top of page

मामा की शादीशुदा बेटी : Hindi Sex Stories

दोस्तों, मेरा नाम जय है (नाम बदला हुआ)। मैं आगरा का रहने वाला हूं। अभी सेकंड ईयर कॉलेज में पढ़ता हूं और ज्यादातर समय घर पर ही रहता हूं। हमारे घर में कपड़े सिलने का काम चलता है, इसी वजह से मुझे ये सुनहरा मौका मिला जिससे मैंने अपने बचपन के कई ख्वाब पूरे किए।


इस कहानी में मैं आपको बताने जा रहा हूं कि कैसे मैंने अपनी मामा की शादीशुदा लड़की नेहा (नाम बदला हुआ) को चोदा। नेहा दीदी की उम्र करीब 35 साल है। उनका पति पिछले दो साल से बाहर नौकरी करता है, इसलिए वे अकेली रहती हैं। दीदी देखने में बहुत हॉट हैं, उनके मम्मे इतने भरे-भरे, बड़े-बड़े कि कोई भी देखकर पागल हो जाए और गांड तो इतनी बड़ी, गोल-मटोल और मुलायम कि बस छूने का, दबाने का मन करता है। मैं उन्हें हर बार देखते ही सोचता, काश इन्हें चोद पाऊं, इनके मम्मों को दबाऊं, इनकी गांड को थपथपाऊं और इनकी चूत में अपना लंड डालकर जोर-जोर से पेलूं।


एक दिन नेहा दीदी हमारे घर आईं। कपड़े सिलवाने आई थीं। जैसे ही वे आईं, मैंने उन्हें देखा तो दिल धड़कने लगा। उन्होंने साड़ी पहनी हुई थी, लेकिन ब्लाउज टाइट था, मम्मे उभरे हुए लग रहे थे। मैंने उनसे पूछा, “दीदी, चाय लोगी?” तो वे मुस्कुराकर बोलीं, “रहने दे जय, बस पानी ले आ।” तभी मम्मी आ गईं और दोनों आपस में बात करने लगीं। बातों-बातों में दीदी ने कहा कि घर में कुछ काम नहीं होता, दिनभर बोर हो जाती हैं। इसलिए वे भी कपड़े सिलने का काम शुरू करना चाहती हैं ताकि टाइम भी पास हो जाए।


अगले ही दिन मम्मी ने मुझे उनके घर कपड़े पहुंचाने को कहा। मैं तुरंत बाइक निकालकर चल दिया। जैसे ही उनके घर पहुंचा, मुख्य दरवाजा बंद था लेकिन थोड़ा सा खुला हुआ था, जैसे किसी ने जल्दी में बंद किया हो। मैं धीरे से अंदर चला गया और सीढ़ियां चढ़कर ऊपर पहुंचा। वहां नेहा दीदी सिर्फ भीगे हुए ब्लाउज और पेटीकोट में खड़ी थीं। ब्लाउज इतना गीला था कि पारदर्शी हो गया था, नीचे के ब्रा की लेस साफ दिख रही थी और मम्मों की गहराई भी झांक रही थी। पेटीकोट पूरा भीगा हुआ था, शरीर से चिपका हुआ, उनकी मोटी जांघों की आउटलाइन और बड़ी-बड़ी गांड की लाइन बिल्कुल साफ नजर आ रही थी। पानी की बूंदें उनकी कमर से नीचे बह रही थीं। बस उन्हें ऐसे देखते ही मेरा लंड एक झटके में खड़ा हो गया, अंडरवियर में दबाव पड़ने लगा।


मैंने हकलाते हुए कहा, “दीदी, ये कपड़े मम्मी ने पहुंचाए हैं।” वे मुस्कुराईं और बोलीं, “आ… अंदर आ जा जय।”


