईं से गेंदें सहलाती।
"आह... मालती रानी, हमममम ऐसे ही... तेज करो," मैं सिसका रहा था। उसकी उंगलियाँ मोटी थी तो ग्रिप टाइट थी– जैसे लंड को निचोड़ रही हो।
मैंने उसके बाल पकड़े, सिर लंड के नीचे दबाया। लेकिन वो बोली, "पहले दूसरों को।" गर्म करदू। फिर किशोर आगे आया। उसका 7 इंच का काला लंड बाहर निकला।
मालती ने मुंह खोला, और उसे चूसने लगी। "ओह्ह... हाँ मैम, जीभ भी घुमाओ," किशोर कराहाते हुए बोला। वो लंड को गले तक ले जाती, उसे थूक लगाकर चूसती, फिर और थूक लगाती।
स्लर्प-स्लर्प की आवाज रूम में खूब गूंजी। वो किशोर के लंड पर लार टपक रही थी, वो उसके मुंह में धक्के मार रहा था। "चूसो रानी,अआआह पूरा खा लो," वो बोला। मालती की आँखें नम होने लगी,
लेकिन वो पूरा मजा ले रही थी – उसके होंठ फैले हुए थे, गाल लन्ड से फुले पड़े थे। एक तरफ मेरी मुठ जारी थी दूसरी तरफ किशोर का ब्लोजॉब चालू था।
अब गोविंद भी आगे आया वो बेड पर लेटा, और मालती को ऊपर खींचा। "चूत में डालो, मैम” उसने कहा। मालती ने उसका लंड पकड़ा – 5.5 इंच का लेकिन मोटा था– उसने लंड अपनी चूत पर रगड़ा।
मालती की गीली चूत से पानी टपक रहा था। "आह... गोविंद बेटा, कितना गर्म है, उफ्फफ!" वो बोली। वो चूत टिकाती हुई धीरे से लंड पर बैठी और लंड अंदर घुसता गया।
"उम्म्म आआह... हाँ ओहद्ह... पेट भरा हुआ लग रहा है।" गोविंद ने उसकी कमर पकड़ी, फिर नीचे से धक्के मारे।
मालती उत्तेजना से उछलने लगी, उसके चुचे हिलते जा रहे थे। "चोदो मुझे...अआआह और तेज हमममम... आह्ह उन्ह्ह्ह!"
उसकी चूत की चपचाप की आवाज आई। गोविंद का लंड पूरी तरह चूत में गायब था, उसकी मोटी गांड नीचे दब रही।
फिर विजय पीछे से आया। अब गांड की बारी थी उसने उंगली डालकर मालती की गांड फैलाई – उसका गुलाबी छेद , बहुत टाइट था। विजय ने पहले थूक लगाया, फिर अपना 6 इंच का लंड दबाया।
"नहीं... अआआह धीरे...ओहद्ह धीरे आह्ह!" मालती चिल्लाई, लेकिन गोविंद ने उसके चुचे दबाए रखे। विजय अंदर पूरी तरह से घुसा –पहले आधा, फिर पूरा।
"फट गई अआआह... उफ्फ सालों... दोनो तरफ भरा दिया मुझे आअआआअह!" मालती ज़ोर से कराही।
अब असली चुदाई की बारी थी मालती के चारों छेद बंद थे । गोविंद चूत में धक्के लगा रहा था, विजय गांड में घुसा हुआ था। मालती बीच में,
मेरी मुठ मार रही थी और साथ ही किशोर का लंड मुंह में लिए चूसे जा रही थी। रूम में सिर्फ सिसकारियाँ – "आह...अआआह हाँ...ओऊहह्ह्ह चोदो... अआआह हमममम!
ओहद्ह मेरा बदन फाड़ दो, सालों अआआह मर गई में आज अआआह!ओऊहह्ह्ह चोदो... अआआह हमममम!" मालती चिल्लाई।
गोविंद उसे बहुत तेज चोद रहा था उसकी चूत का रस उछल रहा। विजय गांड मार रहा था प्लाप-प्लाप की आवाज़ गांड़ से आ रही थी। किशोर मुंह में पिस्टन चला रहा था। मैं मुठ का मजा ले रहा –
उसके हाथों की गर्मी, लंड पर थूक मुझे अलग सुख दे रहे थे।हम घंटा भर ऐसे चलते रहे। मालती पसीने से तर हो गई थी, उसका बदन लाल था। "बस...ओहद्ह थक गई...
अब रुक जाओ अआआह लेकिन मजा भी आ रहा है बहुत" वो बोली। लेकिन विजय ने कहा, "अभी खत्म नहीं। 5 मिनट बाकी है। फाइनल सरप्राइज रह गया है।"
हमने उसे डॉगी स्टाइल में लिया। गोविंद और विजय नीचे लेटे, मालती उनके ऊपर आई। "दो लंड चूत में दोगे तुम?" वो चौंकी। "हाँ रानी, शर्त पूरी करो अब।"
गोविंद पहले अंदर चूत में पहुंचा, फिर विजय ने बगल से उसे दबाया। "नहीं...प्लीज़ अआआह ! मेरी हमममम! फट जाएगी... आह्ह्ह!" चिल्लाई मालती।
लेकिन हमने अपना लंड धकेला – दो लंड चूत में घुसे। टाइट चूत तुरंत फैल गई, उसका खून जैसा रस निकला। "ओह गॉड...अआआह बहुत दर्द हो रहा है! हम आअआआ! आह्ह!" वो मचली।
अब गांड की बारी थी। मैं और किशोर पीछे आए। किशोर पहले गांड में घुसा, फिर मैंने अपना मोटा लंड बगल से उसकी गांड़ में डाला।
"दो ही डालोगे तुम गांड में भी? मार डालोगे मुझे यार नहीं प्लीज़!" मालती अपनी शर्त पर रोई। लेकिन हमने फिर भी चार लंड को ठूंसा। चारों लंड – दो चूत में, दो गांड में एक समय पर थे।
मालती का बदन अब काँपने लगा था - " मेरी फट...अआआह! फट रही ओंह्ह्ह! ... आह्ह... हाय... मत चोदो...अआआह प्लीज़ मत मारो, मेरी फट रही है!" हमने फिर भी खूब धक्के मारे ।
हम सब मिलकर चूत और गांड दोनों फाड़ रहे थे। मालती की चीखें रूम हिला रही थी – "बस... अआआह ओंह्ह्ह झड़ रही हूं मैं आह्ह्ह!" उसका एक बार में बहुत पानी निकला।
हम चारों भी झड़े – हमने गर्म माल उसकी चूत और गांड में भरा। मालती थककर गिर पड़ी, उसका बदन फड़क रहा था।
"तुम...सालो, अआआह हां! जानवर हो... लेकिन... कमाल था सब।" वो बोलते बोलते हाँफी। हमने उसे फिर साफ किया, उसे पानी पिलाया।
"मैम, अगली शर्त कब रखे?" गोविंद हँसा और बोला।
मालती मुस्कुराई, "जल्दी... लेकिन अब सो जाओ।" वो लंगड़ाते हुए चली गई, उसकी गांड भी लंगड़ाती चली जा रही थी।
हम चारों लेटे हुए थे, हम थके हुए थे लेकिन खुश थे। अगले दिन हॉस्टल में वो हमें देख मुस्कुराई, उसकी आँखों में चमक थी।
दोस्तों, ये थी हमारी Antarvasna Sex Stories वाली चुदाई की रात!
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