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मेरे रंडीबाज बनने का सफर-२: Antarvasna Sex Stories

नमस्कार दोस्तों, मेरा नाम करण है।


मेरी शक्ल-सूरत बिल्कुल साधारण है — 5 फीट 10 इंच लंबा, साँवला रंग, लेकिन शरीर गठीला और एथलेटिक है। लोग मुझे देखकर कभी नहीं कहेंगे कि अंदर से मैं कितना बड़ा रंडीबाज़ हूँ, लेकिन कॉलेज के पहले साल से ही मेरी ये भूख शुरू हुई और आज तक कभी नहीं रुकी।


मेरी पिछली कहानी “मेरे रंडीबाज बनने का सफर - 1” यहाँ पढ़ सकते हैं। पिछली कहानी में आपने देखा की कैसे मेरा पहला अनुभव 45 साल की मुस्लिम रंडी शबनम के साथ हुआ।


काली, मोटी, झुर्रियों वाली, भारी शरीर वाली औरत। पहले तो डर लगा, लंड खड़ा भी नहीं हो रहा था, लेकिन जब उसकी मोटी गांड चाटनी शुरू की तो मैं पागल हो गया। उसकी गांड पर मुंह फेरता रहा, जीभ अंदर डाली, फेस-सिटिंग करवाई, फिर 69 में उसकी चूत चाटी और आखिर में उसका गला चोदकर माल उतारा। उसी दिन से मैं पक्का गांड-प्रेमी रंडीबाज़ बन गया।


मुझे गांड चाटना और चटवाना बेहद पसंद है। मैं खुद किसी की गांड घंटों चाट सकता हूँ, जीभ अंदर घुसाकर चूस सकता हूँ, नाक पूरी तरह दबाकर सूंघ सकता हूँ। बदबू, पसीना, थूक — सब कुछ मुझे और उत्तेजित करता है। फेस-सिटिंग बहुत पसंद है, कोई आंटी मेरी शक्ल पर अपनी गांड रखकर बैठे और मैं उसकी गांड चाटता रहूँ। उसी के साथ मुझे अपनी गांड भी चटवाना अच्छा लगता है। 69 पोजीशन में चूत-लंड चूसते हुए गांड चाटना मेरी फेवरेट है।


मैं गंदी गंदी बातें करते हुए चुदाई करना पसंद करता हूँ। गला चोदना (deepthroat), जबरदस्ती लंड गले में ठूंसना, और आंटी को उल्टी करवाने तक ले जाना मुझे बहुत उत्तेजित करता है। पैसे देकर सस्ती रंडियों से शुरू किया, लेकिन अब असली मज़ा तो उन घरेलू मोटी आंटियों को चोदने में आता है।


बात मेरी कॉलेज की सेकंड ईयर की है। मैं हॉस्टल छोड़कर अपने कुछ दोस्तों के साथ फ्लैट में रहने लगा था। फ्लैट के पास ही भोपाल वाले भईया का एक छोटा-सा कैफ़े था। भईया हमारे घर के पास के रहने वाले थे, इसलिए घरवालों और मुझसे उनकी अच्छी जान-पहचान थी। मैं अक्सर वहाँ खाने-पीने और मिलने के बहाने चला जाता था। धीरे-धीरे भईया के साथ मेरी अच्छी बनती गई।


भईया के कैफ़े में काम करती थीं यामिनी भाभी। वो बर्तन धोने, साफ-सफाई और थोड़ा-बहुत खाना बनाने का काम करती थीं। वो पास ही एक किराए के मकान में अपने पति और बच्चों के साथ रहती थीं। पति मजदूरी करते थे और बच्चे स्कूल जाते थे।


यामिनी भाभी की उम्र करीब 35 साल थी। वो न ज्यादा मोटी थीं और न ही ज्यादा पतली। औसत कद-काठी की, काली रंगत वाली औरत थीं।


दिकने में कुछ खास अच्छी नहीं लगती थीं। चेहरे पर काफी मेकअप लगाती थीं, आँखों में काजल, होंठों पर लाल लिपस्टिक। सूट पहनकर आती थीं, लेकिन उनका स्टाइल थोड़ा चालू किस्म का था। हाव-भाव से लगता था कि ये औरत अंदर से काफी खुली हुई है।


मुझे शुरू से ही उनमें कुछ खास आकर्षण महसूस होता था। भले ही वो खूबसूरत न हों, लेकिन अधेड़ उम्र की औरतों के प्रति मेरी भूख हमेशा मुझे उनकी तरफ खींचती थी। उनकी कमर, गांड और सूट के अंदर दबती चूचियाँ देखकर गंदे ख्याल आने लगते थे।


