ट्रेन का एक यादगार सफर - Antarvasna
- Samar
- 12 hours ago
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कामवासना के पाठकों को मेरा नमस्कार, मैं समर कोलकाता से। कामवासना पर आज पहली बार अपनी कहानी शेयर कर रहा हूं, आशा करता हूं आपलोग को मेरी कहानी पसंद आएगी।
जैसा कि आप मेरे नाम से वाकिफ है , मेरी हाइट 5 फिट 7 इंच है और मेरी उमर 24 और मैं हर दिन जिम जाता हूं तो अच्छी खासी बॉडी भी है बस एब्स थोड़े कम है लेकिन इतने है कि अगर टीशर्ट खोलूं तो दिख जाएंगे।
मेरी कहानी की पात्र है शालिनी गुप्ता जिनका उम्र 34-35 है , हाइट 5 फिट 3 इंच बूब्स शायद 34 के होंगे और दिखने में यूं कहे तो कियारा आडवाणी बस कलर थोड़े से डार्क और बूब्स थोड़े से छोटे।
लेकिन अगर आपलोग इमैजिन करना चाहते है तो बुर्ज खलीफा गाने में कियारा आडवाणी को देख लीजिए। अब चलते है कहानी की तरफ , कहानी की शुरुआत होती है भारतीय रेलवे के इंटरसिटी एक्सप्रेस से। मैं कुछ काम के सिलसिले से कोलकाता से बाहर जा रहा था और सफ़र रात का था। तो मैं अपने सीट पर जा बैठा जो कि जनरल कोच था।
थोड़ी देर खिड़की के बाहर हवा का आनंद लेने के बाद मैने अपने आस पास लोगो को देखा जिनमें से एक महिला मतलब शालिनी गुप्ता मेरे सामने वाले सीट में बैठी थी। मैं बैठा था सिंगल सीट मैं और मेरे सामने वाले कम्पार्टमेंट में वो बैठी थी।
सफेद साड़ी और सेक्सी ब्लाउज। चेहरे पर मेकअप और कर्ली बाल। पहली नज़र में तो मुझे लगा काश ऐसी वाइफ़ मुझे मिल जाये तो हर दिन चोदूंगा।
मेरी नजर उस के चेहरे से हट ही नहीं रही थी और यह बात शायद उसे भी पता चल गई थी क्योंकि महिलाओं को ये सब का एहसास हो जाता हैं, लेकिन वो अपने पति और बच्चों के साथ जा रही थी तो मैं ज्यादा घूर भी नहीं सकता था।
परंतु हमलोग का आई कॉन्टैक्ट बहुत बार हुआ। मेरे मन में तो ये चल रहा था कैसे भी बस बात हो जाए फिर मैं चुदाई तक पहुंच ही जाऊंगा।
लेकिन किस्मत को कुछ और ही मंजूर था। थोड़ी देर अच्छी तरह से eye contact होने के बाद वो उल्टे साइड जा बैठी मतलब मैं अब साफ साफ उनके बैक को देख सकता था , अब आँखों को नहीं पीठ को देखना था मुझे।
लेकिन यह ज्यादा कामुक था क्योंकि उसने बैकलेस ब्लाउज पहना था सिर्फ एक डोर थी पीछे की ओर और साइड से कर्वी और थोड़े से निकले हुए पेट यानी यूं कहे तो ऐसा फिगर जो मिशनरी पोजीशन में पेट पकड़ कर और अच्छा ग्रिप देगा ताकि आप और डीप जा सके। यह दृश्य देख कर मेरे लंड में उभार आना शुरु हो गया था, और शायद इस बात की भनक उसको भी थी क्यूंकि वो बीच बीच में आगे की ओर झुक कर मुझे पूरा अच्छे से अपने बैकलेस की व्यू दे रही थी।
अगर मेरा बस चलता तो मैं वहीं सबके सामने उसे पटक कर चोद देता लेकिन ख़ैर। थोड़ी देर तक यह सिलसिला चला लेकिन कहते हैं ना कभी कभी किस्मत अच्छी भी होती है बस हमें लगता है खराब है।
कुछ देर बाद वो उठी और वॉशरूम की और जाने लगी मुझे लगा यह एक मौका है लेकिन क्या पता मै गया और मुझे मार पड़ गई तो?
