हॉस्टल के सीनियर से गांड मरवाई - Gay Sex Stories
- Mayank
- Jun 5
- 5 min read
नमस्कार दोस्तों ये मेरी पहली सच्ची कहानी मैं आपको भेज रहा हूं l
मेरा नाम मयंक हैं मैं पुणे से हु l बचपन से ही मेरी गांड थोड़ी बड़ी थी l मेरे साईज की पतलून नहीं मिलती थी तो अलग से सिलाई करनी पड़ती थी l
मेरा कॉलेज मुंबई में है तो मुझे होस्टेल में रहना पडता था l पहले साल मुझे बहुत दिक्कत आयी , कुछ लड़के मेरी गांड पर हाथ मार देते थे.
अब दूसरा साल था. वो मेरा पहला दिन था कॉलेज का सेकंड ईयर का , और मुझे जो कमरा मिला था उसमें थर्ड ईयर के सीनियर थे तो मुझे उनके साथ रहना था.
मैंने अपना सामान सही से लगाना शुरू किया तभी वो बाथरूम से आए और पीछे से मेरा हाथ पकड़ा औऱ बोले ये जगह पर मेरा सामान रहेगा क्योंकि ये मेरे सीट के पास हैं, उनका तना हुआ लंड मेरी गांड से टकरा गया और वो दूर हो गए ।
मैने उनके तरफ देखा तो वो साॅरी बोले। मैंने उनके लंड के तराफ देखा तो वो तना हुआ था।
वो बोले - ये ऐसे ही रहता हैं थोडा साईज बडा हैं इसका।
मैने कहा- मुझे क्यों बता रहे हों साईज बड़ा है तो नॅचरल हैं। मेरी भी कमर बड़ी है तो मैं थोड़ी बताता हूँ।
तभी सीनियर बोले- इसको कमर नहीं गांड कहते हैं l मैं शर्मा गया और मुस्कराते हुए अपना सामान लगाने लगा.
दो दिनों बाद मैंने हाफ ट्रैक पेंट पहनी थी औऱ योगा करना शुरू किया रूम में। क्योंकि योगा से कोई आवाज नहीं आता तो रूम में भी कर सकते हैं ।
तभी मेरे सीनियर की नींद खुली। उसने मुझे देखा पेंट मेरी गांड में घुस चुकी थी और गोरी जांघों का पसीना देख उसने बेड पर हिलाना शुरू कर दिया।
मैंने कहा आप जो कर रहे हैं उससे आवाज आ रहा है बेड का। तो उसने कहा - रूम में योगा करना भी अलाऊड नहीं।
मैं चुप हो गया और योगा करने लगा। फिर मैं गुस्से में नहाने चला गया l
नहाने के बाद मुझे याद आया रुमाल बेड पर ही रह गया। अरे यार अब क्या होगा? मेरी योगा वाली पँट भी गीली हो गयी थीं। औऱ गांड खुली हुई थीं। नंगी पूरी तरह से।
मेरे पास कोई चारा नहीं था। मैने अनूप सीनियर को आवाज लगायी। थोडा दरवाजा खोला और टॉवेल देने को कहा।
तभी वो हसने लगे और बोले फस गया न बेटे?
मैंने कहाः मैं भी आपकी कुछ मदद कर दूंगा मुझे टॉवेल देदो।
उसने कहा मदद तो करेगा, तू लेकिन टॉवेल मैं तभी दूंगा जब तुम बाथरूम का पूरा दरवाजा खोल के टॉवेल लोगे।
मैं बोला - मैंने कपड़े नहीं पहने।
तो वो बोला - वो मुझे भी पता है और हसने लगा। मैंने सोचा नंगा बाहर जाने से अच्छा है की दरवाज़ा खोल देता हूं।
मैं ने दरवाज़ा खोला। वो सामने आया औऱ मेरी नंगी गांड को देखते हुए टॉवेल देके गया हरामी साला।
दुसरे दिन कॉलेज खत्म होने के बाद हम रूम पर आए तब सीनियर उसके बड़ पर मूठ मारने लगा।
फिर मुझे बोला यार याद है तू मुझे कुछ मदद करने वाला था?
