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चटाई बेचने वाली सविता भाभी-२: Antarvasana3

कहानी का पहला भाग पढ़े: चटाई बेचने वाली सविता भाभी-१

सारे भाग पढ़ने के लिए मेरे नाम पर क्लिक करे।

अब आगे:


सविता बोली," अब समझ मे आया कैसा होता है। अभी तो बस इतना ही दबाया है। ऐसी मस्ती करोगे तो चबा जाउंगी पूरा... बता रही हु। " और वो जोरसे हसने लगी। सविता दूर खड़ी थी।


मेरा लन्ड एकदम टाइट और खड़ा हो चुका था। सविता की नजर मेरे लन्ड पर गयी। सविता मेरा लन्ड घूरे जा रही थी।और में उसको ऊपर से नीचे तक ताड रहा था। मेरे जोर जोर से दबाने के वजहसे सविता के गाउन से स्तन पूरी तरह से बाहर आगये थे। वो जरा दूर खड़ी थी। में उसके पूरे के पूरे मोटे, गोल, स्तन अपनी खुली आंखोसे देख पा रहा था। आज उसपर कोई कपड़ा नही था। उसके गोल मोटे गोरे स्तन और उसपर बड़ा काला गोल घेरा और उसके बीचो बीच उसकी चुचिया। अहहाहा! क्या नजारा था।


मेरी नजर हट ही नही पा रही थी। वो सेक्सी गाउन उनकी सुंदरता को और बढा रहा था। अब में सविता के सामने पूरा नंगा खड़ा था। मेरी धड़कन तेज हो गयी थी।इतना फुर्तीला और जोशीला मर्द उसे पहेली बार ही देखा होगा। तभी में भी उसको ताड रहा हु, ये उसको समझ आ गया था। वो मेरे लन्ड को छोड़ मेरी आंखोमें देखे जा रही थी।


मेंने उसके स्तन जोर जोरसे दबाने के कारण वो लाल लाल हो चुके थे। मेरी उंगलियोंके छाप थोड़े थोड़े उनपर दिख रहे थे और स्तनों से दूध टपक कर पूरा गाउन गिला हो चुका था। मेरे लन्ड से भी कुछ चिपचिपा बाहर आकर मेरी शॉर्ट्स पर लगा था। लगभग आधे घण्टे से खडे होकर में उसके स्तन दबा रहा था। और वो मेरा लन्ड सहला रही थी।


वक़्त का तो कुछ पता ही नही चला, कैसे निकल रहा है। मेने घड़ी देखी तो रात के 10:45 बज रहे थे। इतना दबाने के बाद मुझे लगा अब तो उसे दर्द रहो रहा होगा। वो स्तनोको हाथ ही लगाने नही देगी। तभी अचानक वो बोली, ," हाय राम। ये तो अभी से ही दुखने लगे है। मालूम है कल इसे हाथ भी नही लगने देगा, इतना दुखेगा।"


में बोला," चिंता मत कर सविता में मालिश करके दूंगा कल। तू बस आज मुझे मत रोक। मुझे जो करना है वो करने दे।" सविता शर्माई और बोली," हा हा। और कोई चारा है भी क्या मेरे पास?। में पूरी फस जो गयी हु जाल में। अब तुम जो करोगे वो सहना तो पड़ेगा ही। में तो ठहरी बेचारी, सीधी साधी, भोली गांव की लड़की।" सविता मेरी टांग खीच रही थी।


मेने बोला," बड़ी आई भोली की बच्ची। इधर आ तुझे दिखाता हु कौन भोला है और कौन बेचारा।" इतना बोलकर मेने उसे बाहोंमे लिया। और उसे जोर से चूमने लगा। सविता भी खिलखिलाई। और मुझे चूमने लगी। थोड़ी देर हमारा किस ऐसेही चला। उसके बाद सविता ने मेरी आंखोमें देखा और, वो बोली," अमेय! सुनो ना। क्या ये निकलता हुआ दूध पिओगे क्या।