लेकिन जाते जाते एक बार उसने मुझे पलट कर देखा और वो नज़र मुझे रोक न सकी उसके पीछे जाने से।
मैं पीछे से उसके गोल गोल मादक से गाड़ को देख रहा था जो चलने के साथ साथ हिल रहे थे और साड़ी के ऊपर से ही नज़र आ रहे थे।
उसके जाने के एक मिनट बाद मैं उठा लेकिन मुझे याद नहीं था कि मेरे लंड में तनाव है जो शायद कोई देखे तो दिख जाए।
भला हो आज कल के लूस ट्रैक के फ़ैशन का जिसने मुझे बचा लिया। मैं धीरे धीरे उसके पीछे पीछे टॉयलेट के पास पहुंचा, मेरी हार्ट रेट अपने चरमसीमा पर थी क्यूंकि ये सब किसी की भी लाइफ़ में हर दिन नहीं होता है।
दोनों साइड टॉयलेट के गेट थे तो मैंने एक को खोला तो वो खाली था , फिर मैने हिम्मत कर के दूसरे वाले के लॉक को जैसे खोला शालिनी सामने खड़ी थी और इस तरह से खड़ी थी जैसी उसे पता था मैं आ रहा हूं और मेरा इंतजार कर रही है।
मैं अंदर गया और कुछ सेकंड का eye contact हुआ और फिर मैने उसे साइड में धक्का दे कर उसके दोनों हथेली को अपनी हथेली में मिला कर नेक किस करना स्टार्ट कर दिया हमलोग इस तरह से मिले जैसे कितने साल से बिछड़े हुए आशिक़ हो।
शालिनी की गहरी सांस और हल्की हल्की मादक मोन का असर मेरे ऊपर हो रहा था और मैं बस हाथों को हाथ में ले कर गर्दन के दोनों साइड में किस कर रहा था , फिर उसने इशारा किया दरवाजे की लॉक की और जिसे मैने लगा दिया।
इस बार मैने गर्दन पे किस के जगह हमला सीधा उसके लिपस्टिक वाले मुलायम रसीले होंठ पर किया। और मैने ये दावे के साथ कह सकता हूं मैने आज से पहले इतने रसीले होंठ नहीं चखे थे।
वो मेरा साथ दे रही थी जबकि मेरे एक हाथ उसके हथेली से मिले हुए थे और एक हाथ से मैं उसके बैक पर फेर रहा था और बीच बीच में धीरे धीरे बूब्स पर भी। जो लोग ट्रेन में सफर करते है उनको पता होगा LHB कोच की टॉयलेट की बेसिन थोड़ी बड़ी होती हैं।
मैने कमर से पकड़ कर शालिनी को उस बेसिन के साइड पर बैठाया और फिर से दोनों होंठों को बारी बारी से चूसने लगा और अपने हाथों से ब्लाउज के ऊपर से ही बूब्स को दबाए जा रहा था जो मेरे हाथ में ठीक से आ नहीं रहे थे, वैसे तो मुझे सबसे ज्यादा आकर्षित बूब्स ही करते है परंतु उस दिन मुझे लग रहा था शालिनी की नंगी पीठ को बस खा जाऊं।
तभी मेरे कानो में शालिनी ने कहा मैं ज्यादा देर तक यहाँ नहीं रुक सकती हूं। मेरे मन में आया बस लंड निकल कर चूत में डाल दूं लेकिन ना तो कुछ देर में मेरा पानी निकलता और ना ही वैसे में शालिनी को वो मजा आता जिसकी वो हकदार है।
तो मैने बीच का रास्ता अपनाया मैने उसके दोनों पैरों को थोड़ा फैलायला और साड़ी को थोड़ा ऊपर कर के दोनों पैरों के बीच जो जन्नत थी उसको टच करने लगा , मेरे हाथों में लगी पानी सी गीली पदार्थ ने मुझे बता दिया था चूत गर्म है और तैयार है चुदायी के लिए लेकिन मुझे अपने आप को रोकना था क्यूंकि स्त्री को अगर आप फोरप्ले में एक बार झाड़ दोगे तो वो ये भूल नहीं पाएगी कभी।
तो बस मैने उसके दोनों पैरों को थोड़ा और फैलाया , और अपने आप को इस तरीके से सेट किया जिस से मैं आराम से चूत का रसपान कर सकूं। उसके दोनों पैर मेरे कंधे पर थे और वो बेसिन मै बैठी थे और मैं दोनों जांघों को चूमते हुए चूत की ओर बढ़ रहा था। जब में चूत के पास पहुंचा तो मुझे पैंटी की हालत देख कर लगा ये कितने दिनों से प्यासी है।
फिर मैने पैंटी के ऊपर से ही चूमते हुए अपनी दांत से पैंटी को हल्के से काट दिया जिस से वह सिहर गई और एक लम्बी सी सिसकारी लेने लगी। मैं पैंटी को खोलने में समय की बर्बादी नहीं चाहता था परन्तु बिना ऐसा किए अच्छी तरह से चूत का स्वाद भी लेना मुमकिन नहीं था। फिर मैने जल्दी से शालिनी की पैंटी को उतारा और उसे दिखाते हुए एक बार उसे चाटा ताकि उसे पता चले मैं उसके लिये कितना तड़प रहा हूं।