यामिनी भाभी भी दोपहर 2-3 बजे काम पर आती थीं और रात 11 बजे के आसपास घर जाती थीं।


एक रात की बात है। कैफ़े बंद होने वाला था। भईया और मैं अंदर बैठे शराब पी रहे थे। बाकी स्टाफ जा चुका था। यामिनी भाभी ने अपना काम पूरा किया। उन्होंने हाथ-पैर धोए और बोलीं, “सर, मैं चलती हूँ।” भईया ने हाँ कर दिया और वो बाहर निकल गईं।


लगभग एक घंटे बाद, जब मैं थोड़ी शराब पीकर फ्लैट लौट रहा था, तो रास्ते में एक नजारा देखा जो मेरी आँखें खोल गया। यामिनी भाभी एक बुजुर्ग आदमी के पीछे बाइक पर बैठकर जा रही थीं। उन्होंने स्कार्फ से अपना चेहरा ढका हुआ था, लेकिन मैं उनके कपड़ों और शरीर से तुरंत पहचान गया। वो आदमी उनके पति बिल्कुल नहीं थे।


मुझे तुरंत समझ आ गया — दाल में कुछ काला जरूर है।


उस रात घर लौटकर मैं बिस्तर पर लेट गया। यामिनी भाभी की काली कमर, औसत लेकिन आकर्षक गांड और उनके चालू हाव-भाव मेरे दिमाग में घूम रहे थे। मेरी रंडीबाज़ वाली भूख जाग उठी। उसी रात से मैंने प्लान बनाना शुरू कर दिया कि कैसे इस भाभी को अपने लंड का मजा चखाऊँ।


अगले दिन से मैं कैफ़े जाना बढ़ा दिया। दोपहर में या शाम को बहाने बनाकर यामिनी भाभी के पास पहुँचने की कोशिश करता। कभी पानी माँगता, कभी बर्तन रखने में मदद करता, कभी भाईया से बात करते हुए उनकी तरफ घूरता रहता। धीरे-धीरे आँखों में आँखें डालने लगा। वो भी मेरी नजरों को नोटिस कर रही थीं।

फिर मैंने एक कदम आगे बढ़ाया।


भईया का घर कैफ़े से लगा हुआ ही था। कैफ़े के अंदर से ही घर का रास्ता था। भाईया अकेले रहते थे, इसलिए यामिनी भाभी वहाँ झाड़ू-पोछा लगाने का काम भी करती थीं। मैं अब अक्सर भईया के घर भी चला जाता। बहाने ढूंढता.


जब भी मौका मिलता, मैं यामिनी भाभी को छूने की कोशिश करता। कभी उनके पास से गुजरते हुए उनकी कमर को हाथ लगा देता और “सॉरी भाभी” कहता, कभी झुककर उनकी गांड को हल्का सा टच कर देता.


हैरानी वाली बात ये थी कि यामिनी भाभी कभी विरोध नहीं करती थीं। वो बस थोड़ा मुस्कुरा देतीं या शरमा जातीं, लेकिन कभी हाथ हटाने या नाराज होने का नाटक भी नहीं करती थीं। मुझे साफ समझ आ गया था कि ये भाभी चुदवाने के लिए तैयार है।


धीरे-धीरे मैंने उनका मोबाइल नंबर भी जुगाड़ लिया। शाम या रात को, जब वो घर जातीं तो कभी-कभी कॉल कर लेता। शुरू में वो थोड़ा संकोच करती थीं, लेकिन बाद में बातें होने लगीं। वो अपने घर की बातें बतातीं — खासकर पति की। कहतीं, “करण, वो शराब पीकर आता है तो मुझे मारता-पीटता है। बहुत बुरा बर्ताव करता है।


मैं उन्हें दिलासा देते हुए कहता, “भाभी, आप परेशान मत होइए। अगर कोई मदद चाहिए तो मुझे बताइए।” बातों-बातों में मैं धीरे-धीरे फ्लर्ट करने लगा। कभी-कभी मजाक में कह देता, “भाभी, आप तो अभी भी काफी जवान और आकर्षक लगती हो।” वो हँस देतीं, लेकिन जवाब में कुछ खास नहीं कहती थीं।