अब ये रुकेगा नही और पूरा बर्बाद हो जाएगा।(सविता ने अपने स्तन दिखाते बोला) मतलब तुम्हे पसंद तो है ना? तो ही पीना, वरना रहने दो। वो आगे बोली," मेरे पति को दूध बिल्कुल पसंद नही था। मुझे बच्चा होने के बाद मेरे पति ने कभी इनको चूसा ही नही। वो बस दबाता दबाता, और चूसते वक़्त दूध आये तो मुजेहि पिटता। तुम ही बताव मेरी क्या गलती इसमे।"


इतना बोलके वो थोड़ी मायूस हो गयी । में बोला," देख सविता तू मायूस मत हो। वो हरामखोर तेरे लायक ही नही था। उसे क्या पता उसने क्या खोया है। में बहोत खुशनसीब हु जो तू मुझे मिली सविता। तू आज मुझे ज़हर भी दे तो मैं पी लूंगा।" ये सुनते ही उसके चेहरे पर मुस्कान आई। और वो शर्मा गयी। अब सविता ने अपने स्तन उठाये और उसने अपने चुचे दबाने चालू किये, अब उससे दूध बहने लगा था।


सविता ने मुझे थोड़ा नीचे होने का इशारा किया और मेरे बालोको पकड़कर उसने मेरे मुँह में उसकी चूची दे दी। अब में बड़े आराम से एक स्तन को चूसने लगा। और दूसरेको दबाने लगा। जैसे ही में उसे दबाता , दूध का फव्वारा मेरे मुँह पे आता। में थोड़ी थोड़ी देर हर एक स्तन को चुसता रहा। अब हम दोनों भी खड़े खड़े थक गए थे।


नीचे तो बिस्तर पहलेसे डला ही था। मेने सविता को पकड़ा और नीचे बिस्तर पे ओढा। और उसको लिटाकर उसकी चुचियो को चाटने लगा। पहले जोर से में उसके बॉल को दबाता। फिर एकदम से उसके स्तनोसे जो फव्वारा आता उसे मुँह में लेता और उसके चुचियो को चूसता। सविता को भी बड़ा मजा आ रहा था। उसका दूध अब बहोत ज्यादा बहने लगा था।


में चूसते वक़्त वो कहती,"और जोरसे चुसो अमेय। अहह ओह्ह ह हाएए। निकाल दो मेरा सारा दूध और पी जाओ। खाली करदो आज मेरे छाती को। पूरा दूध पी जाओ । ओह्ह।" में कोशिश कर रहा था के एक भी बून्द नीचे न गिरे। में बीच बीच मे उसको किस करता उसके चुचे उसीको चाटने देता और उसके मुँह से उसका दुध पिता।


बहोत देर तक उसको स्तनों को में चूसता रहा। उसके होठो को चाटता रहा। में अपनी पूरी जीभ उसके मुँह में डालता और मेरा सारा रस उसके मुँह में देता। वो भी ऐसेही करती। वो सारी थूक बाहर आकर हमारे गालों तक फैली हुई थी। अब मैंने सविता को चूमते चूमते उसके कान में जाकर कहा, " सविता, अपने हाथ मे मेरा लन्ड पकडो ना और हिलाओ। कबसे वो तरस रहा है।


तभी अचानक सविता मेरे तरफ देखकर बोली," अरे! वो तो मेरे हाथ मे ही नही आ रहा है पागल लड़के।" और वो हँस पड़ी। मुझे लगा के उसकी मुठ्ठी कम पड़ रही है। (और ये सत्य भी था।) इसलिए वो ऐसे बोल रही है। मैंने बोला, "तो दोनों हाथ से पकडो ना सविता,दूसरा तो हाथ खाली ही है तुम्हारा। क्या तुम भी सविता।" सविता ने एकदम से आँखे खोली। में तो उसके ऊपर ही चढ़ा था। उसने मुझे थोड़ा सा हटाया। और बोली, "अरे पागल, में वैसे नही बोल रही हु।