मैं अंदर चला गया। उन्होंने पूछा, “चाय पीएगा?” मैंने हां में सिर हिलाया। जैसे ही वे किचन की तरफ चाय बनाने गईं, मैं उनकी पीठ के पीछे खड़ा होकर उनकी गांड को घूरने लगा। गीले पेटीकोट में गांड इतनी चमक रही थी, जैसे कोई मक्खन लगाया हो। हर कदम पर गांड हिल रही थी, मैं सोच रहा था कि काश इसे दबा पाऊं। मेरा लंड इतना सख्त हो गया था कि अंडरवियर फाड़ने को तैयार था, आगे से प्रीकम निकलने लगा था।


तभी मेरी नजर उनके बाथरूम पर पड़ी। बाथरूम में दरवाजा ही नहीं था, सिर्फ एक पतला-सा पर्दा लटका हुआ था। मैं चुपके से अंदर घुस गया। वहां फर्श पर उनकी गीली पैंटी पड़ी थी, लाल रंग की, जालीदार। मैंने उसे उठाया और नाक से लगाकर सूंघा। उसमें उनकी चूत की मादक, नमकीन-मीठी खुशबू थी, जो सीधे दिमाग में चली गई। मेरी सांसें तेज हो गईं। मैंने फटाफट अपना लोवर नीचे किया, लंड बाहर निकाला और उस पैंटी को लंड पर लपेटकर मुठ मारने लगा। लंड पर उनकी खुशबू लग रही थी, मैं आंखें बंद करके कल्पना कर रहा था कि दीदी मेरे सामने नंगी हैं और मैं उन्हें चोद रहा हूं। मुठ तेज-तेज चल रही थी, सुपाड़ा फूल गया था, मजा आने लगा था।


इतने में अचानक दीदी की आवाज आई, “जय, कहां हो?” मैं एकदम घबरा गया, दिल जोर-जोर से धड़कने लगा। जल्दी से लंड अंदर डाला, पैंटी वहीं फेंकी और बाहर निकल आया। हांफते हुए बोला, “आया दीदी!”


मैं कमरे में बैठ गया। बाथरूम साफ दिखता था, पर्दा हल्का-सा हिल रहा था और अंदर की हल्की रोशनी से सब कुछ साफ नजर आ रहा था। थोड़ी देर बाद नेहा दीदी चाय का कप लेकर आईं। उनके गीले ब्लाउज से मम्मे पूरी तरह उभरे हुए थे, निप्पल की सख्त आउटलाइन साफ दिख रही थी। कमरे में हल्का अंधेरा था क्योंकि खिड़की पर पर्दा था और लाइट अभी नहीं आई थी। वे हंसते हुए मेरे पास आईं और बोलीं, “जय, तुम बाथरूम में क्या कर रहे थे?”


मैं घबरा गया, दिल जोर-जोर से धड़क रहा था। जल्दी से बहाना बनाया, “कुछ नहीं दीदी, बस देख रहा था कि बाथरूम में दरवाजा क्यों नहीं है।”


वे मुस्कुराईं, थोड़ा शरमाते हुए बोलीं, “मुझे बंद करके घुटन होती है ना, इसलिए निकलवा दिया। खुला रहता है तो अच्छा लगता है… हवा आती है।” उनकी आवाज में हल्की-सी शरारत और उत्तेजना थी।


मैं चाय का घूंट लेने लगा लेकिन नजरें बार-बार उनके मम्मों पर जा रही थीं। ब्लाउज इतना गीला और पतला था कि हर सांस के साथ मम्मे हिल रहे थे। कमरे का अंधेरा और गहरा हो रहा था, जिससे उनकी बॉडी की कर्व्स और ज्यादा उभर रही थीं। दीदी नोटिस कर रही थीं, उनकी सांसें भी तेज हो गई थीं लेकिन वे चुप रहीं, बस मुझे देखती रहीं।


अचानक लाइट चली गई। कमरा और ज्यादा अंधेरा हो गया, सिर्फ बाहर गली की हल्की रोशनी खिड़की से आ रही थी। दीदी बोलीं, “पता नहीं इस लाइट की क्या बीमारी है। अभी मेरे सारे कपड़े नहीं धुले, पैंटी भी गीली पड़ी है। अब क्या पहनूं?”


