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राजकुमारी की चुत मैं नौकर का खीरा - Antarvasna Sex Stories

यह सेक्स कहानी एक काल्पनिक घटना पर आधारित है.

उत्तरप्रदेश की एक रियासत के पूर्व महाराज अब शहर में एक कोठी में रहने लगे थे.

उनकी यह कोठी शहर के पॉश इलाके में थी.


उनके घर में कुछ नौकर चाकर काम करने के लिए लगे हुए थे.


उनकी रानी की मृत्यु हो चुकी थी. उनकी एक बेटी थी राजकुमारी रश्मि.


पूर्व महाराज अपनी बेटी यानी राजकुमारी के साथ रहते थे.


राजकुमारी 19 साल की जवान हो गई थी और मस्त माल के जैसी हो गई थी.

सब उसे छोटी हुकुम कह कर संबोधित करते थे.


महाराज अपनी अय्याशी के लिए अकसर बाहर ही रहते थे.

उनको गाँव की कमसिन कुंवारी लड़कियों को चोदने में मजा आता था तो वे गांव वाली हवेली में रंगरेलियां मनाया करते थे.


सीधे सेक्स कहानी पर आते हैं.


उस वक्त छोटी हुकुम रश्मि नहाकर कमरे में आई थी.

उसने तौलिया बिस्तर पर फेंक दी और अल्मारी से कपड़े निकालने के लिए आगे बढ़ी.


तभी महाराज का वफ़ादार जंगबहादुर राजकुमारी के इस्तरी किये हुए कपड़े लेकर कमरे में दाखिल हुआ.

जंगबहादुर नेपाली था, 24-25 साल का बांका जवान था.


दोनों एक-दूसरे को विस्मित होकर देखने लगे.

रश्मि अपने एक हाथ से अपने दोनों दूध ढकने की कोशिश कर रही थी और अपने दूसरे हाथ से वह चूत छुपाने की कोशिश कर रही थी.


इस अचानक हुए मसले से रश्मि के एक हाथ से उसका एक दूध ठीक से नहीं ढक पाया और वह आधे से ज्यादा बाहर दिखने लगा.

उसका निप्पल भी हाथ की हथेली से नहीं ढक पाया था तो वह भी बाहर अपनी चौंच निकालने लगा था.


जंगबहादुर भी जवान था.

उससे अपनी कामाग्नि को संभाला न गया और वह राजकुमारी रश्मि के पास आ गया.


जंगबहादुर राजकुमारी के उस बाहर झांकते निप्पल को अपनी एक उंगली से छूने लगा.

फिर जंगबहादुर मुस्कुराते हुए बोला- ये तो छिपा नहीं पाई हो छोटी हुकुम!


यह कह कर जंगबहादुर अपनी दो उंगलियों से रश्मि के निप्पल को दबाने लगा.


रश्मि ने यह देखा तो जल्दी से अपना दूसरा हाथ चूत से हटाया और जंगबहादुर के हाथ से निप्पल छुड़ाने की कोशिश करने लगी.

चुत से हाथ हटा तो जंगबहादुर उसकी नंगी चूत को देखने लगा.


उसने निप्पल छोड़ दिया और अपना हाथ वह रश्मि की चूत पर ले गया.

उसने अपनी हथेली से चुत को कवर कर लिया और चुत को मसलने लगा.


जंगबहादुर- अब तो मैंने तुम्हारी चूत भी देख ली है हुकुम!

छोटी हुकुम अन्दर ही अन्दर शायद वासना में झुलसने लगी थी तो वह आंख बंद करके अपना सर झुका कर मूर्तिवत खड़ी रह गई.


जंगबहादुर ने अपने घुटनों से रश्मि के दोनों पैरों को फैला दिया और वह झटके से घुटनों के बल बैठकर अपने दोनों हाथों से रश्मि की चूत का मुँह खोलने लगा.

रश्मि कुछ न कर सकी और जंगबहादुर ने अपनी जीभ को रश्मि की चूत पर लगा दिया.

वह चुत को चाटने लगा.


जंगबहादुर चुत चाटते हुए बोला- सच-सच बताना छोटी हुकुम … तुम्हारी चूत को किस-किस ने देखा है?

रश्मि सकुचाती हुई बोली- सिर्फ आपने!


जंगबहादुर- इसको और किसने छुआ है?

रश्मि- सिर्फ आपने.


जंगबहादुर- इसको किस-किस ने चाटा है?

रश्मि- सिर्फ आपने.