में कबसे इस हाथ से (बाये हाथ से) तुम्हारा लन्ड ढूंढ़ रही हु मुझे मिल ही नही रह है। तुम इतने मेरे ऊपर चढ़ गए के मेरा दूसरा हाथ(दाया हाथ) फस गया है। और में मेरी गर्दन नीचे करके तुम्हारा लन्ड भी देख नही पा रही हु।" इतना बोल कर वो जोरसे हसने लगी। में उसके आंखोमें देखने लगा। और में भी हस पड़ा।


वो अब अपने अलग ही अंदाज़ में आ चुकी थी। मैंने बोला," ok बाबा मेरी गलती। माफ करो। " इतना बोल कर मेने उसको चूमा। और मै उसके ऊपर से थोड़ा सरक गया। हम बस एक दूसरे की आंखोमें ही देखे जा रहे थे। मे हलकेसे उसका बाया हाथ नीचे ले गया और मेरा गरम लन्ड उसको हाथ मे थमा दिया। "ये ले। अब खुश ना।" ,मैंने बोला।


वो शर्मा के बस लाल हो गयी। उसके मुँह से बस "हा" निकला। अब उसने मेरे लन्ड को कसकर पकड़ लिया था। वो मेरा गरम लन्ड सेहेलाने लगी थी। मेरे टोपे के चिर पे उंगलिया फेरने लगी। और वो बीच बीच में ही लन्ड को दबाने लगी। मुझे बहोत अच्छा लगने लगा था। में थोड़ी देर में पागल ही हो जाऊंगा ऐसा मुझे लगने लगा। अब सविता अचानक से ठहर गई।


मुझे मजा आने लगा था पर अचानक से वो रकने के कारण में उसे देखने लगा। तभी उसने अचानक मेरा हाथ पकड़ा और उसके चुत पर रख दिया और वो चुत को सहलाने लगी। में उसका इरादा समझ गया। मेने झटसे उसकी चुत पर मेरा हाथ रगड़ना चालू किया। उसकी चुत की गरमाहट मुझे गाउन के उभर से भी महसूस हो रही थी।


सविता ने चुत मुझे सौप दी और उसने फिर से मेरे लन्ड को पकड़ लिया।और वो हिलाने लगी। सविता की चूत से पानी निकलकर वहाँ का गाउन गिला हो चुका था। मेने अपनी एक उँगली गाउन के उपरसेही उसके चुत के अंदर डालने की कोशिश की। गाउन के वजहसे इतना कुछ नही कर पाया लेकिन सविता को एकदम से झटका लगने जैसा हुआ और उसने एक बड़ी सास ली और सिसकिया देने लगी। ओह्ह आहहह ओह्ह ओह्ह। एकदम से मेरे लन्ड के ऊपर की उसकी पकड़ ढीली पड़ गयी।


वो मदहोश हो गयी थी। उसने अपना पूरा शरीर मुझे सौप दिया। थोड़ी देर बस में ही उसकी चुत के साथ खेलता रहा। में मुँह से उसके मम्मे चूसता। दूध पीता। और उसकी चुत मसलता। उसके चुत से पानी निकल ही बह ही रहा था। उधर का सारा गाउन गिला होके मेरे हाथों को गिला कर रहा था। थोड़ी देर ऐसेही चलता रहा। अब में जरा रुक गया।


में सविता को देखने लगा। वो बस आहटे भरे जा रही थी "ओह्ह ओह्ह आह। रुक मत करते जा करते जा"। वो पसीने से लतपत हो गयी थी। उसकी फूली हुई सास रुकने का नाम ही नही ले रही थी। उसका मुँह खुला था।


उसमेंसे लार टपक रही थी। उसकी आँखें बंद और माथे पर सुख का एहसास था। और वो अपना सबकुछ मेरे हवाले करके अपना चरमसुख प्राप्त करती, गद्दे पे लेटी मजे लेते हुए। में बस उसे देखे ही जा रहा था। अब सविता भी होश में आने लगी। उसने भी आँखे खोली और वो भी मेरे आँखों मे देखने लगी। वो एकदम से शरमाई।