उनके मुंह से ये सुनकर मेरे दिमाग में आग लग गई। इसका मतलब साफ था कि अभी उन्होंने पैंटी नहीं पहनी। गीले पेटीकोट के नीचे कुछ नहीं था, सिर्फ नंगी चूत। मेरा लंड पहले से ही सख्त था, अब दर्द करने लगा।


वे बोलीं, “जय, तुम्हारे पास मोबाइल है? टॉर्च जला दो ना, दूसरी पैंटी ढूंढने में मदद कर।”


मैंने फटाफट मोबाइल निकाला और टॉर्च जला दी। दीदी आगे-आगे चल रही थीं, मैं उनके ठीक पीछे। पूरा ध्यान उनकी बड़ी-बड़ी गांड पर था, जो गीले पेटीकोट में हिल रही थी। हर कदम पर गांड की गोलाई और दरार साफ नजर आ रही थी। कमरे का अंधेरा और टॉर्च की रोशनी मिलकर उनकी बॉडी को और ज्यादा सेक्सी बना रही थी।


वे अलमारी के पास पहुंचीं और झुककर नीचे के डिब्बे में हाथ डालने लगीं। जैसे ही वे झुकीं, पेटीकोट पीछे चढ़ गया और मेरा खड़ा लंड उनकी गांड की दरार से सट गया। मैं थोड़ा आगे झुक गया, लंड और जोर से दबा। दीदी रुक गईं, लेकिन पीछे हटीं नहीं। बस धीरे-धीरे फिर झुकना शुरू कर दिया। बार-बार झुकतीं, लंड रगड़ता रहता। मैंने हल्का-हल्का कमर पकड़ ली और लंड को उनकी गांड पर रगड़ने लगा। पेटीकोट गीला होने से मेरे लोवर के आगे भी गीलापन फैल गया।


वे फुसफुसाईं, “जय… इतना चिपक मत… लेकिन… रुकना भी मत…” उनकी आवाज कांप रही थी। मैंने और जोर से रगड़ा, लंड की सुपारी उनकी गांड की दरार में दब रही थी। दीदी की सांसें तेज हो गईं, वे हल्के-हल्के कमर हिला रही थीं। मुझे इतना मजा आ रहा था कि लग रहा था अभी झड़ जाऊंगा। शायद उन्हें भी बहुत अच्छा लग रहा था, क्योंकि वे अब जानबूझकर ज्यादा पीछे धकेल रही थीं।


अचानक लाइट आ गई। कमरा फिर रोशन हो गया। उन्हें पुरानी फटी हुई पैंटी मिल गई, जिसमें साइड से बड़ा फटाव था और कई छेद थे। वे उसे हाथ में लेकर बोलीं, “जय, एक काम कर सकता है? मेरे लिए अभी नई पैंटी ला सकता है?”


मैंने कहा, “हां दीदी, साइज बताओ।”


वे शरमाकर बोलीं, “साइज तो पता नहीं… जीजा जी लाते थे। वे तो दो साल से बाहर हैं ना।”


मैंने मौका देखकर कहा, “कोई बात नहीं, मैं हाथ से माप लेता हूं।”


वे ठहाका मारकर हंस पड़ीं, “बदमाश!” लेकिन उनकी आंखों में शरारत और चाहत दोनों थीं।


फिर वे बोलीं, “टॉर्च बंद कर दे, इसी फटी वाली अभी पहन लेती हूं।”


मैंने टॉर्च बंद कर दी। अंधेरा फिर छा गया। कुछ सेकंड बीते। फिर उन्होंने कहा, “टॉर्च जला।”