अब मेरी हिम्मत काफी बढ़ चुकी थी। मैं पूरी तरह प्लान बना चुका था कि यामिनी भाभी को फँसाकर उन्हें कुतिया बनाकर चोदूँगा और अपनी सारी हवस उन पर उतारूँगा।


दोस्तों, अगले दिन सुबह-सुबह ही भईया मेरे फ्लैट पर आ गए। मैं अभी उठा भी नहीं था। उन्होंने कहा, “करण, आज मुझे एक जरूरी काम से बाहर जाना पड़ रहा है, सिर्फ एक दिन का काम है। कैफ़े आज बंद रहेगा। ये चाबी रख ले। यामिनी भाभी को बुला लेना और उनसे साफ-सफाई करवा लेना।”


बाहर से तो मैं बिल्कुल नॉर्मल बना रहा। बोला, “ठीक है भाईया, कोई टेंशन मत लो। मैं सब संभाल लूंगा।” लेकिन अंदर से मेरा शैतान पूरी तरह जाग चुका था। मेरे लंड में जोश भर गया। आज मुझे इस रंडी को अकेले में दबोचने का पूरा मौका मिल गया है।


भईया जैसे ही चले गए, मैंने तुरंत यामिनी भाभी को फोन लगा दिया।


“भाभी, आज कैफ़े बंद है, लेकिन भईया ने साफ-सफाई का काम करने को कहा है। आप थोड़ा जल्दी आ जाइए।”


वो थोड़ा रुकीं, फिर बोलीं, “ठीक है… आती हूँ।”


मैं बाजार भाग गया। एक सेक्सी वाली काली नाइटी खरीद ली, कुछ बीयर की बोतलें लीं, और मेडिकल स्टोर से कंडोम, वैसलीन और इंटीमेट वॉश भी ले आया। मन में गंदे-गंदे ख्याल घूम रहे थे — आज इस काली रंडी को पूरी तरह नंगा करके उसकी गांड फाड़ डालूँगा और अपना माल उसके गले तक पिला दूंगा।


लगभग 11 बजे यामिनी भाभी आ गईं। आज वो खास तैयार होकर आई थीं — हल्का मेकअप, टाइट सूट, बाल खुले हुए। जैसे उन्हें अंदाजा था कि आज कुछ होने वाला है।


वो सीधे बर्तन धोने लगीं। मैं चुपचाप उनके पीछे पहुँच गया। बिना कुछ बोले मैंने उन्हें जोर से पीछे से जकड़ लिया। मेरे दोनों हाथ उनकी कमर पर थे और मेरा सख्त लंड उनकी गांड पर दबा हुआ था।


यामिनी भाभी मुस्कुराईं और हल्के से बोलीं, “अरे करण… क्या कर रहे हो? काम करने दो न…”


मैंने उनके कान में गंदी आवाज में फुसफुसाया, “चुप कर रंडी… आज तुझे चोदने का मौका मिला है। बहुत दिनों से तेरी काली गांड को देख-देखकर मर रहा था।”


मैंने धीरे-धीरे उनका सलवार का नाडा खोल दिया। सलवार नीचे सरक गई। मैंने उनकी पैंटी भी उतार दी। उनकी काली लेकिन नरम और गोल गांड मेरे सामने थी। मैं घुटनों के बल बैठ गया और दोनों हाथों से उनकी गांड के चीक्स को जोर से फैला दिया।


“उफ्फ… कितनी प्यारी काली गांड है तेरी साली रंडी…”


मैंने पहले दोनों चूतड़ों को चूम लिया, फिर हल्का-हल्का काटने लगा। यामिनी भाभी सिसकने लगीं। मैंने अपनी नाक उनकी गांड के बीच में पूरी तरह दबा दी और जोर से सूंघा। फिर अपनी गर्म जीभ निकालकर उनकी काली-गुलाबी गांड के छेद को चाटने लगा।


“आह्ह्ह… करण… क्या कर रहे हो …”


फिर मैं उठा, उन्हें घुमा दिया और जोर से किस करने लगा। उनकी लिपस्टिक लगी होंठों को चूसते हुए मैंने उनकी कुर्ती ऊपर कर दी। ब्रा हटाकर उनकी चूचियों को जोर-जोर से मसलने लगा। निप्पल्स को चिमटते हुए बोला, “कितनी मस्त चूचियाँ हैं तेरी …


मेरा एक हाथ नीचे सरक गया। उनकी चूत पहले ही गीली हो चुकी थी। मैंने दो उँगलियाँ अंदर डाल दीं और तेजी से अंदर-बाहर करने लगा। यामिनी भाभी की सिसकारियाँ अब पूरी कराह में बदल गई थीं। वो कुछ नहीं बोलीं, बस आँखें बंद करके सिसक रही थीं।