पर अब सविता रुकना नही चाहती थी। और फिर से सविता ने अपने हाथसे मेरा लन्ड जोरसे पकड़ा और आगे पीछे करना चालू किया। में पागल हो रहा था। अब मेने उसको किस करना चालू किया। उसने उसकी रसभरी जबान मेरे मुँह में चूसने के लिये अंदर तक डाली। में भी उसे लॉलीपॉप के तरह चूसने लगा। अब में भी शांत नही बैठने वाले था।


मेने भी और एक बार उसकी चुत पर से सहलाया। इस बार थोड़ा जोरसे था। ये करते करते मेरे दिमाग मे एकदम से ख्याल आया। सविता ने तो पैंटी ही नही पहनी है। शायद सविता गांव की होने के कारण ब्रा और पैंटी कभी पहनती ही नही थी। मेंने मन में कहा," वाह क्या मजा आता होगा इसके पति को इसे चोद ने में। बस साडी ऊपर करो तो चुत चुदवाने के लिये हाज़िर। और इसकी ऐसी फिगर।


में तो सुबह शाम खड़े खड़े चोदता तुझे ,ओह्ह सविता। अब में ही तुम्हरा पति हु। शायद ये पति वाली लाइन मेने मुँह जोरसे बोली डाली। और वो सविता ने सुन ली। सविता मुझे किस करते करते रुक गयी और हसने लगी। सविता बोली," तुमने अभी क्या बोला तुम्हे पता भी है?। मैंने बोला, "हा सविता। में तुमसे बहोत प्यार करता हु। मुझे माफ़ करदे मेने कुछ गलत बोला हो तो।"


सविता बोली, अरे अरे। माफी किसलिए मांग रहे हो। मुझे तो वो सुनके अच्छा लगा। काश में तुम्हारी पत्नी होती...काशश। मेने कहा," सविता चल मानले, अगर में सचमे तेरा पति होता तो?। सविता बोली, " अगर तुम मेरे पति होते तो में तो तुमसे सुबह,शाम और रात तीन- तीन टाइम चुदवाती। तेरे लन्ड को आराम तभी जब तू बाहर काम के लिये जाता। बाकी जब भी तू घर पर होगा तो तेरा ये चूहा मेरी छेद में ही रहता। हम सारे घरमे चुदाई करते। कभी किचन में, कभी बाथरूम में तो कभी आँगन में। हाए राम! । में तो सोचके भी पागल हुए जा रही हु।"


मुझे ऐसे जवाब की अपेक्षा भी नही थी। मे सविता के जवाब से हैरान था । अब मुझे भी पीछे नही हटना था। में बोला," हा सविता बिल्कुल। और में भी तुझे हर रोज ऐसे चोदता के तेरी चीखें आस पास वाले सारे पड़ोसियों तक जाए। उन्हें भी तो पता चले कि तू बस मेरी है। कोई ऐरा गैरा तुझे हाथ भी नही लगा सकता।" सविता बोली," हा अमेय! में बस तुम्हारी हु।


मेरे चुत पे अधिकार सिर्फ तुम्हारा है। इस चुत के अंदर एक ही लन्ड को जाने की अनुमति है अब, और वो सिर्फ तुम्हारा है अमेय।" इस सब ख्याल से और सविता के बातो से मै और ज्यादा उत्तेजित हो गया।उसके कारन मेरा लन्ड और ही ज्यादा लम्बा और कड़क बना गया। अब उसके एक हाथ की बात नही थी। उसे भी वो शायद पता लगा हो। उसने अपना दूसरा हाथ भी मेरे लन्ड को सेहेलाने में लगा दिया। उसके दोनों हाथों से लन्ड पर पकड़ बहोत अच्छि बैठी थी।


वो जोर जोर से लन्ड हिला रही थी।अब मुझे भी उसे नंगा करन था। मेने एक हाथ उसके गाउन के अंदर डाला और उसे पूरा ऊपर किया। सविता ने भी मुझे नही रोका और गाउन पीछे से उठाने में मुझे मदत की। और उसने गाउन उतार के दूर फेक दिया। अब मेने उसे कसकर पकड़ा। मे अपने बाये हाथ से उसकी नंगी चुत पर अपना हाथ घिसने लगा। उसकी पूरी चुत के ऊपर बहोत बाल थे। मुझे बालो वाली चुत ही पसंद थी। उसके चुत से बहोत पानी पेहेलेसेही आ चुका था।


