"कशिश" पेंटी गिरने से पेंटी उतारने तक का सफ़र-४ : Kamvasna Sex Stories
- Hardik
- Jul 10
- 8 min read
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हम दोनों बाथ टब में आमने सामने बैठे, नंगे तो पहले से ही थे।
मैंने उठके अपनी ज़बान उसकी जाँघों पर फेरी, हाथ से उसकी चुत की दरारों को सहलाया। मैं उसके हुस्न का एक एक कतरा पीना चाहता था, इस लिए मैंने उसके पूरे शरीर को हाथों से, जीभ से और होठों से सहलाया, चूमा, चाटा और चूसा। हर अंग को चूमते हुए। उसकी पीठ, उसकी कमर, उसके नितम्ब, हर जगह मेरे होंठों ने सफर किया। आज उसके शरीर का एक भी कोना छोड़ना नहीं चाहता था।
कशिश ने भी दबा के मेरा लौड़ा पकड़ा हुआ था, वो अब फ़िर से आकार लेने लगा था।
मैंने उसको डॉगी पॉज़ लेने को बोला और डॉगी स्टाइल में आ गई, मैंने उसके दोनों कूल्हे चौड़े कर के गांड़ के छेद का जायज़ा लिया।
मैंने लंड पे लुब्रिकेंट लगाया, जो पहले से ही मेरे बाथरूम में था, मैंने देर ना करते हुए उसे अपने लंड पे और कशिश की गांड़ के छेद पे लगाया, वो मना करने लगी, नहीं यार,, ये नहीं... मैंने कहा बस थोड़ी देर के लिए, कुछ नहीं होगा।
ऐसा कहते ही मैंने आधा टोपा प्रवेश कराया।
वो चिल्लाई आ...ई... निकालो प्लीज़,, बहोत दर्द हो रहा है, चूत की तरह गांड़ की कसावट भी ज़्यादा थी। मैं हल्के झटके देकर धीरे धीरे मेरा लंड उसकी गांड़ में लैंड कराने लगा, जब आधा लंड घुस गया, तब मैंने थोड़ी स्पीड बढ़ाई...
वो थोड़ी देर चिल्लाई...
मैंने उस वक़्त उसका चिल्लाना इग्नोर किया, और लंड अंदर ही अंदर पेलता गया।
जब मुझे लगा कि अब वो मज़ा ले रही है, तब मैंने उसके बालों को पकड़ कर हल्के से खींचा और स्पीड बढ़ाई,
उसकी गांड़ ज़ोर ज़ोर से चोदने लगा।
तब वो चिल्लाकर बोली, यस.... कम ऑन फ़क माय ass.. हार्ड डिक!! और ज़ोर से...
उसके नितम्ब मेरी जाँघों से टकरा के उछल रहे थे। मेरा लंड उसकी गांड़ में तेज़ी से आगे पीछे हो रहा था, हर झटके के साथ एक फटफट आवाज़ आ रही थी।
मैंने उसके बालों के साथ उसकी कमर पकड़ कर अपनी गति और तेज़ कर दी। उसकी आह आआअह्ह्ह्हह… की आवाज़ मुझे और उत्तेजित कर रही थी, तेज़ गति के कारण वो ज़ोर ज़ोर से चीखती रही और मेरे झटके पूरी ताकत से सहती रही, उसने अपनी गांड़ को मेरे लंड पर कस लिया। मैंने अब अपनी आखिरी स्ट्रोक के साथ गर्म वीर्य की धार उसकी गांड़ के अंदर ही छोड़ दी। हर बार वो मेरी पूरी ताकत और वीर्य को अपने अंदर समेटती रही। उनका स्टैमिना भी ग़जब का था।
आखिर में हम दोनों ने मस्ती और रोमांस करते हुए, एक दूसरे को सहलाते हुए शॉवर लिया, बाद में हमने आधा घंटा बेड पर नंगे ही एक दूसरे से रेस्ट किया, मैंने घड़ी में देखा, सुबह के 6 बज रहे थे। मैंने उनके स्तनों को सहलाते हुए पूछा अब क्या इरादा है, जानेमन?