जंगबहादुर अब गंभीर होकर बोला- इसका मतलब तुम्हारी चूत अब मेरी अमानत है … क्योंकि मैं ही केवल ऐसा मर्द हूँ, जिसने तुम्हारी चूत को देखा है, छुआ है और चाटा है. आज के बाद तुम्हारी चूत के साथ मैं जो भी करूँगा, उसे तुम मना नहीं कर सकती हो!

रश्मि धीमी आवाज में बोली- जी … ठीक है.


जंगबहादुर ने उसे पलंग पर लिटाया, फिर कमरे का दरवाजा बंद किया.


वापस आकर उसने रश्मि की दोनों टांगों को खोलकर फैला दिया. वह उसकी चूत को कुछ देर तक देखता रहा.

फिर उसकी चुत में धीरे से उंगली डालकर अन्दर-बाहर करने लगा.


रश्मि को सिहरन महसूस हुई.

जंगबहादुर की उंगली उसकी चुत के अन्दर-बाहर आ-जा रही थी.

इससे रश्मि की चूत गीली होने लगी.


जंगबहादुर ने पैंट खोलकर अपना लंबा-चौड़ा लंड रश्मि की चूत पर रखा और जोर से अन्दर पेल दिया.

रश्मि की चीख निकल गई.

जंगबहादुर ने एक हाथ से उसका मुँह दबाया ताकि वह और चीख न सके.


उसके लंड ने रश्मि की चूत की सील तोड़ दी.

रश्मि दर्द से तड़पने लगी


कुछ देर बाद रश्मि को मजा आने लगा.

वह गांड उठाकर जंगबहादुर का साथ देने लगी.


जंगबहादुर मजा ले लेकर रश्मि को चोदता रहा और रश्मि चुदवाती रही.


कुछ देर बाद दोनों ने अपना पानी छोड़ दिया.

जंगबहादुर के लंड का पानी रश्मि की चूत ने पी लिया.


तभी जंगबहादुर ने पैंट पहन ली और रश्मि ने अलमारी से गाउन निकालकर पहन लिया.


जंगबहादुर- आज से तुम मेरी बीवी हो. तुम्हारी चूत में अब सिर्फ मेरा लंड जाएगा!


जैसे ही जंगबहादुर कमरे से बाहर गया, रजनी छोटी हुकुम रश्मि के कपड़े धोने के लिए आ गई और शोभा झाड़ू लगाने के लिए आ गई.


दोनों की निगाह रश्मि के बिस्तर पर गई.

चादर पर लगा खून देखकर रजनी ने रश्मि से पूछा- छोटी हुकुम, क्या आप महावारी से हो?


रश्मि- नहीं … मेरी महावारी दस दिन पहले आई थी.

रजनी- ओह … फिर ये चादर पर खून कैसा?


तभी जंगबहादुर कमरे के भीतर आकर उन दोनों से मुखातिब हुआ- मैंने उसकी चुत की सील तोड़ी है … यह लाल रंग उसकी निशानी है.


जंगबहादुर ने रश्मि का गाउन उठाया और शोभा व रजनी के सामने उसकी चुत में उंगली डालकर अन्दर-बाहर करने लगा.


जंगबहादुर मुस्कुराते हुए- कैसा लग रहा है मेरी रानी? मजा आ रहा है कि नहीं?

रश्मि सिसकारती हुई बोली- आह … बहुत मजा आ रहा है.


जंगबहादुर ने रश्मि को पलंग के किनारे बैठाया, पैंट उतार कर अपना लंड रश्मि की गीली चूत में पेला और भकाभक चोदने लगा.


रश्मि- आsss … ऊsss … मेरे राजा बहुत मजा आ रहा है.


जंगबहादुर- ये चूत किसकी है?

रश्मि- जी … आपकी है.


जंगबहादुर- कब-कब चोदने दोगी?

रश्मि- जब-जब आपका दिल करे.


जंगबहादुर- शोभा और रजनी के सामने चोद रहा हूँ … बुरा तो नहीं लग रहा?

रश्मि- जी नहीं.


जंगबहादुर- लंड का पानी बाहर निकालूँ या चूत में डालूँ?

रश्मि- चूत में डालो.


जंगबहादुर ने आठ-दस धक्के जोर-जोर से लगाए और लंड का पूरा पानी रश्मि की चूत में उड़ेल दिया.


इस तरह जंगबहादुर ने शोभा और रजनी के सामने उनकी छोटी हुकुम को चोद दिया.