पैंटी को साइड में रख कर मैं वापस से दोनों पैरों के बीच हल्की हल्की बालों वाली चूत पर गया यह मेरा पहला दर्शन था शालिनी की गीली चूत का। मैने चूत के क्लिटोरिस को किस करते हुए चूत के अंदरी हिस्सों को चाटने लगा जिस से शालिनी मेरे बालों को सहलाने लगी।
फिर थोड़ी देर चाटने के बाद मैं वापस से खड़ा हुआ और उसके होंठों पर किस करने लगा और अपने हाथों को चूत की और ले जाते हुए धीरे से एक अंगुली उसके चूत के अंदर प्रवेश किया जिस से शालिनी के ऊपर कोई ज्यादा फर्क नहीं पड़ा तो मैं समझ गया थोड़ा सा से शालिनी को खुश करना मुश्किल है।
फिर मैने किस करते हुए दो अंगुलियों को चूत में डाला जिस से वह सिहर गई और मेरे होंठ को काट दिया। फिर मैने शालिनी की कानों में बोला, तुम सिर्फ़ मज़े लो। बाक़ी का काम मुजे करने दो। और धीरे से कान में दांत काट दिया और बूब्स पर किस करते हुए दोनों पैरों के बीच आ गया और जांघों में जो थोड़े थोड़े पसीने थे, उसको चाटते हुए चूत की ओर बढ़ते गया।
मुझे शालिनी की आवाज सुनाई नहीं दे रही थी लेकिन जिस तरीके से वो मेरे बालों को सहला रही थी मुझे ये पता चल गया था कि वो भी साथ दे रही है। फिर मैने उसकी गीली चूत के फांकों को फैला कर चाटना शुरू किया और अपने एक हाथ को उसके मुंह के अंदर घुसा दिया , और धीरे धीरे चूत का रसपान करने लगा।
लगातार मेरे जीभ के वार से शालिनी निढाल होते जा रही थी और एक समय उसने मेरे सिर को जोर से पकड़ लिया ,ऐसा लगा मानो वो मुझे अपनी चूत में अंदर घुसाना चाहती हो। मुझे पता चल गया अब वो झड़ने वाली है तो मैं उठ गया और उसकी पैंटी को उसके मुंह में डाल दिया जिस से उसे रफ़ सेक्स का भी आनंद मिल जाए। और पुनः उसकी चूत को चाटने लगा, चूत की हल्की हल्की बाल मेरे मुंह में आ रही थी जो मुझे और ज्यादा रोमांच कर रही थी। मैं कभी चाट रहा था कभी अपने अंगुलियों से चूत को मसल रहा था। फिर उसने बोला अब मत तड़पाओ और मैं उठ कर उसके मुंह से पैंटी निकल कर अपने होंठो को उसके होंठ से मिलाया और तीन अंगुली से चूत के दाने को मसलने लगा, जिस से वो अपनी अंतिम चरण पर पहुँच गई और फिर मेरे होंठ को काटते हुए वो चरम सुख की और पहुंच गई।
मेरे हाथों में चूत की पानी और वो पसीने से लथपथ फिर मैने उसे अलग किया और अपने हाथों को एक बार चाटा और फिर वही हाथ उसके मुंह में दे कर एक लंबा सा चुम्बन दिया। वो शांत हो गई थी तो मैने उसे नॉर्मल करने के लिए उसकी चूत को किस किया और चाटते हुए साफ कर दिया। फिर वह उठी तो मुझे लगा बात आगे बढ़ेगी क्योंकि मेरा लन्ड अपने उफान पर था लेकिन वो उठ कर सीधा बाहर चली गई।
फिर मैने अपने लन्ड को शांत किया और बाहर आ गया। मेरी स्टॉप आ गई तो मुझे लगा वो अपना नंबर या कुछ भी देगी लेकिन उसने ऐसा कुछ नहीं किया। मैं उतर कर अपने सफ़र की और चल गया और वो रात याद करते हुए मैंने अपने लन्ड को सहलाया।
कुछ दिनों तक मुझे लगा काश मैं उस रात शालिनी को अपने 8 इंच के काले गुलाबी लन्ड की सवारी करवा देता लेकिन मुझे शालिनी को ये भी बताना था बिना लन्ड लिए वो चरमसुख प्राप्त कर सकती है।
मेरे प्यारे सहपाठी आपलोग जरूर बताइयेगा अगर आप मेरे जगह रहते तो क्या करते? और कहते है न जो होता है अच्छे के लिए होता है , ऐसा मैं इसलिए कह रहा हूं यह आपको आने वाली भाग में पता चलेगा।
कहानी अगर आपको अच्छी लगी या कुछ सुझाव हो तो आप मेरे ईमेल - sam.0417418@gmail.com पर साझा कर सकते है।
Antarvasna