मैंने टॉर्च जलाई तो दीदी ने पेटीकोट खोल दिया था। अब सिर्फ ब्लाउज और वो फटी पैंटी में खड़ी थीं। पैंटी इतनी टाइट और फटी थी कि चूत की झांटें और सिलवटें साफ दिख रही थीं। कमरे का अंधेरा और टॉर्च की रोशनी उनकी बॉडी पर पड़ रही थी, जिससे वे और ज्यादा हॉट लग रही थीं। मैं उन्हें घूर रहा था, मुंह खुला रह गया।


वे बोलीं, “घूरना बंद कर जय… और ये किसी को मत बताना, ठीक है?”


मैं उनके पास चला गया। उन्होंने मेरा हाथ पकड़ा और धीरे से अपनी कमर पर रख दिया। मैंने कमर पर हाथ फेरा, फिर धीरे-धीरे नीचे गांड पर ले गया। गांड दबाते ही उनके मुंह से “आह्ह…” निकली। उनका बदन सिहर उठा, वे उत्तेजित हो गईं।


मैंने उनके कान के पास मुंह ले जाकर फुसफुसाया, “दीदी, पैंटी भी उतार दो ना… सही माप लूंगा।”


वे मादक आवाज में बोलीं, “तू ही उतार दे न… तेरे हाथ का अहसास बहुत अच्छा लग रहा है।”


मैंने धीरे से पैंटी के किनारे पकड़े। दोनों तरफ से नीचे खींचा। पैंटी घुटनों तक आ गई। उनकी चूत सामने थी, हल्की झांटों से ढकी, गीली चमक रही थी। मैंने हाथ रखा, उंगलियां चूत की सिलवटों पर फेरीं। वे सिहर उठीं, “आह… जय…”


मैंने एक उंगली धीरे से अंदर डाली। चूत बहुत गीली और गर्म थी। अंदर-अंदर उंगली घुमाई तो वे “आह… इह्ह… और अंदर…” करने लगीं। मैंने उन्हें दीवार से सटाकर किस करना शुरू किया। होंठ चूसते हुए जीभ अंदर डाली। वे मेरी जीभ चूसने लगीं। किस करते-करते मैंने ब्लाउज के हुक खोले। ब्लाउज खुल गया, ब्रा नहीं थी। भरे-भरे मम्मे बाहर आ गए।


अब दीदी पूरी नंगी थीं। मैं नीचे बैठ गया। उनकी चूत मेरे मुंह के सामने थी। जीभ निकालकर क्लिटोरिस पर रखी, हल्के-हल्के सहलाया। वे जोर से सिसकारीं, “आह्ह… ओह्ह… जय… चाट और जोर से… हाय…”


मैंने जीभ तेज की, क्लिट को चाटा, चूसा। फिर जीभ अंदर डालकर चूत चाटने लगा। उनका रस मुंह में आ रहा था। वे मेरे बाल पकड़कर सिर दबा रही थीं, “उम्म्म… आह्ह… बहुत अच्छा लग रहा है… मत रुकना…” उनकी सिसकारियां कमरे में गूंज रही थीं।


कुछ देर बाद मैं उठा। दोनों मम्मों को हाथों में लिया, मसलने लगा। निप्पल सख्त और खड़े थे। मैंने एक निप्पल मुंह में लिया, जीभ से घुमाया, जोर से चूसा। वे चीखीं, “आह्ह… चूस जय… जोर से… दूसरा भी…” मैंने दूसरा मम्मा भी चूसा, दांतों से हल्का काटा। वे मेरे सिर को दबा रही थीं।