अब उन दोनों को चुदाई का चस्का लग गया था.


जंगबहादुर ने छोटी हुकुम से पैंटी पहनने को ना कह दिया था ताकि उसे जब भी मन हो, वह रश्मि को आराम से चोद सके.

जंगबहादुर की बात मान कर छोटी हुकुम रश्मि ने चड्डी पहनना छोड़ दिया.


अब जंगबहादुर उसे उसके कमरे में, कभी रसोईघर में, तो कभी छत पर घर के सभी नौकरों के सामने चोदने लगा था.


उसे लोगों के सामने छोटी हुकुम के चूत में लंड डालकर देर तक चोदने में मजा आता था.


छोटी हुकुम को भी सबके सामने जंगबहादुर का लंड चूत में डलवाने में मजा आने लगा था.


जब घर की छत पर रात के समय लाइट लगाकर छोटी हुकुम को चोदता था, तो ऊंची बिल्डिंग्स के लोग उन्हें देखकर पोर्न वीडियो बनाकर अपने दोस्तों के साथ शेयर करके मजा लूटने लगे थे.


दिन-रात चुदाई करने के कारण छोटी हुकुम गर्भवती हो गई थी.


ये बात जब रश्मि के माता-पिता को पता चली, तो वे उसकी शादी किसी गरीब रिश्तेदार से कराने की बात करने लगे.

जिस लड़के से रश्मि की शादी की बात चली, उसका नाम जयसिंह था.


जयसिंह बहुत ही सीधा-सादा इंसान था.

साथ ही उसका लंड भी चार इंच से छोटा था.


शादी के बाद जयसिंह रश्मि की चूत को खुश करने में असफल रहा था क्योंकि उसे जंगबहादुर के बड़े लौड़े से चुदने की आदत हो चुकी थी.


जंगबहादुर के लम्बे के मोटे लंड से चुदने के बाद जयसिंह का चार इंच का लंड कैसे कामयाब हो सकता था.


एक दिन जंगबहादुर किचन में छोटी हुकुम को चोद रहा था.

किचन की खिड़की डाइनिंग रूम में खुलती थी, उसे खोलकर जयसिंह से बातें करते हुए छोटी हुकुम की चूत में सब नौकरों के सामने लंड डालकर बातें करते हुए चुदाई कर रहा था.


नौकरों के सामने जंगबहादुर ने वादा किया कि तुम्हारी छोटी हुकुम के पति के सामने वह जयसिंह की औरत की चूत में लंड डालकर सबसे बात करेगा.


उस दिन वह यही कर रहा था.

जंगबहादुर रश्मि को चोदता हुआ जयसिंह से पूछ रहा था- आपको खाना कैसा लगा?

जयसिंह- बहुत लजीज बना है.


जंगबहादुर- पता है किसने बनाया है?

जयसिंह- नहीं पता.


जंगबहादुर मुस्कुराते हुए बोला- आपकी बीवी ने बनाया है.

जयसिंह- अरे वाह ये तो बहुत बढ़िया है लेकिन हमारी बीवी है कहां?


जंगबहादुर व्यंग्य से बोला- वह अभी ककड़ी खा रही है … बाद में दही खाकर आएगी.

जयसिंह को झांट समझ में नहीं आया कि जंगबहादुर यह क्या कह रहा है.


जंगबहादुर अपने लंड को ककड़ी कह रहा था और लंड के पानी को दही कहते हुए बात कर रहा था.

लेकिन जयसिंह समझ नहीं पाया.


जयसिंह- बढ़िया है … आप उन्हें जी भर कर ककड़ी खिलाओ और दही पिलाओ!


रसोईघर में रोटी बेलते हुए सब नौकरानियां तमाशा देखकर मुँह पर पल्ला लगाकर हंस रही थीं.


जंगबहादुर उत्तेजित होकर चोदता हुआ बोला- लो छोटी हुकुम … मैं आपकी चूत में दही डाल रहा हूँ, उसे चुत से पियो और फिर अपने पति के पास जाकर बैठो.


ये कहते हुए जंगबहादुर ने जोर-जोर से लंड को छोटी हुकुम की चूत में रगड़ा और अपना पूरा पानी उसकी चूत में छोड़ दिया.


यह एक काल्पनिक सेक्स कहानी है जो आपके सामने मैंने पेश की.

यदि आपको Antarvasna Sex Stories अच्छी लगी हो तो जरूर बताएं.

मैं आगे भी लिख कर आपका मनोरंजन करता रहूँगा.

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