तो मैंने हा कहा- फिर बोला मेरे घुटने के ऊपर दुख रहा है थोड़ा मालिश कर देना प्लीज।
इतने दिनों में मुझे भी लंड लेने की चाहत आ गई थी, तो मैंने हा कर दिया। फिर वो निकर पर बैठ गया मैं घुटने के ऊपर हाथ लगाया और मालिश करने लगा। तभी उसका लंड खडा हो गया, उसने मुझे देखा की मैं उसके समान को देख रहा हूँ।
तब उसने कहा, ये बड़ा ही है। मैंने कहा- हा मेरी गांड की तरह और दोनों हसने लगे।
फिर वो बोला तेरी गांड तो लड़कों के सपनों में आती है, सब तेरा फोन नंबर मांगते हैं मेरे से।
मैंने कहा - अच्छा? वह बोला हा, लेकिन मैं नहीं देता किसी को।
फिर मैंने पूछा- क्यूँ? तो वो बोला- जो उनको चाहिए वो मुझे भी चाहिए। तो मैं उनको पहले मौका क्यूँ दू?
और मेरी तराफ देखकर मुस्कराने लगा।
मैंने कहा क्या चाहिए तुमको? वह बोला - मेरा लंड बड़ा हैं उसे शांत करने के लिये मुझे तुमारी गांड मारनी हैं। मैं ये सब सुनकर मेरे बेड पर आ गया।
उसे लगा मैं बहुत गुस्सा हो गया, तो वह सॉरी बोलने लगा और मेरे पास आकर माफी माँगने लगा। गांड़ तो मुझे भी मरवानी थी तो मैं पूछने लगा कि- तुमने जो कहा गांड मारने का वो कैसे होता हैं?
उसने मुझे अपने मोबाइल में एक गे फिल्म दिखाईं, जिसमें एक लड़का बड़े लंड से चिकने लड़के की गांड मार रहा था, और निकाल निकाल के वापस डाल रहा था।
वो देखकर मेरी गांड फट गयी मैं उसे मना कर के सो गया।
दूसरे दिन हम कॉलेज से आए और मैं योगा करने लगा, तभी वह नहा रहा था। मैं योगा करते समय ऐसे मुडा की कमर में मोच आ गयी मेरा पैर सीधा नहीं हो रहा था। मैंने अनूप को चिल्ला के आवाज लगायी।
वह नालायक खुला लंड लेके बाहर आया, और मेरे पैर को सीधा करने लगा।
पैर सीधा होने के बाद पेंट भी पहनी और बोला क्या हुआ ज्यादा दुख रहा है क्या? मैं उसके लंड को देखे जा रहा था सोचा चलो इसको मौका दे देते हैं।
मैंने कहा मुझे कमर में मोच आयी है। उसने मुझे बिस्तर पर सुलाया उल्टा मेरी पेंट निकाली तेल लाया औऱ कमर की मालिश करने लगा।
मैं सब एन्जॉय कर रहा था, तभी वो घुटने के ऊपर पैरों पर बैठ गया और कमर कि मालिश करने लगा। अब उसका लंड गांड को लग रहा था, उसकी हिम्मत बढ़ी उसने मेरी गांड के छेद पर तेल लगाया। अब मालिश बंद हो गयी। वो कुछ और कर रहा था। मैंने पीछे देखा तो वो अपने लंड पर भी तेल लगा रहा था।
मैं बिना हिले पड़ा रहा। सोचा कि जो होता है होने दो।
उसने लंड मेरे छेद पर रखा और धक्का दिया। मेरी बड़ी गांड धक्का झेल गयी और लंड घुस गया।
मैने दर्द से वापस झटका दिया और उसे निकाल दिया और बोला ये क्या कर रहे हो?
वह बोला- जानेमन इतना बड़ा लंड किसी के गांड में नहीं जाता और तूने एक झटके में ले लिया? ये बोलकर वो मेरी गांड चाटने लगा। मुझे बहोत मजा आया।
अब उसके मजे की बारी थी. उसने फिर सेट किया औऱ धक्का मारा। और एक धक्का मारा मुझे लगा मेरी गांड से बच्चा निकल के मानेगा आज ये।
थोड़ी देर रुका वो फिर उसने अपने ड्रावर से के वाय जेल निकला और मेरी गांड पे लगाया और सर सर चोदना चालू किया। मै इतना तृप्त पहले कभी नहीं हुआ था औऱ वो अलग ही जुनून से मेरी सवारी कर रहा था।
बहोत देर चोदने के बाद उसने अपना माल मेरी गांड में ही छोड़ दिया। थोड़ी देर के बाद उसका लंड ढीला हो गया तो उसने लंड निकाला और छेद पर कपड़ा लगा दिया ताकि उसने डाला हुआ माल बाहर ना आ जाए।
बाद में मैंने बाथरूम में मेरी गांड को पानी से साफ़ किया। वो अपना लंड मेरे बाजू ने लेके खड़ा हो गया। मैंने उसका लंड भी पानी से साफ़ कर दिया।
अब वो रोज योगा करते समय मेरी गांड मारता है और नहाने जाता है।
और भी Gay Sex Stories मैं लिखूँगा आपके लिए l धन्यावाद l

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