उन्होंने मेरे लंड को पैंट के ऊपर से सहलाना शुरू किया, पहले हल्के-हल्के हाथ फेरा, फिर पकड़कर दबाने लगीं। उनकी उंगलियां लंड की पूरी लंबाई पर सरक रही थीं, जिससे मेरा लंड और सख्त हो गया। फिर वे धीरे से नीचे बैठ गईं, मेरी कमर के पास आकर मेरा लोवर का बटन खोला और ज़िप नीचे की। लोवर को घुटनों तक खींचकर उतारा, फिर अंडरवियर की इलास्टिक पकड़कर धीरे-धीरे नीचे खींचा। जैसे ही अंडरवियर नीचे हुआ, मेरा 6 इंच का लंड बाहर आया, पूरी तरह खड़ा और सुपारा चमक रहा था, पहले से ही प्रीकम से गीला।


नेहा दीदी ने लंड को दोनों हाथों से पकड़ा, ऊपर-नीचे सहलाया, त्वचा को पीछे खींचकर सुपारे को नंगा किया। उनकी नजरें लंड पर टिकी थीं, जैसे भूखी हों। फिर उन्होंने जीभ निकालकर सुपारे पर हल्का सा चाटा, गोल-गोल घुमाया, प्रीकम का स्वाद लिया। मैं सिहर उठा, “आह्ह… दीदी…” उन्होंने मुस्कुराकर लंड को मुंह के पास लाया और धीरे से होंठों से चूम लिया। फिर मुंह खोलकर सुपारे को अंदर लिया, जीभ से चारों तरफ लपेटा। “ग्ग्ग्ग… गी… गी…” की आवाजें आने लगीं।


धीरे-धीरे उन्होंने लंड को और गहराई तक मुंह में लिया, आधा लंड अंदर चला गया। मैंने उनका सिर पकड़ा, बालों में उंगलियां फेरते हुए कहा, “आह्ह दीदी… कितना गर्म और नरम मुंह है… चूसो और जोर से…” वे तेज हो गईं, मुंह ऊपर-नीचे करने लगीं, हाथ से बाकी हिस्से को सहलाती रहीं। कभी सुपारे को जीभ से तेज चाटतीं, कभी पूरा मुंह में लेकर गले तक ले जातीं। गले से “ग्ग्ग्ग… गों…” की आवाज आ रही थी, लार लंड पर बह रही थी। मैं उनकी सिर को हल्का दबाता रहा, वे और जोश में चूस रही थीं। करीब 4-5 मिनट तक उन्होंने ऐसे ही लंड चूसा, मेरी सांसें तेज हो गईं, झड़ने वाला था लेकिन मैं रुक गया।


फिर वे उठीं, होंठ चाटते हुए बोलीं, “अब और मत तड़पा जय… मेरी चूत की आग बुझा दे… जल्दी।” उनकी आवाज कांप रही थी, आंखों में भूख साफ दिख रही थी।


मैंने उन्हें बिस्तर पर धीरे से लिटाया। उनकी टांगें फैलाईं, घुटने मोड़कर पूरी तरह खोल दिए। उनकी चूत सामने थी, हल्की झांटों वाली, गीली और फूली हुई। मैंने लंड हाथ में पकड़ा, सुपारे को उनकी चूत की दरवाजे पर रखकर रगड़ा। क्लिटोरिस पर सुपारा घुमाया तो वे सिहर उठीं, “आह्ह… डाल ना जय… मत तड़पा…” मैंने सुपारे को थोड़ा अंदर धकेला, चूत का मुंह खुला। धीरे से धक्का मारा, लंड आधा अंदर चला गया। चूत टाइट थी, गर्म और गीली।


वे “उफ्फ… आह्ह…” कर रही थीं। मैंने रुककर उन्हें सांस लेने दिया, फिर एक जोरदार धक्का मारा। पूरा 6 इंच का लंड एक झटके में अंदर चला गया। वे जोर से चीखीं, “उई मां… मार डाला साले… आह्ह… बहुत मोटा है… फाड़ दिया…” उनका शरीर कांप उठा, चूत ने लंड को जोर से कस लिया।