उसकी चुत पूरी गीली हो गई थी।अब मैंने धीरे धीरे अपना हाथ उसकी चूत पर रखा और उसके चुत के बाहरी होठो को फैलाया। उसको फैलाते ही मेरी सारी उंगलिया उसके चिप चिपे पानी से भर गई। मेने मेरी दो उँगलियों को उसके चुत के अंदर दाल दिया। और अंदर बाहर करने लगा। सविता तो एकदम से उछलने लगी थी। मे जोर जोर से उसकी चुत को सहलाते ही रहा। अंदर बाहर अंदर बाहर।सविता के मुँह से अब लगादार आवाजे आने लगी। वो रुक ही नही थी।


सविता मजे ले रही थी और उसी दौरान वो मेरे लन्ड को भी हिला रही थी। मेंरे मुँह में उसके चुचे थे। में भी जी भर के दूध पी रहा था। में बीच बीचमे उसके स्तनोको दाँतोसे काटता और मेरी निशानियां उसपर छोड़ता। उसके स्तन तो अब मेरे लव बाईट्स से लाल लाल हो चुके थे। मेने अब मेरी तीन उंगलिया उसके चुत के अंदर दाल दी थी। अब अचानक से उसकी जांघो में थरथराहट होने लगी। वो मुँह से जोर जोर से सिसकिया देने लगी। मेने सब वैसी ही चालू रखा। सविता चीख रही थी। "


ओह्ह अमेय! और जोरसे। फाड दे मेरी चुत। निकाल पानी निकाल पानी सारा। अहह रुकना मत रुकना मत। अहह अहद ओह्ह अहह। सही कर रहे हो। हा हा वाहिपर अहह ओह्ह। " और सविता एकदम से मेरे हाथ पर झड गयी। मेरा पूरा बिस्तर गीला हो गया था। सब पानी पानी। मेरा हाथ पूरा पानी से भरा था। उसकी चुत से पानी बह रहा था।


अब सविता की आवाज धीमी हो गई थी। उसके माथे से पसीना आ रहा था। अब में बिस्तर से उठ गया। वो भी धीरे धीरे होश में आ गयी। और उठके बैठ गयी। उसने आँखे खोली। और वो शर्माते बोली, सविता बोली, "मुझे माफ़ कर दो अमेय। मेने पूरा बिस्तर गीला कर दिया। पर में कंट्रोल ही नही कर पायी।" और वो थोड़ी मायूस होने का नाटक करने लगी। अब में हसने लगा। मेने उसके माथे को चूमा और बोला, "अरे सविता! कुछ नही होता। मुझे अच्छा लगा तुम मेरे बिस्तर पर झड गयी।


हा दुख सिर्फ इस बात का है के तू बिस्तर पर झड गयी। मुझे तेरा पानी मेरे मुँह में चाहिए था। अब तू ही देख मेरा पूरा हाथ भर गया है। इतना बोलते ही मेने वो उंगलिया मेरे मुँह में डाली। और मुझे पूरा नमकीन स्वाद आया। वाहहह, वो स्वाद अमृत से कम नही था।लोग सच ही बोलते है। अगर स्वर्ग कहिपे है तो वो पृथ्वी पर ही है। और अमृत भी। पर सविता मुझे ऐसा करनेसे रोकना चाहती थी उसने मेरा हाथ पकड़ा। पर तब तक मेने उसका रस चख लिया था। सविता बोली," तुम न सचमे पागल हो।


वो सब मेरा मूत है अमेय। इसे ऐसे पीते नही। चलो थूक के आव वो जब चलो।" वो एकदम से बोल पड़ी। मेने उसके मुँह पे हाथ रख और बोला," shhhh! ये अम्रित है अम्रित। समझा। मुझे इसे और पीना है और में पिऊंगा भी। तुम कुछ नही बोलोगी। " अब वो शर्मा रही थी और मुझे बेहद प्यार भरे नजरो से देख रही थी। इससे पहले उसे इतना प्यार कभी नही मिला था।उसके हर एक चीज को मैने अपना लिया था, फिर वो उसकी थूक हो या फिर उसका मूत। ये बात वो समझ गयी थी।