वो बोली, अब बस, आज बाथरूम में तुमने मेरी जान ही निकाल दी। मैंने कहा, ठीक है। लेकिन फ़िर भी मैं उसको वापस गरम करना चाहता था, मैंने ऐसे ही सोते सोते, उसके शरीर को सहलाने लगा, मैं उसके ऊपर आ गया, इस दौरान हम एक दूसरे की आँखों में देख रहे थे, बिना पलक झपकाए। उसके होंठों से सिर्फ आहें निकल रही थीं, मैंने फ़िर से अपने होंठ उसके होंठ रख दिए, हम बेतहाशा बिना रुके एक दूसरे को चूमते रहे, मैंने धीरे धीरे अपना हाथ उसकी जांघों के बीच ले गया, जांघे सहलाते सहलाते मेरा हाथ उसकी चूत की तरफ़ बढ़ा, उसकी कोमल, मुलायम चूत को सहलाने लगा।
वो धीरे से बोली, तो तुम मानोगे नहीं??
मैंने हवसी अंदाज़ में कहा, नहीं....
तब वो मुझे घुमा के मेरे ऊपर आ गई, मेरी छाती चूमने लगी, मेरे निप्पल्स को मुँह में भर के उन्हुँ... उन्हुँ... कर के चूसने और चाटने लगी, उसने मेरा एक के बाद एक हाथ पकड़के अपने नितंब पर रख दिया, शायद वो अपने नितंब दबाने को या सहलाने को कह रही थी, मैं उसके नितंब और जांघे सहलाने और दबाने लगा, धीरे धीरे वो मेरे शरीर पे नीचे की और सरकी, जैसे वो मेरे शरीर के हर कौने को चूमना, चाटना और चूसना चाहती हो। उसने अपने गोरे मुलायम हाथ में मेरा लंड पकड़ा और बोली, आज मैं इसको चबा जाऊंगी।
ऐसा कहते हुए मेरे लंड को अपने मुँह में भर लिया।
तुम्हारा ही है, जानेमन, तुम चाहे कुछ भी करो.. चबाओ, चाटो, चूसो, खाओ... ऐसा कह के उसकी चूत मेरे मुँह के ऊपर रहे ऐसे घुमा दिया, वो मेरे ऊपर थी, हम 69 पोज़ में आ गए और मैंने उसकी चूत को वापस चाटना शुरू कर दिया।
उसकी चूत का चिपचिपा मीठा रस का स्वाद लेने लगा, उसकी चूत के हर हिस्से को अपनी ज़बान से गीला करता रहा। मेरी ज़बान उसके भगशेफ पर जैसे ही गई, वो और तेज़ी से मेरा लंड चूस चूस के अपने मुँह में खींचने लगी।
काफ़ी देर के बाद जब मुझे लगा कि मैं झड़ने वाला हूं, तो मैंने कहा कशिश मैं आनेवाला हूं, तुम्हारे मुँह में ही निकल जाएगा!! उसके मुँह में मेरा लंड था, तो वो हाथ से आने देने इशारा किया...
जब उसे लगा कि मेरी पिचकारी उसके मुँह में लगी तो फट से मेरा लंड मुँह से निकाल लिया और वो मेरा लंड पकड़ के अपने मुँह के सामने रखा और मेरा पूरा माल अपने मुँह, गाल और स्तनों पे गिरने दिया। गाढ़ा, सफेद, गर्म वीर्य उसके गाल, बालों और जिस्म पर बिखर गया। वो धीरे धीरे लपालप मेरा पूरा माल चाटने लगी।
अब वो बोली अब मेरी चाटने की तुम्हारी बारी...
मैं भी तैयार ही था, उसकी गीली, गुलाबी, मखमली, गद्देदार और चमकदार चूत की गर्मी निकालने को...
मैंने उसको पेट के बल लेटा दिया और शुरू हो गया.....