मैं रुक गया, उनके मम्मों को सहलाते हुए कहा, “दीदी, ठीक हो?” वे आंखें बंद करके बोलीं, “हां… अब धीरे-धीरे…” मैंने धीरे-धीरे धक्के मारने शुरू किए। हर धक्के के साथ लंड पूरा बाहर आता, फिर पूरा अंदर जाता। चूत से छप-छप की हल्की आवाज आने लगी। वे “आह्ह… अच्छा लग रहा है… और अंदर… हां ऐसे ही…” कह रही थीं। उनकी टांगें मेरी कमर पर लिपट गईं।


धीरे-धीरे मैंने स्पीड बढ़ाई। अब जोर-जोर से धक्के मार रहा था। वे गांड उठाकर हर धक्के का जवाब दे रही थीं। “जोर से जय… फाड़ दो चूत… आह्ह… ओह्ह… और तेज…” मैं उनके मम्मों को दबा रहा था, निप्पल को उंगलियों से पिंच कर रहा था। वे सिसकारियां ले रही थीं, “आह्ह… इह्ह… हाय… कितना मजा आ रहा है…”


करीब 10 मिनट तक लगातार चोदा। उनकी चूत बार-बार कस रही थी, सांसें तेज हो गईं। अचानक वे चिल्लाईं, “आ रही है… आह्ह… झड़ रही हूं… ओह्ह… जय… ले ले…” उनका शरीर कांप उठा, चूत ने लंड को बहुत जोर से दबाया, गर्म रस निकलकर बहने लगा। वे झड़ गईं, आंखें बंद, मुंह से लंबी सिसकारी।


मैं रुका नहीं। चूत और गीली हो गई थी, रस से लंड चिकना। अब और जोर से धक्के मारने लगा। छप-छप… छप-छप की आवाजें कमरे में गूंज रही थीं। उनकी चूत अभी भी हल्के-हल्के सिकुड़ रही थी। मैं बोला, “आह्ह दीदी… अब मेरा भी निकलने वाला है… ले ले…” वे बोलीं, “अंदर ही झड़ दे जय… भर दे मुझे…”


मैंने आखिरी जोरदार धक्के मारे, लंड पूरा अंदर डालकर रुक गया। “आह्ह… निकल रहा है…” कहते हुए गर्म वीर्य की धार चूत में छोड़ दी। एक-दो-तीन झटके में सब अंदर भर गया।


हम दोनों थककर बेड पर लेट गए, सांसें अभी भी तेज चल रही थीं। मेरा लंड अभी भी आधा खड़ा था, उनकी चूत से हमारा मिला-जुला रस धीरे-धीरे बहकर चादर पर फैल रहा था। दीदी की आंखें बंद थीं, लेकिन चेहरे पर संतुष्टि की हल्की मुस्कान थी। मैंने उनका एक मम्मा हल्के से सहलाया, निप्पल अभी भी सख्त थे। वे सिहरकर मेरी तरफ मुड़ीं और धीरे से मेरे होंठों पर अपने होंठ रख दिए।


किस शुरू हुई, पहले हल्की-हल्की, जैसे अभी-अभी की चुदाई की यादें ताजा कर रही हों। मेरी जीभ उनकी जीभ से खेलने लगी, हम दोनों के मुंह में एक-दूसरे का स्वाद था – नमकीन, गर्म और वासना से भरा। मैंने उनके निचले होंठ को हल्के से काटा, वे “उम्म्म…” करके कराह उठीं। किस गहरी होती गई, मेरे हाथ उनकी कमर पर फिरने लगे, फिर गांड पर पहुंच गए। मैंने उनकी बड़ी-बड़ी गांड को दोनों हाथों से दबाया, उंगलियां गहरे में धंस गईं। वे मेरे सीने से और चिपक गईं, उनके मम्मे मेरी छाती पर दब रहे थे।