मैंने उन्हें भाईया के घर के अंदर ले गया।

कमरे में घुसते ही मैंने उन्हें एक इंटीमेट वॉश की बोतल और वो काली सेक्सी नाइटी थमा दी।


“जा रंडी, चूत और गांड अच्छे से धो ले। अंदर कुछ मत पहनना, सिर्फ ये नाइटी पहनकर आ।”

वो बाथरूम चली गईं। कुछ देर बाद जब आईं तो नाइटी में उनकी काली देह बेहद आकर्षक लग रही थी। निप्पल्स साफ दिख रहे थे

मैं सोफे पर निक्कर में बैठ गया था। दो बीयर की बोतलें निकालीं और एक उन्हें पकड़ा दी।


“पी रंडी।”

“नहीं करण… मैं नहीं पीती…” वो हिचकिचाई।

“चुप कर साली, आज तू पी!”


थोड़ी देर मना करने के बाद वो मान गई। दोनों बीयर पीने लगे। थोड़ी देर बाद दोनों को नशा चढ़ने लगा।

मैंने अपना लंड निक्कर से बाहर निकाला और सहलाते हुए इशारा किया। यामिनी भाभी मुस्कुराईं और घुटनों के बल मेरे सामने बैठ गईं। बिना कुछ कहे उन्होंने मेरा मोटा लंड मुंह में ले लिया और चूसने लगीं।


“हाँ हाँ… चूस साली अच्छे से चूस…”

मैं सिगरेट फूंकता हुआ बीयर पी रहा था और उसके बाल पकड़कर हल्का-हल्का अपना लंड उनके मुंह में अंदर-बाहर कर रहा था। “उफ्फ… आह्ह्ह… उफ़्फ़फ़ … साली कितना अच्छा चूसती है तू…”


मुझे समझ आ गया — ये औरत रंडी है।

मैंने पूछा, “ चुदवाने के कितने पैसे लेती है?”

वो लंड चूसते हुए मुस्कुराई और बोली, “आप जितने दोगे…”

“अच्छे पैसे दूंगा… लेकिन मेरे अंदर के जानवर को सहना पड़ेगा।”


मैं अब अपनी डार्क साइड दिखाने लगा। पहले अपना अंगूठा चुसवाया, फिर दो-तीन उँगलियाँ उनके गले तक ठूंस दीं। वो उम्मम्मम …” करती रही। पहले हल्का, फिर जोर-जोर से।

फिर थप्पड़। पहले हल्के, फिर जोरदार थप्पड़ उनके गाल पर पड़ने लगे। पहले तो वो चौंक गई, लेकिन फिर उसे भी मजा आने लगा। उसकी आँखें नशे में चमक रही थीं।


दोनों ने एक और बीयर खत्म की। अब मैं उसे बेड पर ले गया। मैंने घर से लाई हुई अपनी चादर बिछाई।

मैं लेट गया वो मेरा लंड चूसने लगी। पहले ऊपर-ऊपर, फिर गले तक ले जाने लगी। मुझे एक हार्डकोर Porn वीडियो याद आ गया जिसमें लड़का लड़की का गला चोदता है। लड़की उल्दी कर देती है फिर भी वह चोदता रहता है

मेरा जानवर पूरी तरह बाहर आ गया।


मैंने उसके बाल दोनों हाथों से कसकर पकड़े, अपने पैरों से उसकी बॉडी को लॉक कर लिया ताकि वो हिल न सके, और जोर से अपना मोटा लंड उसके गले में ठूंस दिया।


किसी ने कभी इतना अंदर नहीं डाला था वो दर गयी वो बुरी तरह चटपटाने लगी। आँखें बाहर निकल रही थीं, नाक से पानी निकल रहा था। मैं और जोर लगाता गया। वह मुझे अपने नाखुनो से नोचने लगी मुझे बहुत दर्द हो रहा तह मेरी भी आँखों में आंसू आ गए पर मई किसी जानवर की तरह जबरदस्ती उसका गाला चोदे जा रहा था , मैं रुका नहीं। पूरी ताकत से उसका सिर अपने लंड में दबाए रखा।


पसीना मेरे पूरे शरीर से बह रहा था। मैं जानवर बन चुका था।

अचानक उसके मुंह और नाक से फव्वारे की तरह उल्टी निकल गई — सारी बीयर और थूक बाहर आ गया। पूरा बिस्तर, मेरा पेट और उसका चेहरा गंदा हो गया।