वो भी उसका पूरा समर्पण मुझे करने के लिए तय्यार थी। अब मेरी नजर लन्ड पे गयी। वो बड़े शान से खडा था। उसपर की एक एक धमनी फूल गयी थी। मुझे अब भी सविता के हाथ उसपर महसूस हो रागे थे। मेने देखा मेरे लन्ड से भी चिपचिपा पानी बाहर आ रहा है। सविता के पूरे हाथो पे भी वो लगा था। मेरी उसका रस पीने की हरकत देखकर सविता भी अपना हाथ जबान से चाटने लगी। और उसने वो सारा पानी चाट लिया। अब में उससे और भी ज्यादा मोहित हो गया था।


हमने एक दूसरे को पूरा अपना लिया था। अब मुझे उसकी चुत का स्वाद लेना था। उसकी चुत की बारी आ चुकी थी। मेने सविता को कहा, सविता में तेरी चुत को चाटना चाहता हु। तू बिस्तर पे लेट जा।" सविता बोली," ठीक है। ये लो। आज तेरी जबान से भी मुझे चोद दे। डाल दे अंदर जबान तेरी डाल।" इतना बोलकर वो बिस्तर पे लेट गयी और उसने अपने पैर फैला दिए।अब उसकी चुत एकदम अच्छेसे दिखाई दे रही थी। उसके चुत के होंठ, उसका मूत्रद्वार, उसका योनिद्वार मुझे साफ साफ सिखाई दे रहा था।


जरा सी भी देर न करते हुए ,मेने अपनी जबान उसके चुत में डाली। उसने एकदम से बड़ी सिसकी ली और moan करना चालू किया। वो जोरसे "ahh ohh aahh aaaa मेरी चुत ahhh अमेय। चाटो चाटो और जोरसे। प्लीज और अंदर डालो" ऐसा करने लगी। मेरी जबान अब उसके चुत का सारा माल गटक रही थी। उसकी चुत का स्वाद पूरा नमकीन था। और एकदम हल्का मीठा।


में उसके सारे भागोको चाट रहा था। उसके योनि में जीभ डालता- निकलता। उसके जांघोतक उसे चाटता और फिर से चुत में जबान डालता। सविता को बहोत मजा आ रहा था।उसका चुत का एक एक हिस्सा मे चाट रहा था। अचानक उसकी सिसकिया बढ़ने लगी। उसने मेरे गर्दन को पकड़ा और जोरसे चुत की तरफ दबाने लगी। मेरी सास अटक गयी थी।


मेरी नाक उसके झाटो के ऊपर दब गयी, मेरा मुँह उसकी चुत पर ही था और मेरी जीभ उसके चुत के अंदर। उसने मेरा सिर पकड़कर मेरा मुँह उसकी चुत पर सटा लिया था। मुझे क्या चल रहा है कुछ समझता इतने में ही उसने पूरा मेरे मुह पे झाड दिया। ज्यादातर पानी मेरे मुह में ही चला गया था। और थोड़ा नीचे गिरा। मेरा मुँह उसकी मूत से भरा था। मेने एक ही बार मे वो सारा पानी गटक लिया। उसका स्वाद नमकीन और मीठा था। सविता मुझे देख रही थी। मेने भी सविता के तरफ देखा।


उसके नजर में एक अलग ही चमक थी। उसने तुरंत मुझे ऊपर लिया और मुझे kiss करने लगी। मेरे मुँह में जो माल था वो सविता भी चाटने लगी। हमने एक लंबा फ़्रेन्च किस किया। थोडी देर बाद मे बाजू हटा। मेरी सास फूल गयी थी। मेने पानी की बोतल उठाई और पानी पीने लगा। मेरा मुह पूरा खारा खारा हो गया था। सविता बिस्तर पे ही सिसकिया लेते पड़ी थी। उसको चरमसुख मिल गया था। अब उसकी नंगी चुत में अपनी आँखों से देख पा रहा था।