मैं चूत चाट रहा था, वो अपने मुँह पे गिरा हुआ मेरा माल, धीरे धीरे गटक रही थी, जो उसके स्तनों पे गिरा हुआ था उसको अपने हाथों से ही स्तनों पर और गाल पर लगाने लगी।
कुछ देर बाद वो बेड पे हाथ पटकने लगी और चिल्लाई, चोदो… और ज़ोर से चोदो मुझे… मैं अपनी जीभ उसकी चूत में लंड की तरह ज़ोरों से आगे पीछे करके जीभ से चोदने लगा। उसने अपने रस से मेरा मुँह भर दिया, मैंने पूरा रस गटक लिया, और चूत के आसपास भी जीभ से चाट के पूरा साफ कर दिया। हम दोनों हाँफते हुए एक दूसरे को गले लगा लिया और वो मेरी छाती पर अपना सर रख के सो गई, हम दोनों एक दूसरे की बांहो में सोते रहे।
इस तरह उस रात हमने करीब 5 घंटों तक एक दूसरे को संतुष्ट किया। हमने अपनी पूरी हवस एक दूसरे से मिटाई।
जब हम उठे तब सुबह के 11 बज रहे थे, मैंने उसको जगाते हुए कहा, कशिश...!!
ह्म्म्म...., वो सोते हुए, बंद आँखों में बुदबुदाई..
तुम कितनी खूबसूरत हो, तुम्हारा स्टैमिना ग़ज़ब है, प्रेमा तो एक बार में ही थक जाती थी, ये पल मुझे हमेशा याद रहेगा। वो शरमा कर लाल हो गई और बोली, मुझे भी....
एक बात बताओ, जब से हम मिले है, तब से तुमने कभी ये मोमेंट चाहा था? तुम्हारे मन में मेरे लिए क्या चल रहा था?
उसने आँखें खोली और बोलने लगी, जब तुम पहली बार कार में मुझे ऑफ़िस छोड़ने आए, तब तक तो ऐसा कुछ नहीं सोचा था, लेकिन तुम्हारी सेन्स ऑफ ह्यूमर और फ्लर्टिंग स्किल से में ज़्यादा इंप्रेस हुई थी, तुम हैंडसम तो हो ही, मुझे तुम पे ज़्यादा ऐतबार था, इसी कारण में तुम्हारे साथ दिल खोल के फ्री माइंड से बात करने लगी थी, और मुझे लगता है, तुम मेरा विश्वास कभी नहीं तोड़ोगे। एक बार शाम के वक्त मैं तुम्हारे घर आई थी, दरवाज़ा खुला था, इसलिए सीधा ही अंदर आ गई, लेकिन तुम्हें पता नहीं चला, तुम यहाँ बेडरूम में मोबाइल में मेरी फ़ोटो देखते हुए और मेरा नाम लेते हुए मास्टरबेशन कर रहे थे, उस वक़्त मैं घबरा गई तो वापस चली गई।
लेकिन बाद में मैंने सोचा और मुझे लगा कि दोस्त के नाते मुझे हार्दिक के इस अकेलेपन में उसकी जिस्मानी ज़रूरतों का खयाल करना चाहिए, वैसे मेरी भी तो बहोत सी इच्छाएं थी! जैमिन का लिंग काफ़ी छोटा है, वो मुझे आज तक वो रोमांच नहीं दे पाया, जैसा आज तुमने मुझे ज़िंदगी में पहली बार दिया। आज जब मैंने तुम्हारी वाइफ़ स्वैपिंग वाली फैंटेसी के बारे में सुना तो मेरे जिस्म में भी अज़ीब सी हलचल हुई और मेरे मन भी एकस्ट्रा मैरिटल सेक्स की फैंटेसी ने जन्म लिया। जैमिन के स्पर्म की मोटिलिटी भी कम है, तो मैं चाहती हूँ कि तुम मुझे अपने बच्चे की माँ बनाओ, मेरी 10 साल से सुनी कोख को तुम भर दो, मैं वादा करती हूँ कि ये हंमेशा सीक्रेट रहेगा और इसमें मेरी कोई कॉन्सपिरेसी नहीं रहेगी या मैनिपुलेशन नहीं होगा। इस लिए हम दोनों को जब भी एक दूसरे की ज़रूरत रहेगी हम कोई ज़ोर ज़बरदस्ती के बिना पूरा करेंगे, मेरा बच्चा हो जाने के बाद भी... तुमने आज सच में मुझे जन्नत की सैर करा दी।
सुबह हम देर से उठे, वो बिना किसी शोर के अपने घर जाने लगी। तब मैंने पीछे से आवाज़ दी..
कशिश...!!