लेकिन मैंने लंड नहीं निकाला। पूरा माल खाली होने तक उसका गला चोदता रहा। आखिरकार जोर-जोर से झड़ गया — गाढ़ा-गाढ़ा माल सीधा उसके गले में उतर गया।


मैं हाँफते हुए पीछे हटा। मेरा पूरा शरीर काँप रहा था। यामिनी भाभी की हालत बहुत बुरी थी — वो खांस रही थी, रो रही थी, उल्टी कर रही थी। बोलने की भी हिम्मत नहीं थी।


ये गला चोदने वाला सीन मुश्किल से 30 सेकंड का रहा होगा, लेकिन बेहद इंटेंस और क्रूर था।


हम दोनों ऐसे ही बिस्तर पर निढाल होकर पड़े थे दोनों की साँसे फूल रही थी


यामिनी भाभी बिस्तर पर पड़ी जोर-जोर से रो रही थी। उसका चेहरा उल्टी और थूक से सना हुआ था, आँखों से आँसू बह रहे थे। मैंने उसे उठाया और बाथरूम ले गया।


“रो मत रंडी… चल, साफ करते हैं।”


मैंने खुद उसके मुँह पर पानी मारा, चेहरा धोया। फिर उसके पूरे शरीर को साबुन लगाकर धोया। उसकी चूत और गांड को खूब अच्छे से साफ किया। वो बस चुपचाप खड़ी थी, बोलने की हिम्मत नहीं थी। वो समझ चुकी थी कि मैं इंसान नहीं, पूरा जानवर हूँ।


बाथरूम से निकलकर मैंने बेडशीट बदल दी। उसे सोफे पर बिठाया, पानी पिलाया। वो अभी भी काँप रही थी।

“हो गया ना?” उसने डरी हुई आवाज में पूछा, “मैं काम करने जाऊँ?”

मैंने मुस्कुराते हुए कहा, “सॉरी भाभी… थोड़ा ज्यादा हो गया।”


थोड़ी देर बाद मैंने आखिरी बची बीयर निकाली और उसे ऑफर की। वो पहले मना कर रही थी, लेकिन मेरी आँखों में देखकर डर गई। फिर मान गई।

मैं उसके बगल में बैठ गया, बाएँ हाथ से उसे अपनी बाहों में भर लिया। धीरे-धीरे उसे नॉर्मल करने की कोशिश करने लगा। वो सदमे में थी, लेकिन धीरे-धीरे थोड़ा रिलैक्स हुई।


जब वो थोड़ी नॉर्मल हो गई, तो मैं घुटनों के बल उसके सामने बैठ गया। उसकी नाइटी ऊपर कर दी और उसकी चूत चाटने लगा।

उसकी चूत पहले से गीली थी। मैंने अपनी पूरी जीभ बाहर निकालकर उसकी काली चूत की फाँक चाटनी शुरू कर दी। चूत के ऊपर वाले हिस्से को चूसता, फिर जीभ अंदर डालकर चूसने लगा। वो पहले तो हल्के-हल्के मेरे बाल सहला रही थी। मैंने कहा, “पकड़ के दबा मेरी रंडी।”


उसने मेरे बाल पकड़े और अपनी चूत पर जोर से गाड़ने लगी। उसके चूत के बाल मेरे मुँह में आ रहे थे, लेकिन मुझे मजा आ रहा था। मैं कुत्ते की तरह लपलपाकर उसकी चूत चाट रहा था। उसका चूत का पानी मेरे होठों, ठोड़ी और मुँह पर लग रहा था।


“आह्ह्ह… करण… उफ्फ…” वो सिसक रही थी।

फिर मैंने उसे सोफे पर पलट दिया। वो कुतिया बनकर घुटनों पर आ गई। उसकी मोटी काली गांड मेरे सामने थी।

मैंने दोनों हाथों से उसके गांड के चीक्स को जोर से फैला दिया। अंदर का गुलाबी-काला छेद हल्का खुल गया था। मैंने अपनी लंबी जीभ बाहर निकाली और पूरी ताकत से उसके गांड के छेद में घुसा दी।


“आआआह्ह्ह… मर गई!!!” वो जोर से चीख पड़ी।

मैं पागल हो गया। जीभ अंदर-बाहर करने लगा, चूसने लगा, थूक लगाकर चाटने लगा। बीच-बीच में उसके गांड पर नाखून गाड़ देता। “फच-फच” की आवाज कमरे में गूँज रही थी। वो कराह रही थी, “आह्ह… करण…