मेने पहली बार किसी औरत की चूत खुले आंखोसे देखी थी।सविता अपने पैर फैलाये हुआ वैसेही पड़ी थी। बालो के बीचों बीच उसकी चुत देख कर मुझे स्वर्ग के द्वार का एहसास हो रहा था। उसकी चुत बेहद खूबसूरत थी। काली चुत होने के बावजूद भी वो एक सुंदर फूल की तरह खिली थी। अब सविता भी थोड़ा होश में आ गयी और मेरे पास आकर मुझे लिपट गयी। उसकी आँखें बंद ही थी। वो बहोत दिनों बाद इतना थकी थी। उसने वैसे ही मुझे पानी पिलाने का इशारा किया।


मैने उसको भी थोड़ा पानी पिलाया। अब हम दोनो नंगे एकदूसरे के सामने बैठे थे। अब हमारे दरमियां कोई भी नही था। वो शर्मा रही थी। उसके चुचे एकदम कड़क हो चुके थे। मेरा लन्ड खड़ा का खड़ा था। वो इतना बड़ा था के सविता अपनी नजर उससे हटा नही पा रही थी। वो बीच बीच मे नजर चुरा कर उसे देखती और मेरी तरफ देखकर शर्माती। सविता मेरे पास आयी। और एक छोटी बच्चे के जैसे मुझे लिपट गयी। वो जैसेही मेरे बाहोंमे आयी, मेरा बड़ा और मोटा लन्ड हम दोनों के बीच फस गया और उसके पेट को चुभने लगा।


सविता तो जोरसे हसने लगी। उसने मेरे कन्धेसे अपना हाथ निकाला और मेरे लन्ड को पकड़ कर आड़े लन्ड को हमारे बीच मे खड़ा कर दिया और वो एकदम से मुझे लिपट गयी। मेरे लन्ड की गरमाहट मुझे भी पेट पर महसूस होने लगी ।सविता बीच बीच मे अपने कमर से मेरे लन्ड को मेरे पेट पर ही दबा देती और शर्माती। 3- 4 मिनिट होने के बाद मेने उसे बाहोसे दूर किया। और उसे देखने लगा। मेने उसके स्तन इतने दबाये थे के उसके स्तन की सारी धमनिया नजर आ रही थी।


वो हरि धमनियो का जाल उसके पूरे बदन पर फैला दिखाई पड़ रहा था। उसके चुचे एकदम खड़े हो चुके थे। और उसकी चुत से चिप चीपा पानी टपक रहा था। उसने भी अपनी आँखें खोली। उसने मेरी तरफ देखा और बोली, "मुझे भी तुम्हारा लन्ड चूसना है। दिखाव मुझे तुम्हारा बड़ा लन्ड। मुझे भी उसका पानी पीना है। मेरी प्यास बुझा दो अमेय।" मेरा हथियार तो तैयार ही था। वो उसको ही चिपक के बैठी थी। सविता अब उठ खड़ी हो गई।में भी उठ गया।


उसने मेरे होठो पर किस करना चालू किया। और अपने हाथसे मेरे लन्ड को हिलाने लगी। सविता किस करते करते ही नीचे जाने लगी। उसने मेरे बदन पे आकर, मेरे चुचियो को भी चूसना चालू किया। वो मुझे पसंद आ राह था। में भी उसके स्तनों को दबा कर दूध निकाल रहा था। उसका पूरा दूध मेरे शरीर पर गिर कर सीधे नीचे लन्ड पर जा रहा था। वाह क्या नजारा था वो। अब सविता नीचे जाने गयी। उसने एक हाथसे मेरा लन्ड पकड़ ही रखा था।