हम ऐसे ही किस करते रहे, कभी होंठ चूसते, कभी जीभ अंदर डालकर एक-दूसरे को चाटते। समय का पता ही नहीं चला। करीब आधा घंटा बीत गया। दीदी की सांसें अब सामान्य हो रही थीं, लेकिन आंखों में अभी भी वो चमक थी। अचानक वे मेरे कान के पास मुंह लाकर फुसफुसाईं, “जय… आज तूने मेरी प्यास बुझा दी… इतने सालों बाद किसी ने इतना अच्छे से संतुष्ट किया है… अब से मैं तुझसे ही चुदवाऊंगी।”


उनकी आवाज में एक मादकपन था, जैसे अब वो पूरी तरह मेरी हो चुकी हों। मैंने उनकी आंखों में देखा और मुस्कुराकर कहा, “आज से तू मेरी रंडी है।”


वे जोर से हंस पड़ीं, हंसी में शरारत थी। फिर मेरे गाल पर हल्का थप्पड़ मारकर बोलीं, “अच्छा जी… तो अपनी रंडी के लिए पैंटी ले आना। अच्छी वाली, लेस वाली।”


मैंने उनकी कमर में हाथ डालकर उन्हें और करीब खींचा और कहा, “कल लाऊंगा… लेकिन जैसे ही मैं आऊं, तुझे पैंटी उतारनी होगी। सीधे मेरे सामने, बिना कुछ कहे।”


वे फिर हंस दीं, इस बार शरमाते हुए। फिर मेरे होंठों पर एक लंबा, गहरा किस किया – जैसे वादा कर रही हों कि कल फिर यही होगा। उनकी जीभ मेरे मुंह में घूमी, मैंने भी पूरा जोश से जवाब दिया। किस खत्म होने पर वे बोलीं, “जा अब… वरना मम्मी को शक हो जाएगा।”


मैंने उनके माथे पर एक किस किया, कपड़े पहने और घर की तरफ चल दिया। मन में बस कल का इंतजार था।


तब से जब भी मौका मिलता, हम खूब चुदाई करते हैं।


हॉट दीदी Hindi Sex Stories आपको कैसी लगी? कमेंट में जरूर बताना

Recent Posts

See All
बेटी, तेरी चूत तो कच्ची कली जैसी है - Hindi Sex Stories

मैं शर्म से पानी-पानी हो गई। मेरे पैर कांपने लगे, और मैं जमीन पर बैठ गई। कैंची हाथ में ले ली, पर मेरी नजर उनके उस विशाल लंड पर पड़ी, जो किसी काले मोटे लोहे जैसा था। मुझे उसे हटाना था ताकि उनकी गोलियों

 
 
 
माँ का बेटे बेटी के साथ ग्रुप सेक्स - Free Sex Kahani

ये कहानी मेरी फैमिली की गंदी सच्चाई की है, जो मैंने खुद देखी और सुनी है। भाईयो, इस कहानी में गालियां भरी हैं, तो अगर कोई नर्म दिल वाला है तो कृपया इसे न पढ़ें इसमें चुदाई की फुल डिटेल है, तो अब अगर तु

 
 
 
बहन का फटा हुआ भोसड़ा - Hindi Sex Stories

बचपन से मुझे चुदाई का चस्का था. मेरी बहन खालू के घर गई थी। वहाँ में उसे ट्रेन से रिटर्न लेने गया। वहाँ ट्रेन के फर्स्ट क्लास में उसकी ग्रुप में चुदाई हुई।

 
 
 

Hindi Sex Stories, Indian Sex Stories, Desi Stories, Antarvasna, Free Sex Kahani, Kamvasna Stories 

कामवासना एक नोट फॉर प्रॉफिट, सम्पूर्ण मुफ्त और ऐड फ्री वेबसाइट है।​हमारा उद्देश्य सिर्फ़ फ्री में मनोरंजन देना और बेहतर कम्युनिटी बनाना है।  

Kamvasna is the best and only ad free website for Desi Entertainment. Our aim is to provide free entertainment and make better Kamvasna Community

bottom of page