वो हम्ममम, कहके मेरी मुड़ी...
मैंने कहा, रुको.. तुम्हारे लिए मेरे पास कुछ है।
क्या..??
मैंने सोफे पर रखी बैग से दो गिफ़्ट पैक निकाले, और उसके सामने रखे..
Wow...... क्या है ये??
खोल के देखो।
उसने दोनों पैक के रैपर खोले और बोल उठी, wow.... It's so beautiful.. वैसे मैं ऐसी लड़की नहीं हूँ, वो नखरे करते हुए, आँख मार के बोली, बाय द वे, Thank-you so... much हार्दिक... और Thank-you so... much मेरे hard dick, मेरे पास आके मेरा लंड पकड़ के और दबा के बोली।
तुम मुझे कुछ गिफ़्ट नहीं दोगी?? मैनें उनसे पूछा
तुमने मेरी ब्रा और पेंटी रूपी रैपर खोल के आज पूरी रात तो मेरी आगे पीछे और ऊपर नीचे से ली, और मेरी बजा के पूरा सुजा दिया है, अब और क्या चाहिए, बताओ??
तुमने अपना जिस्म तो गिफ़्ट किया, लेकिन मेरी गिफ़्ट रैपर वापस लेके जा रही हो, वो रैपर भी तो मेरा हुआ ना!! हमारे यहाँ तक के सफ़र और आज रात के मिलन की निशानी वो रैपर ही दे दो। मैंने उसके अंडरवीयर की तरफ़ इशारा करते हुए कहा।
वो खिलखिलाई और रुको कहते हुए, मेरे सामने ही वापस अपनी टॉप और पैंट निकाली, और पेंटी के साथ ब्रा भी देते हुए बोली, ये लो दोनों गिफ़्ट रैपर....
वो फ़िर से पूरी नंगी थी, तब मैंने कहा और एक राउंड कर ले?
वो कपड़े पहनते हुए बोली, पता नहीं कौन सा जानवर है, तुम्हारे अंदर!!? और भी तो 5 दिन है हमारे पास, थोड़ी एनर्जी बचा के रखो, और वैसे भी आज के बाद भी तो कभी न कभी मौका मिलता रहेगा, तब काम आएगी।
मैंने कशिश को बाँहो में भर के होंठों पे एक लंबा किस करते हुए कहा, थैंक्यू कशिश, तुम्हारे दिल के साथ साथ तुम्हारे बिल में जगह देने के लिए,, ऐसे ही भरोसा रखना, वादा करता हूँ, मैं कभी तुम्हारा ऐतबार नहीं तोडूंगा।
वो जा रही थी, मैं सीढ़ी चड़ते हुए उसकी पीठ और लहराते नितंब को देखता रहा और मेरे होंठ धीरे से बोल उठे,, उफ़्फ़ "कशिश" उस वक़्त पीछे से मैंने अपने मोबाइल में उसकी फ़ोटो ली...
उसकी चाल में मुझे बदलाव दिख रहा था, वो अपने दोनों पैर थोड़े फैलाते हुए चल रही थी, मैं समझ गया कि जैमिन ने इसको ठीक से लिया नहीं या तो उसका छोटा पड़ रहा है। जैसा उसने बताया था। एक अज़ीब सा आकर्षण और ग़ज़ब का जादू था उसमें... बिल्कुल उसके नाम की तरह...
इस रात के बाद भी हमने और 5 दिन सेक्स के मज़े लिए, इन दिनों हाल ही में कशिश प्रेग्नेंट है, उनका सातवां महीना चल रहा है, जैमिन और कशिश उसके आनेवाले बच्चे के लिए काफ़ी एक्साइटेड है, अब तो हमारा एक दूसरे के घर आना जाना भी लगा रहता है, कशिश कभी कभी उसके घर खाना खाने भी बुलाती रहती है, उस वक़्त हम चुम्मा चाटी कर लेते है और आज भी कशिश डिलीवरी के बाद और मज़े करने का वादा भी करती है।
ये था, "मेरा और कशिश की पेंटी उतारने तक का सफ़र"
**समाप्त.......🖋️**
दोस्तो कैसी लगी kamvasna Sex Stories जो मेरे साथ घटित हुई आप मेल पर हमें साझा करें।

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