मेरा लन्ड किसी लाठी की तरह सख्त हो चुका था। वो मेरी तरफ देख के बोली, " क्या तुम तैयार हो अमेय, स्वर्गसुख पाने के लिए?। तुम अब दूसरी दुनिया मे जाने वाले हो। तुम्हे ऐसा लगेगा के बस तुम किसी और ही धरती पर हो।" मेने बोला," है सविता। मुझे करवा सैर स्वर्ग की।" और मैने आँखे बंद कर ली। इतना सुनते ही उसने मेरा लन्ड अपने मुँह में लिया। वाह... आजतक मेने बस सुना था के स्वर्ग धरती पर ही है पर आज वो मेने देख भी लिया था। मुझे कुछ समझ नही आ रहा था। इस वक़्त अगर सविता बोलती की मुझे तुम्हारी सारी प्रॉपर्टी देदो तो वो भी में उसके नाम पर कर देता और कहता तू बस रुकना मत। चुसती रहे। चूसती रहे।


वो मेरा लन्ड चूसे जा रही थी। वो आगे पीछे होते वक्त उसके बाल यहाँ वहा उड़ रहे थे। मुझे उसके मुह के हर एक भाग का एहसास हो रहा था। मेरा लन्ड जैसे ही उसके मुँह में जाता, वो अपनी जीभ मेरे टोपे पे घुमाती। ऐसा बहोत देर तक वो करती रही। मेरा आधा ही लन्ड वो अपने मुँह में ले पाई थी। बाकी का लन्ड मोटा होने के कारण सविता के मुँह में जा नही पा रहा था । अब मुझे चार्ज लेना था। इतनी देर वो खुदसे चूस रही थी। पर अब मुझे जैसे चाहिए वैसे। में बोला सविता, अब तू हाथ छोड़, में करवाता हु वैसा कर।"


अब मैंने सविता की गर्दन पडकी और फेस fuck करने लगा। में जोर जोर से मेरा लन्ड उसके मुँह में अंदर बाहर करने लगा। रूम में बस gawk gawk gawk का आवाज घूम रहा था। मुह से उसकी थूक मेरे लन्ड से होते हुए नीचे गिर रही थी। मुझे तो बहोत ज्यादा मजे आ रहे थे। तभी मेने बोला, सविता मेरा लन्ड पूरा खा ले ना। तेरी बरसो की भूख मिट सकती है ।


ये ले पूरा अंदर ले मेरा लन्ड। एक भी इंच इसका बाहर मत छोड़। तेरी जीभ मेरी गोटो को लगनी चाहिए, तो देख ले कितना अंदर लेना है। मेने इतना बोलते ही उसने मेरा लन्ड मुँह से बाहर निकाला ।सविता के मुह से उसकी थूक बाहर निकल कर उसके छाती पर गिर रही थी। और वहासे वो उसकी चुत की तरफ जा रही थी। वो वैसेही मेरे तरफ देख के हँसने लगी। और सास लेने लगी। उसकी सास फूली थी। मुझे वो बेहद सेक्सी लगा। मेंने झट से नीचे गया और उसके होठों को चूमा और सारी थूक चाट ली और उसे ज़ोर जोरसे किस करने लगा।


अब हम दोनी दी घुटनो पर थे। मेरा लन्ड उसके पेट को चुभ रहा था। तभी मेने उसका हाथ लेके उसको लन्ड थमा दिया। वो फिरसे लन्ड हिलाने लगी। बीच बीच मे वी मेरा लन्ड अपनी चुत पर से घिस रही थी। उसके चुत पर बाल थे तो मुझे थोड़ी गुदगुदी होती थी और में हरबार हसता था। इस बार उसने वैसे ही किया और में हस पड़ा।


उसको कुछ समझता नही के में क्यो हस रहा हु, उसे लगा में उसपर ही हस रहा था हर बार। इसलिए, उसने अचानक से मेरे लन्ड के बाल जोरसे खिंचे।में एकदम से चिल्लाया, " सविता पागल है क्या तू? अरे अहह..। और वो जोरसे हसने लगी। मे भी चुप नही बैठा। मेने भी जोर से उसके सिर के बाल खिंचे, सविता जोर से चिल्लाई, उई माँ।


उसके मुँह से और कुछ निकलने से पहलेही मेने उसे किस किया। और उसकी जबान चुसने लगा। वो भी चूसने लगी। हम एकदूसरे के जबान को बहोत देर तक चूस ही रहे थे।

अगला भाग के लिए मुजे मेल करे amymog74@gmail.com

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