मैं बीच-बीच में बीयर का घूँट लेता और फिर उसकी गांड चाटने लग जाता।

फिर मैंने उसे अपनी गांड चाटने को कहा।


“आ मेरी गांड चाट रंडी।”

वो मेरे पीछे आई और मेरी गांड चाटने लगी। शुरू में सूखा-सूखा कर रही थी, फिर मेरे कहने पर थूक लगाकर sloppy licking करने लगी। मेरी गांड, अंडकोष और लंड सब चूसने लगी।

मैंने अपनी गांड फैलाई और उसके सिर को पकड़कर अपनी गांड में दबाने लगा। “और गहरी चाट साली… पूरा मुँह लगा दे…”

वो थक गई थी, लेकिन चाटती रही।

अब असली चुदाई शुरू हुई।

मैंने उसे उठाकर बेड पर लिटा दिया। मिशनरी पोजीशन में। उसके कूल्हों के नीचे तकिया रखा। मेरा लंड और उसकी चूत पहले से गीली थी। मैंने एक जोरदार धक्का मारा और पूरा का पूरा लंड एक ही बार में उसकी चूत में घुसा दिया।

“आआआह्ह्ह!!! मर गई!!!” उसकी जोरदार चीख निकली।


मैं उसके ऊपर लेट गया, उसे किस करने लगा। उसकी आँखें बंद हो रही थीं। मैंने एक थप्पड़ मार दिया। वो जॉश में आ गई और मेरे साथ कूल्हे हिलाने लगी।

मैं उसके मुँह में थूकता, उसके होंठ चूसता, और जोर-जोर से चोदता रहा। “ले रंडी… ले मेरी रंडी… तेरी चूत फाड़ रहा हूँ आज…”

फिर मैंने उसे पलटकर कुत्ते की मुद्रा में किया। वैसलीन लगाई और पहले एक, फिर दो उँगलियाँ उसकी गांड में डालीं। वो चीख पड़ी, “नहीं… मैंने कभी गांड नहीं मरवाई… दर्द हो रहा है!!”


लेकिन मैं रुका नहीं। लंड पर वैसलीन लगाया, उसके बाल पकड़े, मुँह दबाया और पूरी ताकत से अपना मोटा लंड उसकी गांड में ठोक दिया।

“आआआआह्ह्ह्ह्ह!!!!!” वो बुरी तरह चीखी।


मैं अंदर ही अंदर कुछ देर रुका रहा, फिर धीरे-धीरे पंपिंग शुरू कर दी। दर्द के मारे उसका बुरा हाल था, लेकिन धीरे-धीरे वो भी गांड हिलाने लगी।

मैंने स्पीड बढ़ा दी। कमरे में चूतड़ों की थप-थप की आवाज और उसकी कराह गूँज रही थी।


मेरी आँखें बंद होने लगीं। शरीर अकड़ने लगा। मैं समझ गया — झड़ने वाला हूँ।

मैंने आखिरी जोर लगाया और पूरी ताकत से उसकी गांड के अंदर ही अपना गाढ़ा माल छोड़ दिया। “ले रंडी… ले पूरा माल अपनी गांड में…”

5 मिनट तक मैं उसके ऊपर ही पड़ा रहा। वो रो रही थी। मैंने उसे अपनी बाहों में भर लिया।

थोड़ी देर आराम करने के बाद वो उठी, कपड़े पहने और कैफ़े में काम करने लगी।


मैंने जाते वक्त उसे 1000 रुपये दिए। वो मुस्कुराई।

उसके बाद जब भी मौका मिलता, हम दोनों खूब चुदाई करते। लेकिन मुझे सबसे ज्यादा मजा उसका मुँह चोदने, गला चोदने और अपनी गांड चटवाने में आने लगा। वो अब मेरी पूरी तरह बेहशर्म रंडी बन चुकी थी।

दोस्तों, ये थी मेरी यामिनी भाभी वाली सच्ची कहानी।

अगर आपको मेरी ये गंदी कहानी पसंद आई हो तो कमेंट में जरूर बताना।


अगली Antarvasna Sex Stories में आप देखेंगे की कैसे एक 19 साल की लड़की को अपनी बातों में फसा कर अपनी पर्सनल रंडी बनाया


मुझे अपना फीडबैक जरूर दें।

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